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  • बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर हादसे के बाद DGCA का सख्त नियम, दो पायलट की शर्त पर ऑपरेटरों ने दी सेवा बंद करने की चेतावनी..

    बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर हादसे के बाद DGCA का सख्त नियम, दो पायलट की शर्त पर ऑपरेटरों ने दी सेवा बंद करने की चेतावनी..

    नई दिल्ली । उत्तराखंड में बद्रीनाथ के पास हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सख्त कदम उठाया है। चारधाम यात्रा के दौरान संचालित होने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए अब प्रत्येक हेलीकॉप्टर में दो पायलट की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है। यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। हालांकि, इस फैसले के बाद हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि बिना चर्चा किए लागू किए गए इस नियम से परिचालन लागत बढ़ेगी और मौजूदा व्यवस्था के तहत सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो जाएगा। ऑपरेटरों ने DGCA और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UGADA) को पत्र लिखकर फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि समाधान नहीं निकला तो वे चारधाम की चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद कर सकते हैं।

    दो पायलट की अनिवार्यता पर ऑपरेटरों की आपत्ति

    हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों का कहना है कि दो पायलट रखने का फैसला उनसे बातचीत किए बिना लिया गया है। उनके मुताबिक, इस नियम को लागू करने से कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रत्येक हेलीकॉप्टर में दूसरे पायलट की नियुक्ति करने के साथ उसके वेतन, रहने, आने-जाने और अन्य सुविधाओं पर भी खर्च करना होगा। इससे कंपनियों की परिचालन लागत में काफी वृद्धि होगी।

    ऑपरेटरों ने यह भी कहा है कि चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए निर्धारित चार्टर किराये और सीमित मुनाफे को देखते हुए अतिरिक्त खर्च उठाना आसान नहीं होगा। उनका तर्क है कि बढ़ी हुई लागत यात्रियों पर डालना भी उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वे अब तक DGCA के निर्धारित नियमों का पालन करते हुए हिमालय के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित करते रहे हैं। ऐसे में नए नियम को लागू करने से पहले ऑपरेटरों के साथ बातचीत की जानी चाहिए थी।

    सेवाएं बंद करने की चेतावनी

    ऑपरेटरों ने स्पष्ट किया है कि वे दो पायलट रखने की अनिवार्यता को मौजूदा स्वरूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने DGCA और UGADA से तत्काल बैठक बुलाने और इस फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि विमानन सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है, लेकिन ऐसा समाधान भी होना चाहिए जिससे हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन प्रभावित न हो।

    ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया और कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो वे चारधाम यात्रा की चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद कर देंगे। इससे यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा पर निर्भर श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    हादसे में छह लोगों की हुई थी मौत

    यह पूरा मामला 30 अक्टूबर को बद्रीनाथ के पास हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद सामने आया है। शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजकर 15 मिनट पर ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर VT-HCX बद्रीनाथ धाम से देहरादून के सहस्त्रधारा के लिए रवाना हुआ था। उड़ान के दौरान ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हाथी पर्वत के पास स्वारी खर्क में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह स्थान पांडुकेश्वर के ऊपर जोशीमठ घाटी में स्थित है।

    हेलीकॉप्टर में कुल छह लोग सवार थे। इनमें कर्नाटक के पांच श्रद्धालु और दिल्ली निवासी पायलट कैप्टन हिमांशु शामिल थे। इस दुर्घटना में सभी छह लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद बचाव अभियान चलाया गया और सभी मृतकों के शव बरामद किए गए।

    इस दुर्घटना के बाद हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा व्यवस्था और पायलटों की तैनाती को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब दो पायलट की अनिवार्यता को लेकर DGCA और ऑपरेटरों के बीच मतभेद सामने आ गए हैं। एक तरफ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ ऑपरेटर बढ़ती लागत और सेवाओं के संचालन पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। फिलहाल इस विवाद का समाधान बातचीत और नियमों पर पुनर्विचार के बाद ही निकल सकता है।

  • बद्रीनाथ चढ़ावा अनियमितता प्रकरण ने पकड़ी रफ्तार, निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज, शासन ने शुरू की बहुस्तरीय जांच

    बद्रीनाथ चढ़ावा अनियमितता प्रकरण ने पकड़ी रफ्तार, निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज, शासन ने शुरू की बहुस्तरीय जांच

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। विभागीय कार्रवाई के तहत पहले निलंबित किए गए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ अब पुलिस ने भी मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिससे पूरे घटनाक्रम की गहन पड़ताल की जा सके।

    बीकेटीसी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत मंदिर अधिकारी की लिखित तहरीर पर दर्ज हुई, जिसके बाद मामला विभागीय जांच से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। पुलिस अब उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    जानकारी के अनुसार, मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की सूचना मिलने के बाद मंदिर समिति ने प्रारंभिक स्तर पर जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना मंदिर की धनराशि के साथ कथित अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ। इसी आधार पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच के दौरान मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, चढ़ावे की गिनती, धनराशि के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।

    बताया गया है कि प्रारंभिक जांच के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आए दावों को भी संज्ञान में लिया गया था। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आने का उल्लेख किया गया, जिनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई आवश्यक समझी गई। इसी प्रक्रिया के तहत पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

    बीकेटीसी का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। समिति का मानना है कि यदि संबंधित कर्मचारी को पद पर बनाए रखा जाता तो जांच प्रभावित होने की आशंका बनी रहती। इसी कारण पहले प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए निलंबन किया गया और बाद में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

    अब पुलिस जांच और उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त तथ्य या अन्य संबंधित पहलू सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। फिलहाल प्रशासन और मंदिर समिति दोनों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोष तय किए जाएंगे और जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत

    चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत


    नई दिल्ली । उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस बार आस्था के साथ-साथ चिंता का विषय भी बनती जा रही है। यात्रा शुरू होने के महज 39 दिनों के भीतर 105 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस की तकलीफ और पुरानी बीमारियों के कारण हुई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार मौतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रा प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 14 मई तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, लेकिन इसके बाद बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सिर्फ 14 दिनों में 65 और लोगों ने जान गंवा दी। सबसे ज्यादा 50 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं, जबकि बद्रीनाथ में 30, यमुनोत्री में 15 और गंगोत्री-गौमुख क्षेत्र में 10 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है।

    हाल ही में टिहरी जिले के देवप्रयाग में महाराष्ट्र से आए दो श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतकों में 49 वर्षीय किशन नरहरि और 81 वर्षीय विमल ज्ञानोबा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ज्यादातर श्रद्धालु ऊंचाई वाले इलाकों में शरीर पर पड़ने वाले दबाव को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

    चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। अब तक 23 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं, जबकि रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 42 लाख के पार पहुंच गया है। सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ धाम में उमड़ी है, जहां 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ में 6 लाख 42 हजार, यमुनोत्री और गंगोत्री में 4-4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

    सरकार लगातार दावा कर रही है कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेडिकल कैंप, डॉक्टर, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई है। यात्रा शुरू होने से पहले एडवाइजरी जारी कर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई थी। बावजूद इसके लगातार बढ़ रही मौतों ने यात्रा की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई श्रद्धालु अति उत्साह में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और लगातार चढ़ाई की वजह से हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि अगर सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत यात्रा रोककर चिकित्सकीय मदद लें।

    चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने के बाद से ही चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

    आस्था के इस महापर्व में जहां करोड़ों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं लगातार बढ़ती मौतों ने यह साफ कर दिया है कि पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा को हल्के में लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

  • हिमालय की पवित्र वादियों में शुरू हुई आस्था की यात्रा, प्रशासन ने किए व्यापक सुरक्षा इंतजाम

    हिमालय की पवित्र वादियों में शुरू हुई आस्था की यात्रा, प्रशासन ने किए व्यापक सुरक्षा इंतजाम


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में आस्था और आध्यात्मिकता के प्रतीक चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विधिवत रूप से हो गई। इस शुभ दिन पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही देशभर से पहुंचे भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी और पूरा क्षेत्र भक्ति भाव और जयकारों से गूंज उठा।

    गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कपाट खुलने की प्रक्रिया उत्तरकाशी जिले में स्थित इन पवित्र स्थलों पर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में संपन्न हुई। पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जिससे यात्रा के प्रारंभिक चरण में ही उत्साह और आस्था का वातावरण बन गया। चारधाम यात्रा के इस शुभारंभ के साथ ही हिमालय की पवित्र वादियों में धार्मिक गतिविधियों ने गति पकड़ ली है।

    आने वाले दिनों में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खोले जाएंगे। केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाने की तैयारी है। इन दोनों प्रमुख धामों के कपाट खुलने के बाद पूरी चारधाम यात्रा अपने चरम पर पहुंच जाएगी और लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

    राज्य सरकार और प्रशासन ने इस वर्ष यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन टीमें और स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय किया गया है। प्रमुख पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सहायता केंद्र और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

    डिजिटल पंजीकरण और ट्रैकिंग व्यवस्था को भी इस बार और अधिक सख्त किया गया है ताकि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की निगरानी और सुविधा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें और सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है।

    चारधाम यात्रा का हिंदू धर्म में अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन से जीवन के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। हिमालय की गोद में स्थित ये चारों धाम श्रद्धालुओं को न केवल आस्था से जोड़ते हैं बल्कि उन्हें प्रकृति की दिव्यता का अनुभव भी कराते हैं।

    हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं, जिससे उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलता है। स्थानीय होटल, परिवहन, दुकानें और छोटे व्यवसाय इस दौरान सक्रिय हो जाते हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। पर्यटन आधारित गतिविधियों में भी इस अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है।

    इस वर्ष प्रशासन का अनुमान है कि यात्रियों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रह सकती है, जिसके चलते सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। जैसे ही केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे, यात्रा पूरी तरह से अपने चरम पर पहुंच जाएगी और श्रद्धालुओं का विशाल प्रवाह हिमालय की ओर बढ़ेगा।