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  • करवा चौथ से पहले शुक्र अस्त, फिर भी महिलाएं खरीद सकेंगी सुहाग का सामान, जानें कब करें ?

    करवा चौथ से पहले शुक्र अस्त, फिर भी महिलाएं खरीद सकेंगी सुहाग का सामान, जानें कब करें ?


    नई दिल्ली। करवा चौथ का व्रत इस साल 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ महिलाएं इस व्रत की तैयारियों में जुटी हैं। हालांकि, शुक्र ग्रह के अस्त होने और पंचक की समाप्ति को लेकर सुहाग सामग्री की खरीदारी के शुभ समय पर सवाल उठ रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र अस्त होने से करवा चौथ का व्रत रखने या पूजा की सामग्री और सुहाग का सामान खरीदने पर रोक नहीं है।

    26 से 28 अक्टूबर तक कर सकती हैं खरीदारी

    ज्योतिषविदों के अनुसार, इस साल पंचक 25 अक्टूबर को शाम करीब 7 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इसके बाद महिलाएं 26, 27 और 28 अक्टूबर को करवा चौथ की तैयारियों के लिए खरीदारी कर सकती हैं। सोमवार से ही त्योहार की तैयारी शुरू की जा सकती है।

    इन दिनों महिलाएं पूजा के लिए करवा, पूजा की थाली, दीपक और छलनी खरीद सकती हैं। इसके अलावा चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, साड़ी और अन्य सुहाग सामग्री भी अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार ली जा सकती है।

    क्या शुक्र अस्त होने पर सुहाग सामग्री खरीदना अशुभ है?

    ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम, सौंदर्य, विवाह और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है। शुक्र के अस्त होने की अवधि में विवाह जैसे कुछ मांगलिक कार्यों के मुहूर्त को लेकर सावधानी बरती जाती है। इसी वजह से करवा चौथ की खरीदारी को लेकर भी महिलाओं के मन में असमंजस है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शुक्र अस्त होने का मतलब यह नहीं है कि करवा चौथ का व्रत नहीं रखा जा सकता या सुहाग का सामान खरीदना वर्जित है। महिलाएं चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, नई साड़ी और पूजा सामग्री खरीद सकती हैं। सोशल मीडिया पर खरीदारी को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों के बीच जरूरी है कि व्रत और विवाह जैसे अलग-अलग धार्मिक आयोजनों के नियमों को एक जैसा न समझें।

    29 अक्टूबर को शुक्र का उदय होने की जानकारी

    द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्र 12 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 19 मिनट पर अस्त हुए थे। पंचांग में 29 अक्टूबर को शाम 6 बजे शुक्र के उदय होने का समय बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र के उदय होने के बाद कुछ शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।

    हालांकि, विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के मुहूर्त की शुरुआत को लेकर अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं में अंतर हो सकता है। इसलिए विवाह की तारीख तय करने से पहले संबंधित पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से जानकारी लेना उचित रहेगा।

    करवा चौथ की पूजा के लिए पहले जुटा लें ये सामग्री

    करवा चौथ के दिन पूजा के समय किसी जरूरी वस्तु की कमी न हो, इसके लिए सामग्री पहले से खरीदकर रख लेना सुविधाजनक रहता है। पूजा के लिए करवा, छलनी, पूजा की थाली, दीपक, रोली, अक्षत, कलावा, फल और मिठाई जैसी चीजें जुटा लें।

    इसके साथ ही महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, साड़ी या सूट भी खरीद सकती हैं। समय रहते तैयारी करने से व्रत के दिन की भागदौड़ कम होगी और पूजा की व्यवस्था आसानी से की जा सकेगी।

  • शादी से लेकर गृह प्रवेश ,तक बिना मुहूर्त के, भी होते हैं शुभ कार्य जानिए अबूझ मुहूर्त के दिन

    शादी से लेकर गृह प्रवेश ,तक बिना मुहूर्त के, भी होते हैं शुभ कार्य जानिए अबूझ मुहूर्त के दिन


    नई दिल्ली । हिंदू परंपराओं में शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है लेकिन कुछ ऐसे विशेष समय भी होते हैं जब किसी पंचांग या ज्योतिषीय गणना की आवश्यकता नहीं होती और इन समयों को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है आम धारणा यह है कि यह योग केवल अक्षय तृतीया तक ही सीमित होता है लेकिन वास्तविकता यह है कि साल में कई ऐसे अवसर आते हैं जब बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में लगभग साढ़े तीन दिन ऐसे माने जाते हैं जिन्हें स्वयंसिद्ध या अबूझ मुहूर्त कहा जाता है इन दिनों में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि किसी भी शुभ कार्य की सफलता के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती

    इन विशेष अवसरों में चैत्र नवरात्रि का पहला दिन, अक्षय तृतीया, विजयादशमी और एक आधा अतिरिक्त शुभ योग शामिल होता है इन दिनों को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से इन्हें अत्यधिक महत्व प्राप्त है

    इन अबूझ मुहूर्तों में विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि इस समय किया गया विवाह स्थायी और सुखद होता है खासकर उन जोड़ों के लिए जिनकी कुंडली का मिलान कठिन होता है उनके लिए यह दिन वरदान के समान माने जाते हैं

    इसके अलावा गृह प्रवेश, नए मकान की नींव रखना, सोना चांदी, वाहन या जमीन की खरीदारी जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी इन दिनों में शुभ माने जाते हैं व्यवसाय शुरू करना भी इस समय अत्यंत लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह समय सफलता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है

    बच्चों से जुड़े संस्कार जैसे अन्नप्राशन, कर्णवेध, नामकरण, विद्यारंभ और मुंडन संस्कार भी इन शुभ दिनों में संपन्न किए जाते हैं धार्मिक मान्यता है कि इस समय किए गए सभी कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और उन्हें अक्षय पुण्य प्राप्त होता है

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अबूझ मुहूर्त का अर्थ है ऐसा समय जो स्वयं में पूर्ण रूप से शुभ हो और जिसमें किसी विशेष गणना की आवश्यकता न हो इन दिनों को इतना शुभ माना जाता है कि कोई भी कार्य बिना बाधा के सफल होने की संभावना अधिक रहती है कुल मिलाकर यह मान्यता भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां समय को केवल कैलेंडर नहीं बल्कि शुभ और अशुभ ऊर्जा के आधार पर भी देखा जाता है