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  • जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी

    जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम रामपुर जेल से रिहा होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईडी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। अब एजेंसी रविवार सुबह करीब 10 बजे आजम खान को कोर्ट में पेश कर कस्टडी की मांग करेगी।

    दरअसल, ईडी ने आजम खान के खिलाफ 14 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया था। दूसरी ओर, हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई की उम्मीद थी। इसी बीच ईडी की टीम सीआरपीएफ जवानों के साथ रामपुर जेल के बाहर पहुंच गई। जेल से बाहर आते ही टीम ने आजम खान को हिरासत में ले लिया और बाद में गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। अब्दुल्ला आजम की रिहाई को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से मिली थी राहत

    आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों ने क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल कर दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की थी।

    15 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए सजा निलंबित कर दी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग अदालत ने खारिज कर दी थी।

    रिहाई के बाद आजम खान ने उठाए सवाल

    रामपुर जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब कहने के लिए क्या बचा है और वह क्या कह सकते हैं। उनके मुताबिक, कानून का अस्तित्व ही खत्म हो गया है।

    आजम खान ने सवाल किया, ‘क्या मुस्लिम होने की यही सजा है?’ उन्होंने कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुस्लिम ने यूनिवर्सिटी बनाई। उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल बनाए और क्या यही उनका अपराध है?

    ED ने 1,170 करोड़ की संपत्तियां अटैच करने का किया था दावा

    प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बताया था कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत रामपुर स्थित आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और भवनों को अटैच किया है। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है।

    ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी फंड का इस्तेमाल निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि आजम खान ने उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और जल निगम में कैबिनेट मंत्री रहते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कथित अनियमितताओं के लिए किया।

    वहीं, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जुलाई में यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी की ओर से अपील दायर की गई थी। ईडी ने इस मामले में अगस्त में छापेमारी कर आजम खान से पूछताछ भी की थी।

    अखिलेश यादव बोले- वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, ‘आज के हुक्मरानों को याद रहे, जब वक्त बदल जाता है तो तख्त बदल जाता है।’

    अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों की जो साजिश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया देख रही है। उन्होंने एक उम्रदराज व्यक्ति को बार-बार मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने को बेहद कायराना हरकत बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, हवा बदलने पर उसे खुद भी इसका सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब नाइंसाफी हद से गुजर जाती है तो वह जुल्म करने वालों के लिए ही कहर बन जाती है। अखिलेश ने इस पूरी कार्रवाई को बेहद निंदनीय बताया।

    इससे पहले अखिलेश यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात की थी। उन्होंने बीजेपी सरकार पर आजम खान के खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। अखिलेश ने यह भी दावा किया था कि उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं।

  • आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज

    आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जेल पहुंचकर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि आजम खान पहले भी आजम थे आज भी आजम हैं और आगे भी आजम रहेंगे। उन्होंने कहा कि फर्जी मुकदमों में इतनी ताकत नहीं है कि आजम खान को लंबे समय तक जेल में रखा जा सके। अखिलेश के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और राजनीतिक एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    जेल से बाहर निकलने के बाद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आजम खान के साथ अपनी मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी। हालांकि जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि आजम खान से मिलने आने में करीब 11 महीने का समय क्यों लग गया तो वह सवाल पर नाराज होते दिखाई दिए। इस दौरान बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। मुलाकात के बाद उनके बयान और सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई।

    आजम खान समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और रामपुर की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और जेल में रहने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार बहस होती रही है। समाजवादी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखती रही है जबकि आरोपों और कानूनी मामलों का फैसला अदालतों की प्रक्रिया के तहत होता है। अखिलेश यादव का ताजा बयान इसी राजनीतिक संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

    अखिलेश यादव ने अपने बयान में आजम खान के राजनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्हें फर्जी मुकदमों के जरिए दबाया नहीं जा सकता। समाजवादी पार्टी लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कानूनी कार्रवाई के नाम पर उनके वरिष्ठ नेता को निशाना बनाया गया है। हालांकि किसी मुकदमे को फर्जी या सही मानने का अंतिम फैसला संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    रामपुर जेल में हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने लंबे अंतराल के बाद आजम खान से मुलाकात की। पत्रकारों ने इसी अवधि को लेकर सवाल किया था। सवाल के जवाब में अखिलेश की नाराजगी ने इस मुलाकात को और चर्चा में ला दिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है।

    आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में पहचाने जाते हैं और रामपुर से उनका गहरा राजनीतिक जुड़ाव रहा है। उनके जेल में रहने और कानूनी मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी के समर्थक लगातार प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अखिलेश यादव का यह दौरा पार्टी के भीतर आजम खान के महत्व को दोहराने वाला कदम माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व अपने वरिष्ठ नेता के साथ खड़े होने का संदेश देना चाहता है।

    फिलहाल इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव के बयान और पत्रकारों के सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया चर्चा में है। आजम खान से मिलने के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आजम खान का राजनीतिक प्रभाव खत्म नहीं हुआ है। वहीं मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और आगे पार्टी इस मामले को लेकर क्या रणनीति अपनाएगी इस पर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

  • रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय

    रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय


    नई दिल्ली। रामपुर जेल में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक रिश्ता बताया। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि आजम खान उनके दिल से जुड़े हुए हैं और उनके साथ उनका जुड़ाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। इस मुलाकात को लेकर सियासी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने इस दौरान आजम खान के परिवार पर कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए।

    अखिलेश यादव गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे रामपुर पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने हेलीपैड पर उतरा। यहां से वह कार के जरिए सीधे रामपुर जेल पहुंचे। उनके साथ आजम खान के बड़े बेटे अदीब भी कार में मौजूद थे लेकिन वह जेल के अंदर मुलाकात के लिए नहीं गए। जेल प्रशासन की व्यवस्था के बीच अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत करीब एक घंटे तक चली। जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव दोपहर करीब 1 बजकर 42 मिनट पर जेल के अंदर दाखिल हुए और 2 बजकर 51 मिनट के आसपास बाहर निकले। एक साल के भीतर अखिलेश यादव की आजम खान से यह तीसरी मुलाकात बताई जा रही है।

    जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के परिवार ने जितना अन्याय झेला है वैसा किसी राजनीतिक परिवार के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का पढ़ाई लिखाई और शिक्षा से कोई विशेष जुड़ाव नहीं है। जौहर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस विश्वविद्यालय के सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत है। अखिलेश यादव के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और उनके परिवार के साथ खड़े रहने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पैन कार्ड से जुड़े मामले में रामपुर जेल में बंद हैं। इस मामले में एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने दोनों को सात सात साल की सजा सुनाई थी। आजम खान ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। ऐसे में उनकी कानूनी लड़ाई और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं। अखिलेश यादव पहले भी आजम खान के समर्थन में बयान देते रहे हैं और अब जेल में मुलाकात के बाद उन्होंने एक बार फिर उनके प्रति भावनात्मक जुड़ाव जाहिर किया।

    मुलाकात के दौरान और उसके बाद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पहले दिन से चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत की बात कहती रही है और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर वोट चोरी के आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप अखिलेश यादव के राजनीतिक बयान हैं और इनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को अलग से देखना जरूरी है।

    अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने पर जौहर विश्वविद्यालय के हेलीपैड के पास आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा उनके बड़े बेटे अदीब और अन्य समर्थक मौजूद रहे। सपा के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी उनका स्वागत किया। इस दौरान अदीब जेल के बाहर ही रहे। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान पार्टी और आजम खान के समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल इस मुलाकात का मुख्य संदेश आजम खान के प्रति अखिलेश यादव का भावनात्मक समर्थन रहा जबकि भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर उनके आरोपों ने राजनीतिक बहस को भी हवा दी है। 

  • आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी फिर ED के निशाने पर 15 अफसरों की टीम ने खंगाले दस्तावेज कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

    आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी फिर ED के निशाने पर 15 अफसरों की टीम ने खंगाले दस्तावेज कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई


    उत्तर प्रदेश । समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बुधवार सुबह रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी समेत आजम खान और जौहर ट्रस्ट से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई। जानकारी के मुताबिक ED की टीम कई वाहनों से यूनिवर्सिटी पहुंची और वहां मौजूद दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की। छापेमारी के दौरान यूनिवर्सिटी के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। खास बात यह रही कि कार्रवाई के बीच यूनिवर्सिटी में नियमित कक्षाएं भी चलती रहीं और छात्रों को पहचान पत्र की जांच के बाद प्रवेश दिया गया।

    ED की यह कार्रवाई रामपुर तक सीमित नहीं रही। सहारनपुर और दिल्ली समेत कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोगों और परिसरों के अलावा सहारनपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता का कार्यालय और आवास भी शामिल है। ED की टीम इन जगहों पर वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड और अन्य कागजात खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत की जा रही है।

    जांच एजेंसियों के सामने मुख्य सवाल कथित तौर पर सरकारी ठेकों से मिले पैसों के इस्तेमाल को लेकर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी ठेकों से प्राप्त धनराशि किन लोगों या कंपनियों के माध्यम से जौहर यूनिवर्सिटी अथवा उससे जुड़े ट्रस्ट तक पहुंची। आरोपों की जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि इस रकम का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी की संपत्तियां तैयार करने या अन्य गतिविधियों में किस तरह किया गया। हालांकि छापेमारी अभी जांच का हिस्सा है और कार्रवाई पूरी होने के बाद ही ED की ओर से सामने आने वाली जानकारी से तस्वीर और स्पष्ट होगी।

    जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में रही है। 15 जुलाई को रामपुर के जिलाधिकारी ने यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को ढहाने का आदेश दिया था। प्रशासन की ओर से आरोप लगाया गया था कि इन इमारतों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के बिना कराया गया। हालांकि बाद में मुरादाबाद के कमिश्नर आन्जनेय सिंह की अदालत ने जिलाधिकारी के इस आदेश पर रोक लगा दी। इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    ED की कार्रवाई के बीच यूनिवर्सिटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि छापेमारी के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। यूनिवर्सिटी में छात्रों को पहचान पत्र देखकर प्रवेश दिया गया जबकि अभिभावकों को गेट से ही वापस लौटाया गया। दूसरी तरफ आजम खान के आवास पर इस कार्रवाई के दौरान कोई छापेमारी नहीं हुई और वहां सामान्य स्थिति बनी रही।

    आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले भी हो चुकी है। जुलाई 2019 में ED ने यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसरों में तलाशी अभियान चलाया था और दस्तावेज जब्त किए थे। इसके बाद सितंबर 2023 में आयकर विभाग और ED ने आजम खान के आवास तथा जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ठिकानों पर लगातार तीन दिनों तक छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के बाद संदिग्ध बैंक लेनदेन से संबंधित जानकारी सामने आने पर ED की ओर से समन भी जारी किए गए थे।

    आजम खान इस समय रामपुर जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज रहे हैं और उनके वकील के मुताबिक दोहरे पैन कार्ड मामले को छोड़कर अन्य मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है या वे बरी हो चुके हैं। फिलहाल दोहरे पैन कार्ड मामले में अदालत की सजा के बाद वह जेल में हैं और जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की गई है।

    ED की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब आजम खान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज है। हाल ही में शिवपाल यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें गृहमंत्री बनाया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ऐसे में ED की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

    फिलहाल जांच एजेंसी की टीम अलग अलग ठिकानों पर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। छापेमारी से जुड़े पूरे मामले में ED की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि एजेंसी को किन वित्तीय लेनदेन या संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और इस कार्रवाई के बाद आजम खान तथा जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

  • लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक

    लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक



    नई दिल्ली। लखनऊ में समाजवादी राजनीति के बीच शुक्रवार को भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब आजम खान ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात हाल ही में दिवंगत हुए मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए की गई।

    मुलाकात के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “दुख की घड़ी में सब साथ हैं।” इस मुलाकात को राजनीतिक औपचारिकता से ज्यादा मानवीय संवेदना और आपसी समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

    बता दें कि प्रतीक यादव का 38 वर्ष की उम्र में बुधवार को हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के चलते निधन हो गया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम में किया गया, जहां उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम यात्रा विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास से शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक शामिल हुए।

    आजम परिवार की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब समाजवादी पार्टी पहले से ही शोक की स्थिति से गुजर रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे एकजुटता और संवेदना के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • ईद पर काले कपड़े और काली पट्टी! जेल से आजम खान का चौंकाने वाला संदेश, वजह सुनकर रूह कांप जाएगी

    ईद पर काले कपड़े और काली पट्टी! जेल से आजम खान का चौंकाने वाला संदेश, वजह सुनकर रूह कांप जाएगी


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और रामपुर जेल में बंद आजम खान ने इस साल ईद को लेकर एक बड़ा और भावुक संदेश जारी किया है। शनिवार को सपा नेता यूसुफ मलिक और अन्य नेताओं ने जेल में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया गया कि आजम खान ने मुस्लिम समुदाय, विशेषकर सुन्नी मुसलमानों से अपील की है कि वे इस बार ईद की नमाज के दौरान काले कपड़े पहनें या बांह पर काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराएं।

    आजम खान ने अपनी अपील की वजह ईरान में हाल ही में हुई दुखद घटना बताई, जिसमें 160 बच्चियां शहीद हुईं। उन्होंने कहा कि यह इंसानी और नैतिक जिम्मेदारी है कि इस हादसे पर शोक व्यक्त किया जाए और दुनिया का ध्यान इस घातक घटना की ओर खींचा जाए। उनके अनुसार, ये बच्चियां भी हमारी अपनी बेटियों जैसी थीं और उनके लिए सम्मान जताना हम सभी का कर्तव्य है।

    सपा नेता ने बताया कि आजम खान ने ईद के दिन सादगी बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोग केवल काले कपड़े पहनें और काली पट्टी बांधें, सामान्य हंसी-खुशी और पारंपरिक उत्सव से दूर रहें। उनका संदेश ‘खिराज-ए-तहसीन’ के रूप में मासूमों को श्रद्धांजलि देने और वैश्विक स्तर पर हो रहे जुल्म के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध का रूप है।

    मुलाकात में आजम खान की पत्नी तजीन फात्मा भी मौजूद थीं। करीब आधे घंटे तक चली बातचीत में राजनीतिक चर्चा के बजाय मानवीय और सामाजिक संवेदनाओं पर जोर दिया गया। जेल प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच यह बातचीत पूरी हुई। सपा नेता यूसुफ मलिक ने कहा कि आजम खान लगातार मानवता और इंसानी मूल्यों पर जोर देते रहे हैं, और उनके संदेश का असर रामपुर और आसपास के जिलों में भी दिखाई दे रहा है।

    ज्ञात हो कि आजम खान लंबे समय से जेल में बंद हैं, लेकिन उनके पैगाम और बयान समाज और राजनीति पर लगातार असर डाल रहे हैं। इस अपील के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईद के दिन मुस्लिम समुदाय इस प्रतीकात्मक विरोध में किस हद तक शामिल होता है और उनके संदेश का जमीन पर क्या असर दिखाई देता है।