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  • SBI भर्ती 2026 में जूनियर एसोसिएट्स के 1,538 पदों पर आवेदन शुरू, जानें योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और सैलरी

    SBI भर्ती 2026 में जूनियर एसोसिएट्स के 1,538 पदों पर आवेदन शुरू, जानें योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और सैलरी

    नई दिल्ली ।भारतीय स्टेट बैंक ने क्लर्क कैडर में जूनियर एसोसिएट्स कस्टमर सपोर्ट एंड सेल्स के 1,538 पदों पर विशेष भर्ती अभियान शुरू किया है। यह भर्ती एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणी की बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए की जा रही है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 7 अगस्त से आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 27 अगस्त निर्धारित की गई है।

    इस भर्ती में अलग अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए रिक्तियां निर्धारित की गई हैं। सबसे अधिक 289 पद गुजरात में हैं। महाराष्ट्र में 165, मध्य प्रदेश में 134, झारखंड में 133, कर्नाटक में 120 और ओडिशा में 111 पद रखे गए हैं। राजस्थान में 106, आंध्र प्रदेश में 88, तमिलनाडु में 65 और पश्चिम बंगाल में 55 पद शामिल हैं।

    इसके अलावा असम में 39, जम्मू कश्मीर में 42, तेलंगाना में 32, उत्तर प्रदेश में 31, छत्तीसगढ़ में 26, चंडीगढ़ में 22, त्रिपुरा में 22, पंजाब में 18, दिल्ली में 17, बिहार में 12 और हिमाचल प्रदेश में 11 पद निर्धारित किए गए हैं। कुल रिक्तियों में एससी के 207, एसटी के 1,219 और ओबीसी के 112 पद शामिल हैं।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त समकक्ष योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी पात्र माने जाएंगे। जिन अभ्यर्थियों के पास इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री है, उनके लिए डिग्री पूरी होने की तारीख 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले होना जरूरी है।

    जो उम्मीदवार स्नातक के अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर में हैं, वे भी इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, ऐसे उम्मीदवारों को चयन होने की स्थिति में 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले स्नातक परीक्षा पास करने का प्रमाण देना होगा।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 20 वर्ष और अधिकतम उम्र 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में निर्धारित छूट मिलेगी।

    उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा और स्थानीय भाषा से जुड़े परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा शामिल होगी। उम्मीदवारों को संबंधित पद के लिए चुनी गई स्थानीय भाषा का परीक्षण भी देना होगा। अंतिम चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों को जूनियर एसोसिएट्स के पद पर नियुक्ति दी जाएगी।

    चयनित उम्मीदवारों को 24,050 रुपये से लेकर 64,480 रुपये तक मासिक वेतनमान मिलेगा। इसके अतिरिक्त बैंक के नियमों के अनुसार विभिन्न लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वेतन और सुविधाओं के कारण बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती महत्वपूर्ण अवसर मानी जा सकती है।

    आवेदन शुल्क उम्मीदवार की श्रेणी के अनुसार निर्धारित किया गया है। ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों को 750 रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा। एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी, एक्सएस और डीएक्सएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है।

    उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करते समय अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु और श्रेणी से संबंधित जानकारी सावधानीपूर्वक दर्ज करनी होगी। आवेदन की अंतिम तिथि 27 अगस्त है, इसलिए पात्र अभ्यर्थियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

  • MP हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने में देरी, 4.8 लाख लंबित मामलों का निपटारा करने में लग सकते हैं 40 साल

    MP हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने में देरी, 4.8 लाख लंबित मामलों का निपटारा करने में लग सकते हैं 40 साल

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि वर्तमान 42 न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 75–85 न्यायाधीश नहीं की गई, तो वर्तमान में लंबित 4,80,592 मामले निपटाने में सिर्फ पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है।

    लंबित मामलों की गंभीर स्थिति
    हालिया आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 तक न्यायाधीशों की संख्या औसतन 42–43 रही। इस अवधि में कुल 84,455 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 90,045 मामलों का निपटारा हुआ, जिससे केवल 5,590 मामलों की शुद्ध कमी दर्ज हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गति के बावजूद लंबित मामलों का समाधान 39–40 वर्षों में ही संभव होगा।

    न्यायिक रिक्तियों का कारण
    1989–90 की एरियर कमेटी की रिपोर्ट और हालिया विश्लेषण यह स्पष्ट करते हैं कि उच्च न्यायालयों में मामलों के जमा होने का मुख्य कारण न्यायाधीशों की नियुक्तियों में देरी है। वर्तमान स्थिति दर्शाती है कि न्याय प्रक्रिया अत्यधिक धीमी होने पर संविधान द्वारा प्रदत्त न्याय तक त्वरित पहुँच (अनुच्छेद 39-ए) का अधिकार केवल औपचारिक बनकर रह जाएगा।

    न्यायाधीशों की आवश्यक संख्या और अनुशंसाएं
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपनी स्वीकृत क्षमता 53 से बढ़ाकर 85 न्यायाधीश करने की अनुशंसा की है। केंद्र और राज्य सरकार से अब तक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति लंबित है।

    लक्ष्य यह है कि अगले पांच वर्षों में लंबित मामलों को खत्म करने के लिए प्रति माह 22,000–23,000 मामलों का निपटारा आवश्यक होगा। इसके लिए कम से कम 75 कार्यरत न्यायाधीश तुरंत नियुक्त किए जाने चाहिए।

    वर्ष 2026 में मुख्य न्यायाधीश सहित सात न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि नई नियुक्तियां समय पर नहीं होतीं, तो लंबित मामलों का बैकलाग फिर बढ़ सकता है।

    सुधार की दिशा
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुधार तभी स्थायी होगा जब

    न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जाए

    विशेष बेंचों का गठन किया जाए

    आधुनिक डिजिटाइजेशन और प्रबंधन प्रणाली लागू की जाए

    साथ ही सरकार को अनुच्छेद 39-ए के तहत अपनी जवाबदेही निभाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लानी होगी, ताकि आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कायम रहे।