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  • चंद्रशेखर के चुनावी दांव से बदले सियासी समीकरण, मेरठ की तीन सीटों पर ASP ने बढ़ाई हलचल

    चंद्रशेखर के चुनावी दांव से बदले सियासी समीकरण, मेरठ की तीन सीटों पर ASP ने बढ़ाई हलचल

    मेरठ। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने 45 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की घोषणा कर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। मेरठ जिले की मेरठ शहर, किठौर और मेरठ कैंट सीटों पर घोषित प्रभारियों को लेकर स्थानीय राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खासतौर पर मेरठ शहर और किठौर सीट पर इस फैसले को समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

    आसपा प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अहम सीटों पर सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मजबूत चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी ने किठौर से बाबर चौहान खरदौनी, मेरठ शहर से बदर अली और मेरठ कैंट से संजीव पाल को विधानसभा प्रभारी बनाया है। आमतौर पर पार्टी बाद में इन्हीं प्रभारियों को उम्मीदवार घोषित करती है।

    2027 चुनाव की रणनीति के संकेत
    तीनों सीटों पर अलग-अलग सामाजिक समीकरणों के आधार पर प्रभारियों की नियुक्ति यह संकेत देती है कि आजाद समाज पार्टी इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिर्फ औपचारिक मौजूदगी दर्ज कराने नहीं, बल्कि मजबूत चुनावी मुकाबला करने की तैयारी में है। मेरठ की अन्य चार सीटों—सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर और मेरठ दक्षिण—पर भी जल्द प्रभारियों की घोषणा होने की संभावना है।

    हस्तिनापुर से चंद्रशेखर के चुनाव लड़ने की चर्चा
    राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद 2027 का विधानसभा चुनाव हस्तिनापुर (सुरक्षित) सीट से लड़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो मेरठ ही नहीं, पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है। इस सीट से भाजपा के दिनेश खटीक लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से भी कई दावेदार सक्रिय हैं।

    मेरठ शहर में बदर अली पर दांव
    मेरठ शहर सीट पर आसपा ने मुस्लिम समुदाय से आने वाले बदर अली को प्रभारी बनाया है। इस सीट पर मुस्लिम, ब्राह्मण, वैश्य, जैन, पंजाबी और दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में यहां से समाजवादी पार्टी के रफीक अंसारी विधायक हैं, जिन्होंने 2017 और 2022 में भाजपा प्रत्याशियों को हराकर जीत दर्ज की थी।

    बदर अली पहले युवा सेवा समिति के जरिए सक्रिय राजनीति में आए थे। वर्ष 2023 के नगर निगम चुनाव में उनकी संस्था के पांच पार्षद निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2025 में चंद्रशेखर आजाद ने उन्हें आजाद समाज पार्टी में शामिल कराया था। माना जा रहा है कि उनके मैदान में आने से विपक्षी वोटों का समीकरण बदल सकता है।

    किठौर में बाबर चौहान से बढ़ी सियासी चुनौती
    किठौर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम, दलित, त्यागी और गुर्जर मतदाता प्रभावशाली हैं। यहां पार्टी ने बाबर चौहान खरदौनी को प्रभारी बनाया है। बाबर पहले समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन स्थानीय राजनीतिक मतभेदों के बाद उन्होंने आसपा का दामन थाम लिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार शाहिद मंजूर ने भाजपा के सत्यवीर त्यागी को करीब 2,100 मतों के अंतर से हराया था। ऐसे में बाबर की सक्रियता इस सीट पर मुकाबले को और रोचक बना सकती है।

    मेरठ कैंट में नए सामाजिक समीकरण की कोशिश
    भाजपा के मजबूत गढ़ मानी जाने वाली मेरठ कैंट सीट पर आसपा ने संजीव पाल को जिम्मेदारी सौंपी है। इस सीट पर पंजाबी, वैश्य, ब्राह्मण, क्षत्रिय और दलित मतदाताओं का प्रभाव है। संजीव पाल को आगे कर पार्टी ने दलित-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़ते हुए व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने का संकेत दिया है।

  • सीहोर में दामोदर यादव का तीखा वार सदियों की गुलामी का हिसाब होगा अब बदलने वाली है सियासत

    सीहोर में दामोदर यादव का तीखा वार सदियों की गुलामी का हिसाब होगा अब बदलने वाली है सियासत

    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गई जब आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव ने अपने तीखे और आक्रामक भाषण से सियासी माहौल को गर्म कर दिया बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर ग्राम बरखेड़ा कुर्मी में आयोजित इस कार्यक्रम में देर रात तक लोगों की भारी भीड़ जुटी रही और यादव के भाषण ने पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल तेज कर दी

    रात करीब 11 बजे शुरू हुआ यह संबोधन देर रात 1 बजे तक चला जिसमें दामोदर यादव ने अपने खास अंदाज में विरोधियों पर जमकर निशाना साधा उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत स्थानीय बुंदेली और मालवी लहजे से करते हुए लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया और फिर सामाजिक न्याय तथा सत्ता में भागीदारी के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया

    यादव ने कहा कि जो लोग आज उनकी विचारधारा और यात्रा को रोकने की कोशिश कर रहे हैं वे दरअसल समाज में आ रही जागरूकता से डरे हुए हैं उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट तक चिट्ठियां भेजी जा रही हैं ताकि उनके आंदोलन को रोका जा सके लेकिन अब यह रुकने वाला नहीं है

    अपने भाषण में उन्होंने सबसे बड़ा संदेश दलित और पिछड़ा वर्ग की एकता को लेकर दिया उन्होंने कहा कि जिस दिन यह दोनों वर्ग एकजुट हो जाएंगे उस दिन देश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल जाएंगी उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के लिए जागरूक हों और अपनी ताकत को पहचानें

    घोड़ी पर चढ़ने को लेकर समाज में होने वाले विवादों पर भी यादव ने तीखा कटाक्ष किया उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सदियों तक कुछ वर्गों को दबाकर रखा अब वही लोग डर रहे हैं उन्होंने कहा कि समय बदल रहा है और अब जो भेदभाव करेंगे उन्हें जवाब मिलेगा उनका यह बयान सभा में मौजूद लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बना रहा

    दामोदर यादव ने बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के संघर्ष और उनके योगदान को याद करते हुए लोगों से अपने वोट की ताकत को समझने की अपील की उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति वोट है और अगर सही तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए तो सत्ता की तस्वीर बदली जा सकती है

    इस कार्यक्रम में भीम युवा संगठन और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए आसपास के गांवों से भी लोग देर रात तक कार्यक्रम में डटे रहे और पूरा माहौल जय भीम के नारों से गूंजता रहा

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीहोर जिले में आजाद समाज पार्टी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है और इस तरह की आक्रामक सभाएं आने वाले चुनावों की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं दामोदर यादव के इस भाषण को भी उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है