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  • बदरीनाथ में आस्था के बीच बड़ा हादसा तप्तकुंड में ज्यादा देर स्नान बना जानलेवा डॉक्टरों ने दी खास सलाह

    बदरीनाथ में आस्था के बीच बड़ा हादसा तप्तकुंड में ज्यादा देर स्नान बना जानलेवा डॉक्टरों ने दी खास सलाह


    नई दिल्ली। बदरीनाथ धाम में आस्था के साथ तप्तकुंड में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध तप्तकुंड में अधिक संख्या में डुबकी लगाने और लंबे समय तक गर्म पानी में रहने को चिकित्सकों ने स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है। शुक्रवार को कुंड में 108 डुबकी लगाने के दौरान दो सगी बहनों की मौत के बाद श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। चिकित्सकों के अनुसार प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त पानी में अधिक समय तक रहने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

    बदरीनाथ के सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ. सचिन राणा के अनुसार तप्तकुंड का पानी प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त है। इसके अलावा कुंड के आसपास गर्म हवाओं का प्रभाव भी रहता है। ऐसे वातावरण में लंबे समय तक रहने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि कुंड में अधिकतम दो से तीन डुबकी लगाने के बाद बाहर निकल जाना चाहिए। खासकर बुजुर्गों और हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    शुक्रवार को हुआ हादसा इस चेतावनी की गंभीरता को सामने लाता है। 71 वर्षीय रामू देवी और 63 वर्षीय प्रेमा देवी सगी बहनें थीं। बताया गया कि दोनों करीब एक सप्ताह से प्रतिदिन तप्तकुंड में 108 डुबकी लगा रही थीं। शुक्रवार को भी उन्होंने इसी तरह स्नान किया लेकिन इसके बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई। दोनों की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। घटना के बाद तीर्थयात्रियों के बीच भी चिंता बढ़ गई और प्रशासन तथा चिकित्सकों की ओर से सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    तप्तकुंड बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता के चलते बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करते हैं। कई श्रद्धालु धार्मिक संकल्प के तहत बार बार डुबकी लगाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ शरीर की क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। गर्म पानी में लंबे समय तक रहने या बार बार डुबकी लगाने से चक्कर आना कमजोरी महसूस होना मूर्छा आना और हृदय संबंधी परेशानी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने के कारण बदरीनाथ में मौसम और वातावरण मैदानी इलाकों से अलग होता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही स्नान करना चाहिए। यदि स्नान के दौरान चक्कर घबराहट सांस लेने में परेशानी अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी महसूस हो तो तुरंत कुंड से बाहर निकलकर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

    चिकित्सकों की सलाह का उद्देश्य श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को रोकना नहीं बल्कि उसे सुरक्षित बनाना है। तप्तकुंड में स्नान करते समय सीमित समय तक रहना और अधिक डुबकी लगाने से बचना जरूरी है। दो महिलाओं की मौत की घटना ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के साथ सावधानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए ताकि बदरीनाथ की यात्रा श्रद्धा के साथ सुरक्षित भी रहे।

  • बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में नया खुलासा, आरोपी कर्मचारी को मिला प्रमोशन और नोट गिनने की जिम्मेदारी

    बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में नया खुलासा, आरोपी कर्मचारी को मिला प्रमोशन और नोट गिनने की जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच के बीच सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपों के घेरे में आए कर्मचारी को मंदिर समिति में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती रहीं। यही नहीं, उन्हें पदोन्नति देकर चढ़ावे की गणना जैसे संवेदनशील कार्य में भी लगाया गया था, जिससे पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के मुताबिक संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में हुई थी। यह ऐसा पद था, जहां पदोन्नति की व्यवस्था नहीं थी। इसके बावजूद वर्ष 2018 में उन्हें व्यक्तिगत सहायक के पद पर समायोजित किया गया। बाद में नियमों में संशोधन कर उनके लिए जनसंपर्क विशेष अधिकारी पद तक पदोन्नति का रास्ता भी तैयार किया गया। इसी दौरान उन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

    जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार

    मामले की जांच के लिए गठित समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, हालांकि समिति के सभी सदस्य अब तक बदरीनाथ नहीं पहुंचे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    बीकेटीसी अध्यक्ष ने क्या कहा

    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र या प्रशासनिक जांच भी कराई जा सकती है। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारी मंदिर समिति का स्थायी कर्मचारी है और विभिन्न अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है। शिकायत मिलने के दिन ही जांच समिति गठित कर संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया था।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे बदले जरूर गए हैं, लेकिन पुराने कैमरों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है। यात्रा सीजन में कर्मचारियों की कमी के कारण कई बार अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी दी जाती हैं।

    संपत्ति की भी होगी जांच

    मंदिर समिति ने संकेत दिए हैं कि संदेह के घेरे में आए कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच की जाएगी। समिति के अनुसार चढ़ावे की राशि प्रतिदिन बैंक में जमा होती है और उसकी गणना बैंक प्रतिनिधि, गणना अधिकारी तथा तीर्थयात्रियों की मौजूदगी में की जाती है। अब तक रिकॉर्ड में किसी तरह की ओवरराइटिंग सामने नहीं आई है।

    कांग्रेस ने उठाए निष्पक्ष जांच पर सवाल

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे जुड़े अधिकारियों को ही जांच में शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति या उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बिना श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल नहीं हो सकता। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा।