Tag: Baba Mahakal

  • महाकाल की दिव्य भस्म आरती, रजत ॐ-बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    महाकाल की दिव्य भस्म आरती, रजत ॐ-बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ अलौकिक श्रृंगार


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त के दौरान भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल के साथ हरि ॐ का जल अर्पित कर विशेष पूजा संपन्न हुई।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत का ॐ और बिल्वपत्र मुकुट धारण कराया गया। रुद्राक्ष की माला, रजत की मुंडमाला, डमरू और शेषनाग से सुशोभित रजत मुकुट से अलंकृत किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल का तिलक सजाया गया, जबकि सुगंधित पुष्पों की मनमोहक मालाओं से बाबा महाकाल का स्वरूप और भी दिव्य दिखाई दिया।

    श्रृंगार के पश्चात भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित करने के बाद कपूर आरती की गई। इसके उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से पवित्र भस्म अर्पित की गई और परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण ने सभी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

  • महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती रजत मुकुट त्रिशूल डमरू और रुद्राक्ष माला से निखरा बाबा का श्रृंगार

    महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती रजत मुकुट त्रिशूल डमरू और रुद्राक्ष माला से निखरा बाबा का श्रृंगार


    मध्यप्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के दिव्य और अलौकिक दर्शन हुए। प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुलते ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद गर्भगृह में विराजित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। पंडे पुजारियों ने भगवान महाकाल का दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया। प्रथम घंटा बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बन गया।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का भव्य राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत ॐ बिल्वपत्र युक्त मुकुट धारण कराया गया। रुद्राक्ष की माला रजत मुंडमाल और सुगंधित पुष्पमालाओं से बाबा का दिव्य श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड अंकित किया गया तथा त्रिशूल डमरू और शेषनाग से अलंकृत रजत मुकुट से उनका स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दिया।

    पूजन के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की भी विधिवत आराधना की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

    भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगल की कामना की। हर दिन की तरह शनिवार की भस्म आरती भी अत्यंत श्रद्धा आस्था और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुई जिसने भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

  • महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र

    महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दरबार में एक बार फिर श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजस्थान के जयपुर से आए एक भक्त परिवार ने बाबा महाकाल के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए लाखों रुपए मूल्य का चांदी का भव्य छत्र समर्पित किया। इस विशेष भेंट ने न केवल मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया बल्कि यह भी साबित किया कि महाकाल के प्रति भक्तों का विश्वास और समर्पण समय के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है।

    जयपुर के सन सिटी नीदड़ निवासी भागचंद बलेसरा लंबे समय से भगवान महाकाल के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। इसी श्रद्धा भाव के साथ उन्होंने विशेष रूप से 1 किलो 300 ग्राम चांदी से एक सुंदर और कलात्मक छत्र तैयार करवाया। इस छत्र की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख 25 हजार रुपए बताई जा रही है। भागचंद बलेसरा अपने पूरे परिवार के साथ उज्जैन पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इस दिव्य छत्र को बाबा महाकाल को अर्पित किया।

    इस धार्मिक अवसर पर उनकी धर्मपत्नी सीता देवी, पुत्र गोविंद बलेसरा और सीताराम बलेसरा, पुत्रियां ममता, सुमन और अनिता तथा पौत्र महावीर बलेसरा भी मौजूद रहे। पूरे परिवार ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ छत्र का पूजन कराया। इसके बाद विशेष अनुष्ठान संपन्न कर यह चांदी का छत्र भगवान महाकाल के मुखमंडल पर धारण कराया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को श्रद्धा और भक्ति के साथ देखा। पूजा के दौरान वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।

    छत्र अर्पण के बाद मंदिर समिति की ओर से भागचंद बलेसरा और उनके परिवार का सम्मान भी किया गया। श्रद्धालु परिवार ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें जीवन में अनेक उपलब्धियां और खुशियां मिली हैं। इसी कृतज्ञता और आस्था के भाव से उन्होंने यह विशेष भेंट समर्पित की है।

    महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सोने-चांदी के आभूषण, मुकुट, छत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। देश और विदेश से आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को बहुमूल्य उपहार भेंट करते हैं। विशेष बात यह है कि सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने के बावजूद धार्मिक दान और भेंट की भावना में कोई कमी नहीं आई है।

    महाकालेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जयपुर से आए इस श्रद्धालु परिवार द्वारा अर्पित किया गया चांदी का छत्र भी इसी अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया है।

  • महाकाल के दिव्य स्वरूप ने मोहा भक्तों का मन, भस्म आरती में उमड़ी आस्था

    महाकाल के दिव्य स्वरूप ने मोहा भक्तों का मन, भस्म आरती में उमड़ी आस्था


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga में रविवार तड़के आयोजित भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य और मनोहारी स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। प्रातः 4 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही विधि-विधान से पूजन-अर्चन का क्रम शुरू हुआ। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं के पूजन के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर विशेष पूजा संपन्न हुई।

    भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू के साथ भांग अर्पित कर विशेष श्रृंगार किया गया। हरिओम का जल अर्पित कर कपूर आरती की गई। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म रमाई गई। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, इसलिए भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

    भस्म अर्पित होने के बाद बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। मोगरा और गुलाब के फूलों से सजे बाबा महाकाल का अलौकिक स्वरूप भक्तों को मंत्रमुग्ध करता रहा। इसके बाद भगवान को फल एवं मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    भस्म आरती में बड़ी संख्या में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

  • महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य नजारा, पंचामृत अभिषेक से सजा बाबा महाकाल का स्वरूप

    महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य नजारा, पंचामृत अभिषेक से सजा बाबा महाकाल का स्वरूप

    उज्जैन उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान भक्तों को बाबा महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन प्राप्त हुए। सुबह चार बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से उनका अभिषेक संपन्न हुआ। पूरे वातावरण में मंत्रोच्चार और हरिओम के जयघोष से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।

    भव्य श्रृंगार और भस्म अर्पण की परंपरा

    अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। पहले ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंका गया और फिर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया। भांग, चंदन और त्रिपुंड से किया गया यह श्रृंगार बाबा महाकाल को राजाधिराज स्वरूप प्रदान करता है। इसके बाद कपूर आरती और फल-मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिभाव से भर गया।

    श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक मान्यता

    भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पारंपरिक रूप से भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं, जिससे यह आरती अत्यंत पवित्र और अद्वितीय मानी जाती है। इस अवसर पर पूरा मंदिर परिसर जय महाकाल के उद्घोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने दिव्य अनुभूति का अनुभव किया।

  • उज्जैन पहुंचे यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बाबा महाकाल के दर्शन कर शयन आरती में हुए शामिल

    उज्जैन पहुंचे यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बाबा महाकाल के दर्शन कर शयन आरती में हुए शामिल


    उज्जैन । उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य गुरुवार को मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन पहुंचे। उज्जैन पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी, बेटा और अन्य सहयोगी भी मौजूद रहे। मंदिर पहुंचने पर महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उनका स्वागत और सम्मान किया गया।

    मंदिर परिसर में पहुंचकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने नंदी हॉल में बैठकर कुछ समय ध्यान लगाया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन दिखाई दिए। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं और पुजारियों ने भी उनका स्वागत किया। भगवान महाकाल के दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर में आयोजित शयन आरती में भी भाग लिया और विधि विधान से पूजा अर्चना की।

    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बाबा महाकाल के दरबार में आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें बाबा महाकाल की संध्या और शयन आरती में शामिल होने का अवसर मिला। उन्होंने भगवान महाकाल से प्रार्थना करते हुए कहा कि वे उन्हें और देश के सभी लोगों को सेवा का अवसर देते रहें और इसी तरह अपने दरबार में बुलाते रहें।

    इस दौरान उन्होंने विकास के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। डिप्टी सीएम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार मध्य प्रदेश के साथ साथ उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी तेजी से विकास कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों का तेजी से विकास किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खासतौर पर महाकाल की भस्म आरती और शयन आरती में शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का यह दौरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा, जिसमें उन्होंने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेकर प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की।

  • महाकाल भस्म आरती: भांग चंदन और बेलपत्र से सजा बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गूंजे जय महाकाल के जयकारे

    महाकाल भस्म आरती: भांग चंदन और बेलपत्र से सजा बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गूंजे जय महाकाल के जयकारे


    उज्जैन । धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर तड़के करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए जिसके बाद विधि-विधान से भगवान महाकालेश्वर की भस्म आरती संपन्न हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का भव्य और दिव्य श्रृंगार किया गया जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर विशेष पूजन संपन्न किया गया। पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि से गूंजता रहा जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। बाबा को चंदन का त्रिपुंड और त्रिनेत्र से अलंकृत किया गया वहीं भांग और बेलपत्र से भी विशेष सजावट की गई। सुगंधित पुष्पों और मालाओं से सजे भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत मनमोहक नजर आ रहा था। इसके बाद भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया।

    कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर पवित्र भस्म रमाई गई। यह परंपरा महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है। भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुण्डमाल रुद्राक्ष की माला और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। इसके साथ ही कई आभूषणों से भगवान का अलंकरण किया गया जिससे उनका स्वरूप और भी दिव्य दिखाई दे रहा था।

    तड़के आयोजित इस भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर में हर ओर जय महाकाल के जयकारे गूंज रहे थे जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के पास पहुंचकर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं भी व्यक्त कीं और बाबा से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

    उज्जैन के महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु इस अद्भुत परंपरा को देखने और बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए यहां पहुंचते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से बाबा महाकाल के दर्शन और आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत अवसर

    बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत अवसर


    उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के भस्म आरती का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। मंदिर के कपाट खुलते ही सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया और पुजारियों ने आज्ञा लेकर चांदी द्वार खोला।

    इसके बाद गर्भगृह के पट खोलकर भगवान महाकाल का श्रृंगार किया गया। पंचामृत से पूजन और कर्पूर आरती के पश्चात भगवान को भांग, चंदन, सिंदूर और आभूषणों से सजाया गया। इस दिव्य श्रृंगार से महाकाल का स्वरूप अत्यंत आकर्षक और अलौकिक दिखाई दिया।

    नंदी हाल में नंदी जी का विधिवत स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। तत्पश्चात भगवान महाकाल का जल से अभिषेक और पंचामृत से विशेष पूजा हुई, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग अर्पित कर भस्म अर्पित किया गया।

    भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की माला धारण कराई गई। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और बाबा महाकाल के दिव्य आशीर्वाद का अनुभव किया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी भस्म अर्पित की गई।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इस आरती को इसलिए अत्यंत विशेष और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। भस्म आरती का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत अवसर प्रदान करता है।

  • 8 फरवरी महाकाल भस्म आरती: चंदन के त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल, अलौकिक श्रृंगार के हुए दर्शन

    8 फरवरी महाकाल भस्म आरती: चंदन के त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल, अलौकिक श्रृंगार के हुए दर्शन

    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के 8 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके साथ ही श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कपाट खुलते ही गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुजारियों ने भगवान महाकाल सहित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया और जलाभिषेक से आरती की शुरुआत हुई ।

    इसके पश्चात भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का अत्यंत मनोहारी और दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को चंदन का त्रिपुंड लगाया गया, त्रिनेत्र से अलंकृत किया गया और भांग से राजा स्वरूप में सजाया गया। यह दृश्य भक्तों के लिए अत्यंत भावविभोर कर देने वाला रहा।

    भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया और कपूर आरती संपन्न हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर भस्म रमाई गई, जो महाकाल की विशिष्ट पहचान और शिव तत्व का प्रतीक मानी जाती है। भस्म अर्पण के पश्चात भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। आभूषणों और फूलों से बाबा महाकाल का भव्य अलंकरण किया गया, जिससे गर्भगृह दिव्यता से आलोकित हो उठा।

    अल सुबह संपन्न हुई इस भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। भक्तों की आस्था और भक्ति ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि बाबा महाकाल के दरबार में आकर हर मनोकामना पूर्ण होने की आशा जाग उठती है। जो श्रद्धालु मंदिर नहीं पहुंच सके, वे घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से भी भस्म आरती के दर्शन कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

  • 25 जनवरी महाकाल भस्म आरती: चंद्र अर्पण और चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार, अलसुबह उमड़े श्रद्धालु, घर बैठे करें बाबा महाकाल के दर्शन

    25 जनवरी महाकाल भस्म आरती: चंद्र अर्पण और चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार, अलसुबह उमड़े श्रद्धालु, घर बैठे करें बाबा महाकाल के दर्शन


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार को अलसुबह भव्य और दिव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया। तड़के ठीक 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही बाबा महाकाल के जयकारों से संपूर्ण परिसर गूंज उठा। इस अवसर पर भगवान महाकाल का विशेष और मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों द्वारा विधि-विधान से गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। अभिषेक क्रम में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

    अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर चंद्र अर्पित किया गया, वहीं चंदन से त्रिपुंड और त्रिनेत्र अंकित कर भांग से मनोहारी श्रृंगार रचा गया। श्रृंगार के इस अलौकिक स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम के जल का अर्पण किया गया और ध्यान मंत्रों के साथ भगवान का आवाहन किया गया।

    भस्म अर्पण की परंपरा के तहत कपूर आरती की गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर विधि-विधान से भस्म रमाई गई। भस्म आरती के इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु अलसुबह ही मंदिर परिसर में उपस्थित रहे। भस्म रमाने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। फूलों और आभूषणों से भगवान का भव्य अलंकरण किया गया।

    भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। परंपरा अनुसार श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते नजर आए। श्रद्धालुओं का मानना है कि नंदी के माध्यम से कही गई प्रार्थना सीधे बाबा महाकाल तक पहुंचती है और शीघ्र फलित होती है।

    पूरे भस्म आरती आयोजन के दौरान जय श्री महाकाल हर-हर महादेव और बाबा महाकाल की जय के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। अलसुबह की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। देश-विदेश से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

    जो श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन नहीं कर सके, वे मंदिर समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए लाइव दर्शन के माध्यम से घर बैठे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सके। महाकाल की भस्म आरती न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की सबसे प्राचीन और अद्वितीय धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।