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  • चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत

    चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत


    नई दिल्ली । उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस बार आस्था के साथ-साथ चिंता का विषय भी बनती जा रही है। यात्रा शुरू होने के महज 39 दिनों के भीतर 105 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस की तकलीफ और पुरानी बीमारियों के कारण हुई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार मौतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रा प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 14 मई तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, लेकिन इसके बाद बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सिर्फ 14 दिनों में 65 और लोगों ने जान गंवा दी। सबसे ज्यादा 50 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं, जबकि बद्रीनाथ में 30, यमुनोत्री में 15 और गंगोत्री-गौमुख क्षेत्र में 10 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है।

    हाल ही में टिहरी जिले के देवप्रयाग में महाराष्ट्र से आए दो श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतकों में 49 वर्षीय किशन नरहरि और 81 वर्षीय विमल ज्ञानोबा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ज्यादातर श्रद्धालु ऊंचाई वाले इलाकों में शरीर पर पड़ने वाले दबाव को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

    चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। अब तक 23 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं, जबकि रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 42 लाख के पार पहुंच गया है। सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ धाम में उमड़ी है, जहां 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ में 6 लाख 42 हजार, यमुनोत्री और गंगोत्री में 4-4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

    सरकार लगातार दावा कर रही है कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेडिकल कैंप, डॉक्टर, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई है। यात्रा शुरू होने से पहले एडवाइजरी जारी कर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई थी। बावजूद इसके लगातार बढ़ रही मौतों ने यात्रा की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई श्रद्धालु अति उत्साह में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और लगातार चढ़ाई की वजह से हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि अगर सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत यात्रा रोककर चिकित्सकीय मदद लें।

    चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने के बाद से ही चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

    आस्था के इस महापर्व में जहां करोड़ों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं लगातार बढ़ती मौतों ने यह साफ कर दिया है कि पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा को हल्के में लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

  • हिमालय की पवित्र वादियों में शुरू हुई आस्था की यात्रा, प्रशासन ने किए व्यापक सुरक्षा इंतजाम

    हिमालय की पवित्र वादियों में शुरू हुई आस्था की यात्रा, प्रशासन ने किए व्यापक सुरक्षा इंतजाम


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में आस्था और आध्यात्मिकता के प्रतीक चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विधिवत रूप से हो गई। इस शुभ दिन पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही देशभर से पहुंचे भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी और पूरा क्षेत्र भक्ति भाव और जयकारों से गूंज उठा।

    गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कपाट खुलने की प्रक्रिया उत्तरकाशी जिले में स्थित इन पवित्र स्थलों पर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में संपन्न हुई। पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जिससे यात्रा के प्रारंभिक चरण में ही उत्साह और आस्था का वातावरण बन गया। चारधाम यात्रा के इस शुभारंभ के साथ ही हिमालय की पवित्र वादियों में धार्मिक गतिविधियों ने गति पकड़ ली है।

    आने वाले दिनों में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खोले जाएंगे। केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाने की तैयारी है। इन दोनों प्रमुख धामों के कपाट खुलने के बाद पूरी चारधाम यात्रा अपने चरम पर पहुंच जाएगी और लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

    राज्य सरकार और प्रशासन ने इस वर्ष यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन टीमें और स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय किया गया है। प्रमुख पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सहायता केंद्र और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

    डिजिटल पंजीकरण और ट्रैकिंग व्यवस्था को भी इस बार और अधिक सख्त किया गया है ताकि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की निगरानी और सुविधा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें और सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है।

    चारधाम यात्रा का हिंदू धर्म में अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन से जीवन के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। हिमालय की गोद में स्थित ये चारों धाम श्रद्धालुओं को न केवल आस्था से जोड़ते हैं बल्कि उन्हें प्रकृति की दिव्यता का अनुभव भी कराते हैं।

    हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं, जिससे उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलता है। स्थानीय होटल, परिवहन, दुकानें और छोटे व्यवसाय इस दौरान सक्रिय हो जाते हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। पर्यटन आधारित गतिविधियों में भी इस अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है।

    इस वर्ष प्रशासन का अनुमान है कि यात्रियों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रह सकती है, जिसके चलते सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। जैसे ही केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे, यात्रा पूरी तरह से अपने चरम पर पहुंच जाएगी और श्रद्धालुओं का विशाल प्रवाह हिमालय की ओर बढ़ेगा।