Tag: Ayatollah Khamenei

  • खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, परमाणु हथियार पर दोहराया अमेरिकी रुख

    खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, परमाणु हथियार पर दोहराया अमेरिकी रुख


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका समझौते का रास्ता चाहता है, लेकिन यदि हालात बने तो निर्णायक कार्रवाई करने में भी देर नहीं करेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में अपने हितों की रक्षा करेगा। उनके अनुसार, पहला विकल्प समझौता है, लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं होती तो अमेरिका अपने उद्देश्य पूरे करने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि वह बड़े पैमाने पर जनहानि नहीं चाहते, इसलिए कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं।

    परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया अमेरिकी रुख

    ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता न बचे।

    उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में तेल की कीमतें युद्ध के दौरान बढ़े स्तर से नीचे आ चुकी हैं और अमेरिका चाहता है कि ईरान किसी भी संभावित समझौते की शर्तों का पालन करे।

    सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता अमेरिका

    ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना नहीं है। उनका कहना था कि अमेरिका की प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है।

    युद्धविराम के बाद भी जारी है बयानबाजी

    हालांकि हाल के संघर्ष के बाद दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन बयानबाजी लगातार जारी है। ट्रंप पहले भी कई बार ईरान को लेकर कड़े बयान दे चुके हैं और राजनयिक समाधान के साथ-साथ सैन्य विकल्प खुले होने की बात कह चुके हैं।

    ईरान ने दिया कड़ा जवाब

    ट्रंप के बयान पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या से उसके विचार समाप्त नहीं होते। दूतावास ने अमेरिका पर ईरान के इतिहास और संस्कृति को न समझने का आरोप लगाया और कहा कि दबाव की राजनीति से उसके सिद्धांत नहीं बदलेंगे।

    दोनों देशों के बीच जारी यह तीखी बयानबाजी संकेत देती है कि युद्धविराम के बावजूद रिश्तों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्रीय घटनाक्रम इस संबंध की दिशा तय करेंगे।

  • ईरान तैयार नागरिक इलाकों पर हमलों की जांच में सहयोग देने को, अराघची ने कहा वैध सैन्य कार्रवाई

    ईरान तैयार नागरिक इलाकों पर हमलों की जांच में सहयोग देने को, अराघची ने कहा वैध सैन्य कार्रवाई


    नई दिल्ली । तेहरान ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच स्पष्ट किया है कि वह नागरिक क्षेत्रों पर हमलों से जुड़े आरोपों की जांच में सहयोग करने को तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघचीने कहा कि उनकी सरकार किसी भी स्वतंत्र जांच का समर्थन करेगी और यह साबित करने को तैयार है कि ईरानी सैन्य कार्रवाई केवल वैध सैन्य लक्ष्यों के खिलाफ है।

    अराघची ने अल अरबी अल जदीद वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में कहा कि ईरान ने जानबूझकर किसी भी आवासीय या नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया है। यदि किसी घटना में नागरिकों को नुकसान हुआ है तो तथ्यों की निष्पक्ष जांच होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के कुछ ठिकानों पर हाल में हुए हमले पड़ोसी देशों से किए गए थे और जवाबी कार्रवाई करते समय कोशिश होगी कि आबादी वाले क्षेत्रों को नुकसान न पहुंचे।

    हाल के दिनों में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमलों के बाद मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार संघर्ष बढ़ने से मध्य पूर्व की सुरक्षा वैश्विक ऊर्जा बाजार और मानवीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी क्षेत्रीय पहल का स्वागत करेगा जिससे युद्ध का न्यायसंगत अंत हो सके हालांकि अब तक कोई ठोस प्रस्ताव “मेज पर” नहीं आया है।

    इसके अलावा ईरानी अधिकारियों ने कहा कि हाल के इजरायली हमले में अयातुल्ला अली खामेनेईघायल हुए थे लेकिन उनकी चोट जानलेवा नहीं है। खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति और स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें फैल रही थीं। उनका पहला सार्वजनिक संबोधन 12 मार्च को सरकारी मीडिया द्वारा प्रसारित किया गया जिसमें उद्घोषक ने उनका संदेश पढ़ा।ईरान की यह पेशकश क्षेत्रीय तनाव कम करने और युद्ध अपराध की संभावित जांच में सहयोग देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

  • Iran के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की पत्नी की भी मौत.. US-इजराइली हमलें हो गई थीं घायल

    Iran के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की पत्नी की भी मौत.. US-इजराइली हमलें हो गई थीं घायल


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei) की पत्नी, मंसूरेह खोजस्तेह बाघेरजादेह की मौत हो गई है। खबर है कि US-इजराइली हमलों में लगी चोटों की वजह से उनकी मौत हो गई। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर (Government Broadcaster) प्रेस टीवी ने सोमवार को कहा कि हमले के बाद वह ‘शहीद हो गईं’ खामेनेई खुद शनिवार को अमेरिका और इजराइल के हमलों में मारे गए थे। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि खोजस्तेह भी उन्हीं हमलों में घायल हो गई थीं और बाद में उनकी चोटों की वजह से मौत हो गई।

    ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि अयातुल्ला खामेनेई हमलों के शुरुआती दौर में ही मारे गए। US और इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि ये हमले स्ट्रेटेजिक मिलिट्री और सिक्योरिटी टारगेट पर किए गए थे। इसकी पुष्टि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के धर्मगुरु की मौत की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जो सरकार बदलने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा था।


    सुप्रीम लीडर के परिवार में हुई मौतों की पहले ही पुष्टि कर दी थी

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि खामेनेई के कई रिश्तेदार, जिनमें उनकी बेटी, दामाद और उनकी पोती शामिल हैं, उन्हीं हमलों में मारे गए। रॉयटर्स ने यंग जर्नलिस्ट्स क्लब के ज़रिए तेहरान सिटी काउंसिल के एक सदस्य का ज़िक्र किया, जिन्होंने हमलों के बाद सुप्रीम लीडर के परिवार में हुई मौतों की पहले ही पुष्टि कर दी थी।

    सुप्रीम लीडर के परिवार के सदस्यों की मौत से तेहरान की लीडरशिप पर अंदरूनी दबाव बढ़ने और पूरे इलाके में तनाव और बढ़ने की उम्मीद है। ईरानी अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि देश पर किसी भी हमले का बदला लिया जाएगा।


    सीनियर मौलवी अयातुल्ला अराफी अंतरिम सुप्रीम लीडर के तौर पर काम करेंगे

    सरकार से जुड़ी IRNA न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, अली खामेनेई की हत्या के बाद सीनियर मौलवी अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर के तौर पर काम करेंगे। अराफी को टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल का ज्यूरिस्ट मेंबर बनाया गया है, जिसे ईरान के कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोसेस के तहत परमानेंट उत्तराधिकारी चुने जाने तक ट्रांज़िशन के दौरान सुप्रीम लीडर की शक्तियों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा गया है।

    ईरान के संवैधानिक ढांचे के तहत, अंतरिम लीडरशिप काउंसिल में प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन, चीफ जस्टिस गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई और गार्डियन काउंसिल के एक मौलवी शामिल हैं। यह तीन सदस्यों वाली बॉडी मिलकर सुप्रीम लीडर की शक्तियों का इस्तेमाल करेगी और खामेनेई की मौत के बाद बदलाव के समय में देश के मामलों की देखरेख करेगी, जब तक कि कोई परमानेंट उत्तराधिकारी नहीं चुना जाता।

  • खामेनेई के निधन पर भारत के इस गांव में तीन दिन का शोक, पूरे गांव में बंद रहा व्यापार

    खामेनेई के निधन पर भारत के इस गांव में तीन दिन का शोक, पूरे गांव में बंद रहा व्यापार


    नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के अलीपुर गांव में तीन दिन का अनौपचारिक शोक मनाया गया। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य और उनके 40 से अधिक अधिकारी मारे गए। इस घटना के बाद ईरान ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए।

    मिनी ईरान में शोक की लहर

    अलीपुर जिसे लंबे समय से मिनी ईरान कहा जाता है शिया मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। रविवार को खामेनेई की मृत्यु की खबर की पुष्टि होते ही पूरा गांव थम गया। स्थानीय निवासियों ने स्वेच्छा से तीन दिन के लिए दुकानें और व्यवसाय बंद रखे। सुबह से ही सड़क किनारे ठेले और बाजार बंद रहे लोग समूहों में इकट्ठा हुए और खामेनेई के चित्र के साथ धार्मिक नारे लगाए।

    विरोध जुलूस और शोक प्रदर्शन

    दो दिन के शोक के बाद अंजुमन-ए-जाफरिया कमेटी के नेतृत्व में विरोध जुलूस निकाला गया। लगभग पूरे गांव ने इसमें भाग लिया। कई लोग काले वस्त्र पहनकर खामेनेई के प्रति सम्मान और शोक व्यक्त कर रहे थे।

    ईरान से ऐतिहासिक और व्यक्तिगत संबंध

    अलीपुर गांव का ईरान से जुड़ाव केवल धार्मिक नहीं बल्कि शैक्षिक और व्यापारिक भी रहा है। गांव का मूल नाम बेल्लिकुंटे था। बीजापुर आदिलशाहियों के समय शिया मुस्लिमों का एक समूह यहां बस गया और इसे अलीपुर नाम दिया गया। अधिकांश निवासी आज भी व्यापार और शिक्षा के लिए ईरान और अरब देशों से जुड़े हैं।

    खामेनेई का इस गांव से व्यक्तिगत संबंध 1986 से जुड़ा है जब वह ईरान के राष्ट्रपति के रूप में अलीपुर आए और एक स्थानीय अस्पताल का उद्घाटन किया। स्थानीय निवासी शफीक ने बताया उनका दौरा हमारे आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने वाला था। हमारा जुड़ाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि आस्था और धार्मिक मार्गदर्शन से भी जुड़ा है।

    स्थानीय धर्मगुरुओं का बयान

    गांव के धर्मगुरु मौलाना सैयद इब्राहिम ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह हमला बिना उकसावे के और अत्यंत निंदनीय था। उनका कहना था कि दुर्भाग्य है कि कई इस्लामी देश इस हमले पर मूक दर्शक बने हुए हैं।