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  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़, उच्च न्यायिक आयोग की मांग से बढ़ी हलचल

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़, उच्च न्यायिक आयोग की मांग से बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान सामग्री के कथित गबन को लेकर मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस पूरे विवाद ने अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर नया मोड़ ले लिया है, जहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच न्यायिक हस्तक्षेप की मांग तेज होती जा रही है।

    मामले की जांच पहले ही एसआईटी द्वारा की जा चुकी है और टीम अपनी रिपोर्ट तैयार कर आगे की प्रक्रिया के लिए उच्च अधिकारियों को सौंपने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि जांच टीम लखनऊ के लिए रवाना हो चुकी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंपे जाने की संभावना है। इसी बीच इस प्रकरण को लेकर एक नई जनहित याचिका लखनऊ स्थित उच्च न्यायालय की पीठ में दाखिल की गई है।

    अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दाखिल इस याचिका में मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग का गठन किया जाए। याचिका में राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, अयोध्या के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मंदिर ट्रस्ट के सचिव को पक्षकार बनाया गया है। संभावना जताई जा रही है कि इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह हो सकती है।

    इसी बीच आरोपों की श्रृंखला और भी गंभीर होती जा रही है। सराफा व्यापार से जुड़े एक संगठन के नॉर्थ इंडिया हेड द्वारा यह दावा किया गया है कि लगभग 60 किलो चांदी, जो देशभर के दानदाताओं द्वारा मंदिर के लिए भेजी गई थी, उसका उचित उपयोग या सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। आरोपों के अनुसार, यह चांदी गलाकर धार्मिक उपयोग के लिए ईंटों और अन्य सामग्री में बदली गई थी, लेकिन बाद में इन वस्तुओं का हिसाब स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।

    इसके अलावा कुछ दानदाताओं का यह भी कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से चांदी के दीपक, कटोरे और अन्य धार्मिक वस्तुएं मंदिर को दान की थीं, लेकिन मंदिर निर्माण के बाद वे वस्तुएं दिखाई नहीं दीं। दानदाताओं ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए दान सामग्री का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपील की है।

    इस विवाद के चलते मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं और श्रद्धालुओं के बीच भी असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि लगातार उठ रहे विवादों का असर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और दान की मात्रा पर भी पड़ा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    फिलहाल यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बीच आगे बढ़ रहा है। एक ओर एसआईटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक आयोग की मांग ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।

  • राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा

    राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा


    पुणे/अयोध्या। प्रसिद्ध ओजस्वी वक्ता साध्वी ऋतंभरा ने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता पर बड़ा बयान दिया है। पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि का संघर्ष एक ऐसे संकल्प की परिणति थी जिसका कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में सूचना क्रांति और सोशल मीडिया का बोलबाला है लेकिन राम मंदिर आंदोलन उस समय सफल हुआ जब ये आधुनिक साधन मौजूद नहीं थे।इसका कारण यह था कि आंदोलन का संदेश सीधे लोगों के दिलों में गूँज रहा था।साध्वी ऋतंभरा ने मानवीय इच्छाशक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा हमारा काम राम जी के कार्य के लिए समर्पित है। मानवीय संकल्प में पर्वतों को उखाड़ फेंकने और पत्थर को पानी में बदल देने की शक्ति होती है बशर्ते वह आत्मसंयम और चरित्र की प्रमाणिकता पर आधारित हो।

    राष्ट्र की मजबूती चरित्र और एकजुटता में

    साध्वी ने समाज को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक दृढ़ संकल्पित समाज क्या हासिल कर सकता है। उनके अनुसार किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी भौतिक संपदा में नहीं बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र और आंतरिक विभाजनों को दूर करने की क्षमता में निहित होती है। उन्होंने दमितों और वंचितों की रक्षा के लिए समाज से आगे आने का आह्वान भी किया। अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ का उल्लास: 29 दिसंबर से शुरू होंगे कार्यक्रम एक ओर जहाँ साध्वी ऋतंभरा ने आंदोलन की वैचारिक विजय को रेखांकित किया वहीं दूसरी ओर अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के पांच दिवसीय भव्य आयोजन की रूपरेखा जारी कर दी गई है।

    आयोजन की मुख्य विशेषताएं

    प्रारंभ: राम मंदिर ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र के अनुसार समारोह की शुरुआत 29 दिसंबर से होगी।मुख्य अतिथि: 31 दिसंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शिरकत करेंगे।सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में नियमित रामचरितमानस पाठ और कथा का आयोजन होगा।समय: सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन शाम से शुरू होकर रात 9 बजे तक चलेंगे।यह आयोजन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद के महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है जिसमें देश भर से श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।