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  • बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से टकराया पक्षी, सभी 148 यात्री सुरक्षित उतरे

    बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से टकराया पक्षी, सभी 148 यात्री सुरक्षित उतरे


    नई दिल्ली । विशाखापत्तनम से बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान IX2065 पक्षी से टकरा गई। घटना के बावजूद विमान ने अपनी यात्रा पूरी की और बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान में सवार सभी 148 यात्री सुरक्षित हैं। अधिकारियों के अनुसार, घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

    विमान के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद उसे पार्किंग स्टैंड पर ले जाया गया। निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत ग्राउंड इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने विमान की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इस जांच का उद्देश्य पक्षी से टकराने के कारण विमान के बाहरी ढांचे, इंजन या अन्य तकनीकी हिस्सों को संभावित नुकसान का पता लगाना है। जांच पूरी होने के बाद ही विमान की स्थिति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

    विमानन क्षेत्र में पक्षियों से टकराने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए सुरक्षित लैंडिंग के बाद भी तकनीकी निरीक्षण आवश्यक होता है। इस मामले में विमान ने बिना किसी अप्रिय घटना के बेंगलुरु में उतरकर अपनी यात्रा पूरी की। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित रही।

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी अन्य घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी नजर रखी जा रही है। इसी महीने फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान को सुरक्षा संबंधी अलर्ट के बाद जयपुर में उतारा गया था। उस विमान से कथित तौर पर ‘स्क्वॉक 7500’ संकेत प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में यह कोड विमान अपहरण जैसी गंभीर सुरक्षा स्थिति का संकेत देता है।

    यह अलर्ट अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मिला था। इसके बाद विमान को जयपुर में सुरक्षित उतारा गया। हालांकि, उस समय संकेत जारी होने के वास्तविक कारणों के बारे में तत्काल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई थी। दोनों घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों से संबंधित हैं, लेकिन इनके बीच विमान संचालन और सुरक्षा प्रक्रियाओं का महत्व प्रमुख रूप से सामने आता है।

    इस बीच, पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा हालात का असर भारतीय विमानन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ रहा है। कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब के प्रमुख शहरों के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित की हैं। इनमें रियाद, जेद्दा और दम्माम के साथ कुछ कंपनियों की मदीना जाने वाली उड़ानें भी शामिल हैं।

    एयर इंडिया ने रियाद, दम्माम और जेद्दा से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें 20 अक्टूबर तक रद्द रखने की घोषणा की है। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड दिया जा रहा है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी दम्माम, जेद्दा और रियाद की उड़ानों का निलंबन इसी तारीख तक बढ़ाया है। वहीं, इंडिगो ने इन तीन शहरों के अलावा मदीना की उड़ानें 24 अक्टूबर तक रद्द की हैं। अकासा एयर ने रियाद के लिए निलंबन 24 अक्टूबर और जेद्दा के लिए 21 अक्टूबर तक बढ़ाया है।

    एयरलाइंस ने कहा है कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और वे क्षेत्रीय हालात पर लगातार नजर रख रही हैं। बेंगलुरु में पक्षी से टकराने की घटना के बाद विमान की तकनीकी जांच जारी है, जबकि सभी 148 यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है।

  • : एटीएफ की बढ़ती कीमतों पर सरकार की एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बातचीत, राम मोहन नायडू बोले- सभी पक्षों से चर्चा के बाद फैसला

    : एटीएफ की बढ़ती कीमतों पर सरकार की एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बातचीत, राम मोहन नायडू बोले- सभी पक्षों से चर्चा के बाद फैसला

    नई दिल्ली । केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बढ़ी लागत को लेकर एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एटीएफ की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मंत्री का यह बयान इंडिगो की ओर से एटीएफ की बढ़ी कीमतों के कारण फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के ऐलान के बाद आया है। नायडू ने कहा कि एटीएफ की बढ़ती लागत विमानन क्षेत्र के सामने अहम मुद्दों में से एक है और सरकार इस पर संबंधित पक्षों के साथ चर्चा कर रही है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित आईएफक्यूएम सिम्पोजियम 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत में नायडू ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट एटीएफ की कीमतों पर भारी बोझ डाल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों यानी ओएमसी, दोनों के साथ बातचीत कर रही है और बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह देखा जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले नागर विमानन मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगा। मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने जा रहा है और सभी पक्षों का नजरिया समझने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

    कॉन्फ्रेंस में नायडू ने विमानन क्षेत्र को लेकर सरकार के दीर्घकालिक विजन की भी जानकारी दी। इसमें सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी एसएएफ को बढ़ावा देना, देश में कई एयरपोर्ट हब विकसित करना और घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल में एसएएफ की हिस्सेदारी को लेकर नियम बनाया है। इसके तहत 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का एक प्रतिशत हिस्सा एसएएफ से आना चाहिए। यह हिस्सेदारी 2028 तक दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

    नायडू ने बताया कि सरकार सरकारी रिफाइनरियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के साथ ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप एसएएफ के उत्पादन को लेकर बातचीत कर रही है। सरकार विमानन क्षेत्र में एसएएफ के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ इसके उत्पादन की क्षमता विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा भारत का लक्ष्य देशभर में कई एयरपोर्ट हब विकसित कर ग्लोबल एविएशन हब बनने का है। इसके लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाने की योजना है, जिसके तहत छोटे शहरों के यात्री घरेलू गेटवे के माध्यम से लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़ सकेंगे।

    एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत इंजन बनाने की क्षमता को महत्वपूर्ण मानता है और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ गतिविधियों तथा कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से होगी। उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन बनाने में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। नायडू ने कहा कि डिफेंस सेक्टर में हासिल की गई जानकारी और तकनीक आगे चलकर सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है। एटीएफ की कीमतों को लेकर सरकार की बातचीत के बीच अब संबंधित पक्षों की राय और उसके बाद मंत्रालय के फैसले पर नजर रहेगी।

  • इंडिगो ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का किराया बढ़ेगा, मंगलवार से नए शुल्क लागू होंगे

    इंडिगो ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का किराया बढ़ेगा, मंगलवार से नए शुल्क लागू होंगे


    नई दिल्ली ।
    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ाने का फैसला किया है। एयरलाइन के अनुसार, नई दरें मंगलवार से बुक होने वाली सभी उड़ानों पर लागू होंगी। इससे हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के टिकट खर्च में बढ़ोतरी होगी। फ्यूल चार्ज घरेलू उड़ानों में तय दूरी के आधार पर और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में रूट तथा क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग रखा गया है।

    एयरलाइन के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। हाल ही में एटीएफ की कीमतों में महीने-दर-महीने 14 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते एटीएफ की लागत पिछले एक दशक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। एयरलाइन ने बताया कि एविएशन टरबाइन फ्यूल उसकी परिचालन लागत का एक बड़ा हिस्सा है। इसलिए ईंधन की कीमत बढ़ने का असर एयरलाइन की लागत संरचना और नेटवर्क के संचालन पर पड़ रहा है।

    घरेलू उड़ानों के लिए 500 किलोमीटर तक की दूरी पर 375 रुपये का फ्यूल चार्ज लगाया जाएगा। 501 से 1,000 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए यह शुल्क 600 रुपये होगा। 1,001 से 1,500 किलोमीटर की दूरी वाली उड़ानों पर 900 रुपये, 1,501 से 2,000 किलोमीटर की उड़ानों पर 1,150 रुपये और 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी वाली उड़ानों पर 1,300 रुपये का फ्यूल चार्ज लिया जाएगा। इस तरह घरेलू उड़ानों के लिए शुल्क दूरी बढ़ने के साथ अलग-अलग निर्धारित किया गया है।

    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी अलग-अलग शुल्क तय किया गया है। सार्क क्षेत्र में 500 किलोमीटर तक की दूरी वाली उड़ानों पर 1,000 रुपये और 500 किलोमीटर से अधिक दूरी वाली उड़ानों पर 3,000 रुपये का फ्यूल चार्ज लगेगा। वहीं, साउथ-ईस्ट एशिया, जीसीसी, मिडिल ईस्ट और नॉर्थ व ईस्ट एशिया जाने वाली उड़ानों के लिए 5,500 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। अफ्रीका और यूरोप जाने वाली उड़ानों पर फ्यूल चार्ज 6,000 रुपये होगा।

    एयरलाइन ने कहा है कि बढ़ती ईंधन लागत की पूरी भरपाई करने के लिए फ्यूल चार्ज में इससे अधिक बढ़ोतरी की जरूरत हो सकती थी, लेकिन यात्रियों पर पड़ने वाले असर को कम रखने के लिए अपेक्षाकृत सीमित बदलाव किया गया है। एयरलाइन के अनुसार, ईंधन की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण यह शुल्क बढ़ाना जरूरी हुआ है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी बीते तीन महीनों में करीब 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में इस वृद्धि का असर एयरलाइन के परिचालन खर्च पर पड़ रहा है। नई फ्यूल चार्ज दरों के लागू होने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों के यात्रियों को टिकट बुक करते समय अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

  • फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर बढ़ी जिज्ञासा, 24 घंटे में इंटरनेट सर्च में 5000% से ज्यादा उछाल

    फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर बढ़ी जिज्ञासा, 24 घंटे में इंटरनेट सर्च में 5000% से ज्यादा उछाल

    नई दिल्ली: फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा घटना के बाद दुनिया भर में हो रही है। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में दूसरे पायलट ने कथित तौर पर उन पर हमला कर विमान को क्रैश करने की कोशिश की। इस दौरान कैप्टन स्मित मच्छार घायल हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और आरोपी पायलट से संघर्ष किया। इस कार्रवाई के चलते विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बच सकी। घटना के बाद लोग उनकी बहादुरी के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत परिचय के बारे में भी जानकारी हासिल करने में जुट गए हैं। इसका असर इंटरनेट पर होने वाली खोजों में भी दिखाई दिया।

    भारत में स्मित मच्छार का नाम तेजी से ट्रेंड करने लगा। उपलब्ध गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर मच्छार के नाम से जुड़े सर्च शब्दों में 5000 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विदेशों में लोगों की रुचि उनके धर्म से जुड़ी जानकारी जानने में दिखाई दी, जहां इससे संबंधित इंटरनेट सर्च में 3000 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि बताई गई। वहीं भारत में उनके नाम के साथ जाति से जुड़ी जानकारी जानने की कोशिश ज्यादा दिखाई दी। इस तरह विमान में हुई घटना के बाद कैप्टन की बहादुरी के साथ उनकी व्यक्तिगत पहचान को लेकर भी इंटरनेट पर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई।

    स्मित मच्छार शादीशुदा हैं या सिंगल, इसे लेकर भी इंटरनेट पर काफी खोज की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं। सोशल मीडिया पर किए गए दावों के अनुसार उनका जन्म गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के वधवान में हुआ बताया गया है। उनके परिवार का संबंध राजकोट और कच्छ-सौराष्ट्र क्षेत्र से भी बताया जाता है। इसी तरह उनके सरनेम को लेकर भी जानकारी सामने आती रही है। गुजरात में मच्छार सरनेम के लोहाना और नागर ब्राह्मण समुदायों में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस तरह की व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी को लेकर इंटरनेट पर मौजूद दावों को उसी रूप में देखा जा रहा है।

    घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को लेकर सम्मान भी सामने आया है। मुंबई में इस्राइल के महावाणिज्य दूतावास ने उनके सम्मान में एक विशेष बिलबोर्ड लगाया। मुंबई स्थित इस्राइल के महावाणिज्य दूत यानिब रेवाच ने सोशल मीडिया पर बिलबोर्ड की तस्वीर साझा की और कैप्टन की बहादुरी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत को एक नया हीरो मिला है और इस्राइल कैप्टन स्मित मच्छार का नाम कभी नहीं भूलेगा। इस घटना के बाद स्मित मच्छार की पहचान और उनके साहस से जुड़ी जानकारी को लेकर इंटरनेट पर लगातार बढ़ती दिलचस्पी दिखाई दे रही है।

  • अगस्त में घरेलू हवाई यातायात 6.34 प्रतिशत घटा, इंडिगो और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में आई कमी

    अगस्त में घरेलू हवाई यातायात 6.34 प्रतिशत घटा, इंडिगो और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में आई कमी

    नई दिल्ली ।भारत में घरेलू हवाई यात्री यातायात में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। इस महीने घरेलू एयरलाइनों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 6.34 प्रतिशत घटकर करीब 1.21 करोड़ रह गई। विमानन क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रमुख एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में भी बदलाव देखने को मिला।

    अगस्त में इंडिगो घरेलू विमानन बाजार में सबसे बड़ी एयरलाइन बनी रही, हालांकि उसकी बाजार हिस्सेदारी जुलाई के मुकाबले कम हुई। जुलाई में इंडिगो की हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 65 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद कंपनी घरेलू हवाई यातायात में सबसे आगे रही।

    अगस्त के दौरान इंडिगो से 78.87 लाख यात्रियों ने हवाई सफर किया। घरेलू बाजार में उसकी हिस्सेदारी घटने के बावजूद यात्रियों की संख्या के लिहाज से वह अन्य प्रमुख एयरलाइनों से आगे रही।

    एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी में इस दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई। जुलाई में समूह की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 26.7 प्रतिशत हो गई। अगस्त में एयर इंडिया समूह के विमानों से 32.32 लाख यात्रियों ने यात्रा की।

    अकासा एयर की बाजार हिस्सेदारी अगस्त में 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रही। एयरलाइन ने इस महीने 6.68 लाख यात्रियों को यात्रा कराई। इस तरह बाजार हिस्सेदारी के मामले में अकासा एयर ने तीसरा स्थान बरकरार रखा।

    स्पाइसजेट के प्रदर्शन में अगस्त के दौरान गिरावट देखने को मिली। जुलाई में उसकी बाजार हिस्सेदारी 1.6 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 1.2 प्रतिशत रह गई। एयरलाइन ने इस महीने करीब 1.40 लाख यात्रियों को यात्रा कराई।

    स्पाइसजेट को अगस्त में कई परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों का असर उसकी उड़ानों पर भी पड़ा और कई उड़ानों में देरी दर्ज की गई। बाजार हिस्सेदारी में कमी के बीच एयरलाइन के परिचालन प्रदर्शन पर भी निगरानी बनी रही।

    उड़ानों के समय पर संचालन के मामले में अगस्त के दौरान इंडिगो का प्रदर्शन प्रमुख एयरलाइनों में सबसे बेहतर रहा। एयरलाइन का ऑन-टाइम परफॉरमेंस 91 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद अकासा एयर का प्रदर्शन 90.5 प्रतिशत रहा।

    एयर इंडिया समूह का ऑन-टाइम परफॉरमेंस अगस्त में 83.9 प्रतिशत रहा। वहीं, अलायंस एयर का प्रदर्शन 71.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से अलग-अलग एयरलाइनों के समय पर उड़ान संचालन में अंतर का पता चलता है।

    स्पाइसजेट से जुड़ी परिचालन और वित्तीय स्थिति को लेकर भी निगरानी जारी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि विमानन नियामक डीजीसीए एयरलाइन की मौजूदा चुनौतियों के बीच उसके वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन पर करीबी नजर रख रहा है।

    मंत्री के अनुसार, डीजीसीए को एयरलाइन की परिचालन और वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइन की मौजूदा परिस्थितियों के बीच विमानन सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।

    अगस्त के आंकड़ों में जहां घरेलू हवाई यातायात में सालाना गिरावट सामने आई, वहीं एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में अलग-अलग बदलाव दर्ज हुए। इंडिगो अभी भी बाजार में सबसे आगे रही, जबकि एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी बढ़ी और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में कमी आई।

  • भारत-चीन हवाई संपर्क बहाली की दिशा में कदम, 21 सितंबर से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच रोजाना उड़ान चलेगी

    भारत-चीन हवाई संपर्क बहाली की दिशा में कदम, 21 सितंबर से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच रोजाना उड़ान चलेगी


    नई दिल्ली । 
    भारत और चीन के बीच लंबे समय से प्रभावित हवाई संपर्क अब दोबारा बहाल होने जा रहा है। चाइना सदर्न एयरलाइंस ने 21 सितंबर से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच नियमित सीधी यात्री उड़ान सेवा फिर शुरू करने का ऐलान किया है। करीब छह साल के अंतराल के बाद शुरू होने वाली यह सेवा दोनों देशों के बीच यात्रियों की आवाजाही के साथ व्यापार और पर्यटन संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे और BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर दोनों देशों के बीच गतिविधियां बढ़ी हैं। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। ऐसे समय में दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क बहाल करने का फैसला आपसी संबंधों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवाएं वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के बाद प्रभावित हुई थीं। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा तनाव के कारण भी हवाई संपर्क सामान्य नहीं हो सका। लंबे समय तक सीधी उड़ानें बंद रहने से यात्रियों को दोनों देशों के बीच यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर रहना पड़ा।

    चाइना सदर्न एयरलाइंस के मुताबिक, ग्वांगझू-नई दिल्ली मार्ग पर बोइंग 737 सीरीज के विमानों से रोजाना एक उड़ान संचालित की जाएगी। ग्वांगझू इंटरनेशनल एयरपोर्ट से विमान स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 3:35 बजे रवाना होगा और शाम 7 बजे नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेगा।

    नई दिल्ली से वापसी की उड़ान रात 8:20 बजे रवाना होगी। यह विमान अगले दिन तड़के 4:15 बजे ग्वांगझू एयरपोर्ट पर पहुंचेगा। इस तरह दोनों दिशाओं में नियमित सीधी सेवा उपलब्ध होने से भारत और चीन के बीच यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा मिलने की संभावना है।

    हवाई संपर्क बहाल होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही पर्यटन और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है। लंबे समय से बाधित सीधी उड़ान सेवा शुरू होने से यात्रियों के लिए दोनों देशों के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा आसान होगी।

    चाइना सदर्न एयरलाइंस के इस ऐलान के साथ वह दोनों देशों के बीच उड़ान सेवाएं बहाल करने वाली प्रमुख चीनी एयरलाइनों में शामिल हो गई है। इससे पहले चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस और एयर चाइना भी भारत और चीन के बीच अपनी सेवाएं बहाल कर चुकी हैं।

    भारत और चीन के बीच संबंधों में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच हवाई संपर्क की बहाली को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच रोजाना सीधी उड़ान शुरू होने से दोनों देशों के नागरिकों, कारोबारियों और पर्यटकों के लिए सीधा संपर्क फिर मजबूत होने की दिशा में कदम बढ़ेगा।

  • नोरा फतेही के ‘खिलौना विमान’ कमेंट पर विवाद गहराया, विमानन कंपनी ने 3 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा किया

    नोरा फतेही के ‘खिलौना विमान’ कमेंट पर विवाद गहराया, विमानन कंपनी ने 3 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा किया

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री और डांसर नोरा फतेही एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। इस बार मामला पिछले साल दिसंबर में मुंबई से जयपुर की यात्रा के दौरान चार्टर्ड विमान को लेकर की गई उनकी सोशल मीडिया टिप्पणी से जुड़ा है। विमानन कंपनी ड्यून्स एविएशन ने नोरा फतेही के खिलाफ गांधीनगर की अदालत में तीन करोड़ रुपये की मानहानि का सिविल मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि अभिनेत्री की टिप्पणियों से उसकी छवि और कारोबार को नुकसान पहुंचा।

    मुकदमे के मुताबिक, दिसंबर में मुंबई से जयपुर की यात्रा के दौरान नोरा फतेही ने सेसना सिटेशन CJ2 विमान के अंदर एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्होंने विमान को छोटा और खिलौने जैसा बताया था। उन्होंने विमान की तुलना लेगो से भी की थी। बाद में यह वीडियो उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया गया, जिसके बाद उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई।

    ड्यून्स एविएशन का दावा है कि नोरा फतेही के बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने के कारण उनकी टिप्पणी का कंपनी की छवि पर सीधा प्रभाव पड़ा। कंपनी के मुताबिक, अभिनेत्री की टिप्पणियों के बाद लोगों के बीच विमान को लेकर गलत धारणा बनी और इसका असर उसके कारोबार पर भी पड़ा।

    कंपनी ने अदालत में दावा किया है कि उसकी बुकिंग में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आई। इसके साथ ही रद्द होने वाली बुकिंग की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई। ड्यून्स एविएशन ने नोरा की टिप्पणियों को लापरवाह और गैरजिम्मेदार बताते हुए आरोप लगाया कि ये बातें किसी तकनीकी जानकारी, जांच या तथ्यों के आधार पर नहीं कही गई थीं।

    विमान की सुरक्षा को लेकर भी कंपनी ने अपना पक्ष अदालत के सामने रखा है। ड्यून्स एविएशन के मुताबिक जिस विमान पर नोरा ने टिप्पणी की थी, वह असुरक्षित या गैरकानूनी नहीं था। कंपनी का कहना है कि विमान निर्धारित मानकों के अनुरूप है और उड़ान के लिए पूरी तरह उपयुक्त था।

    कंपनी ने यह भी दावा किया है कि विमान नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए से प्रमाणित था और वैध एनएसओपी के तहत कानूनी रूप से संचालित किया जा रहा था। ड्यून्स एविएशन का कहना है कि नोरा की टिप्पणियों के कारण उसकी प्रतिष्ठा, गुडविल और कारोबार को गंभीर नुकसान पहुंचा।

    इस मामले में कंपनी ने नोरा फतेही से तीन करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। इसके अलावा अदालत से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो हटाने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है। कंपनी ने अभिनेत्री से सार्वजनिक रूप से सफाई देने की मांग भी की है।

    मामले की सुनवाई गांधीनगर की सीनियर सिविल जज आर. अग्रवाल की अदालत में 25 सितंबर को होगी। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और कंपनी की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इसलिए नोरा फतेही की टिप्पणी और उससे कंपनी को हुए कथित नुकसान को लेकर कानूनी स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • पायलटों के लिए सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार, सरकार ने विमानन सुरक्षा नियमों के विस्तार के संकेत दिए

    पायलटों के लिए सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार, सरकार ने विमानन सुरक्षा नियमों के विस्तार के संकेत दिए


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार देश में विमानन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सभी पायलटों के वार्षिक डोप टेस्ट को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को बताया कि वर्तमान नियमों के तहत पूरे पायलट नेटवर्क में केवल 10 प्रतिशत पायलटों का सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य है। सरकार अब इस दायरे को बढ़ाने के संभावित प्रभावों का आकलन कर रही है।

    मंत्री के अनुसार, नागर विमानन महानिदेशालय सभी पक्षकारों के साथ इस विषय पर विचार कर रहा है कि प्रत्येक पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट कराया जाए। अंतिम निर्णय से पहले प्रस्ताव के सुरक्षा संबंधी लाभों और विमानन संचालन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

    राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि नियमों में संभावित बदलाव पर चल रही चर्चा इस महीने हुई एयर इंडिया की एक उड़ान घटना की जांच से अलग है। सरकार का उद्देश्य विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है और इसके लिए मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।

    यह प्रस्ताव एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली जा रही उड़ान एआई2379 से जुड़ी घटना के बाद सामने आया है। 4 अगस्त को उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई हाइड्रोलिक प्रणाली में खराबी के कारण करीब 300 फीट कम हो गई थी। हालांकि बाद में विमान स्थिर हो गया और दिल्ली में सुरक्षित रूप से उतर गया। घटना में केबिन क्रू के सदस्यों समेत कम से कम 17 लोग घायल हुए थे।

    घटना के बाद पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आने के बाद निगरानी को लेकर चर्चा तेज हुई। इसके बाद एयर इंडिया ने अपने पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की।

    बढ़ी हुई जांच के दौरान दो अन्य पायलट शुरुआती ड्रग टेस्ट में फेल पाए गए। कन्फर्मेटरी टेस्ट के परिणाम आने तक दोनों को एहतियात के तौर पर उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया। एयरलाइन की विस्तारित जांच प्रक्रिया के तहत अब तक करीब 400 पायलटों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

    घटना से जुड़ी तकनीकी जांच भी जारी है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और अन्य प्रणालियों की जांच कर रहा है। नागर विमानन मंत्री ने संकेत दिया कि घटना को लेकर शुरुआती रिपोर्ट जल्द सामने आ सकती है। जांच के निष्कर्षों से घटना के तकनीकी और संचालन संबंधी पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी।

    इस बीच फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पायलटों की ड्रग जांच के लिए वैकल्पिक तकनीक पर विचार करने का सुझाव दिया है। संगठन ने लार या ओरल-फ्लूइड आधारित परीक्षण की संभावनाओं पर ध्यान देने की अपील की है। ऐसे तरीके कुछ देशों में इस्तेमाल किए जाते हैं और इन्हें लेकर नियामकीय स्तर पर चर्चा की जा रही है।

    वार्षिक डोप टेस्ट का दायरा बढ़ाने का निर्णय लागू होने पर पायलटों की नियमित निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। हालांकि सरकार अंतिम फैसला सुरक्षा लाभ, परिचालन प्रभाव और परीक्षण व्यवस्था की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगी। विमानन क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नियमों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    नई दिल्ली । हजारों फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में घटित एक गंभीर विमान दुर्घटना के बाद सरकार ने सभी एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू और विमान चालकों के मादक पदार्थ परीक्षण को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब आकस्मिक ड्रग टेस्ट के दायरे को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बनाई जा रही है।

    यह प्रशासनिक पहल फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2379 में हुई एक गंभीर घटना के बाद सामने आई है। उड़ान के दौरान विमान में अचानक तेज हलचल हुई और वह हवा में लगभग 300 फीट नीचे आ गया। इस हादसे में तीन शिशुओं सहित 137 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से कई लोग घायल हो गए थे। जांच के दौरान मुख्य विमान चालक के शरीर में भांग या गांजे जैसे वर्जित नशीले पदार्थ की पुष्टि हुई थी।

    विमानन सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले को देखते हुए विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की अनिवार्य जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के उड़ान परिचालन विभाग ने सभी पायलटों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्जित दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन की जांच अब शत-प्रतिशत चालकों के लिए लागू होगी। यह प्रक्रिया कंपनी की गुरुग्राम अकादमी, फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर और संबंधित एयरलाइंस कार्यालयों में संचालित की जा रही है।

    विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा सितंबर 2021 में मादक पदार्थों की जांच से संबंधित नियम जारी किए गए थे, जिन्हें जनवरी 2022 से प्रभावी रूप से लागू किया गया था। वर्तमान नियमों में औचक जांच का प्रावधान है, लेकिन हालिया सुरक्षा चूक को देखते हुए केंद्र सरकार नियमों को अधिक कठोर बनाने पर विचार कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत परीक्षणों की आवृत्ति और जांच का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया जाएगा।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन करने वाले उड़ानों में भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि क्रू सदस्यों के नियमित और आकस्मिक परीक्षण से उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और इस प्रकार की लापरवाही पर पूर्ण विराम लग सकेगा।

    विमानन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जांच की नई व्यवस्था से न केवल एयरलाइंस के अनुशासन में सुधार होगा, बल्कि उड़ानों के दौरान यात्रियों का विश्वास भी पुनः मजबूत होगा। सरकार आने वाले दिनों में इस संबंध में नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर सकती है।

  • एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट के अनिद्रा और नशीली दवा लेने की बात आई सामने।

    एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट के अनिद्रा और नशीली दवा लेने की बात आई सामने।

    नई दिल्ली । थाईलैंड के फुकेट से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के एक यात्री विमान में हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद जारी जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। हाल ही में सामने आई आंतरिक सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित उड़ान के मुख्य पायलट लंबे समय से अनिद्रा की समस्या से ग्रस्त थे और इसके निवारण के लिए नींद की गोलियों का सेवन करते थे। इस घटना के दौरान विमान हवा में अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया था, जिससे कई यात्री और क्रू सदस्य घायल हो गए थे।

    उड्डयन दुर्घटना जांच ब्यूरो अर्थात एएआईबी द्वारा इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। प्रारंभिक पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि उड़ान भरने से पूर्व और उड़ान के दौरान सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया गया था। जांच एजेंसियों द्वारा पायलट के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है, जिसमें नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े पहलुओं की भी जांच शामिल है। घटना के समय विमान में 137 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे।

    जांच अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए संबंधित पायलट ने स्वीकार किया है कि वह पारिवारिक चिकित्सक की सलाह पर दवाइयों का सेवन कर रहा था। पायलट का तर्क था कि उड़ानों के अनिश्चित समय और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण उसकी नींद का चक्र प्रभावित हुआ था। हालांकि, उड्डयन नियमों के तहत किसी भी वाणिज्यिक उड़ान को संचालित करने से पहले पायलट का पूर्ण रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है।

    रिपोर्ट में यह गंभीर तथ्य भी सामने आया है कि जिस समय विमान टर्बुलेंस की चपेट में आया, उस दौरान मुख्य पायलट कॉकपिट में अपनी निर्धारित सीट पर मौजूद नहीं था। विमान का नियंत्रण सह-पायलट के हाथों में था। इसके अतिरिक्त, उड़ान भरने से पूर्व फुकेट में चालक दल के सदस्यों के साथ हुई गतिविधियों और बैठकों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के निर्धारित मानकों के तहत इस घटना की जांच की जा रही है। विमान निर्माता कंपनी एयरबस और फ्रांस का नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो भी तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। एएआईबी ने आश्वासन दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। मध्य प्रदेश सहित देश भर के विमान यात्रियों के बीच इस घटना के बाद उड्डयन सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

    विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है। इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा एयरलाइंस कंपनियों और उनके क्रू मेंबर्स के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए जाने की संभावना है। फिलहाल मामले से जुड़ी सभी तकनीकी और मेडिकल जांच रिपोर्टों की अंतिम समीक्षा की जा रही है।