Tag: Bada Mangal

  • चौथा बड़ा मंगल आज, हनुमान जी की आराधना का विशेष दिन, जाने पूजा-व्रत और मांगलिक दोष से राहत के उपाय

    चौथा बड़ा मंगल आज, हनुमान जी की आराधना का विशेष दिन, जाने पूजा-व्रत और मांगलिक दोष से राहत के उपाय


    नई दिल्‍ली । ज्‍येष्‍ठ अधिकमास चल रहा है, इसके मंगलवार बहुत खास होते हैं. बड़ा मंगल का व्रत रखना, हनुमान जी की पूजा करना और उपाय करना बहुत लाभ देगा. इससे तमाम तरह की समस्‍याओं का अंत होता है और जीवन में सुख-सम‍ृद्धि आती है.

    जिन लड़के-लड़कियों को मंगल दोष है, वो बड़ा मंगल के दिन गुड़, चने, लाल मसूर की दाल दान करें. ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी. साथ ही चौथे बड़ा मंगल पर सुंदरकांड का पाठ करें. यहां देखिए आज की तिथि, योग, नक्षत्र, राहुकाल समेत पूरा पंचाग.
    जिन लड़के-लड़कियों को मंगल दोष है, वो बड़ा मंगल के दिन गुड़, चने, लाल मसूर की दाल दान करें. ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी. साथ ही चौथे बड़ा मंगल पर सुंदरकांड का पाठ करें. यहां देखिए आज की तिथि, योग, नक्षत्र, राहुकाल समेत पूरा पंचाग.

    26 मई 2026 का पंचांग
    आज की तिथि – सुबह 05:11 बजे से ज्‍येष्‍ठ शुक्‍ल एकादशी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन 27 मई तक रहेगी. लिहाजा एकादशी तिथि का व्रत 27 मई को रखा जाएगा.

    आज का वार – मंगलवार.
    आज के ग्रह गोचर – आज चंद्रमा कन्‍या राशि में गोचर करेंगे.
    आज का नक्षत्र – 26 मई 04:08 बजे से हस्‍त नक्षत्र रहेगा और पूरा दिन रहेगा.
    आज के योग – 03:15 बजे से सिद्धि योग प्रारंभ होगा और पूरे दिन रहेगा.

    सूर्य व चंद्रमा का समय
    सूर्योदय – सुबह 05:46 बजे
    सूर्यास्त – शाम 07:01 बजे
    चन्द्रोदय – दोपहर 02:54 बजे
    चन्द्रास्त – 26 व 27 मई की तड़के सुबह 02:46 बजे
    (शहर के हिसाब से उदय व अस्त के समय में कुछ मिनट या सेकेंड का अंतर देखा जा सकता है)

    आज के शुभ काल
    ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:09 बजे से 04:57 बजे तक
    अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
    अमृत काल – रात 11:28 बजे से 01:11 बजे तक

    आज के अशुभ काल
    राहुकाल – दोपहर 03:42 बजे से शाम 05:22 बजे तक
    यम गण्ड – सुबह 09:04 बजे से 10:44 बजे तक
    कुलिक – दोपहर 12:23 बजे से 02:03 बजे तक
    दुर्मुहूर्त – सुबह 08:25 बजे से 09:18 बजे तक, रात 11:19 बजे से 12:02 बजे तक
    वर्ज्यम् – दोपहर 01:09 बजे से 02:52 बजे तक

  • बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार

    बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बड़ा मंगल का दिन इस बार बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन Gajakesari Rajyog का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग का निर्माण तब होता है जब गुरु ग्रह और चंद्रमा एक ही राशि में आकर युति करते हैं। 19 मई 2026 को यह संयोग मिथुन राशि में बन रहा है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह योग व्यक्ति के जीवन में धन लाभ, सफलता, मान-सम्मान और रुके हुए कार्यों में प्रगति का संकेत देता है। विशेष रूप से कुछ राशियों पर इसका प्रभाव अधिक शुभ बताया जा रहा है। मेष राशि के जातकों के लिए कार्यस्थल पर सराहना और आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं, हालांकि उन्हें क्रोध और फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी गई है।

    वृषभ राशि वालों के लिए यह समय करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है, वहीं मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सबसे अधिक फलदायी माना जा रहा है क्योंकि यह युति उनकी ही राशि में बन रही है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं। सिंह राशि वालों के लिए अचानक धन लाभ और प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं, जबकि मीन राशि के जातकों के लिए सुख-सुविधाओं में वृद्धि और रुका हुआ धन मिलने की संभावना बताई जा रही है।

    हालांकि यह ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित भविष्यफल है और वास्तविक परिणाम व्यक्ति के कर्म और परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

  • बड़ा मंगल: भक्ति, सेवा और आस्था का पावन पर्व

    बड़ा मंगल: भक्ति, सेवा और आस्था का पावन पर्व



    नई दिल्ली। बड़ा मंगल हिंदू धर्म में भगवान हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय पर्व है। यह विशेष रूप से ज्येष्ठ माह के मंगलवारों को मनाया जाता है। उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व को बड़े उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिलता है और जगह-जगह भंडारों का आयोजन होता है।

    बड़ा मंगल क्यों मनाया जाता है?
    बड़ा मंगल मनाने का मुख्य उद्देश्य भगवान Hanuman जी की आराधना करना और उनके आशीर्वाद से जीवन में शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति प्राप्त करना है।

    मान्यता है कि हनुमान जी संकटमोचक हैं और उनकी पूजा करने से:

    जीवन के कष्ट दूर होते हैं

    भय और नकारात्मकता समाप्त होती है

    आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है

    मंगल ग्रह से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है

    जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती है

    बड़ा मंगल की शुरुआत और इतिहास
    बड़ा मंगल की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है, हालांकि इसका कोई एक निश्चित ऐतिहासिक प्रमाणित आरंभ नहीं मिलता। यह परंपरा मुख्य रूप से अवध क्षेत्र से जुड़ी हुई है।

    ऐसा माना जाता है कि, यह परंपरा कई सौ वर्ष पुरानी हैमुगल काल और अवध के नवाबों के समय में यह परंपरा और अधिक लोकप्रिय हुईलखनऊ में हनुमान मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा का आयोजन शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे उत्तर भारत में फैल गई। समय के साथ यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सेवा का भी प्रतीक बन गया।

    बड़ा मंगल की परंपराएं और आयोजन
    बड़ा मंगल के दिन देशभर में विशेष धार्मिक और सामाजिक आयोजन किए जाते हैं:

    1. विशेष पूजा और आरती
    हनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगती है। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और आरती का पाठ किया जाता है।

    2. भंडारे और लंगर
    इस दिन सबसे खास परंपरा भंडारे की होती है, जिसमें हजारों लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है। यह सेवा भावना का प्रतीक है।

    3. सेवा कार्य
    भक्त गरीबों, जरूरतमंदों और राहगीरों की सेवा करते हैं, जो इस पर्व की सबसे सुंदर विशेषता है।

    4. भक्ति और जुलूस
    कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

    बड़ा मंगल का सामाजिक महत्व
    बड़ा मंगल केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा भावना का भी प्रतीक है। यह दिन लोगों को जोड़ने का कार्य करता है और समाज में दया, करुणा और सहयोग की भावना को बढ़ाता है।इस दिन अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है और सभी लोग एक साथ सेवा और भक्ति में शामिल होते हैं।

    बड़ा मंगल का आधुनिक महत्व
    आज के समय में भी बड़ा मंगल की परंपरा उतनी ही मजबूत है। बदलते समय के साथ डिजिटल माध्यमों से भी भक्ति कार्यक्रम साझा किए जाते हैंबड़े स्तर पर भंडारों का आयोजन होता हैयुवा पीढ़ी भी इस परंपरा से जुड़ रही हैयह पर्व आधुनिक समाज में भी आस्था और सेवा का संतुलन बनाए हुए है।बड़ा मंगल हमें यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता में निहित है। हनुमान जी की आराधना हमें जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मकता प्रदान करती है।यह पर्व हर साल भक्तों को यह याद दिलाता है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता की सेवा ही सच्ची पूजा है।

  • बड़ा मंगल पर इन राशियों पर बरसेगी हनुमान जी की विशेष कृपा, मिलेगा बड़ा लाभ

    बड़ा मंगल पर इन राशियों पर बरसेगी हनुमान जी की विशेष कृपा, मिलेगा बड़ा लाभ

    नई दिल्ली। बड़ा मंगल 5 मई से शुरू होकर 23 जून तक मनाया जाएगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। यह दिन भगवान हनुमान को समर्पित होता है और सामान्य मंगलवार की तुलना में अधिक विशेष और फलदायी माना जाता है। इस दौरान अनुशासन और ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना गया है।

    बड़ा मंगल के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। मान्यता है कि इसी दिन हनुमान जी ने पांडु पुत्र भीम का अहंकार दूर किया था, जिसके कारण इसे बुढ़वा मंगल कहा जाता है। वहीं त्रेतायुग में ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही हनुमान जी और भगवान श्रीराम की पहली भेंट हुई थी। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में हनुमान जी कुछ विशेष राशियों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं।

    मेष राशि
    मेष राशि को हनुमान जी की प्रिय राशियों में प्रमुख माना जाता है। इस राशि के लोग साहसी और परिश्रमी होते हैं। बजरंगबली की कृपा से इनके कार्यों में तेजी आती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। सच्चे मन से पूजा करने पर सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के जातक नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास के लिए जाने जाते हैं। हनुमान जी की कृपा से इन्हें समाज में सम्मान और सफलता प्राप्त होने के अवसर बढ़ जाते हैं।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के लोग दृढ़ निश्चयी होते हैं। हनुमान जी की आराधना से इनके जीवन में भय और परेशानियां कम होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि के लोग धार्मिक प्रवृत्ति और सकारात्मक सोच वाले माने जाते हैं। हनुमान जी की पूजा से इन्हें सही दिशा मिलती है और जीवन में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलते हैं।

  • ज्येष्ठ मास 2026 बड़ा मंगल का महासंयोग नौकरी कारोबार में सफलता और संकटों से मुक्ति का सुनहरा अवसर

    ज्येष्ठ मास 2026 बड़ा मंगल का महासंयोग नौकरी कारोबार में सफलता और संकटों से मुक्ति का सुनहरा अवसर


    नई दिल्ली। ज्येष्ठ मास 2026 इस बार अत्यंत विशेष और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है क्योंकि इस वर्ष यह महीना लगभग साठ दिनों का होगा और इसमें अधिकमास का भी प्रभाव देखने को मिलेगा जिससे इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है इस अवधि को भक्तजन विशेष पुण्य अर्जित करने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का श्रेष्ठ अवसर मान रहे हैं

    शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास भगवान हनुमान की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है इस महीने में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है मान्यता है कि इसी महीने के मंगलवार को हनुमान जी का श्रीराम से प्रथम मिलन हुआ था इसलिए इस दिन की पूजा का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है वर्ष 2026 में अधिकमास के कारण इस बार आठ बड़े मंगल का विशेष योग बन रहा है जिससे यह समय और भी शक्तिशाली और शुभ माना जा रहा है

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़ा मंगल के दिन किए गए उपाय जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं और व्यक्ति के करियर आर्थिक स्थिति तथा मानसिक शांति पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं ऐसा कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा हनुमान जी को शीघ्र प्रसन्न करती है और भक्तों के संकट दूर होते हैं

    यदि कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी कर्ज या रुके हुए धन से परेशान है तो ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना गया है श्रद्धा भाव से हनुमान मंदिर में बैठकर इस स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और आर्थिक बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं ऐसा विश्वास है कि इससे जीवन में स्थिरता आती है और कर्ज से मुक्ति के मार्ग खुलते हैं

    करियर और नौकरी में तरक्की के लिए बड़ा मंगल विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से प्रमोशन नहीं मिल रहा या मेहनत का उचित फल नहीं मिल रहा तो इस दिन हनुमान जी को मीठा पान अर्पित करना शुभ माना जाता है पान को सफलता और कार्य सिद्धि का प्रतीक माना जाता है इससे कार्यस्थल की बाधाएं दूर होती हैं और नए अवसर प्राप्त होते हैं

    विवाह में देरी या मांगलिक दोष से परेशान लोगों के लिए भी यह समय अत्यंत शुभ बताया गया है ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी को लाल चोला अर्पित करने से वैवाहिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है इससे रिश्तों में सुधार आता है और जीवन में स्थिरता बढ़ती है

    मानसिक तनाव चिंता या शारीरिक पीड़ा से जूझ रहे लोगों के लिए भी बड़ा मंगल विशेष राहत देने वाला माना गया है इस दिन हनुमान जी को सुगंधित इत्र और केवड़े की माला अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है साथ ही लाल वस्त्र धारण करने की सलाह दी जाती है क्योंकि लाल रंग ऊर्जा साहस और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है

    इस प्रकार ज्येष्ठ मास 2026 का बड़ा मंगल भक्तों के लिए केवल धार्मिक अवसर ही नहीं बल्कि जीवन में नई दिशा देने वाला समय माना जा रहा है जिसमें श्रद्धा और भक्ति से किए गए कार्य कई गुना फल देने वाले माने गए हैं

  • ज्येष्ठ मास 2026 में 60 दिन का दुर्लभ संयोग ,दोगुना पुण्य और आस्था का महासंगम

    ज्येष्ठ मास 2026 में 60 दिन का दुर्लभ संयोग ,दोगुना पुण्य और आस्था का महासंगम


    नई दिल्ली। इस वर्ष ज्येष्ठ मास का विशेष संयोग देखने को मिल रहा है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास लगभग 60 दिन का होगा। ऐसा दुर्लभ योग कई वर्षों बाद बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय अत्यंत पुण्यदायी माना जा रहा है। इस बार अधिकमास के कारण ज्येष्ठ मास का महत्व और अधिक बढ़ गया है। भक्तजन इस अवधि को भगवान विष्णु और भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर मान रहे हैं।

    ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई 2026 से हो रही है और यह 29 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान 17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहेगा। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना अधिक माना जाता है। इसलिए इसे दोगुना पुण्य देने वाला महीना कहा जा रहा है।

    इस महीने में मंगलवार का विशेष महत्व होता है जिसे बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। इस बार ज्येष्ठ मास लंबे होने के कारण बड़े मंगल की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी। भक्त इस दिन हनुमान जी की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इससे संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख शांति आती है।

    ज्येष्ठ मास में दान पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान गर्मी चरम पर होती है इसलिए जल सेवा को सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है। लोग राहगीरों को पानी पिलाते हैं। प्याऊ लगवाते हैं। पशु पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करते हैं। इससे सकारात्मक ऊर्जा और पुण्य प्राप्त होता है।

    इस मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान है। तिल अन्न और सत्तू का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख समृद्धि बढ़ती है। साथ ही इस महीने में सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है।

    भक्तजन इस पूरे महीने नियम संयम का पालन करते हैं। दिन में एक बार भोजन करना और सरल जीवन जीना पुण्यकारी माना जाता है। मंगलवार के दिन हनुमान मंदिरों में विशेष भंडारे और पूजा आयोजन किए जाते हैं। बूंदी के लड्डू का भोग लगाया जाता है।

    ज्येष्ठ मास में सूर्य की तीव्र गर्मी रहती है इसलिए दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो सूती वस्त्र पहनकर शरीर को ढककर निकलना चाहिए। इससे स्वास्थ्य की रक्षा होती है।

    इस प्रकार यह ज्येष्ठ मास धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकमास के कारण इसका प्रभाव और भी बढ़ गया है। भक्तजन इसे जीवन में पुण्य अर्जित करने का श्रेष्ठ अवसर मान रहे हैं।

    यह अवधि भक्तों के लिए विशेष साधना और सेवा का समय मानी जाती है। इस दौरान किए गए छोटे से छोटे पुण्य कार्य का भी बड़ा फल मिलता है। इसलिए लोग इस मास को आध्यात्मिक उन्नति का सुनहरा अवसर मानते हैं और श्रद्धा के साथ इसका पालन करते हैं।