पोषक तत्वों से भरपूर
डायबिटीज नियंत्रण में सहायक
घाव और सूजन में फायदेमंद
इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार
उपयोग से पहले रखें सावधानी

घाव और सूजन में फायदेमंद
इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार
उपयोग से पहले रखें सावधानी

1. लहसुन
2. मेथी दाना
3. अर्जुन की छाल
लेकिन एक जरूरी सच
लाइफस्टाइल ही असली गेम-चेंजर
तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम करना
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी
वजन नियंत्रित रखना
तनाव कम करना
सीधी बात-कोलेस्ट्रॉल हमें चेतावनी देता है कि जीवनशैली सुधारने का समय आ गया है। घबराने के बजाय इसे एक संकेत मानिए, और शरीर के साथ दोस्ती कीजिए। दिल आपका है-देखभाल भी आपकी जिम्मेदारी है।

रक्त की कमी होने पर रात में दो मुनक्का और दो अंजीर भिगोकर सुबह उनका सेवन करना लाभकारी माना गया है इसके साथ लौह भस्म को शहद के साथ चाटना चाहिए सुबह खाली पेट सफेद पेठे और आंवले का रस पीना शरीर में रक्त निर्माण को बढ़ावा देता है तिल और गुड़ का सेवन भी आयरन की कमी को पूरा करने में सहायक है वहीं रात में गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण लेने से पाचन सुधरता है और रक्त शुद्ध होता है
दूसरा उपाय आहार तालिका से जुड़ा है भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां सहजन की पत्ती और डंडी तथा चुकंदर को शामिल करना चाहिए फलों में अनार अंगूर सेब और खजूर का सेवन लाभदायक होता है दिन के समय छाछ पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है जिससे रक्त की मात्रा बढ़ने में सहायता मिलती हैइसके साथ यह जानना भी जरूरी है कि किन चीजों से परहेज करना चाहिए अधिक मात्रा में हरी मिर्च बैंगन ज्यादा खट्टे फल और पैक्ड खाद्य या पेय पदार्थों का सेवन एनीमिया की समस्या को बढ़ा सकता है इसलिए इनसे दूरी बनाना जरूरी है
तीसरा उपाय जीवनशैली से जुड़ा है आयुर्वेद के अनुसार लोहे के बर्तन में भोजन पकाने से शरीर को प्राकृतिक रूप से आयरन प्राप्त होता है जिससे रक्त निर्माण में मदद मिलती है इसके अलावा सूर्य स्नान भी बेहद जरूरी माना गया है सुबह की हल्की धूप शरीर में विटामिन डी के स्तर को बढ़ाती है जो लाल रक्त कोशिकाओं को मजबूत बनाता हैआयुर्वेदिक उपायों के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाकर एनीमिया की समस्या से प्राकृतिक रूप से राहत पाई जा सकती है

आधुनिक चिकित्सा में इस स्थिति को एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है जबकि आयुर्वेद इसे पित्त दोष की वृद्धि से जोड़कर देखता है आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में पित्त असंतुलित होता है तो अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेट की समस्याओं के साथ साथ हड्डियों और जोड़ों में भी कमजोरी आने लगती है मुंह के खट्टे या कड़वे स्वाद के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे देर रात भोजन करना शराब और तंबाकू का सेवन लिवर का सही तरीके से काम न करना पाचन अग्नि का कमजोर पड़ जाना और लंबे समय तक भूखा रहना गलत खान पान की आदतें भी पेट में एसिड बढ़ाने का बड़ा कारण बनती हैं
आयुर्वेद में इस समस्या के प्रभावी समाधान बताए गए हैं पेट से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर करने के लिए त्रिफला चूर्ण को बेहद लाभकारी माना गया है रात को गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण लेने से सुबह पेट साफ रहता है और पित्त शांत होता हैखान पान की समय सारिणी में बदलाव करना भी जरूरी है देर रात भोजन करने से बचें और सूर्यास्त के आसपास खाना खा लें भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें कुछ देर टहलें और सोते समय बाईं करवट लें विज्ञान भी मानता है कि बाईं करवट सोने से पेट का एसिड ऊपर की नली में नहीं चढ़ता और हृदय तक रक्त प्रवाह बेहतर रहता है
तांबे के बर्तन में रखा पानी पेट के अम्ल को शांत करने में मदद करता है इसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को डिटॉक्स भी करता है इसके अलावा सौंफ और मिश्री का सेवन या उनका पानी पीने से पाचन सुधरता है और मुंह की दुर्गंध भी कम होती हैविशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अत्यधिक तनाव और चिंता से पेट में एसिड का उत्पादन सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना भी पेट की सेहत के लिए बेहद जरूरी है

खांसी के प्रकार
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसारखांसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी। सूखी खांसी में गले में खुजलीजलन और लगातार खांसी होती है। वहींबलगम वाली खांसी में छाती भारी महसूस होती हैबलगम निकलता है और सीने में दबाव या तकलीफ होती है। दोनों ही प्रकार की खांसी में गले में जलन और सीने की बेचैनी आम संकेत हैं। यदि खांसी कई दिनों तक कम न हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।
आयुर्वेदिक नुस्खे और घरेलू उपाय
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सूखी खांसी में मुलेठी या लौंग का एक छोटा टुकड़ा चूसने से गले को तुरंत आराम मिलता है। इसके अलावावासा के पत्तों का काढ़ा पीना या इसका पाउडर लेना कफ को कम करने में मदद करता है। सोने से पहले हल्दी मिलाकर गर्म दूध पीना गले की जलन और खांसी में राहत देता है।बलगम वाली खांसी या सामान्य खांसी के लिए गुनगुने अदरक का काढ़ाअदरक-तुलसी का काढ़ा शहद के साथ लेने से कफ पतला होकर बाहर निकलता है। इसके अलावागर्म पानी में नमक डालकर गरारा करना और भाप लेना भी गले और छाती की जलन को कम करता है। लौंगअदरक और इलायची को मिलाकर पाउडर या काढ़ा के रूप में इस्तेमाल करना भी खांसी में आराम देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये आयुर्वेदिक नुस्खे प्राकृतिक और सुरक्षित हैं। इन उपायों को संतुलित आहारपर्याप्त पानी और पर्याप्त आराम के साथ अपनाने से खांसी में तेजी से सुधार होता है। नियमित रूप से इन नुस्खों का पालन करने से न केवल खांसी नियंत्रित रहती हैबल्कि सांस की सेहत भी मजबूत बनती है।हालांकियदि खांसी के साथ सांस फूलनाबुखारलगातार कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देंतो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती चरण में अपनाए गए आयुर्वेदिक नुस्खे समय पर राहत देने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

आयुष मंत्रालय ने एक पोस्ट के माध्यम से इन चार आसान उपायों को साझा किया है जिनमें से पहला उपाय है आई पामिंग। इस विधि में दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़कर गर्म किया जाता है और फिर इन्हें आंखों पर रखा जाता है। इससे आंखों की थकान कम होती है और आंखें रिलैक्स महसूस करती हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और आई पामिंग इस दबाव को कम करने में मदद करता है।
दूसरा उपाय है त्राटक। यह एक अभ्यास है जिसमें मोमबत्ती की लौ को बिना पलक झपकाए कुछ देर तक देखा जाता है। यह अभ्यास आंखों की रोशनी को बेहतर करने आंखों की सफाई और आंखों की नमी को बनाए रखने में मदद करता है। त्राटक से आंखों की आंतरिक स्पष्टता बढ़ती है और यह आँखों की थकान को कम करता है।
तीसरा उपाय है गीले कॉटन पैड का इस्तेमाल। गीले कॉटन पैड से आंखों के तनाव को कम किया जा सकता है और सिर दर्द से भी राहत मिलती है। इसके लिए रूई को ठंडे पानी या गुलाब जल में भिगोकर आंखों पर कुछ देर के लिए रखा जाता है। यह उपाय आंखों के नीचे सूजन को कम करने और आंखों को ताजगी देने के लिए बहुत प्रभावी है। कुछ लोग इसकी जगह खीरे के टुकड़े भी इस्तेमाल करते हैं।
चौथा उपाय है भाप लेना। सर्दियों में कई बार आंखों में गंदगी जमा हो जाती है जिससे पलके चिपकने लगती हैं। हल्की भाप से आंखों को शुद्ध किया जा सकता है जिससे पलके चिपकने से बचती हैं। हालांकि ध्यान रखें कि अधिक भाप लेने से आंखों की ड्राइनेस बढ़ सकती है इसलिए इसे संतुलित मात्रा में लें।