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  • आजमगढ़ में ओवैसी की जनसभा से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी तेज, एआईएमआईएम ने एक लाख लोगों के जुटने का किया दावा

    आजमगढ़ में ओवैसी की जनसभा से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी तेज, एआईएमआईएम ने एक लाख लोगों के जुटने का किया दावा


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी 11 अक्टूबर को आजमगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। इस कार्यक्रम के जरिए पार्टी पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। जनसभा के लिए आजमगढ़ के कोटिला के पास स्थित सिरसल क्लब ग्राउंड को चुना गया है। पार्टी की ओर से कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है।

    कार्यक्रम की तैयारियों को लगभग पूरा बताया गया है। एआईएमआईएम के जिला अध्यक्ष नदीम अहमद के अनुसार, जनसभा शाम चार बजे से शुरू होगी, जबकि असदुद्दीन ओवैसी के शाम करीब छह बजे कार्यक्रम में पहुंचने का कार्यक्रम है। नदीम अहमद ने कहा कि ओवैसी अल्लामा शिब्ली नोमानी की ऐतिहासिक धरती से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के अभियान की शुरुआत करेंगे। हालांकि, जनसभा में वास्तविक रूप से कितने लोग शामिल होते हैं, यह कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट होगा।

    आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम ने राज्य में अलग राजनीतिक गठबंधन बनाने का संकेत दिया है। जिला अध्यक्ष नदीम अहमद ने कहा कि उनकी पार्टी ने खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दलों से भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने का अनुरोध किया था। उनके मुताबिक, इन दलों ने एआईएमआईएम को अपने साथ शामिल करने में रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में पार्टी अब तीसरा मोर्चा बनाकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। उनके बयान के अनुसार, पार्टी चुनाव में गठबंधन के विकल्प पर आगे बढ़ रही है।

    आजमगढ़ की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी नदीम अहमद ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी अब जिले में पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं है। उनका कहना था कि आजमगढ़ को समाजवादी पार्टी का गढ़ मानना उचित नहीं है और पार्टी नेतृत्व ने जिले के विकास की अपेक्षा अपने गृह क्षेत्र सैफई पर अधिक ध्यान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में आजमगढ़ के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं हुआ। नदीम अहमद के मुताबिक, जिले के लोग अब इन मुद्दों को समझ रहे हैं।

    नदीम अहमद ने यह भी दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ओवैसी के नेतृत्व में एक मजबूत गठबंधन तैयार हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह गठबंधन आजमगढ़ की अधिकतर विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करेगा। हालांकि, यह पार्टी पदाधिकारी का चुनावी दावा है और इसके परिणाम का आकलन मतदान के बाद ही किया जा सकेगा।

    आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी आजमगढ़ सदर और लालगंज, दोनों लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में एआईएमआईएम की जनसभा और तीसरा मोर्चा बनाने की घोषणा आगामी चुनाव से पहले जिले में पार्टी की रणनीति को सामने लाती है।

  • आजमगढ़ में पत्नी, दो पुजारियों और बेटे की हत्या, आठ घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में आरोपी ढेर

    आजमगढ़ में पत्नी, दो पुजारियों और बेटे की हत्या, आठ घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में आरोपी ढेर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मंगलवार शाम एक गंभीर घटना के बाद करीब आठ घंटे तक बंधक संकट की स्थिति बनी रही। शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और दो पुजारियों को गोली मार दी। इसके बाद वह अपने बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस ने काफी देर तक बातचीत के जरिए उसे आत्मसमर्पण के लिए तैयार करने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति नियंत्रण में नहीं आई।

    बताया गया कि अरविंद शाम के समय अपने घर पहुंचा था। उस समय घर में पूजा-पाठ चल रहा था। वहां उसकी पत्नी बबीता सिंह के अलावा पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा मौजूद थे। पूजा को लेकर जानकारी लेने के दौरान अरविंद ने पुजारियों से आधार कार्ड दिखाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर पत्नी के साथ उसकी बहस हो गई।

    विवाद बढ़ने के बाद अरविंद ने कथित तौर पर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता और दोनों पुजारियों की मौत हो गई। घटना के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

    तीन लोगों की हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने आरोपी से लगातार बातचीत करने की कोशिश की। उसके परिवार के लोगों के माध्यम से भी उसे समझाने का प्रयास किया गया। पुलिस का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था।

    करीब सात घंटे तक बातचीत और समझाने का सिलसिला चलता रहा। आरोपी आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, वह बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहा था। इसी बीच कमरे के भीतर से अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने 10 वर्षीय बेटे को गोली मार दी। बच्चे को गोली लगने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई का फैसला किया। कमरे में प्रवेश के दौरान स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

    पुलिस के अनुसार, टीम के कमरे में पहुंचने पर आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। इस कार्रवाई में अरविंद सिंह घायल हो गया।

    घायल आरोपी और उसके बेटे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। वहीं, कमरे में मौजूद दो अन्य बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद मौके पर पुलिस बल, विशेष जांच टीम और फॉरेंसिक टीम को तैनात किया गया।

    पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और गोलीबारी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जानकारी में पूजा के दौरान हुए विवाद को घटना की शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    करीब आठ घंटे तक चले इस घटनाक्रम में आरोपी की पत्नी, दो पुजारियों और उसके बेटे की जान चली गई। पुलिस कार्रवाई के बाद बाकी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और बंधक संकट समाप्त हुआ