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  • E20 पेट्रोल की कीमत पर बड़ा खुलासा किसानों से लेकर कच्चे तेल तक समझिए क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल के दाम

    E20 पेट्रोल की कीमत पर बड़ा खुलासा किसानों से लेकर कच्चे तेल तक समझिए क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल के दाम


    नई दिल्ली । देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 ईंधन की आपूर्ति तेज़ी से बढ़ाई जा रही है। सरकार का लक्ष्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले जैव ईंधन को बढ़ावा देना है। हालांकि आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एथेनॉल भारत में ही तैयार होता है तो फिर E20 पेट्रोल सामान्य पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं मिलता। अब सरकार ने संसद में इस सवाल का विस्तृत जवाब देते हुए इसकी असली वजह स्पष्ट कर दी है।

    सरकार के मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में एथेनॉल कोई बहुत सस्ता ईंधन नहीं है। एथेनॉल का उत्पादन किसानों से खरीदे गए मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। किसानों को उचित मूल्य देने की नीति के तहत सरकार एथेनॉल की खरीद तय दरों पर करती है। इसके अलावा परिवहन भंडारण और कर जैसे अतिरिक्त खर्च भी इसमें शामिल होते हैं। यही कारण है कि E20 पेट्रोल तैयार करने की कुल लागत सामान्य पेट्रोल के बराबर या कई बार उससे अधिक हो जाती है।

    सरकार ने यह भी बताया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सामान्य स्तर पर रहती है तब एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की लागत में कोई बड़ी कमी नहीं आती। यदि भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें बहुत अधिक बढ़ती हैं तब एथेनॉल मिश्रण आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक साबित हो सकता है। इसलिए फिलहाल उपभोक्ताओं को कीमत के रूप में सीधी राहत नहीं मिल पा रही है।

    हालांकि सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल का सबसे बड़ा फायदा कीमत नहीं बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का मतलब है कि ईंधन का एक बड़ा हिस्सा अब देश में ही तैयार हो रहा है। इससे विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम होती है और वैश्विक संकट या युद्ध जैसी परिस्थितियों में ईंधन आपूर्ति पर असर कम पड़ता है। साथ ही किसानों को उनकी फसल का बेहतर बाजार मिलता है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल पंपों पर अलग से शुद्ध पेट्रोल E10 और E20 उपलब्ध कराना फिलहाल व्यावहारिक नहीं है। देश में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप हैं और हर स्थान पर तीन तरह का ईंधन रखने के लिए अलग भंडारण और वितरण व्यवस्था की जरूरत होगी। इससे लागत काफी बढ़ जाएगी और सप्लाई चेन को संभालना भी कठिन हो जाएगा। इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन और वितरण नेटवर्क पर पहले ही बड़े पैमाने पर निवेश किया जा चुका है।

    माइलेज को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। सरकार के अनुसार E20 ईंधन के उपयोग से कुछ वाहनों में लगभग तीन से पांच प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है। हालांकि वास्तविक माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता बल्कि वाहन की स्थिति ड्राइविंग शैली टायर का दबाव समय पर सर्विसिंग और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसे कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है।

    दुनिया के कई विकसित देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है ताकि आयातित तेल पर खर्च कम हो और स्वदेशी जैव ईंधन के जरिए ऊर्जा क्षेत्र को अधिक आत्मनिर्भर बनाया जा सके। आने वाले समय में एथेनॉल उत्पादन बढ़ने और तकनीक बेहतर होने के साथ इसकी लागत में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

  • E20 पेट्रोल पर बढ़ीं वाहन मालिकों की चिंताएं लंबे समय तक खड़ी गाड़ियों में क्यों आ रही हैं फ्यूल सिस्टम की दिक्कतें जानिए

    E20 पेट्रोल पर बढ़ीं वाहन मालिकों की चिंताएं लंबे समय तक खड़ी गाड़ियों में क्यों आ रही हैं फ्यूल सिस्टम की दिक्कतें जानिए


    नई दिल्ली। देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है। हाल ही में केंद्र सरकार ने 100 प्रतिशत इथेनॉल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही देशभर में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। इस पहल का उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना विदेशी मुद्रा की बचत करना और प्रदूषण घटाना है। हालांकि इसके बढ़ते इस्तेमाल के बीच कुछ वाहन मालिकों और मैकेनिकों ने नई चिंताएं भी सामने रखी हैं।

    भोपाल के कई ऑटो मैकेनिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल का उपयोग करने वाली कुछ गाड़ियों में पहले की तुलना में फ्यूल पंप जल्दी खराब होने की शिकायतें बढ़ी हैं। उनका दावा है कि जिन वाहनों में पहले फ्यूल पंप वर्षों तक बिना किसी समस्या के चलता था अब कुछ मामलों में उसे कम समय में बदलना पड़ रहा है। हालांकि यह अनुभव सभी वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं होता और यह वाहन के मॉडल रखरखाव तथा निर्माता की तकनीक पर भी निर्भर करता है।

    मैकेनिकों के अनुसार जिन गाड़ियों का लंबे समय तक उपयोग नहीं होता उनमें फ्यूल टैंक में मौजूद इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नमी को अधिक आकर्षित कर सकता है। इससे कुछ परिस्थितियों में फ्यूल सिस्टम में जमाव या अन्य तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि वाहन कई सप्ताह या महीनों तक बिना चलाए खड़ा रहे तो फ्यूल लाइन और पंप पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नई पीढ़ी की E20 अनुकूल गाड़ियों को इसी प्रकार के ईंधन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इन वाहनों में ऐसे रबर सील फ्यूल पाइप और अन्य पुर्जे लगाए जाते हैं जो इथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें। लेकिन पुराने मॉडल के कुछ वाहनों में यदि निर्माता ने E20 की मंजूरी नहीं दी है तो वाहन मालिकों को कंपनी के दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए।

    वाहन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि गाड़ी लंबे समय तक खड़ी रखनी हो तो समय समय पर इंजन स्टार्ट करना और कुछ दूरी तक चलाना बेहतर रहता है। इससे फ्यूल सिस्टम सक्रिय रहता है और ईंधन के लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से होने वाली संभावित समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। साथ ही समय पर सर्विस कराना फ्यूल फिल्टर की जांच कराना और केवल भरोसेमंद पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाना भी जरूरी है।

    सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से कार्बन उत्सर्जन कम होगा किसानों को गन्ने और अन्य फसलों का बेहतर बाजार मिलेगा तथा कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी। दूसरी ओर वाहन उद्योग भी लगातार ऐसे इंजन विकसित कर रहा है जो E20 और भविष्य में अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

    ऐसे में यदि आपका वाहन नया है और निर्माता ने E20 ईंधन की अनुमति दी है तो सामान्य रूप से चिंता की जरूरत नहीं है। वहीं यदि वाहन पुराना है तो कंपनी की गाइडलाइन के अनुसार ही ईंधन का चयन करना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। नियमित रखरखाव और समय पर जांच किसी भी ईंधन के साथ वाहन की बेहतर कार्यक्षमता बनाए रखने की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।