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  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक अयोध्या की मणिरामदास छावनी में चल रही है। बैठक में ट्रस्ट के लिए तीन नए सदस्यों की घोषणा की गई है। इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं। बैठक में अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती सहित अन्य ट्रस्टी मौजूद हैं।

    राम मंदिर के पहले CEO के नाम पर अंतिम मंथन
    बैठक का सबसे अहम एजेंडा राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप चुकी है। बताया जा रहा है कि कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा है। अब ट्रस्ट इन नामों पर चर्चा कर अंतिम नाम तय कर सकता है। बैठक के दूसरे चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।

    पूर्व IPS राजेश पांडेय की दावेदारी सबसे मजबूत बताई जा रही
    CEO पद की चर्चा में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उनकी दावेदारी की खास वजह सिर्फ पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भी हैं। इस वजह से उन्हें मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का प्रत्यक्ष अनुभव भी हासिल है। राम मंदिर CEO के लिए यह अनुभव उनकी प्रोफाइल को अलग महत्व देता है।

    CEO के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
    राम मंदिर CEO की भूमिका केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, VIP और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां भी CEO के सामने रहेंगी।

    इसी वजह से सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जटिलताओं का अनुभव रखने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला ट्रस्ट को ही करना है।

    बैठक में ये प्रमुख ट्रस्टी और आमंत्रित सदस्य मौजूद
    1. महंत नृत्य गोपाल दास
    2. कमलनयन दास
    3. स्वामी गोविंद देव गिरी
    4. डॉ. कृष्ण मोहन
    5. दिनेंद्र दास जी महाराज
    6. दिनेश चंद्र जी
    7. बजरंग बांगड़ा
    8. जगदीश आफले
    9. राज गोपाल मिनियार
    10. समीर पांडा

    ट्रस्ट डीड और नियमावली में संशोधन पर भी चर्चा
    CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की डीड और न्यास नियमावली में संशोधन सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। बैठक दोपहर 3 बजे ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होनी है। अधिकांश ट्रस्टी अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने रामलला के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दोनों ने मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद बैठक की तैयारियों में हिस्सा लिया।

    चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर भी नजर
    बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी निर्णय अहम माना जा रहा है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों की सामाजिक गतिविधियां बढ़ी हैं।

    ऐसे में ट्रस्ट में उनकी संभावित वापसी को लेकर अटकलें भी तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच की मौजूदा स्थिति में चंपत राय को लेकर राहत की बात सामने आने के बाद उनके दोबारा ट्रस्ट से जुड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। डॉ. अनिल मिश्र को लेकर ट्रस्ट क्या फैसला करता है, इस पर भी नजर रहेगी। अंतिम तस्वीर बैठक के बाद ही साफ होगी।

    संघ और VHP पदाधिकारियों के अयोध्या पहुंचने से बढ़ी हलचल
    बैठक से पहले संघ और विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के भी अयोध्या पहुंचने की सूचना है। VHP महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संरक्षक दिनेश चंद्र और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह के अयोध्या पहुंचने की जानकारी है। संघ और VHP पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात भी की। बंद कमरे में हुई इस बैठक के बाद ट्रस्ट की अहम बैठक को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

  • यूपी: राम मंदिर ट्रस्ट की CEO सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, पैनल में शामिल नामों पर अब ट्रस्ट करेगा फैसला

    यूपी: राम मंदिर ट्रस्ट की CEO सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, पैनल में शामिल नामों पर अब ट्रस्ट करेगा फैसला

    लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। अब ट्रस्ट पैनल में शामिल नामों पर विचार कर अंतिम नाम तय करेगा।

    राम मंदिर परिसर में हुई बैठक
    राम मंदिर परिसर में हुई बैठक के बाद सर्च कमेटी के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज को रिपोर्ट सौंपी। इस दौरान ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। तीन सदस्यीय सर्च कमेटी में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े भी शामिल हैं।

    CEO के लिए नामों का पैनल तैयार
    जानकारी के मुताबिक, चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद कमेटी ने CEO पद के लिए नामों का पैनल तैयार किया है। अब ट्रस्ट इस पैनल में शामिल नामों पर चर्चा करेगा और किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा। ट्रस्ट की 2 सितंबर को अहम बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम की घोषणा होने की संभावना है।

    मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में होगी अहम भूमिका
    CEO की नियुक्ति को राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियुक्ति के बाद CEO मंदिर की प्रशासनिक और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं के संचालन में अहम भूमिका निभाएगा। अब सभी की निगाहें 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर टिकी हैं, जहां राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम पर अंतिम फैसला हो सकता है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के 54 रिश्तेदार और करीबी जांच के घेरे में; संपत्तियों का मांगा गया पूरा ब्योरा

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के 54 रिश्तेदार और करीबी जांच के घेरे में; संपत्तियों का मांगा गया पूरा ब्योरा


    नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर(Ayodhya Ram Mandir) के चढ़ावे में कथित चोरी और आर्थिक अनियमितताओं के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों के बाद अब उनके रिश्तेदार और करीबी भी जांच एजेंसियों की नजर में आ गए हैं। अयोध्या पुलिस और एसआईटी ने लखनऊ में आरोपियों तथा उनसे जुड़े 54 लोगों की संपत्तियों की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ी रकम का इस्तेमाल कहीं जमीन मकान फ्लैट या दूसरी अचल संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया गया।

    जानकारी के मुताबिक आठ नामजद आरोपियों के साथ उनके 54 रिश्तेदारों और करीबियों के नाम की सूची लखनऊ प्रशासन को भेजी गई है। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से लखनऊ के जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान आरोपियों और उनके परिजनों के नाम दर्ज या नामांतरण की गई कृषि और गैर कृषि भूमि समेत दूसरी अचल संपत्तियों का विवरण मांगा गया है। पत्र के साथ क्षेत्राधिकारी अयोध्या की रिपोर्ट भी भेजी गई है, जिसमें संबंधित लोगों की संपत्तियों की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

    जांच का दायरा केवल राजस्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रखा गया है। लखनऊ की संबंधित तहसीलों के एसडीएम और निबंधन कार्यालयों के सब रजिस्ट्रारों से भी रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं। इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम और आवास विकास परिषद से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि पिछले दो वर्षों में सूची में शामिल लोगों ने जमीन, मकान, फ्लैट या किसी अन्य अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री की है या नहीं।

    एसआईटी यह भी जोड़ने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के कथित आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों में हुई गतिविधियों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं। जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि आरोपियों या उनके करीबियों की संपत्ति में हाल के वर्षों में अचानक या असामान्य बढ़ोतरी हुई है या नहीं। अगर रिकॉर्ड में कोई संदिग्ध लेनदेन सामने आता है तो वह मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

    इस मामले में आठ प्रमुख आरोपियों के अलावा 54 रिश्तेदारों और करीबियों को जांच के दायरे में लाया गया है। सूची में शामिल लोगों के नाम और पते के आधार पर अलग-अलग विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है। अयोध्या के साथ लखनऊ और दूसरे जिलों से जुड़े संपत्ति रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। जांच एजेंसियां कथित गबन की रकम के संभावित इस्तेमाल और उसके स्रोत के बीच कड़ी तलाश रही हैं।

    इसी बीच आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के मामले में भी अदालत की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। विवेचना के दौरान बंद किए गए पेंशन खाते को दोबारा खोलने के लिए आरोपी की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने विवेचक और सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी को 13 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने बैंक खाते में आई धनराशि के सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट और आवश्यक कार्रवाई पूरी कर आख्या पेश करने को कहा है।

    अदालत के आदेश के मुताबिक आरोपी के जेल जाने के बाद खाते में आई पेंशन राशि से जुड़े तथ्य भी जांच का हिस्सा हैं। अब विवेचक को बैंक रिकॉर्ड के सत्यापन से संबंधित स्थिति स्पष्ट करनी होगी। ऐसे में राम मंदिर दान चोरी मामले में एक तरफ एसआईटी आरोपियों और उनके करीबियों की संपत्तियों की जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ अदालत में बैंक खातों और धनराशि से जुड़े पहलुओं पर भी सुनवाई जारी है। आने वाले दिनों में संपत्ति और वित्तीय रिकॉर्ड से सामने आने वाले तथ्य इस मामले की जांच की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय


    उत्तरप्रदेश। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को शुरू हो गई। इस बैठक पर देशभर के श्रद्धालुओं और आम लोगों की नजरें टिकी हैं क्योंकि इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों सहित कई अहम मुद्दों पर फैसला लिया जाना है।

    बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व्हीलचेयर पर पहुंचकर शामिल हुए। महासचिव चंपत राय भी बैठक में मौजूद रहे जबकि अनिल मिश्रा बैठक शुरू होने तक नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार ट्रस्ट के कुछ पदेन सदस्य और केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी प्रत्यक्ष रूप से बैठक में शामिल नहीं हुए और उनके ऑनलाइन जुड़ने की संभावना जताई गई।

    बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी की घटना सार्वजनिक होने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया था। ट्रस्ट की बैठक में इन इस्तीफों को स्वीकार करने या आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जा रहा है। ट्रस्ट में कुल 14 सदस्य हैं जिनमें चार पदेन सदस्य शामिल हैं। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है जबकि पदेन सदस्यों के मतों की गणना नहीं की जाती।

    बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक बयान जारी कर कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना से वे बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी ऐसा महापाप किया है उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    बैठक के दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम पर भरोसा जताया। उनका कहना था कि इस घटना से देशभर में गलत संदेश गया है और करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

    सूत्रों के अनुसार यदि महासचिव पद पर बदलाव होता है तो विश्व हिंदू परिषद के बजरंग बागड़ा का नाम सामने आ सकता है। वहीं ट्रस्टी पद के लिए नीरज दौनेरिया के नाम पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन संभावित नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहले ही खारिज कर चुकी है। अदालत ने कहा कि इसी विषय से संबंधित मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय और जांच की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।

  • अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: रातभर पूछताछ में कई राज बेनकाब, 8 आरोपी गिरफ्तार, 60 लाख रुपये बरामद

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: रातभर पूछताछ में कई राज बेनकाब, 8 आरोपी गिरफ्तार, 60 लाख रुपये बरामद


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम के कथित गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूरी रात पूछताछ की। शुरुआती जांच में ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं जिनसे संकेत मिलता है कि चढ़ावे की रकम में हेराफेरी का यह कथित खेल पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार चल रहा था।

    पुलिस के अनुसार अब तक करीब 60 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की गई कुल रकम कितनी है और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पूछताछ के दौरान कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर ऐसे लोगों के नाम भी बताए हैं जिनकी भूमिका की अब जांच की जा रही है।

    जांच में सामने आया कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित रूप से नकदी की गड्डियां अलग कर दी जाती थीं। इसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से बाथरूम में छिपाया जाता था ताकि किसी को शक न हो। मौका मिलने पर यह रकम मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाई जाती थी और बाद में एक तय स्थान पर उसका बंटवारा किया जाता था। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। सभी आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे मामले की परतें खोली जा सकें।

    जांच के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर की गणना व्यवस्था में प्रभावशाली भूमिका निभाता था और गणना कक्ष की चाबी भी उसके पास रहती थी। सुभाष श्रीवास्तव गणना प्रक्रिया का प्रभारी बताया जा रहा है। वहीं अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में तैनात थे। पुलिस का दावा है कि इन दोनों के ठिकानों से चोरी की रकम भी बरामद हुई है। मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा और अविनाश शुक्ला की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

    पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित गबन की राशि को किस तरह ठिकाने लगाया गया और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी संलिप्तता रही है। बरामद नकदी के अलावा बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज, पुजारी महासंघ ने PM को लिखा पत्र; CBI जांच की उठाई मांग

    राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज, पुजारी महासंघ ने PM को लिखा पत्र; CBI जांच की उठाई मांग

    अयोध्या अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं की चर्चाओं के बीच अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर ट्रस्ट को भंग करने, पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    महासंघ का कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था, विश्वास और लंबे संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर के संचालन और दान राशि के उपयोग को लेकर यदि किसी प्रकार के सवाल उठ रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। संगठन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण और उसके विकास के लिए अपनी श्रद्धा के अनुसार धन, सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान सामग्री दान की है। यह योगदान केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यदि चढ़ावे या दान राशि के प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

    महासंघ ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए। संगठन का कहना है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    संगठन के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि यदि वर्तमान ट्रस्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राम मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले परिवारों और मंदिर निर्माण के संघर्ष से जुड़े लोगों के योग्य प्रतिनिधियों को ट्रस्ट में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि ऐसे लोग मंदिर की परंपराओं, संघर्ष और धार्मिक महत्व को बेहतर ढंग से समझते हैं और अधिक जिम्मेदारी के साथ इसकी सेवा कर सकते हैं।

    महासंघ ने यह भी कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए मंदिर के संचालन और वित्तीय प्रबंधन को लेकर किसी भी प्रकार का संशय लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

    गौरतलब है कि हाल ही में राम मंदिर में चढ़ावे की राशि और दानपात्रों के प्रबंधन को लेकर कुछ रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें कथित वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। हालांकि इन मामलों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी हैं। इसी बीच पुजारी महासंघ की ओर से उठाई गई मांगों ने इस मुद्दे को नई राजनीतिक और धार्मिक चर्चा का विषय बना दिया है।

    अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले समय में इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है, यह श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • राम मंदिर में दर्शन के बाद बिट्टा बोले भगवान को राजनीति से ऊपर रखें

    राम मंदिर में दर्शन के बाद बिट्टा बोले भगवान को राजनीति से ऊपर रखें


    नई दिल्ली: अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने अयोध्या धाम पहुंचकर राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी और लोगों को एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की।

    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में बिट्टा ने कहा कि वह वर्षों से भगवान राम और हनुमान जी के दर्शन करते आ रहे हैं और उनकी कृपा से ही उनका जीवन सुरक्षित रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा देश में शांति बनाए रखने का प्रयास किया और अपने जीवन में न गोली चलने दी न दंगे-फसाद होने दिए और न ही बम विस्फोट होने दिए।

    उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि भगवान राम को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। उनका साफ कहना था कि राम पहले हैं और सियासत बाद में। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को धर्म और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि समाज में एकता और शांति बनी रहे।

    बिट्टा ने अपने बयान में अनुच्छेद 370 हटाने और राम मंदिर निर्माण का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे देश को आतंकवाद से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार ये फैसले राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को मजबूत करते हैं।

    उन्होंने अपनी पहचान को लेकर भी एक भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका धर्म भारत माता है और उनकी जाति वंदे मातरम् है। इस दौरान उन्होंने सिख समाज से भी अपील की कि वे खुलकर सामने आएं और देश विरोधी गतिविधियों का विरोध करें। उन्होंने कहा कि जब तक समाज एकजुट होकर ऐसे मुद्दों पर आवाज नहीं उठाएगा तब तक समस्याएं बनी रहेंगी।

    फिल्म धुरंधर में सिख किरदार को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है और अब सच्चाई छिप नहीं सकती। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में बननी चाहिए जिससे लोगों के सामने सही तथ्य आ सकें और इतिहास की वास्तविकता सामने आए।

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने ईरान से जुड़े युद्ध के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे संघर्षों का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर भी पड़ता है जिसमें भारत भी अछूता नहीं रह सकता।

    बिट्टा का यह दौरा और बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। उनके संदेश को एकता और राष्ट्रहित के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • अयोध्या राम मंदिर में बढ़ेगी पुजारियों की संख्या, 70 नए पुजारियों की भर्ती को ट्रस्ट की मंजूरी, परकोटे में भी जल्द होंगे दर्शन

    अयोध्या राम मंदिर में बढ़ेगी पुजारियों की संख्या, 70 नए पुजारियों की भर्ती को ट्रस्ट की मंजूरी, परकोटे में भी जल्द होंगे दर्शन

    नई दिल्ली/अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित व सुचारू बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर में 70 नए पुजारियों की भर्ती को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद रामलला, राम दरबार के साथ-साथ परकोटे और अन्य मंदिरों में नियमित पूजा और दर्शन की व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।राम मंदिर में पहले चरण के निर्माण की पूर्णता के उपलक्ष्य में ध्वजारोहण समारोह संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही जून 2025 में शेषावतार मंदिर और परकोटे में स्थित सभी छह मंदिरों में अलग-अलग देवी-देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा भी पूरी कर ली गई थी। अब ट्रस्ट की योजना इन सभी मंदिरों को आम श्रद्धालुओं के लिए नियमित रूप से खोलने की है। इसके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित पुजारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

    इसी जरूरत को देखते हुए 70 नए पुजारियों की भर्ती का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे 13 दिसंबर को मणिराम छावनी पीठाधीश्वर महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी बैठक में मंजूरी दी गई। ट्रस्ट का मानना है कि नए पुजारियों की नियुक्ति से मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना का क्रम बिना किसी बाधा के पूरे दिन संचालित किया जा सकेगा।वर्तमान स्थिति की बात करें तो राम मंदिर में इस समय कुल 20 पुजारी कार्यरत हैं। मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र नाथ शास्त्री के निधन के बाद चार वरिष्ठ पुजारी पहले से सेवाएं दे रहे थे। इसके बाद पुजारी प्रशिक्षण योजना के तहत 24 युवकों को प्रशिक्षित किया गया था, हालांकि नियुक्ति पत्र न मिलने और मानदेय से जुड़े विवादों के कारण यह मामला काफी समय तक उलझा रहा।

    बाद में ट्रस्ट ने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और निर्धारित मानदेय देकर मुक्त कर दिया, जिससे कई पुजारी निराश हो गए। कुछ महीनों बाद उन्हीं प्रशिक्षित पुजारियों में से पहले 10, फिर 6 को सशर्त नियुक्ति पत्र दिए गए, जबकि 4 को पूरी तरह बाहर कर दिया गया। इस तरह वर्तमान में कुल 20 पुजारी राम मंदिर परिसर में सेवाएं दे रहे हैं।इन 20 पुजारियों को रामलला और राम दरबार के अलावा शेषावतार मंदिर, परकोटे के छह मंदिरों, सप्त मंडपम, यज्ञमंडप और कुबेर टीला स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। कार्यभार अधिक होने के कारण ड्यूटी को सुबह और शाम की पालियों में बांटा गया है।ड्यूटी व्यवस्था में अब हिंदी पंचांग के अनुसार अमावस्या और पूर्णिमा के आधार पर बदलाव किया जाता है। 10-10 पुजारियों की दो टीमें बनाई गई हैं, जिनमें से एक टीम रामलला में और दूसरी राम दरबार में पूजा करती है। अगले दिन रोस्टर के अनुसार दोनों टीमें अपनी जगह बदल लेती हैं।

    फिलहाल पुजारियों की कमी के कारण शेषावतार, परकोटा, सप्त मंडपम और कुबेर टीला में पूजा केवल सीमित समय के लिए ही हो पा रही है। यहां सुबह और शाम की आरती के बीच लंबे समय तक मंदिरों के पट बंद रहते हैं। ट्रस्ट का मानना है कि यदि पर्याप्त पुजारी उपलब्ध हो जाएं तो सभी मंदिरों में पूरे दिन दर्शन और पूजा संभव हो सकेगी।आकलन के अनुसार, राम मंदिर परिसर के सभी मंदिरों में नियमित पूजा और दर्शन के लिए कम से कम 50 पुजारियों की तत्काल जरूरत है। तीन शिफ्टों में आठ-आठ घंटे की ड्यूटी के हिसाब से यह संख्या और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में 70 नए पुजारियों की भर्ती का फैसला आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा।