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  • 2027 से WhatsApp और Telegram पर सिम-बाइंडिंग नियम संभव, सिम हटाने पर अकाउंट की सेवाएं हो सकती हैं बंद

    2027 से WhatsApp और Telegram पर सिम-बाइंडिंग नियम संभव, सिम हटाने पर अकाउंट की सेवाएं हो सकती हैं बंद

    नई दिल्ली । व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करने वालों के लिए 2027 से नए नियम लागू हो सकते हैं। प्रस्तावित सिम-बाइंडिंग व्यवस्था के तहत अकाउंट से जुड़े भारतीय मोबाइल नंबर का सक्रिय सिम या ई-सिम उसी डिवाइस में मौजूद होना जरूरी हो सकता है, जिस पर संबंधित अकाउंट इस्तेमाल किया जा रहा है। दूरसंचार विभाग ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को 31 दिसंबर 2026 तक इन नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना और भारतीय मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग को रोकना बताया गया है।

    इस व्यवस्था का सीधा असर उन उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है, जो मैसेजिंग ऐप पर अकाउंट बनाने के बाद रजिस्टर्ड सिम कार्ड निकाल देते हैं या उसे किसी दूसरे फोन में इस्तेमाल करते हैं। नए नियमों के तहत प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना पड़ सकता है कि अकाउंट से जुड़ा नंबर उसी डिवाइस में सक्रिय सिम या ई-सिम के माध्यम से सत्यापित हो। यदि सिम निकाल दिया जाता है, नंबर बदल जाता है या सिम निष्क्रिय हो जाता है, तो संबंधित अकाउंट की सेवाएं सीमित या निलंबित की जा सकती हैं, जब तक नंबर का दोबारा सत्यापन नहीं हो जाता।

    सरकार की इस पहल के पीछे ऑनलाइन धोखाधड़ी के उन तरीकों पर रोक लगाने का उद्देश्य है, जिनमें भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके मैसेजिंग अकाउंट बनाए जाते हैं और बाद में उनका संचालन दूसरे देशों से किया जाता है। दूरसंचार विभाग के अनुसार, कुछ धोखाधड़ी गिरोह सिम कार्ड के माध्यम से अकाउंट तैयार करते हैं और फिर उनका इस्तेमाल फिशिंग, आर्थिक ठगी तथा तथाकथित डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों के लिए करते हैं। सक्रिय सिम और मैसेजिंग अकाउंट के बीच संबंध मजबूत होने से ऐसे मामलों की रोकथाम में मदद मिलने की उम्मीद है।

    व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म मोबाइल नंबर के आधार पर उपयोगकर्ता का पंजीकरण करते हैं, इसलिए उनके इस व्यवस्था के दायरे में आने की संभावना है। हालांकि, अलग-अलग ऐप पर नियमों के लागू होने की स्थिति को लेकर पूरी स्पष्टता जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्नैपचैट पर इन नियमों के लागू होने की संभावना कम बताई गई है, जबकि सिग्नल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उपयोगकर्ताओं को अपने संबंधित ऐप की आधिकारिक जानकारी और नियमों के अंतिम स्वरूप पर नजर रखनी चाहिए।

    इन संभावित बदलावों का असर उन लोगों पर अधिक पड़ सकता है, जो एक फोन में सिम रखते हैं लेकिन व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप किसी दूसरे डिवाइस पर चलाते हैं। इसी तरह, अकाउंट बनाने के बाद सिम निकाल देने वाले, मुख्य रूप से वाई-फाई के जरिए ऐप इस्तेमाल करने वाले और डुअल-सिम फोन में अकाउंट से जुड़े नंबर को निष्क्रिय छोड़ने वाले उपयोगकर्ताओं को भी परेशानी हो सकती है।

    हालांकि, सिम-बाइंडिंग नियमों का मतलब यह नहीं है कि 1 जनवरी 2027 से व्हाट्सएप किसी खास आईफोन या एंड्रॉइड फोन पर चलना बंद कर देगा। प्रस्तावित व्यवस्था का संबंध मोबाइल नंबर के सत्यापन और अकाउंट की सुरक्षा से है, न कि किसी विशेष मोबाइल ब्रांड या ऑपरेटिंग सिस्टम से। इसलिए इसे फोन के मॉडल पर आधारित प्रतिबंध समझना सही नहीं होगा।

    प्रस्तावित नियमों में भौतिक सिम कार्ड के साथ ई-सिम को भी शामिल किया गया है। यदि अकाउंट से जुड़ा नंबर सक्रिय ई-सिम के रूप में उसी डिवाइस में मौजूद रहता है, तो उपयोगकर्ता को निर्धारित शर्तों के तहत सेवा जारी रखने में आसानी हो सकती है। हालांकि, अंतिम प्रक्रिया और सत्यापन से जुड़े व्यावहारिक निर्देश नियमों के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेंगे।

    उपयोगकर्ताओं के लिए फिलहाल जरूरी है कि वे अपने मैसेजिंग अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर की सक्रियता बनाए रखें और सिम बदलने या दूसरे फोन में स्थानांतरित करने से पहले संभावित प्रभाव को समझें। इन नियमों का उद्देश्य सुरक्षा मजबूत करना है, लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम दिशानिर्देश किस तरह लागू किए जाते हैं और प्लेटफॉर्म सत्यापन की प्रक्रिया कैसे संचालित करते हैं।

  • ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए यूएएन सेवाओं की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं। यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के तकनीकी उन्नयन के बाद अब यूएएन एक्टिवेशन और नया यूएएन जारी करने की सुविधा पहले की तरह पोर्टल पर उपलब्ध नहीं रहेगी। इन सेवाओं को नई डिजिटल व्यवस्था के तहत स्थानांतरित किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और तकनीक आधारित बनाई जा सके।

    नए बदलाव के तहत यूएएन को सक्रिय करने और नया यूएएन प्राप्त करने के लिए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन को अधिक मजबूत बनाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। नई प्रणाली के लागू होने के बाद सदस्यों को अपनी पहचान की पुष्टि डिजिटल माध्यम से करनी होगी, जिसके बाद ही संबंधित सेवा उपलब्ध होगी।

    तकनीकी अपग्रेड के साथ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के इंटरफेस और प्रोसेसिंग सिस्टम में भी सुधार किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार यूएएन एक्टिवेशन, नया यूएएन जारी करने और पहली बार यूएएन प्राप्त करने जैसी सेवाओं की प्रक्रिया पूरी तरह नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित होगी। इससे डेटाबेस का बेहतर एकीकरण होगा और सेवाओं की गति तथा सुरक्षा दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

    जिन कर्मचारियों का यूएएन अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है, उन्हें नई प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान का डिजिटल सत्यापन कराना होगा। वहीं जिन कर्मचारियों को पहली बार यूएएन जारी किया जाना है, उनके लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सफल सत्यापन के बाद नया यूएएन संबंधित कर्मचारी के भविष्य निधि खाते से जोड़ दिया जाएगा, जिससे आगे की सभी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

    संगठन ने यूएएन भूल जाने वाले सदस्यों के लिए रिकवरी प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। अब पंजीकृत मोबाइल नंबर के सत्यापन, आवश्यक व्यक्तिगत जानकारी और पहचान संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि के बाद सदस्य अपना यूएएन दोबारा प्राप्त कर सकेंगे। इससे ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्हें लंबे समय बाद अपने खाते की जानकारी प्राप्त करनी होती है।

    हालांकि यूएएन से जुड़ी अधिकांश सेवाओं की प्रक्रिया नई व्यवस्था के अंतर्गत स्थानांतरित कर दी गई है, लेकिन ऑनलाइन डेथ क्लेम दाखिल करने की सुविधा पहले की तरह यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। इसके लिए आधार से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों का आकार और फाइल प्रारूप भी तय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक होगा।

    तकनीकी उन्नयन के बाद शुरुआती दिनों में ऑनलाइन क्लेम और अन्य अनुरोधों के निपटारे में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। अतिरिक्त सत्यापन और सिस्टम जांच के कारण यह स्थिति अस्थायी मानी जा रही है। सदस्यों को सलाह दी गई है कि एक ही अनुरोध को बार-बार जमा करने या अनावश्यक रूप से बार-बार लॉगिन करने से बचें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और सभी उपयोगकर्ताओं को सुचारु सेवाएं मिल सकें।

    नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य निधि सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। फेस ऑथेंटिकेशन आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने से पहचान संबंधी धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और खाताधारकों को भविष्य में तेज, विश्वसनीय और अधिक सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।