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  • अतीक कांड जैसी घटना का हवाला देते हुए जान से मारने की चेतावनी दी गई..

    अतीक कांड जैसी घटना का हवाला देते हुए जान से मारने की चेतावनी दी गई..


    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जान से मारने की गंभीर धमकियां मिलने से धार्मिक और सुरक्षा हलकों में तनाव बढ़ गया है। ज्योतिष्पीठ के प्रमुख को सीधे तौर पर अतीक अहमद कांड जैसा खतरनाक अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। इन धमकियों ने न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को सवालों के घेरे में ला दिया है, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था को भी पूरी तरह सतर्क कर दिया है।

    घटना की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 को हुई जब शंकराचार्य के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर लगातार धमकी भरे संदेश भेजे गए। इन संदेशों में अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें माफिया अतीक अहमद के समान परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। नंबर ब्लॉक करने के बावजूद आरोपी ने 6 अप्रैल को दो वॉइस मैसेज भेजे, जिनमें हिंसक लहजे में उनकी हत्या की धमकी दी गई। पहला संदेश दोपहर 1:55 बजे और दूसरा 1:57 बजे प्राप्त हुआ। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी ने इसे गंभीर हमला करार देते हुए जल्द ही विधिक कार्रवाई और पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही।

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हाल ही में माघ मेले के दौरान प्रशासन के साथ विवाद में भी चर्चा में रहे। संगम स्नान के दौरान उनके काफिले और प्रशासन के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद पदवी के उपयोग पर नोटिस जारी किया गया। इसके साथ ही आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा उनके आश्रमों में नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए, जिसके आधार पर POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई। हालांकि, उच्च न्यायालय ने शंकराचार्य को अग्रिम जमानत दे दी। समर्थकों का मानना है कि यह सब उनके ‘गौ माता-राष्ट्रमाता’ अभियान और हिंदू हितों की आवाज को दबाने की साजिश है।

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जीवन संघर्षपूर्ण और प्रेरक रहा है। उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की उपाधि प्राप्त की और छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे। 1994 में वे छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए और 2003 में दंड संन्यास की दीक्षा ली। राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा की शास्त्रीय विधि और सरकारी नीतियों पर उनके बेबाक बयानों के कारण वे अक्सर चर्चा में रहते हैं।

    इस विवाद में आशुतोष ब्रह्मचारी भी प्रमुख भूमिका में हैं, जो शंकराचार्य के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हाल ही में उन्हें भी धमकी मिली, जो जांच में पाकिस्तान से संबंधित पाई गई। शंकराचार्य को दी गई धमकी में ‘अतीक कांड’ का हवाला है, जो 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की सार्वजनिक हत्या से जुड़ा था। उस समय भारी पुलिस सुरक्षा और लाइव कैमरों के सामने हमलावरों ने उन्हें गोलियों से भून दिया था।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान से नहीं…. वाहन से जाने से रोका,,,प्रशासन ने दी सफाई

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान से नहीं…. वाहन से जाने से रोका,,,प्रशासन ने दी सफाई


    प्रयागराज।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रयागराज (Prayagraj) में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwaranand) को संगम जाने से रोके जाने को लेकर अब प्रशासन ने सफाई दी है। मेला प्राधिकरण के आईसीसीसी सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में अफसरों ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से नहीं रोका गया था, यह भ्रम फैलाया जा रहा है। उनसे वाहन से उतरकर स्नान के लिए पैदल जाने का अनुरोध किया गया था। तीन घंटे तक लगातार आग्रह करने के बाद भी वह अपनी जिद पर अड़े रहे। बिना अनुमति के मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) जैसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व की व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास किया।

    मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि मौनी अमावस्या से एक दिन पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दो वाहनों की अनुमति मांगी थी लेकिन मेला प्रशासन ने अत्यधिक भीड़ व सुरक्षा का हवाला देते हुए मना कर दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम नोज के करीब तक पहुंच गए। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि पीपा पुल नंबर दो को एक दिन पहले से बंद रखा गया था। एएसपी कल्पवासी थाना प्रभारी ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने बैरिकेड तोड़ दिया। सीसीटीवी फुटेज के साक्ष्य के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। साधु-संतों की पिटाई के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी जांच कराई जाएगी।

    मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि मौनी स्नान पर्व पर किसी तरह के वाहन का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई थी। वहीं, डीएम मनीष वर्मा ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा प्राथमिकता थी। इसी कड़ी में अविमुक्तेश्वरानंद को वाहन लेकर संगम नोज तक जाने से रोका गया था। ताकि किसी तरह की भगदड़ की स्थिति उत्पन्न न हो सके।


    शंकराचार्य का प्रोटोकॉल देने पर है रोक: मेलाधिकारी

    मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्तूबर 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के तहत प्रोटोकॉल देने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मेला में उन्हें शंकराचार्य ज्योतिषपीठ नहीं बल्कि बद्रिका आश्रम सेवा शिविर के नाम पर जमीन आवंटित की गई है। प्रेसवार्ता के दौरान अफसर अविमुक्तेश्वरानंद को स्वामी के नाम से ही संबोधित करते रहे।