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  • नवरात्र व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? फलाहार से लेकर मसालों तक, यहां देखें पूरी लिस्ट

    नवरात्र व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? फलाहार से लेकर मसालों तक, यहां देखें पूरी लिस्ट


    नई दिल्‍ली । शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के साथ व्रत रखने की परंपरा है। इस दौरान कुछ श्रद्धालु नौ दिनों तक फलाहार करते हैं, तो कुछ पहले और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। व्रत रखने वालों के लिए खानपान के कुछ पारंपरिक नियम भी बताए गए हैं, जिनमें अनाज, दालों, नमक और मसालों से जुड़े परहेज शामिल हैं। आइए जानते हैं कि नवरात्र के दौरान क्या खा सकते हैं और किन चीजों से बचने की परंपरा है।

    नवरात्र व्रत में क्या खा सकते हैं?

    नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और व्रत के नियमों के अनुसार फल, दूध, मेवे और कुछ खास अनाजों से बने व्यंजन खा सकते हैं।

    1. कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा का आटा

    व्रत में गेहूं के आटे की जगह कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा के आटे का इस्तेमाल किया जाता है। इनसे पूरी, पराठे और अन्य फलाहारी व्यंजन बनाए जा सकते हैं।

    2. साबूदाना और समा के चावल

    साबूदाने की खिचड़ी, खीर और वड़े के अलावा समा के चावल से बनी खिचड़ी भी व्रत में खाई जाती है। इन्हें फलाहार के लोकप्रिय विकल्पों में गिना जाता है।

    3. व्रत में खाई जाने वाली सब्जियां

    कद्दू, लौकी, खीरा, आलू, अरबी, रतालू, गाजर और शकरकंद का सेवन किया जा सकता है। टमाटर और अदरक का इस्तेमाल भी कई घरों में व्रत के भोजन में किया जाता है।

    4. दूध और दूध से बने पदार्थ

    व्रत के दौरान दूध, दही, पनीर, मावा, छाछ, लस्सी, मक्खन और देसी घी का सेवन किया जा सकता है। इनका इस्तेमाल फलाहारी व्यंजन तैयार करने में भी होता है।

    5. मौसमी फल

    सेब, केला, अनार, पपीता और संतरा जैसे फल व्रत के लिए अच्छे विकल्प हैं। फल खाने से शरीर को ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।

    6. सूखे मेवे और मखाना

    किशमिश, बादाम, काजू, अखरोट, मखाना और मूंगफली को व्रत के भोजन में शामिल किया जा सकता है। इन्हें सीधे खाने के अलावा खीर और दूसरे फलाहारी व्यंजनों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

    7. सेंधा नमक और चुनिंदा मसाले

    व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। काली मिर्च, जीरा, हरी मिर्च, हरा धनिया और छोटी इलायची जैसे मसाले कई परंपराओं में स्वीकार्य हैं।

    नवरात्र व्रत में किन चीजों से बचना चाहिए?

    व्रत के पारंपरिक नियमों के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनके नियम कुछ भिन्न हो सकते हैं।

    1. गेहूं, चावल और अन्य सामान्य अनाज

    व्रत के दौरान गेहूं, सामान्य चावल, सूजी, मैदा, जई और बेसन से बने व्यंजन नहीं खाए जाते। इनके स्थान पर व्रत में मान्य आटे और समा के चावल का उपयोग किया जाता है।

    2. दालें और दालों से बने खाद्य पदार्थ

    चना, अरहर, मूंग, मसूर और अन्य दालों का सेवन पारंपरिक नवरात्र व्रत में नहीं किया जाता। बेसन से बनी चीजों से भी परहेज रखा जाता है।

    3. सामान्य नमक और कुछ मसाले

    व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है। कई परिवार हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, धनिया पाउडर, हींग और राई का उपयोग भी नहीं करते।

    4. प्याज और लहसुन

    नवरात्र के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। इसी वजह से प्याज और लहसुन से परहेज किया जाता है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक इनका सेवन नहीं करते।

    5. पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड

    बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले जूस, प्रोसेस्ड स्नैक्स और सॉस या केचप से परहेज करना उचित माना जाता है। पैकेट पर लिखी सामग्री जांचना जरूरी है, क्योंकि कुछ उत्पादों में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो व्रत के नियमों के अनुकूल न हों।

    6. मांसाहार और शराब

    नवरात्र के दौरान पारंपरिक रूप से मांस, मछली, अंडे और शराब का सेवन नहीं किया जाता। श्रद्धालु इन दिनों सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाते हैं।

    व्रत रखते समय इन बातों का भी रखें ध्यान
    अपनी परंपरा और व्रत के संकल्प के अनुसार ही भोजन चुनें।
    लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय व्रत में मान्य फल, दूध और अन्य खाद्य पदार्थ उचित मात्रा में लें।
    पर्याप्त पानी पिएं, विशेषकर तब जब आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे हों।
    मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग लंबे उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और परिवारों में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं। इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में लें।

  • PM मोदी की देशवासियों से अपील… बोले- एक साल तक सोना खरीदने से बचें….

    PM मोदी की देशवासियों से अपील… बोले- एक साल तक सोना खरीदने से बचें….


    नई दिल्ली।
    पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को देशवासियों से 1 साल तक सोना ना खरीदने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने लोगों से विदेश यात्रा (Foreign travel) को आगे बढ़ाने की भी बात कही। प्रधानमंत्री ने यह अपील ऐसे समय में की है जब युद्ध की वजह से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पीएम मोदी की इस अपील के पीछे की वजह फॉरेन एक्सचेंज (foreign exchange) की बचत को माना जा रहा है।

    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) की वजह से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें सातवें आसमान पर हैं। साथ पूरी सप्लाई चेन तहस-नहस हो गई है। जिससे भारत जैसे आयात करने वाले देश अधिक प्रभावित हुए हैं। बता दें, पीएम मोदी अपनी अपील के जरिए फॉरेन एक्सचेंज आउटफ्लो को कम करना चाहते हैं।

    पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी अपील को देशभक्ति के साथ जोड़ा है। उन्होंने तेल की बचत करने का भी आग्रह किया है। पीएम ने लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम सिस्टम, नेचुरल फार्मिंग और स्वदेशी प्रोडक्ट्स का उपयोग करने की सलाह दी है।


    क्यों है गोल्ड का आयात इतना महत्वपूर्ण? (Why Gold matters)

    भारत दुनिया का सबसे अधिक गोल्ड आयात करने वाले देशों में से एक है। भारत का घरेलू मांग विदेशी आयात पर निर्भर करता है। क्योंकि भारत से खरीदे गए गोल्ड के लिए डॉलर में भुगतान करना होता है इसलिए यह भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त दबाव बनाता है। इससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है। फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व लगातार घटता है।

    यह चिंता मौजूदा परिस्थितियों में और बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल इंपोर्ट करता है। ऐसे में कच्चे तेल का बढ़ता रेट भी अतिरिक्त दबाव बना रहा है। बता दें, तेल और खाद के खर्च की वजह से डॉलर की निकासी पर दबाव बढ़ रहा है।

    ऐसे में अगर देश कम सोना खरीदता है तो वह रुपये की सेहत के लिए भी अच्छा रहेगा। वहीं, इससे ट्रेड बैलेंस भी बेहतर होगा।


    भारत का फॉरेक्स रिजर्व मजबूत (India forex reserves)

    फॉरेक्स रिजर्व के मोर्चे पर अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत का फॉरेक्स रिजर्व 691.11 अरब डॉलर है। जोकि 11 महीने के इंपोर्ट के लिए काफी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड का शेयर मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गया है। सितंबर 2025 तक यह 13.92 प्रतिशत था।