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  • सोनिया गांधी ने राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्यार की कहानी साझा की, किताब में खुलेंगी जिंदगी की कई यादें

    सोनिया गांधी ने राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्यार की कहानी साझा की, किताब में खुलेंगी जिंदगी की कई यादें


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपने रिश्ते की शुरुआत से जुड़ी यादें साझा की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पहली पोस्ट में एक वीडियो जारी कर बताया कि इंग्लैंड में अपनी पसंद का खाना तलाशते हुए वह कैम्ब्रिज के एक ग्रीक रेस्तरां तक पहुंची थीं। इसी जगह एक मित्र ने उनकी मुलाकात राजीव गांधी से कराई थी। सोनिया ने इस मुलाकात को अपने जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यहीं से उनके प्रेम की शुरुआत हुई और दोनों ने मिलकर यादों से भरी दुनिया बनाई।

    सोनिया गांधी ने बताया कि राजीव गांधी से पहली मुलाकात के दौरान ही उन्हें महसूस हुआ था कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह अपना जीवन बिताना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव की भावना भी कुछ ऐसी ही थी। इसके बाद दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी। वे पार्टियों में जाते, घूमते और विद्यार्थियों की बैठकों में एक-दूसरे के साथ समय बिताते थे।

    राजीव गांधी के व्यक्तित्व को याद करते हुए सोनिया ने कहा कि उनका स्वभाव बेहद सौम्य था। उन्होंने राजीव के आकर्षक व्यक्तित्व का भी उल्लेख किया, लेकिन उनके अनुसार राजीव की सबसे खास बात उनका सहज और विनम्र व्यवहार था। सोनिया की ये यादें उनकी आगामी पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ से जुड़ी हैं, जिसका विमोचन 10 नवंबर को होना है। उन्होंने शनिवार को ही अपना सोशल मीडिया अकाउंट बनाया और पहली पोस्ट में पुस्तक का वीडियो साझा किया।

    इस पुस्तक में सोनिया गांधी ने अपने बचपन से लेकर भारत में जीवन बिताने तक के अनुभवों का वर्णन किया है। इसकी शुरुआत युद्ध के बाद इटली के वेनेटो क्षेत्र में उनके बचपन से होती है। इसके बाद उनके कैम्ब्रिज पहुंचने और वर्ष 1965 में राजीव गांधी से मुलाकात का विवरण आता है। राजीव गांधी उस समय जवाहरलाल नेहरू के पोते के रूप में जाने जाते थे।

    पुस्तक में राजीव गांधी से विवाह और उनकी मां, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात का भी जिक्र है। सोनिया ने भारत में नई जिंदगी के साथ तालमेल बैठाने के अनुभव साझा किए हैं। इनमें हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय खानपान तथा संस्कृति को अपनाना शामिल है। इस तरह पुस्तक में निजी जीवन के साथ एक नए देश और परिवार में खुद को ढालने की यात्रा भी दर्ज है।

    सोनिया गांधी की आत्मकथा में गांधी परिवार को प्रभावित करने वाली कई बड़ी त्रासदियों का भी उल्लेख है। इनमें विमान हादसे में संजय गांधी की मृत्यु, वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या शामिल हैं। इन घटनाओं के बाद उनके निजी जीवन में आए बदलावों और परिवार की परिस्थितियों का भी वर्णन किया गया है।

    राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। उस समय पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1996 तक कांग्रेस की स्थिति कमजोर होने लगी और पार्टी के भीतर कई गुट उभर आए। पार्टी को एकजुट करने के प्रयासों के बीच सोनिया गांधी ने वर्ष 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली। इसके बाद वर्ष 1998 में वह पार्टी की अध्यक्ष बन गईं।

    सोनिया गांधी वर्ष 2017 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहीं। उनका कार्यकाल पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा रहा। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर मिला। सहयोगी दलों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया था, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को इस पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

    पुस्तक में इस राजनीतिक दौर और प्रधानमंत्री पद से दूर रहने के उनके फैसले का भी उल्लेख है। मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने भी अपनी पुस्तक ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ में उस समय के घटनाक्रम का वर्णन किया था। सोनिया गांधी की नई पुस्तक में निजी रिश्तों, पारिवारिक त्रासदियों और राजनीतिक जीवन से जुड़े अनुभवों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।

  • रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन, योगी आदित्यनाथ बोले- अभावों से संघर्ष कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरक कहानी

    रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन, योगी आदित्यनाथ बोले- अभावों से संघर्ष कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरक कहानी

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में अधिक समय बिताने के बजाय अच्छी पुस्तकों को पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर प्रतिदिन पांच से सात घंटे बिताने वाले लोग यदि इसमें से एक-दो घंटे भी पुस्तकें पढ़ने के लिए निकालें, तो उनके जीवन को नई दिशा मिल सकती है। सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स जुटाने की तुलना में वास्तविक जीवन में आगे बढ़ने के प्रयास अधिक उपयोगी हैं। उन्होंने महापुरुषों की जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ने को संघर्षों से प्रेरणा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ऐसे व्यक्ति की जीवनयात्रा को सामने लाती है, जिसने अभावों को अपनी कमजोरी या आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनने दिया। संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर रामनाथ कोविंद देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है।
    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में पुस्तकालयों के विस्तार और पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रत्येक ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं और इनमें पुस्तकालय के लिए एक कमरा निर्धारित किया गया है। इन स्थानों पर गांव के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालयों का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भी व्यापक स्तर पर पुस्तकालयों तक पहुंचनी चाहिए और सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी।
    मुख्यमंत्री ने पुस्तक मेलों में लोगों की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को आशंका थी कि मौजूदा दौर में लोग पुस्तकें खरीदने में कितनी रुचि दिखाएंगे। हालांकि, लखनऊ में आयोजित पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद गोरखपुर में उससे भी अधिक पुस्तकें बिकीं। हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में लगे पुस्तक मेले में भी युवाओं और विद्यार्थियों ने अच्छी भागीदारी की। उन्होंने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि मौजूद है, जरूरत उन्हें उपयुक्त मंच और अवसर उपलब्ध कराने की है।
    रामनाथ कोविंद की जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उनका जन्म कानपुर के परौंख गांव में हुआ था और बचपन में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। उन्होंने गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू की और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। इसके बाद उन्होंने भाजपा संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करना ही महानता की पहचान है।
    उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बावजूद रामनाथ कोविंद का अपनी जन्मभूमि परौंख से जुड़ाव बना रहा। वह अवसर मिलने पर गांव जाते हैं और पुराने साथियों के साथ चाय तथा चाट बेचने वालों से भी उनके संबंध कायम हैं। उन्होंने गांव में शिक्षा सुविधाओं के विकास के लिए प्रयास किए। वहां विद्यालय भवन को विकसित करके राज्य सरकार को सौंपा गया, जिसे आगे आवासीय विद्यालय के रूप में विकसित किया गया। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के जन्मभूमि प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।
    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सादगी और अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा देती है। उनके अनुसार, व्यक्ति कितना भी बड़ा पद हासिल कर ले, उसके संस्कार और विचार नहीं बदलने चाहिए। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानपुर के छोटे से गांव के गरीब परिवार में जन्मा व्यक्ति अपनी योग्यता और कार्यक्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसे भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती और रामनाथ कोविंद के जीवन को लोकतांत्रिक मूल्यों तथा पारदर्शिता का उदाहरण बताया।
    विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति की जीवनयात्रा को ‘कच्चे घर, पक्के इरादे’ का उदाहरण बताया और विधानसभा सदस्यों के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों और पुस्तकालयों में अच्छी हिंदी पुस्तकों की पहुंच बढ़ी है और किताबें बच्चों तक पहुंच रही हैं।
    कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के गायन से हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनाथ कोविंद को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उनकी पत्नी सविता कोविंद का भी स्वागत किया गया। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों के साथ अपनी आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन किया।