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  • उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान नस्लीय भेदभाव पर छलका दर्द-SCG टेस्ट होगा आखिरी मैच

    उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान नस्लीय भेदभाव पर छलका दर्द-SCG टेस्ट होगा आखिरी मैच


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड SCG में खेला जाने वाला एशेज सीरीज का टेस्ट मैच उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। इस भावुक मौके पर ख्वाजा ने न सिर्फ अपने संन्यास की घोषणा की बल्कि अपने लंबे करियर के दौरान झेले नस्लीय भेदभाव मीडिया की आलोचना और टीम मैनेजमेंट के दोहरे मानदंडों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने कहा कि उन्हें पूरे करियर में कई बार उनके पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम पहचान के कारण अलग नजर से देखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चोटिल होने की स्थिति में भी उनकी सच्चाई जाने बिना उन पर सवाल खड़े किए गए और उन्हें अक्सर आलसी स्वार्थी या टीम के लिए पूरी तरह समर्पित न होने वाला खिलाड़ी बताया गया।

    ख्वाजा ने कहा जब मैं चोटिल होता था तो लोग बिना पूरी जानकारी के मुझ पर उंगलियां उठाते थे। मुझे ऐसा महसूस कराया गया कि मैं टीम के लिए उतना प्रतिबद्ध नहीं हूं जितना बाकी खिलाड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि यह नजरिया सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था बल्कि उनकी पहचान से भी जुड़ा हुआ था।उन्होंने हाल ही में पर्थ टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने और एक वैकल्पिक ट्रेनिंग सेशन में शामिल न होने पर हुई आलोचना का भी जिक्र किया। ख्वाजा के मुताबिक कई खिलाड़ी मैच से पहले गोल्फ खेलते हैं या शराब पीते हैं लेकिन उन्हें ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं जब उन्होंने ऐसा किया तो इसे बड़ा मुद्दा बनाया गया और उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए गए।

    ख्वाजा ने साफ शब्दों में कहा कि यह दोहरा मापदंड उन्हें हमेशा खलता रहा। उन्होंने कहा कि अगर वही काम कोई और करता तो उसे मजाक या सामान्य व्यवहार मान लिया जाता लेकिन उनके मामले में इसे चरित्र से जोड़ दिया गया।संन्यास की घोषणा के दौरान ख्वाजा के साथ उनकी पत्नी रेचल बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि वे काफी समय से इस फैसले पर विचार कर रहे थे। पत्नी से लंबी बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब सही समय आ गया है। ख्वाजा ने कहा कि उन्हें संतोष है कि वे अपने करियर को SCG जैसे ऐतिहासिक मैदान पर अपनी शर्तों पर खत्म कर पा रहे हैं।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एशेज सीरीज की शुरुआत में एडिलेड टेस्ट की प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना उनके लिए एक बड़ा संकेत था। हालांकि बाद में जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने अहम पारियां खेलीं और टीम के लिए योगदान दिया। ख्वाजा ने साफ किया कि वे जबरदस्ती टीम में बने रहने के पक्ष में नहीं थे और अगर जरूरत पड़ी होती तो वे उसी समय संन्यास लेने के लिए तैयार थे।अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी ख्वाजा क्रिकेट से पूरी तरह दूरी नहीं बनाएंगे। वे आगे भी ब्रिस्बेन हीट के लिए बिग बैश लीग और क्वींसलैंड के लिए शेफील्ड शील्ड में खेलते नजर आएंगे। उनका मानना है कि क्रिकेट अभी भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है।

    इस मौके पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के CEO टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा कि उस्मान ख्वाजा ने मैदान के अंदर और बाहर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। उनका योगदान सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने विविधता समावेशिता और साहस की मिसाल भी पेश की है।कुल मिलाकर उस्मान ख्वाजा का संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी का विदाई नहीं है बल्कि यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में मौजूद उन मुद्दों की ओर भी इशारा करता है जिन पर अब खुलकर चर्चा होने लगी है।

  • ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नया इतिहास! एलेक्स कैरी ने कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक रन बनाने वाले विकेटकीपर का बड़ा रिकॉर्ड बनाया

    ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नया इतिहास! एलेक्स कैरी ने कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक रन बनाने वाले विकेटकीपर का बड़ा रिकॉर्ड बनाया


    नई दिल्ली।ऑस्ट्रेलिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज एलेक्स कैरी ने शनिवार को ब्रिसबेन में खेले जा रहे एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट मैच के दौरान एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। कैरी अब एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर बल्लेबाजों में दूसरे स्थान पर आ गए हैं। यह रिकॉर्ड पहले एडम गिलक्रिस्ट के नाम था, जिन्होंने पांच बार यह कारनामा कर इतिहास रचा था।

    हालांकि चौथे टेस्ट के दौरान कैरी का प्रदर्शन थोड़ी निराशा वाला रहा। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में वह जल्दी ही सस्ते में आउट होकर पवेलियन लौट गए। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने गिलक्रिस्ट के खास क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली।एलेक्स कैरी ने 2025 में ऑस्ट्रेलिया के लिए कुल 767 रन बनाए, जिससे वह साल 2005 के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले विकेटकीपर बन गए। एडम गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड की बात करें तो उन्होंने 2001 में 870, 2004 में 837, 2005 में 836, 2002 में 792 और 2003 में 714 रन बनाए थे।

    कैरी ने साल 2025 में श्रीलंका, वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका WTC फाइनलऔर इंग्लैंड के खिलाफ कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। उनके इस प्रदर्शन के चलते वह आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में टॉप-10 बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो चुके हैं।ब्रिसबेन में खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच का पहला दिन बेहद रोमांचक रहा। पहले दिन ही 20 विकेट गिर गए, और दोनों टीमों की पहली पारी पूरी हो गई। ऑस्ट्रेलिया ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक दूसरी पारी में बिना किसी नुकसान के चार रन बना लिए थे, जिससे उन्हें 46 रन की बढ़त मिली।

    दूसरे दिन भी विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहा। लंच ब्रेक तक ऑस्ट्रेलिया ने 25 ओवर में 6 विकेट खोकर 98 रन बनाए। पहले सेशन में टीम ने 94 रन जोड़े और 6 विकेट गंवाए। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने कुल मिलाकर 140 रन की बढ़त हासिल कर ली। इंग्लैंड के जोश टंग ने 45 रन देकर पांच विकेट लिए। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए इंग्लैंड ने मेजबान टीम को 152 रन पर ऑलआउट कर दिया। जवाब में इंग्लैंड की टीम 29.5 ओवर में 110 रन पर ऑलआउट हो गई।इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने पहले तीन टेस्ट मैच जीतकर 11 दिन के भीतर सीरीज अपने नाम कर ली थी। इस जीत के साथ ही टीम के लिए कैरी का प्रदर्शन और भी खास बन गया है, क्योंकि उन्होंने टीम को मजबूत बल्लेबाजी का सहारा दिया और गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड को चुनौती दी।

    एक कैलेंडर ईयर में ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा टेस्ट रन:

    870 – एडम गिलक्रिस्ट, 2001

    837 – एडम गिलक्रिस्ट, 2004

    836 – एडम गिलक्रिस्ट, 2005

    792 – एडम गिलक्रिस्ट, 2002

    767 – एलेक्स कैरी, 2025

    714 – एडम गिलक्रिस्ट, 2003

    इस उपलब्धि से यह साफ हो गया है कि एलेक्स कैरी ने न सिर्फ खुद को टीम का अहम हिस्सा बनाया है, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके इस प्रदर्शन से युवा खिलाड़ियों में भी प्रेरणा मिलेगी और भविष्य में ऑस्ट्रेलिया के लिए कई रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद बढ़ जाएगी।

  • स्टीव स्मिथ की चोट ने उस्मान ख्वाजा को दिया करियर का आखिरी जीवनदान तीसरे टेस्ट में मिली जगह

    स्टीव स्मिथ की चोट ने उस्मान ख्वाजा को दिया करियर का आखिरी जीवनदान तीसरे टेस्ट में मिली जगह


    नई दिल्ली ।
    ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा को तीसरे एशेज टेस्ट मैच में एक ऐसा मौका मिला जिसका उन्होंने शायद कभी उम्मीद भी नहीं की थी। स्टीव स्मिथ की चोट ने ख्वाजा को क्रिकेट के बड़े मंच पर एक और जीवनदान दिया। जब ऑस्ट्रेलिया की टीम दो-शून्य से आगे थी और किसी को उम्मीद नहीं थी कि ख्वाजा को फिर से खेलने का मौका मिलेगा तब यह चोट उनके लिए वरदान साबित हुई।

    ख्वाजा की वापसी का चमत्कारी कारण

    उस्मान ख्वाजा ने 2022 में टेस्ट क्रिकेट में अपनी वापसी की थी। उस वक्त ट्रैविस हेड की चोट उनके लिए वरदान बनी थी। ख्वाजा की पिछली वापसी भी इसी तरह से हुई थी। अब 2022 में अपने करियर की दूसरी पारी में वो लगातार ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट स्क्वॉड का हिस्सा बने थे। लेकिन मौजूदा समय में उनकी फॉर्म और फिटनेस समस्याएँ उनके साथ थीं। इस बीच स्टीव स्मिथ को एडिलेड में तीसरे एशेज टेस्ट से पहले ट्रेनिंग के दौरान सिर में चोट लगी जिसके बाद उन्हें वर्टिगो की समस्या का सामना करना पड़ा। इसके चलते उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया और इसने ख्वाजा को टीम में मौका दिया।

    क्या ख्वाजा इस मौके का फायदा उठा पाएंगे

    ख्वाजा के लिए यह मौका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका एडिलेड में टेस्ट क्रिकेट में रिकॉर्ड अच्छा रहा है। 39 साल की उम्र में उनका करियर अब अंतिम दौर में है और एशेज सीरीज के बाद शायद ही वह ऑस्ट्रेलिया की टीम में नजर आएं। 18 दिसंबर को उनका जन्मदिन है और यह उनकी उम्र के लिहाज से एक अहम मोड़ हो सकता है। अब यह देखना बाकी है कि ख्वाजा इस जीवनदान का कितना फायदा उठा पाते हैं और क्या वह अपनी वापसी को और भी यादगार बना सकते हैं।

    स्मिथ की अनुपस्थिति ने ख्वाजा के लिए दरवाजे खोले

    यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि स्टीव स्मिथ की अनुपस्थिति ने ख्वाजा के लिए टीम में जगह बनाई। ख्वाजा को मौका मिलने से उनकी वापसी को लेकर कुछ उम्मीदें बढ़ी हैं हालांकि उनका प्रदर्शन अभी तक उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है। लेकिन इस मौक़े को गंवाना उनके लिए बड़ा जोखिम हो सकता है क्योंकि इस समय उनका करियर एक मोड़ पर खड़ा है। ख्वाजा का यह जीवनदान उन्हें उन फैंस के लिए प्रेरणा बन सकता है जो मानते हैं कि क्रिकेट में कभी भी कुछ भी हो सकता है और एक चोट या एक मौके से करियर में नया मोड़ आ सकता है।