Tag: auspicious day

  • हनुमान जयंती 2 अप्रैल को, बजरंगबली को प्रसन्न करने करें ये आसान और अचूक उपाय

    हनुमान जयंती 2 अप्रैल को, बजरंगबली को प्रसन्न करने करें ये आसान और अचूक उपाय


    नई दिल्ली। हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संकटमोचन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन पूरे विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा और उपासना की जाती है।

    मंगलवार का विशेष महत्व

    हनुमान जी का जन्म मंगलवार को हुआ था, इसलिए हर मंगलवार उनकी विशेष पूजा होती है। इसके अलावा शनिवार भी हनुमान जी को प्रिय माना गया है। त्रेता युग में चैत्र पूर्णिमा की सुबह हनुमान जी का जन्म हुआ था, उनके माता-पिता अंजनी और केसरी थे।

    भगवान शिव के अवतार

    हिंदू ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी महादेव के 11वें अवतार माने जाते हैं। वे बल, बुद्धि और विद्या के दाता हैं और अष्ट सिद्धि एवं नवनिधि के स्वामी हैं। हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि उनकी पूजा और व्रत रखने से जीवन के संकट दूर होते हैं।

    अष्ट चिरंजीवी में शामिल

    धर्मग्रंथों में हनुमान जी को आठ अमर पात्रों में से एक माना गया है। अन्य सात हैं अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेद व्यास, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय। इनका रोज स्मरण करने से लंबी आयु और निरोगी जीवन मिलता है।

    पूजा विधि

    हनुमान जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करनी चाहिए।
    घर की सफाई और गंगाजल से पवित्रता करें।
    मंदिर या घर पर हनुमान जी की पूजा करते समय सिंदूर और चोला अर्पित करें।
    चमेली का तेल चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं।
    जल, पंचामृत, अबीर, गुलाल, अक्षत, फूल, धूप-दीप और भोग अर्पित करें।
    सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    पान का बीड़ा जिसमें गुलकंद और बादाम हो, अर्पित करें।
    हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान आरती का पाठ करें।

    हनुमान जी के 12 नाम

    ॐ हनुमान, ॐ अंजनी सुत, ॐ वायु पुत्र, ॐ महाबल, ॐ रामेष्ठ,
    ॐ फाल्गुण सखा, ॐ पिंगाक्ष, ॐ अमित विक्रम, ॐ उदधिक्रमण,
    ॐ सीता शोक विनाशन, ॐ लक्ष्मण प्राण दाता, ॐ दशग्रीव दर्पहा।

    राशि अनुसार मंत्र

    मेष: ॐ सर्वदुखहराय नमः
    वृषभ: ॐ कपिसेनानायक नमः
    मिथुन: ॐ मनोजवाय नमः
    कर्क: ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः
    सिंह: ॐ परशौर्य विनाशन नमः
    कन्या: ॐ पंचवक्त्र नमः
    तुला: ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः
    वृश्चिक: ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः
    धनु: ॐ चिरंजीविते नमः
    मकर: ॐ सुरार्चिते नमः
    कुंभ: ॐ वज्रकाय नमः
    मीन: ॐ कामरूपिणे नमः

  • सोने की अंगूठी पहनने का सही तरीका: राशि, उंगली और शुभ दिन जानिए

    सोने की अंगूठी पहनने का सही तरीका: राशि, उंगली और शुभ दिन जानिए


    नई दिल्ली ।भारतीय ज्योतिष में सोने को सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने वाली धातु माना जाता है। मान्यता है कि जब सोने की अंगूठी सही उंगली, उचित दिन और विधि से पहनी जाती है, तो यह जीवन में धन, सम्मान और मानसिक स्थिरता बढ़ाने में सहायक होती है। वहीं, गलत नियमों के साथ सोना पहनना विपरीत प्रभाव भी ला सकता है।

    कौन सी उंगली में सोना पहनना शुभ है?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अनामिका उंगली सूर्य तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। इस उंगली में सोने की अंगूठी पहनने से प्रतिष्ठा आत्मविश्वास और कार्यक्षमता बढ़ती है। कुछ परंपराओं में कनिष्ठा छोटी उंगली में भी सोना पहनने की सलाह दी गई है।वही मध्यमा उंगली शनि से जुड़ी होने के कारण इसमें सोना पहनना तनाव और आर्थिक रुकावट ला सकता है। अंगूठे में सोना पहनना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि यह चंद्रमा का संकेतक है।

    सोना पहनने के शुभ दिन

    धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सोना पहनने के लिए गुरुवार सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह बृहस्पति का दिन है। रविवार भी सूर्य से जुड़ा होने के कारण मान-सम्मान बढ़ाने वाला है। इसके अलावा, बुधवार और शुक्रवार सामान्यतः अनुकूल माने जाते हैं।

    सोने की अंगूठी पहनने की पारंपरिक विधि
    सोना पहनने से पहले उसका शुद्धिकरण आवश्यक माना गया है। अंगूठी को पहले गंगाजल या स्वच्छ जल में रखें फिर दूध और शहद से शुद्ध करें। इसके बाद अंगूठी को भगवान विष्णु या सूर्यदेव के सामने रखकर प्रार्थना करें और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 11 बार जाप करें। शुद्धिकरण के बाद इसे अनामिका उंगली में पहनें।
    राशियों के अनुसार अनुकूलता
    ज्योतिष के अनुसार, मेष, सिंह, कर्क, धनु और मीन राशि वाले सोना पहनने से शुभ फल प्राप्त करते हैं। जबकि वृषभ, मिथुन, मकर और कुंभ राशि वालों को बिना व्यक्तिगत कुंडली देखे सोना नहीं पहनना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम निर्णय हमेशा व्यक्तिगत कुंडली देखकर ही लेना चाहिए।

    सोना और ग्रहों का संबंध

    सोना मुख्य रूप से बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है, जो ज्ञान, धर्म, संतान और धन का कारक माना जाता है। कुछ मान्यताओं में यह सूर्य को भी बल देता है, जिससे आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है।

    धार्मिक दृष्टि से महत्व

    धार्मिक परंपराओं में सोना महालक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। यह माना जाता है कि सोना धारण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति बनी रहती है। हालांकि किसी भी धातु या रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना अत्यंत लाभकारी होता है।