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  • क्या गर्मी में नुकसान पहुंचा सकता है मेथी दाना? सेवन से पहले जान लें ये जरूरी बातें

    क्या गर्मी में नुकसान पहुंचा सकता है मेथी दाना? सेवन से पहले जान लें ये जरूरी बातें


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही खानपान में बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है। इस दौरान लोग शरीर को ठंडा और स्वस्थ रखने के लिए कई घरेलू उपाय अपनाते हैं। मेथी दाना भी इन्हीं चीजों में शामिल है, जिसे आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। हालांकि, गर्मियों में इसका सेवन करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
    आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाने की तासीर गर्म मानी जाती है। यही वजह है कि इसका अधिक सेवन गर्मियों में शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। लेकिन सही मात्रा और सही तरीके से सेवन किया जाए तो यह शरीर को कई फायदे भी पहुंचा सकता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार मेथी दाना पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने और कमजोरी दूर करने में सहायक माने जाते हैं। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने और वजन घटाने में भी मददगार माना जाता है।
    गर्मियों में मेथी दाने का सेवन भिगोकर करना ज्यादा लाभकारी माना जाता है। रातभर पानी में भिगोए गए मेथी दानों को सुबह खाली पेट खाने से शरीर को ठंडक मिल सकती है और पाचन भी बेहतर रहता है। कई लोग इसका पानी पीना भी पसंद करते हैं।
    हालांकि आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि जरूरत से ज्यादा मेथी दाना खाने से शरीर में गर्मी, एसिडिटी, पेट में जलन और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर जिन लोगों की बॉडी हीट ज्यादा रहती है, उन्हें सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।
    गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को मेथी दाने का सेवन डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए। अगर संतुलित मात्रा में और सही तरीके से सेवन किया जाए, तो मेथी दाना गर्मियों में भी शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
  • मेथी दाने का सही सेवन जानिए, वरना गर्मियों में बढ़ सकती हैं समस्याएं.

    मेथी दाने का सही सेवन जानिए, वरना गर्मियों में बढ़ सकती हैं समस्याएं.

    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में मौजूद मसालों को केवल स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत सुधारने के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण मसाला है मेथी दाना, जिसे आयुर्वेद में एक प्रभावशाली औषधि माना गया है। इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, रक्त शर्करा नियंत्रित रहती है और शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। हालांकि, गर्मियों के मौसम में इसके सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाना उष्ण प्रकृति का होता है, यानी इसकी तासीर गर्म होती है। यह सामान्य रूप से शरीर में वात और कफ को संतुलित करने में सहायक होता है, लेकिन गर्मियों के दौरान शरीर में पित्त का स्तर पहले से ही बढ़ा रहता है। ऐसे में यदि मेथी दाने का सेवन अधिक मात्रा में किया जाए, तो यह शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है। कई लोगों को इसके कारण पेट में जलन, एसिडिटी, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में मेथी दाने का सेवन पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसके सेवन के तरीके में बदलाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि मेथी दानों को रातभर पानी में भिगो दिया जाए और सुबह उस पानी को छानकर पी लिया जाए। इस प्रक्रिया से इसकी गर्म तासीर कुछ हद तक कम हो जाती है और शरीर को इसके लाभ भी मिलते रहते हैं।

    इसके अलावा मेथी दाने का पाउडर बनाकर उसे दही या छाछ के साथ लेना भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है। छाछ और दही की ठंडी तासीर मेथी के गर्म प्रभाव को संतुलित करती है, जिससे पाचन तंत्र को राहत मिलती है और शरीर में गर्मी नहीं बढ़ती। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं।

    गर्मियों में मेथी दाने की मात्रा को सीमित रखना भी बेहद जरूरी है। अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, इसे खाली पेट लेने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। भोजन के बाद इसका सेवन करना ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है।

    कुछ विशेष परिस्थितियों में सावधानी बरतना और भी जरूरी हो जाता है। मधुमेह के मरीज, लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं मेथी दाने का सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें। ऐसा इसलिए क्योंकि यह शरीर के शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है।

  • हरी सब्जियों को खाएं सही तरीके से, बुजुर्ग और बच्चों के लिए विशेष सलाह…

    हरी सब्जियों को खाएं सही तरीके से, बुजुर्ग और बच्चों के लिए विशेष सलाह…


    नई दिल्ली: हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं। आयुर्वेद में भी हरी पत्तेदार सब्जियों को खाने का सही तरीका बताया गया है, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर को पूरा पोषण मिल सके।

    हालांकि आजकल सैंडविच, सलाद और नूडल्स में कच्ची सब्जियों का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार कई हरी सब्जियां कच्ची खाने से पाचन में समस्या हो सकती है और वात दोष बढ़ा सकती हैं।

    कैसे खाएं हरी सब्जियां:

    पालक, शिमला मिर्च और गोभी जैसी हरी सब्जियों को कच्चा खाने से बचें। इनमें परजीवी टेपवर्म होने का खतरा रहता है।

    सब्जियों को पहले उबालें, फिर अतिरिक्त पानी निचोड़कर घी या तेल में हल्का भूनकर पकाएं।

    बुजुर्ग और बच्चों को हरी सब्जियों का सेवन कम मात्रा में दें।

    आयुर्वेद में बुजुर्गों और बच्चों के पाचन को ध्यान में रखते हुए कुछ सब्जियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इनमें तोरई, टिंडा, लौकी, परवल और कुंदरू शामिल हैं। ये हरी सब्जियों जितनी ही पौष्टिक होती हैं और पचाने में हल्की होती हैं। यदि बच्चे इन सब्जियों को कम पसंद करें, तो इन्हें आटे में मिलाकर पराठा या मीठे के रूप में दिया जा सकता है।

    सही मात्रा और सही तरीके से हरी सब्जियों का सेवन करने से पाचन बेहतर रहता है, प्रतिरक्षा मजबूत होती है और हृदय स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है।

  • पंचतत्व और हमारी उंगलियां: जानें शरीर में इन्हें सक्रिय करने के आसान तरीके

    पंचतत्व और हमारी उंगलियां: जानें शरीर में इन्हें सक्रिय करने के आसान तरीके


    नई दिल्ली: हमारा शरीर पंचभूतों से बना है -पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। आयुर्वेद और प्राचीन ज्ञान के अनुसार ये पंचतत्व हमारे शरीर और स्वास्थ्य के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मृत्यु के बाद शरीर इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाता है, लेकिन जीवन में इनके संतुलन और सक्रियता को बनाए रखना भी जरूरी है।

    हाथ की पांचों उंगलियां हमारे शरीर के पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। अंगूठा पृथ्वी तत्व, तर्जनी वायु, मध्यमा आकाश, अनामिका अग्नि और कनिष्ठा जल का प्रतीक है।

    पृथ्वी तत्व अंगूठा:
    प्रकृति से जुड़ने से पृथ्वी तत्व सक्रिय होता है। हरियाली के बीच समय बिताएं, नंगे पैर घास पर चलें, मिट्टी को हाथ लगाएं और बागवानी करें।

    वायु तत्व तर्जनी:
    सांस और प्राणायाम से वायु तत्व संतुलित होता है। रोजाना खुली हवा में अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम करें। आहार में हल्की कड़वी चीजें शामिल करें।

    आकाश तत्व मध्यमा:
    आकाश तत्व को संतुलित करने के लिए ध्यान और मौन की प्रक्रिया अपनाएं। ध्यान मुद्रा में बैठकर ओम का उच्चारण करें। यह मानसिक चेतना बढ़ाता है और मन को शांति प्रदान करता है।

    अग्नि तत्व अनामिका:
    अग्नि तत्व पाचन से जुड़ा है। इसे सक्रिय करने के लिए सूर्य नमस्कार, नौकासन और कपालभाति जैसी योग मुद्राएं करें। साथ ही हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लें। सही पाचन से कई रोग अपने आप ठीक हो सकते हैं।

    जल तत्व कनिष्ठा:
    जल तत्व हमारे शरीर का 50-65 फीसदी हिस्सा बनाता है। इसे सक्रिय करने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लें, जल मुद्रा का अभ्यास करें और स्विमिंग करें।इस प्रकार पंचतत्वों को सक्रिय और संतुलित रखने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर रहता है बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा भी बढ़ती है।