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  • खरमास 2026: आज से शुरू, एक माह तक रहेंगे इन बातों का ध्यान

    खरमास 2026: आज से शुरू, एक माह तक रहेंगे इन बातों का ध्यान


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव किसी राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे संक्रांति कहा जाता है। विशेष रूप से जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास या मलमास लगता है। हिंदू धर्म में इस समय को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, लेकिन पूजा पाठ, दान और जप तप के लिए इसे विशेष लाभकारी माना गया है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष खरमास 15 मार्च 2026 से शुरू हो चुका है और सूर्य के 13 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करने पर यह समाप्त होगा। इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाएगा। इसके बाद फिर से मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं और 20 अप्रैल से विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।

    त्रिग्रही योग का प्रभाव
    मीन राशि में पहले से विराजमान शुक्र और शनि के साथ सूर्य के प्रवेश से त्रिग्रही योग बनता है। इसका सकारात्मक प्रभाव मिथुन, तुला, वृषभ, कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों पर आर्थिक लाभ, मान सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है।

    मांगलिक कार्य वर्जित

    खरमास के दौरान ग्रहों की शुभ दृष्टि का प्रभाव कम होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन और अन्य मांगलिक कार्य टालने की परंपरा है। साथ ही नए व्यापार की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    खरमास में क्या ना करें

    भगवान, गुरु, माता पिता, गाय और स्त्री की निंदा न करें।

    जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाना अशुभ माना गया है।

    नए वाहन या घर खरीदने से परहेज करें।

    विवाद और झगड़ों से दूर रहें।

    खरमास में क्या करें

    दान पुण्य, पूजा और धार्मिक कार्य करें। 

    रामायण, गीता और सत्यनारायण कथा का पाठ लाभकारी है।सूर्य देव, भगवान शिव और विष्णु की पूजा से घर परिवार में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

  • Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से जुड़े 7 जरूरी काम जो पुण्य की प्राप्ति के लिए हर किसी को करने चाहिए

    Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से जुड़े 7 जरूरी काम जो पुण्य की प्राप्ति के लिए हर किसी को करने चाहिए

    नई दिल्ली| Makar Sankranti 2026 Puja Ke Upay: सनातन परंपरा में हर साल 14 या 15 जनवरी को मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं. इस दिन स्नान, ध्यान और दान करने का बहुत ज्यादा महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन व्यक्ति सूर्य रश्मियों के पुण्य प्रभाव से पूरे साल सुख, सौभाग्य और आरोग्य को प्राप्त करता है. अलग-अलग प्रां​तों में अलग-अलग नाम से मनाए जाने वाले इस पावन पर्व को उत्तर भारत में खिचड़ी के नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति के दिन व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति के लिए कौन से 7 काम जरूर करने चाहिए.

    1. तिल के तेल से करें मालिश

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के पर्व पर तिल का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि संक्रांति के दिन व्यक्ति द्वारा तिल के तेल से मालिश करने से शुभता सूर्य की कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से पूरे साल व्यक्ति स्वस्थ रहता है.

    2. तिल का उबटन लगाएं

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गुडलक को पाने के लिए न सिर्फ तिल का तेल बल्कि तिल का उबटन भी लगाना चाहिए. मान्यता है कि तिल का उबटन लगाने से व्यक्ति कांतिवान बनता है.

    3. गंगा स्नान

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता कि संक्रांति के दिन पुण्यदायिनी मां गंगा के अमृतजल में लगाई गई तीन डुबकी अनंत पुण्य प्रदान करने वाली होती है.

    4. तिलयुक्त जल से करें स्नान

    हिंदू मान्यता के अनुसार यदि आप तिल के तेल से मालिश या उससे बना उबटन न लगा पाएं तो कम से कम अपने नहाने के पानी में तिल डालकर स्नान करें. मान्यता है​ कि ​मकर संक्रांति पर तिलयुक्त जल से स्नान करने पर व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

    5. पूजा में तिल से करें हवन

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान के बाद हवन करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति के दिन आपके द्वारा की जाने वाली साधना-आराधना का पुण्यफल तब और बढ़ जाता है जब आप हवन सामग्री में तिल मिलाकर देवताओं के लिए विशेष रूप से हवन करते हैं. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन तिल से हवन करने पर व्यक्ति पर लक्ष्मी और नारायण दोनों की कृपा बरसती है.

    6. जरूरतमंद लोगों को करें तिल का दान

    मकर संक्रांति के पावन पर्व पर स्नान के साथ दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन काले तिल के साथ गुड़ का दान करने पर न सिर्फ भगवान सूर्य बल्कि शनिदेव की कृपा भी अवश्य प्राप्त होती है.

    7. जरूर करें तिल से बना भोजन

    मकर संक्रांति पर पूजा के तमाम उपायों की तरह तिल से बना भोजन भी शुभ फल प्रदान करता है. ऐसे में आप इस दिन तिल से बने लड्डू, गजक, रेवड़ी आदि का सेवन अवश्य करें. मान्यता है कि प्रसाद स्वरूप तिल से बनी चीजों का सेवन करने पर सूर्य देव की विशेष कृपा बरसती है.

  • मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान

    मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति हिंदू धर्म में एक बेहद महत्वपूर्ण और खास त्योहार है, जो हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से पौष माह में आता है और इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं जिसे देवताओं का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य की उपासना दान और विशेष रूप से गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान का महत्व होता है।

    मकर संक्रांति कब है 2026

    पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन का विशेष पुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर लगभग 2 घंटे 32 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किए गए स्नान, दान, सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने और जप-तप का विशेष महत्व है।

    मकर संक्रांति पर किन चीजों का करें दान

    मकर संक्रांति का दिन विशेष रूप से दान के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दिन दान करने से न केवल पुण्य मिलता है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन निम्नलिखित चीजों का दान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को खुशहाली मिलती है तिल: तिल का दान बहुत शुभ माना जाता है और यह शरीर को निरोगी बनाता है।

    गुड़: गुड़ का दान करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। खिचड़ी: खिचड़ी का दान करना और उसका सेवन करना विशेष रूप से इस दिन शुभ माना जाता है। चावल और उड़द: चावल और उड़द का दान करना भी मकर संक्रांति के दिन फलदायी होता है।हल्दी और नमक: हल्दी और नमक का दान भी पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। धान: धान का दान करने से अनर्थ और दरिद्रता का नाश होता है। इसके अलावा इस दिन दीन-हीन और गरीबों को वस्त्र, वस्तुएं, अन्न और अन्य जरूरी सामान दान करने का भी महत्व है।

    मकर संक्रांति का महत्व

    मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के उत्तरायण होने के कारण विशेष रूप से महत्व रखता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन से सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक शक्ति और ऊर्जा लेकर आती हैं। यही कारण है कि इस दिन को शुभ कार्यों की शुरुआत और दान-पुण्य के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है।

    स्नान-दान का महत्व

    मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। साथ ही सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना और विशेष रूप से मंत्रों का जाप करना पुण्यदायी होता है। मकर संक्रांति का पर्व एक नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता लेकर आता है, जो जीवन को उज्जवल और समृद्ध बनाता है।

  • 09 जनवरी 2026 पंचांग: सप्तमी तिथि पर उत्तर फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र का संयोग, जानिए शुभ और अशुभ काल

    09 जनवरी 2026 पंचांग: सप्तमी तिथि पर उत्तर फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र का संयोग, जानिए शुभ और अशुभ काल


    नई दिल्ली । आज 09 जनवरी 2026 को माघ माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस दिन का संयोग उत्तर फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र के बनने से विशेष महत्व रखता है। शुक्रवार के दिन जो मां लक्ष्मी को समर्पित होता है इस तिथि और नक्षत्र का संगम विशेष शुभ फल देने वाला माना जाता है। यहां जानिए आज के शुभ और अशुभ काल के बारे में ताकि आप अपने दैनिक कार्यों को सही समय पर नियोजित कर सकें।

    शुभ काल

    अभिजीत मुहूर्त 1212 PM – 1255 PM यह समय बेहद शुभ माना जाता है, खासकर महत्वपूर्ण कार्यों के लिए। व्यापारिक फैसले, घर की शांति, और नए काम की शुरुआत के लिए यह अवधि श्रेष्ठ है।

    अमृत काल 0605 AM – 0746 AM यह काल बेहद फलदायक है। इस समय में पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष महत्व होता है। जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    ब्रह्म मुहूर्त 0538 AM – 0626 AM इस समय का उपयोग ध्यान साधना और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। यह समय भी अत्यंत शुभ है और धार्मिक कार्यों के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

    अशुभ काल

    राहू काल 1113 AM – 1233 PM यह समय किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए उपयुक्त नहीं होता है। यात्रा, नई शुरुआत और किसी भी बड़े निवेश से बचना चाहिए।

    यम गण्ड 313 PM – 433 PM इस समय भी नकारात्मक प्रभाव होते हैं। महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें और कोई भी नया कार्य प्रारंभ करने से परहेज करें।
    कुलिक 834 AM – 954 AM यह समय भी अशुभ माना जाता है। इस समय में किसी भी प्रकार की तात्कालिक कार्रवाई या दांव लगाने से बचना चाहिए।
    दुर्मुहूर्त 0922 AM – 1004 AM, 1255 PM – 0137 PM इस समय में भी कार्यों को स्थगित करना बेहतर है, क्योंकि यह समय शुभ नहीं होता।
    वर्ज्यम् 1046 PM – 1230 AM यह समय भी कार्यों को करने के लिए अनुकूल नहीं होता। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए इसे टाल देना सही रहेगा।

    सूर्य और चंद्रमा का समय

    सूर्योदय 0714 AM आज सूर्योदय का समय है 714 AM, जो दिन की शुरुआत के लिए शुभ है।
    सूर्यास्त 0553 PM सूर्यास्त का समय 553 PM है, और यह समय रात की शुरुआत का संकेत है।
    चन्द्रोदय 1151 PM चंद्रमा का उदय रात के 1151 बजे होगा, जो रात्रि में चंद्र ग्रहण का संकेत कर सकता है।
    चन्द्रास्त 1144 AM, Jan 10 चंद्रमा का अस्त 1144 AM पर होगा, जो दिन के समय होगा और अगले दिन का संकेत देगा।

    आज के पंचांग के अनुसार, इस दिन को विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है, खासकर उन समयों में जब अभिजीत मुहूर्त, अमृत काल और ब्रह्म मुहूर्त जैसी शुभ अवधी हो। वहीं, राहू काल और यम गण्ड जैसे अशुभ कालों में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को स्थगित कर देना चाहिए।