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  • आज नृसिंह जयंती, ऐसे करें भगवान नृसिंह की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

    आज नृसिंह जयंती, ऐसे करें भगवान नृसिंह की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि


    नई दिल्ली। आज नृसिंह जयंती पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन भगवान विष्णु के उग्र अवतार भगवान नृसिंह को समर्पित है, जिन्होंने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अवतार लिया था। आधा मनुष्य और आधा सिंह के रूप में प्रकट होकर उन्होंने अधर्म का अंत किया और धर्म की स्थापना की।

    शुभ मुहूर्त और तिथि
    नृसिंह चतुर्दशी की तिथि 29 अप्रैल को शाम 7:51 बजे से शुरू होकर 30 अप्रैल को रात 9:12 बजे तक रहेगी। मध्याह्न संकल्प का समय सुबह 10:59 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक रहेगा।
    वहीं, सायंकाल पूजा का शुभ समय शाम 4:17 बजे से 6:56 बजे तक निर्धारित किया गया है।
    व्रत का पारण 1 मई को सुबह 5:41 बजे किया जाएगा।

    नृसिंह जयंती का महत्व
    वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली यह जयंती विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इसी दिन संध्या समय खंभे से प्रकट होकर भगवान नृसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध किया था। यह पर्व भक्तों की रक्षा, शत्रुओं के नाश और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    भगवान नृसिंह की महिमा
    भगवान नृसिंह को शक्ति और संरक्षण के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उनकी आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, विरोधियों से राहत मिलती है और भय व संकटों से सुरक्षा प्राप्त होती है। साथ ही मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

    पूजा विधि
    इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई कर स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें। चूंकि भगवान नृसिंह का प्राकट्य गोधूली बेला में हुआ था, इसलिए सूर्यास्त के समय पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। पूजा के दौरान भगवान की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं, लाल फूल अर्पित करें और श्रद्धा से मंत्र जाप करते हुए अपनी मनोकामना व्यक्त करें।

    व्रत नियम
    व्रत रखने वाले भक्त इस दिन फलाहार या जलाहार ग्रहण करते हैं और संयम का पालन करते हैं। अगले दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण किया जाता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी भक्ति भाव से पूजा कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

    विशेष उपाय
    यदि कोई व्यक्ति शत्रु या मुकदमे से परेशान है, तो भगवान नृसिंह को लाल फूल अर्पित कर लाल रेशमी धागा चढ़ाएं। इसके बाद घी का चौमुखी दीपक जलाकर “ऊं नृसिंहाय शत्रु भुजबल विधराय स्वाहा” मंत्र का 3, 5 या 11 माला जाप करें। पूजा के बाद उस धागे को दाहिने हाथ में बांधने से बाधाएं शांत होने की मान्यता है।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

    चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तप संयम ज्ञान और वैराग्य की प्रतीक देवी हैं। उनका यह रूप हमें कठिन समय में भी संयम और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है। कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा और मंत्र जाप से मानसिक शांति आत्मविश्वास और जीवन में बाधाओं को दूर करने की शक्ति प्राप्त होती है।

    मां ब्रह्मचारिणी का नाम ही उनके स्वरूप का परिचायक है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। यही कारण है कि उनका पूजन साधना और संयम का अभ्यास करवा कर व्यक्ति को अडिग बनाता है। जीवन या व्यवसाय में अगर कोई बड़ी बाधा बार-बार आती है तो इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आपकी इच्छाओं को पूरा करने में मदद कर सकती है और आत्मविश्वास को नया बल देती है।

    इस दिन का शुभ-मुहूर्त सुबह का समय माना गया है लेकिन विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक है। इस समय में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और सफेद या हल्के पीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है। इससे मन और शरीर दोनों में शुद्धता आती है।

    पूजन विधि सरल है लेकिन प्रभावशाली। मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और अपने कृतज्ञता भाव व्यक्त करें। मां को चमेली या कमल के फूल अर्पित करें क्योंकि ये उनके प्रिय माने जाते हैं। भोग में चीनी मिश्री या पंचामृत चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना आवश्यक है जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

    मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र है:

    “या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू।
    देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥”

    इस मंत्र का अर्थ है कि देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अद्भुत और दिव्य है। माता के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। साधारण मंत्र भी है: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः जिसका जाप कर श्रद्धा और भक्ति से मां की आराधना की जाती है।

    इस प्रकार चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा न केवल आत्मविश्वास और संयम की शक्ति देती है बल्कि जीवन में सुख शांति और समृद्धि भी लाती है। इस दिन विधि-विधान और उचित मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

  • 08 फरवरी 2026 का पंचांग: फाल्गुन कृष्ण सप्तमी आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और सूर्य-चंद्र का समय

    08 फरवरी 2026 का पंचांग: फाल्गुन कृष्ण सप्तमी आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और सूर्य-चंद्र का समय


    नई दिल्ली । आज 08 फरवरी 2026, रविवार को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन पूजा-पाठ, जप-तप और व्रत-अनुष्ठान के लिए विशेष महत्व रखता है। दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होती है, जिसे आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। वहीं शुभ कार्यों की योजना बनाते समय अभिजीत और अमृत काल को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाता है।

    आज के पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं अमृत काल शाम 7 बजकर 17 मिनट से 9 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान, योग और ईश्वर स्मरण के लिए सर्वोत्तम समय है।

    अशुभ काल की बात करें तो आज राहुकाल शाम 4 बजकर 51 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। यम गण्ड दोपहर 12 बजकर 41 मिनट से 2 बजकर 04 मिनट तक और कुलिक काल 3 बजकर 27 मिनट से 4 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक तथा वर्ज्यम् काल सुबह 8 बजकर 40 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।

    खगोलीय दृष्टि से आज सूर्य का उदय सुबह 7 बजकर 07 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय 9 फरवरी की रात 12 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त 9 फरवरी को सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर रहेगा। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सकारात्मक फल प्रदान करते हैं, इसलिए दिन की योजना पंचांग के अनुसार बनाना लाभकारी माना जाता है।

    शुभ काल:
    अभिजीत मुहूर्त – 12:18 PM – 01:03 PM
    अमृत काल – 07:17 PM – 09:03 PM
    ब्रह्म मुहूर्त – 05:30 AM – 06:18 AM

    अशुभ काल:
    राहुकाल – 04:51 PM – 06:14 PM
    यम गण्ड – 12:41 PM – 02:04 PM
    कुलिक – 03:27 PM – 04:51 PM
    दुर्मुहूर्त – 04:45 PM – 05:30 PM
    वर्ज्यम् – 08:40 AM – 10:26 AM

    सूर्य और चंद्रमा का समय:
    सूर्योदय – 07:07 AM
    सूर्यास्त – 06:14 PM
    चन्द्रोदय – 09 फरवरी, 12:18 AM
    चन्द्रास्त – 09 फरवरी, 11:23 AM

  • आज का पंचांग 24 जनवरी 2026: धार्मिक कार्यों और पूजा के लिए विशेष शुभ दिन, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

    आज का पंचांग 24 जनवरी 2026: धार्मिक कार्यों और पूजा के लिए विशेष शुभ दिन, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल


    नई दिल्ली।आज माघ मास की शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि है। पंचांग के अनुसार चंद्रमा मीन राशि में संचार कर रहा है जिससे भक्ति ध्यान और मानसिक शांति के योग बन रहे हैं। शिव योग दोपहर 2:02 बजे तक प्रभाव में रहेगा इसके बाद सिद्ध योग का आरंभ होगा। यह योग धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।

    षष्ठी तिथि रात्रि 12:40 बजे तक रहेगी इसके पश्चात सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। नक्षत्र की बात करें तो उत्तराभाद्रपद नक्षत्र दोपहर 2:16 बजे तक रहेगा इसके बाद रेवती नक्षत्र प्रभाव में आएगा। गंडमूल नक्षत्र का प्रारंभ दोपहर 2:16 बजे के बाद माना गया है इसलिए इस समय जन्म नामकरण या नए कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।करण का विवरण इस प्रकार है। कौलव करण दोपहर 1:14 बजे तक रहेगा इसके बाद गर करण का प्रभाव होगा। सूर्य उत्तरायण स्थिति में है और ऋतु शिशिर चल रही है। सूर्योदय सुबह 7:12 बजे और सूर्यास्त शाम 5:53 बजे होगा।

    आज के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04 बजे तक विजय मुहूर्त दोपहर 2:09 से 2:52 बजे तक और गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:09 बजे तक है। निशीथ काल रात 11:54 से 12:47 बजे तक रहेगा। इन समयों में पूजा ध्यान जप और मानसिक शुद्धि से जुड़े कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।आज के अशुभ समय में राहुकाल सुबह 9:00 से 10:30 बजे गुलिक काल सुबह 6:00 से 7:30 बजे और यमगंड दोपहर 1:30 से 3:30 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 6:57 से 7:40 बजे तक और पूरे दिन पंचक का प्रभाव रहेगा। इस अवधि में नए कार्य या शुभ निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    आज का विशेष उपाय यह है कि जल में दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करने से मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।सप्ताह का यह शनिवार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए उपाय जीवन में स्थिरता शांति और सफलता के मार्ग प्रशस्त करते हैं।