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  • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की 72 साल की कहानी, सत्यजीत रे के 36 सम्मान से शबाना आजमी के रिकॉर्ड तक

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की 72 साल की कहानी, सत्यजीत रे के 36 सम्मान से शबाना आजमी के रिकॉर्ड तक

    नई दिल्ली ।राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सबसे महत्वपूर्ण सम्मानों में शामिल हैं। 1954 में शुरू हुई इस पुरस्कार व्यवस्था ने सात दशकों से अधिक समय में फिल्मों, कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी विशेषज्ञों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी है। 22 सितंबर 2026 को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन गुजरात के एकता नगर में हो रहा है। यह पहली बार है जब यह समारोह दिल्ली से बाहर आयोजित किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। उस समय 1953 में रिलीज हुई फिल्मों को सम्मान के लिए चुना गया था। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री बीवी केसकर थे। शुरुआत में इन पुरस्कारों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नहीं, बल्कि स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म के नाम से जाना जाता था।

    इससे पहले 1949 में भारत सरकार ने फिल्म जांच समिति का गठन किया था। समिति का उद्देश्य भारतीय फिल्म उद्योग की स्थिति, फिल्मों की गुणवत्ता और उनके सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव का अध्ययन करना था। समिति की सिफारिशों के बाद फिल्मों को सरकारी स्तर पर सम्मान देने की व्यवस्था शुरू की गई।

    शुरुआती दौर में पुरस्कार मुख्य रूप से फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और बच्चों की फिल्मों पर केंद्रित थे। उस समय कलाकारों के लिए अलग-अलग पुरस्कार नहीं दिए जाते थे। शुरुआत से ही अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्मों को इसमें जगह देने की नीति अपनाई गई। यही व्यवस्था आगे चलकर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की प्रमुख विशेषता बनी।

    पहला पुरस्कार समारोह 10 अक्टूबर 1954 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ था। सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान मराठी फिल्म श्यामची आई को मिला था। सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म का पुरस्कार महाबलीपुरम को दिया गया। दो बीघा जमीन और भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य को भी ऑल इंडिया सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया था। बच्चों की फिल्म खेला घर को भी सम्मान मिला था।

    कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग पुरस्कारों की शुरुआत 1967 में रिलीज फिल्मों के लिए हुई और 1968 में विजेताओं को सम्मानित किया गया। उत्तम कुमार पहले सर्वश्रेष्ठ अभिनेता बने, जबकि नरगिस दत्त पहली सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुनी गईं। उस समय इन पुरस्कारों को भारत अवॉर्ड और उर्वशी अवॉर्ड कहा जाता था।

    1969 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार शुरू हुआ और देविका रानी इसकी पहली प्राप्तकर्ता बनीं। 1973 से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रशासन की जिम्मेदारी डायरेक्टरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल ने संभाली। 2022 में इसके पुनर्गठन के दौरान इसका राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम में विलय कर दिया गया।

    समय के साथ पुरस्कारों का दायरा भी बढ़ता गया। सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, संगीत, प्लेबैक सिंगिंग, स्क्रीनप्ले, कॉस्ट्यूम, मेकअप, साउंड, कोरियोग्राफी, स्टंट और विजुअल इफेक्ट्स जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया।

    अभिनय की श्रेणी में शबाना आजमी ने पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतकर रिकॉर्ड बनाया है। उन्हें अंकुर, अर्थ, खंडहर, पार और गॉडमदर के लिए सम्मान मिला। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में अमिताभ बच्चन ने चार पुरस्कार जीते हैं, जबकि ममूटी ने ब्रमायुगम के लिए अपना चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया।

    प्लेबैक गायन में के. जे. येसुदास के नाम आठ राष्ट्रीय पुरस्कार हैं। संगीतकार ए. आर. रहमान ने सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते हैं। महान फिल्मकार सत्यजीत रे के नाम भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 36 सम्मानों का उल्लेख किया जाता है। उनके योगदान ने भारतीय सिनेमा को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अलग पहचान दिलाई।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का उद्देश्य केवल फिल्मों को सम्मान देना नहीं रहा है। इनका लक्ष्य कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता वाली फिल्मों को प्रोत्साहित करना तथा भारत की विविध संस्कृतियों और भाषाओं को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना भी रहा है।

  • दिल्ली नहीं, गुजरात केवड़िया में होगा 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह, उद्धव ठाकरे ने केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल

    दिल्ली नहीं, गुजरात केवड़िया में होगा 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह, उद्धव ठाकरे ने केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन दिल्ली से गुजरात के केवड़िया ले जाने के फैसले को लेकर सियासत गरमा गई है। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक तरह की दीवार खड़ी करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, पार्टी सांसद संजय राउत ने भी समारोह को लेकर सवाल उठाते हुए कलाकारों से इसके बहिष्कार की अपील की है।

    उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का स्थान बदले जाने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह के राष्ट्रीय कार्यक्रम मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू और देश के दूसरे राज्यों की राजधानियों में क्यों नहीं आयोजित किए जा सकते। उन्होंने कहा कि गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच दीवार बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है, इसका जवाब भारतीय जनता पार्टी से मांगा जाना चाहिए।

    उद्धव ठाकरे के बाद सांसद संजय राउत ने भी इस फैसले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल गुजरात के प्रधानमंत्री हैं। राउत ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश का राष्ट्रीय कार्यक्रम है और ऐसे में लोगों की स्वाभाविक उम्मीद होगी कि इसका आयोजन देश की राजधानी में किया जाए।

    संजय राउत ने समारोह को गुजरात ले जाने के फैसले पर सवाल करते हुए पूछा कि क्या यह वाइब्रेंट गुजरात का कार्यक्रम है। उन्होंने इस विचार के पीछे के लोगों के लिए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ तक कहा।

    राउत ने दावा किया कि गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का स्थान बदला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से देश की राजधानी और राष्ट्रीय पुरस्कारों की अहमियत कम करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कलाकारों से गुजरात नहीं जाने की अपील करते हुए कहा कि देश पर गर्व करने वाले कलाकार पुरस्कार लेने से इनकार कर दें।

    अधिकारियों के अनुसार, 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह अब दिल्ली के बजाय गुजरात के केवड़िया में आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को समारोह में विजेताओं को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। समारोह का स्थान बदलने के फैसले ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है और विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

    केवड़िया, जिसे अब एकता नगर के नाम से जाना जाता है, गुजरात के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थित है, जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के नाम से जाना जाता है। प्रतिमा की ऊंचाई 597 फीट है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में इसका उद्घाटन किया था।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी। पहली बार पुरस्कार समारोह दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था। इसके बाद ज्यादातर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह विज्ञान भवन में ही होते रहे हैं। हालांकि, यह परंपरा पूरी तरह दिल्ली तक सीमित नहीं रही है। कुछ मौकों पर समारोह देश के दूसरे शहरों में भी आयोजित किए गए हैं। वर्ष 1971 में 17वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह चेन्नई में आयोजित किया गया था।

  • सलमान खान मिले हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप से, रेड सी फिल्म फेस्टिवल 2025 में बने अवॉर्ड प्रेजेंटर; आलिया भट्ट भी हुईं शामिल

    सलमान खान मिले हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप से, रेड सी फिल्म फेस्टिवल 2025 में बने अवॉर्ड प्रेजेंटर; आलिया भट्ट भी हुईं शामिल


    नई दिल्ली/बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान गुरुवार को सऊदी अरब के जेद्दाह में आयोजित रेड सी फिल्म फेस्टिवल 2025 का हिस्सा बने। यह फेस्टिवल 4 दिसंबर से 13 दिसंबर तक चल रहा है और इसमें दुनिया की कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं। इस मौके पर सलमान ने हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप से भी मुलाकात की, जो उनके लिए बेहद खास रहा।रेड सी फिल्म फेस्टिवल के ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज पर सलमान और जॉनी की रेड कार्पेट पर हुई मुलाकात की तस्वीरें साझा की गईं। तस्वीरों में दोनों ही सितारे कैमरे के लिए पोज़ देते और आपसी बॉन्डिंग दिखाते नजर आए।

    सलमान खान ने इस फेस्टिवल में अवॉर्ड प्रेजेंटर के रूप में भी हिस्सा लिया। मंच पर आते ही उन्होंने दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा-मैं यहां आकर बेहद खुश हूं। रेड सी फिल्म फेस्टिवल में शामिल होना मेरे लिए एक सौभाग्य की बात है। एक टैलेंटेड एक्टर को अवॉर्ड देना सम्मान की बात है।इस दौरान सलमान ने हॉलीवुड अभिनेता और रैपर इद्रिस एल्बा को रेड सी ऑननेरी अवॉर्ड प्रेजेंट किया। अवॉर्ड लेते हुए इद्रिस एल्बा ने कहा कि यह उनके द्वारा अटेंड किया गया सबसे बेहतरीन फिल्म फेस्टिवल है। उन्होंने कहा- यह फेस्टिवल दुनिया को रिप्रेजेंट करता है और इसे अटेंड करना मेरे लिए बहुत खास अनुभव है।

    रेड सी फिल्म फेस्टिवल 2025 में बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां भी शामिल हुईं। इनमें आलिया भट्ट, ऐश्वर्या राय, रेखा और कार्तिक आर्यन शामिल थे। फेस्टिवल के दौरान सितारों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी उपलब्धियों और ग्लोबल सिनेमा के महत्व पर चर्चा की।सलमान खान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स भारतीय सिनेमा के लिए गर्व की बात हैं। उन्होंने कहा-यह मंच हमें वैश्विक स्तर पर अपनी फिल्मों और कलाकारों को पेश करने का मौका देता है। हॉलीवुड और बॉलीवुड कलाकारों के साथ इस तरह का संवाद बेहद उत्साहजनक है।

    सलमान की इस मुलाकात और फेस्टिवल में उनकी उपस्थिति को उनके फैंस ने सोशल मीडिया पर काफी सराहा। रेड कार्पेट पर सलमान का स्टाइल और जॉनी डेप के साथ उनका बॉन्ड कैमरे में कैद हुआ, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।इस फेस्टिवल का उद्देश्य दुनियाभर की फिल्मों और कलाकारों को एक ही मंच पर लाना है। इसके जरिए फिल्म मेकर, अभिनेता और अन्य फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग अपनी रचनात्मकता और विचार साझा करते हैं। इस वर्ष के फेस्टिवल में अवॉर्ड्स के अलावा पैनल डिस्कशन, स्क्रीनिंग्स और वर्कशॉप्स का आयोजन भी किया गया। सलमान खान की इस फेस्टिवल में उपस्थिति से यह साबित हुआ कि बॉलीवुड सितारे अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म इंडस्ट्री में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके साथ आलिया भट्ट और ऐश्वर्या राय जैसी स्टार्स का भी होना इसे और खास बनाता है। रेड सी फिल्म फेस्टिवल 2025 में सलमान खान और हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप की मुलाकात, इद्रिस एल्बा को अवॉर्ड देना और बॉलीवुड की स्टार्स की उपस्थिति ने इसे ग्लोबल सिनेमा के लिए एक यादगार इवेंट बना दिया।