Tag: Bada Talab Bhopal

  • MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी

    MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी


    भोपाल मध्य प्रदेश में पिछले करीब 60 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में बारिश अब राहत के साथ आफत भी बनती दिखाई दे रही है। प्रदेश की नर्मदा काली सिंध और बेतवा समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। कई जगह नदी नालों का जलस्तर बढ़ने से रास्ते प्रभावित हुए हैं तो कुछ इलाकों में पुल और सड़कें पानी में डूब गई हैं। दूसरी ओर लंबे समय से पानी की कमी और सूखे जैसे हालात से जूझ रहे बांधों में तेजी से पानी पहुंचने लगा है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्रोतों में नई उम्मीद जगी है।

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 498.3 मिलीमीटर यानी करीब 19.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। हालांकि यह सामान्य बारिश के आंकड़े 579.7 मिलीमीटर यानी करीब 22.8 इंच से अभी 3.2 इंच कम है। प्रदेश में अब तक करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। इसके बावजूद पिछले दो दिनों से सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम ने प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को जमकर भिगो दिया है।

    भोपाल में रुक रुककर हो रही बारिश से शहर का मौसम पूरी तरह बदल गया है। सुबह से बारिश और बादलों के कारण कई इलाकों में धुंध जैसा नजारा देखने को मिला। राजधानी की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब में भी लगातार पानी की आवक बनी हुई है। पिछले दो दिनों में बड़े तालाब का जलस्तर करीब तीन फीट बढ़ा है और यह 1663 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल भराव क्षमता 1666.80 फीट बताई जा रही है। यानी तालाब को अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में अब करीब चार फीट पानी की जरूरत रह गई है। बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़े तालाब के जल्द लबालब होने की उम्मीद बढ़ गई है।

    भोपाल के कोलार केरवा और कलियासोत डैम में भी पानी का स्तर बढ़ा है। कोलार डैम का अधिकतम जलस्तर 1516.40 फीट है और मंगलवार दोपहर तक यहां 1496.65 फीट पानी दर्ज किया गया। केरवा डैम में जलस्तर 1652.52 फीट पहुंच चुका है जबकि इसकी क्षमता 1673 फीट है। दो दिनों में केरवा में करीब तीन फीट पानी बढ़ा है। वहीं कलियासोत डैम का जलस्तर 1650.09 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल क्षमता 1659 फीट है। आने वाले समय में कैचमेंट एरिया में तेज बारिश होने पर इन बांधों में पानी की आवक और बढ़ सकती है।

    बारिश का असर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी साफ नजर आया। रायसेन के सेमरा स्थित सरकारी स्कूल में कमर तक पानी भर गया। सांची रोड और भोपाल रोड पर बेतवा नदी के छोटे पुल पानी में डूब गए। शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक बारिश का पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। इसी जिले में बारिश के पानी से भरे गड्ढे में स्कूल वैन फंस गई और बच्चों ने पत्थर डालकर उसे निकालने की कोशिश की।

    सीहोर में मूसलाधार बारिश के कारण एक मकान पानी से घिर गया और परिवार के फंसने की सूचना पर पुलिस तथा ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में मंदिर और दुकानों में पानी भर गया। वहीं इच्छावर में श्मशान घाट तक पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को शव को कंधे पर लेकर नदी पार करनी पड़ी।

    नर्मदा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदी उफान पर है और नर्मदा से जुड़े बांधों में पानी की आवक बढ़ी है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर डैम में भी जलस्तर बढ़ने की खबर है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। मऊगंज में सेलार नदी के बढ़े जलप्रवाह के कारण करीब 650 फीट की ऊंचाई से गिरती दूधिया जलधारा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    कुल मिलाकर दो दिन पहले तक सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे मध्य प्रदेश में बारिश ने तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। नदियों और बांधों में बढ़ता पानी जहां किसानों और जलस्रोतों के लिए राहत की खबर है वहीं निचले इलाकों में जलभराव और नदी नालों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि प्रदेश में जल संकट की चिंता कितनी कम होती है और किन इलाकों में भारी बारिश नई चुनौती बनती है।

  • भोपाल के बड़ा तालाब पर चला प्रशासन का एक्शन, सीमांकन में 100 से ज्यादा अतिक्रमण चिन्हित

    भोपाल के बड़ा तालाब पर चला प्रशासन का एक्शन, सीमांकन में 100 से ज्यादा अतिक्रमण चिन्हित



    भोपालभोपाल की पहचान माने जाने वाले बड़ा तालाब के किनारों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई एक बार फिर तेज हो गई है। करीब पांच दिन के ब्रेक के बाद गुरुवार को जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने सीमांकन अभियान दोबारा शुरू किया। बैरागढ़ तहसील की टीम लाउखेड़ी, बोरवन और बेहटा गांव पहुंची, जहां तालाब के 50 मीटर दायरे में जमीन की नापजोख कर वास्तविक सीमा तय की गई।

    सीमांकन के दौरान बेहटा क्षेत्र में कुछ स्थानीय लोगों ने एफटीएल (फुल टैंक लेवल) पॉइंट को लेकर आपत्ति जताई और टीम के साथ बहस भी हुई। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि यहां लाल निशान क्यों लगाए जा रहे हैं और इसकी अनुमति किसने दी है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सरकारी रिकॉर्ड और तय मानकों के अनुसार की जा रही है और टीम ने विरोध के बावजूद सर्वे जारी रखा।

    करीब चार घंटे चली इस कार्रवाई में 50 मीटर के प्रतिबंधित दायरे के भीतर 100 से ज्यादा अतिक्रमण चिन्हित किए गए। बोरवन गांव के बूढ़ागांव इलाके और बेहटा की झुग्गी बस्ती में सर्वे के दौरान कई झुग्गियां तालाब के निर्धारित दायरे में पाई गईं। इन स्थानों को चिह्नित करने के लिए टीम ने मौके पर लाल निशान लगाए, ताकि आगे की कार्रवाई के दौरान इन्हें आसानी से चिन्हित किया जा सके।

    इससे पहले 28 फरवरी को हलालपुरा इलाके के पास भी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की थी, जहां तालाब किनारे बने एक गार्डन की बाउंड्रीवॉल और गोदाम को तोड़ा गया था। होली के कारण कुछ दिनों तक कार्रवाई धीमी रही, लेकिन अब प्रशासन ने इसे फिर से तेज कर दिया है।

    अधिकारियों के अनुसार फिलहाल सीमांकन का काम बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में किया जा रहा है। अगले सप्ताह से कार्रवाई टीटी नगर सर्कल में भी शुरू होगी। टीटी नगर क्षेत्र को तालाब किनारे का सबसे प्राइम इलाका माना जाता है, जहां कई होटल, रेस्टोरेंट, सरकारी कार्यालय और आलीशान कॉलोनियां मौजूद हैं। यहां कई प्रभावशाली लोगों की जमीनें भी बताई जाती हैं।

    प्रशासन का कहना है कि सीमांकन पूरा होने के बाद तालाब के 50 मीटर दायरे में आने वाले सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस अभियान से न सिर्फ तालाब की मूल सीमा स्पष्ट होगी बल्कि भोपाल के इस ऐतिहासिक जलस्रोत को बचाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकता है।

  • भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर

    भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर


    भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत के बाद मध्य प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी कड़ी में राजधानी भोपाल में भी कई इलाकों से गंदे पानी की सप्लाई की शिकायतें सामने आने लगी हैं। हालात को देखते हुए नगर निगम का अमला पानी के सैंपल लेने और वाल्व सुधारने में जुटा है। वहीं, मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने खुद मैदान में उतरकर शहर की पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया, जहां कई चौंकाने वाली लापरवाहियां सामने आईं।
    कांग्रेस नेताओं ने सबसे पहले गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के बरखेड़ा पठानी इलाके में स्थित पानी की टंकी का निरीक्षण किया। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला टंकी पर चढ़े और पूरे निरीक्षण का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। इस दौरान टंकी के अंदर और आसपास गंदगी पाई गई। झूमरवाला ने कहा कि इसी टंकी से रोजाना हजारों लोगों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है और यदि यहां साफ-सफाई नहीं होगी, तो लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

    झूमरवाला ने कहा कि दूषित पानी से संक्रमण और गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।

    उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भोपाल में भी इंदौर जैसी दुखद घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि टंकी के आसपास गंदगी फैली हुई है और शराबियों का जमावड़ा भी रहता है, जो हालात को और खराब करता है। झूमरवाला ने कहा कि यह वक्त सिर्फ चेतावनी देने का नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करने का है। पानी जीवन है और इसके साथ किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इसके बाद नगर निगम के कांग्रेसी पार्षद श्यामला हिल्स स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पहुंचे। इस निरीक्षण में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान और मो. जहीर सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद रहे।

    निरीक्षण के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि श्यामला हिल्स के फिल्टर प्लांट का रॉ वॉटर सीधे बड़े तालाब में मिल रहा है, जबकि इसी बड़े तालाब से शहर के कई इलाकों में पीने का पानी सप्लाई किया जाता है।

    नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि रॉ वॉटर का बड़े तालाब में मिलना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने दावा किया कि निरीक्षण के समय वाटर ट्रीटमेंट प्लांट चालू हालत में नहीं था और सिर्फ कागजी कार्रवाई ही दिखाई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पानी का नियमित सैंपल लिया जाता है या नहीं, इसकी कोई रिपोर्ट मौके पर उपलब्ध नहीं कराई गई।

    जकी ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट में नियुक्त केमिस्ट के पास रसायन शास्त्र में ग्रेजुएशन की अनिवार्य योग्यता होनी चाहिए, लेकिन इस संबंध में भी संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पानी की गुणवत्ता जांच में भी खामियां सामने आईं और फिल्ट्रेशन के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन होता नहीं दिखा।

    कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की कि भोपाल की सभी पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट की तुरंत जांच कराई जाए, नियमित सैंपलिंग सुनिश्चित की जाए और जहां भी लापरवाही पाई जाए, वहां सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने साफ कहा कि इंदौर की घटना से सबक लेते हुए राजधानी में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।