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  • भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत पर मारुति चेयरमैन का भरोसा! 2031 तक 63 लाख कारों का बाजार होने का अनुमान

    भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत पर मारुति चेयरमैन का भरोसा! 2031 तक 63 लाख कारों का बाजार होने का अनुमान


    नई दिल्ली। मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव ने भारतीय अर्थव्यवस्था और ऑटो सेक्टर को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। उन्होंने कहा है कि जीएसटी 2.0 के सुधारों ने न केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को फायदा पहुंचाया है बल्कि अर्थव्यवस्था के कई दूसरे क्षेत्रों को भी मजबूती दी है। पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण पैदा हुई वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि आर्थिक सुधारों का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। भार्गव ने यह बात कंपनी की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कही।

    भार्गव के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है लेकिन इसके बावजूद भारत का जीएसटी कलेक्शन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। उनका मानना है कि अगर जीएसटी में सुधार नहीं किए गए होते तो पिछले कुछ मुश्किल महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था इतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाती। उन्होंने जीएसटी सुधारों को ऐतिहासिक बदलाव बताते हुए केंद्र सरकार और संबंधित सभी पक्षों के प्रयासों की सराहना की।

    मारुति सुजुकी चेयरमैन ने कहा कि आर्थिक सुधारों से देश की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है और इसका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। जब कारोबार का विस्तार होता है तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से सुधारों की प्रक्रिया को और तेज करने की अपील की। साथ ही कारोबार करना आसान बनाने और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनके अनुसार सरकारी कामकाज में तकनीक का अधिक इस्तेमाल होने से भ्रष्टाचार और देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

    आरसी भार्गव ने यह भी कहा कि देश में जितनी तेजी से संपत्ति का निर्माण होगा उतनी ही तेजी से सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। उनका मानना है कि यदि सरकारी कार्यक्रम इसी दिशा में आगे बढ़ते रहे तो आर्थिक विकास का लाभ समाज के ज्यादा बड़े हिस्से तक पहुंच सकता है। इस दौरान उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूद विकास की संभावनाओं को लेकर भी सकारात्मक रुख जाहिर किया।

    ऑटोमोबाइल सेक्टर की बात करें तो मारुति सुजुकी ने आने वाले वर्षों में कार बाजार के मजबूत विस्तार का अनुमान जताया है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2031 तक भारत में कार इंडस्ट्री का आकार 61 लाख से 63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। खासतौर पर छोटी कारों के बाजार में आने वाले वर्षों में तेज वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। कंपनी इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार कर रही है।

    मारुति सुजुकी की इंस्टॉल्ड प्रोडक्शन क्षमता वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक 29 लाख यूनिट तक पहुंचाने की योजना है। इसके बाद वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक इसे बढ़ाकर 36.5 लाख यूनिट करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी ने अगले पांच वर्षों के लिए अपना पूंजीगत खर्च भी बढ़ाकर 77500 करोड़ रुपए कर दिया है। भार्गव ने संकेत दिया कि कंपनी का यह बड़ा निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता और आने वाले समय में ऑटोमोबाइल बाजार में बढ़ती मांग पर भरोसे को दर्शाता है।

  • ग्वालियर व्यापार मेला में टूटा 100 साल का रिकॉर्ड: 38 दिन में 32,787 वाहन पंजीकृत, कारों ने बाइक को पछाड़ा

    ग्वालियर व्यापार मेला में टूटा 100 साल का रिकॉर्ड: 38 दिन में 32,787 वाहन पंजीकृत, कारों ने बाइक को पछाड़ा


    नई दिल्ली। ग्वालियर व्यापार मेला इस बार 100 साल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए ऑटोमोबाइल सेक्टर में नया इतिहास रच गया है। 38 दिनों तक चलने वाले मेले में कुल 32,787 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिनमें 17,736 कारें और 15,051 दोपहिया वाहन शामिल थे। पांच साल पहले जहां कारों की बिक्री करीब 7,500 थी, अब यह संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई, जो शहर की बढ़ती क्रय शक्ति और चार पहिया वाहनों की ओर रुझान को दर्शाती है।

    मेले के दौरान रोड टैक्स में 50% तक की छूट, आसान फाइनेंस सुविधा और ऑन-द-स्पॉट पंजीयन जैसे ऑफर्स ने ग्राहकों को आकर्षित किया। अंतिम दिन तक 1,351 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिससे बिक्री में निरंतर उत्साह बना रहा। हालांकि 50 लाख से 2 करोड़ रुपए तक की लग्जरी कारों की बिक्री में गिरावट देखी गई, केवल 62 कारें बिकीं।

    आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग ने बताया कि लोगों ने दोपहिया की बजाय चार पहिया वाहनों पर अधिक ध्यान दिया। वाहन डीलरों और फाइनेंस कंपनियों में रिकॉर्ड बिक्री से उत्साह देखा गया है और कोविड काल के बाद बाजार में आई सुस्ती अब पूरी तरह समाप्त होती नजर आ रही है। कुल मिलाकर, ग्वालियर व्यापार मेला ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए ऐतिहासिक और आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी का संकेत बन गया है।

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