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  • करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात

    करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात


    शिवपुरी जिले: 
    के करैरा स्थित बगीचा सरकार मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कलयुग में राक्षसी प्रवृत्तियों के बदलते स्वरूप पर अपनी बात रखी। उन्होंने त्रेतायुग के राक्षसों और वर्तमान समय के नकारात्मक व्यवहार की तुलना करते हुए श्रद्धालुओं से सवाल किया कि पहले राक्षस किस तरह के काम करते थे और आज उनके व्यवहार तथा गतिविधियों में क्या बदलाव आया है। कथा के दौरान उन्होंने जीवन, कर्म और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार साझा किए।

    पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से कथा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहले के समय में राक्षस यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में हड्डियां डालकर बाधा उत्पन्न करते थे। वहीं, आज के दौर में राक्षसी प्रवृत्तियां अलग रूप में दिखाई देती हैं। उनके अनुसार, वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर भ्रामक और नकारात्मक पोस्ट के जरिए लोगों के बीच गलत संदेश फैलाना भी ऐसी प्रवृत्ति का उदाहरण है।

    कथा के दौरान उन्होंने परमात्मा की सर्वव्यापकता का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर को पाने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध और पाप रूपी तृष्णा का त्याग करना चाहिए। उन्होंने जीवन में सुधार के लिए रामायण के विभिन्न पात्रों और प्रसंगों से सीख लेने की बात कही। उनके मुताबिक, रामायण व्यक्ति को सामान्य अवस्था से महान बनने की प्रेरणा देती है, जबकि केवट और शबरी जैसे पात्र विनम्रता और विशिष्टता का संदेश देते हैं।

    उन्होंने सुग्रीव और विभीषण के प्रसंगों के माध्यम से प्रभु की शरण में जाने के महत्व को समझाया। साथ ही हनुमानजी के जीवन और समर्पण का उदाहरण देते हुए साधारण जीवात्मा से आध्यात्मिक रूप से ऊंचे स्तर तक पहुंचने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सुधार के लिए रामकथा, कर्मों को बेहतर बनाने के लिए गीता और मृत्यु के विषय को समझने के लिए भागवत का श्रवण महत्वपूर्ण है।

    पंडित शास्त्री ने कथा में एक पौराणिक प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने हनुमानजी को रामचरितमानस का वास्तविक रचयिता बताते हुए कहा कि हनुमानजी ने अपने नाखूनों से पत्थरों पर रामकथा लिखी थी। उनके अनुसार, महर्षि वाल्मीकि के मन में द्वेष उत्पन्न होने की आशंका से हनुमानजी ने उस रचना को समुद्र में विसर्जित कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानजी के वचन के कारण वाल्मीकि ने कलयुग में गोस्वामी तुलसीदास के रूप में अवतार लेकर रामचरितमानस को जनभाषा में लोगों तक पहुंचाया। यह प्रसंग उन्होंने रामकथा के महत्व को समझाने के लिए सुनाया।

    कथा में श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चर्चा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रैलियों में भीड़ जुटाई जाती है, जबकि कथा में सच्चे भक्त पहुंचते हैं। उन्होंने अपने प्रति आकर्षण का श्रेय हनुमानजी को देते हुए कहा कि उनका क्रेज नहीं, बल्कि हनुमानजी का प्रभाव है, जो कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने अधिक भीड़ देखने के इच्छुक लोगों को 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले दिव्य दरबार में आने के लिए कहा।

    करैरा में रामकथा के साथ दिव्य दरबार को लेकर भी लोगों की रुचि बनी हुई है। 27 और 28 अक्टूबर को होने वाले आयोजन का उल्लेख करते हुए पंडित शास्त्री ने श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। कथा के दौरान उनके प्रवचनों में धार्मिक आस्था, जीवन सुधार, कर्म और आधुनिक समय में नकारात्मकता जैसे विषय प्रमुख रहे।

  • क्या बाबा बागेश्वर सच में सोने की खड़ाऊ पहनते हैं? बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’

    क्या बाबा बागेश्वर सच में सोने की खड़ाऊ पहनते हैं? बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’


    छतरपुर।
    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की खड़ाऊ इन दिनों चर्चा में है। मुकेश अंबानी के घर गणेश उत्सव के दौरान उनकी सुनहरे रंग की खड़ाऊ नजर आने के बाद सोशल मीडिया पर इन्हें सोने का बताया जाने लगा। हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी खड़ाऊ लकड़ी की हैं और उन पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है।

    अब इस विवाद पर एक बार फिर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने अपने अंदाज में कहा है कि अगर लोग सोने की खड़ाऊ की चर्चा करते रहेंगे तो वह अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे।

    बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करेंगे’

    छतरपुर में कथा के दौरान खड़ाऊ को लेकर उठ रहे सवालों पर धीरेंद्र शास्त्री ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि अगर उनकी सोने की खड़ाऊ का जिक्र किया गया तो वह अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे। उन्होंने कहा कि वह ऐसे बाबा नहीं हैं जो इस तरह की बातों से डर जाएं।

    उनके इस बयान की रिपोर्ट 20 सितंबर को प्रकाशित हुई है।

    ‘हम माया-मोह छोड़ने वाले बाबा नहीं’

    धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि वह माया-मोह छोड़ने का प्रवचन नहीं देते। उनके अनुसार, उनका संदेश यह है कि व्यक्ति माया-मोह में रहते हुए खूब कमाए और उस धन का इस्तेमाल परमात्मा की ओर बढ़ने में करे।

    उन्होंने कहा कि वह ऐसी बातों में दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहते और जो बात है, उसे उसी रूप में कहेंगे।

    अंबानी के घर जाने के बाद शुरू हुई थी चर्चा

    सोने की खड़ाऊ को लेकर चर्चा उस समय शुरू हुई, जब धीरेंद्र शास्त्री को उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया में गणेश उत्सव के दौरान देखा गया। तस्वीरों और वीडियो में उनके पैरों में सुनहरे रंग की खड़ाऊ दिखाई दीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर इन्हें सोने की खड़ाऊ बताया जाने लगा।

    हालांकि, उपलब्ध तस्वीरों और अन्य रिपोर्टों में इन खड़ाऊ के लकड़ी की होने और उन पर सुनहरी फिनिश होने की जानकारी सामने आई है। इन्हें वास्तव में सोने से बना होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    पहले भी दे चुके हैं सफाई

    धीरेंद्र शास्त्री इस मामले में पहले भी सफाई दे चुके हैं। उनका कहना था कि खड़ाऊ लकड़ी की है और उस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई थी कि सिर्फ रंग के आधार पर इसे सोने की खड़ाऊ बताया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इतना ज्ञान है कि सोना पैरों में पहनने की चीज नहीं है। बाद में इसी विवाद पर ताजा प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में डायमंड की खड़ाऊ बुक करने की बात कही।

    इस तरह फिलहाल ‘सोने की खड़ाऊ’ का दावा धीरेंद्र शास्त्री के अपने बयान के मुताबिक सही नहीं है। उनके अनुसार खड़ाऊ लकड़ी की है, जबकि सुनहरे रंग के कारण उसके सोने की होने की चर्चा शुरू हुई।

  • बंगाल में बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने पर FIR दर्ज, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

    बंगाल में बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने पर FIR दर्ज, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

    नई दिल्ली ।दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर पीठ के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद पश्चिम बंगाल में विवाद बढ़ता जा रहा है। भवानीपुर पुलिस स्टेशन के सामने बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है। इससे पहले विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उनके बयान का बचाव करते हुए विरोध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बंगाल में हनुमंत कथा के दौरान दुर्गा पूजा और नवरात्रि के समय मांसाहारी भोजन को लेकर अपील की थी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के मुताबिक उन्होंने कहा था कि लोग नवरात्रि के दौरान मूर्ति रखें या नहीं रखें, लेकिन पूजा पंडालों के पास मांसाहारी भोजन नहीं बनाया जाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा था कि लोग चाहें तो अपने घरों में मांस खा सकते हैं। उनके मुताबिक दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों के आसपास मांस और शराब की दुकानें बंद होनी चाहिए। उन्होंने मांसाहारी भोजन करने वाले हिंदुओं को लेकर भी टिप्पणी की थी। इन बयानों के बाद तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस की ओर से विरोध शुरू हुआ।

    कलकत्ता जिला कांग्रेस कमेटी के आठ सदस्य भवानीपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे। कमेटी के प्रमुख प्रदीप प्रसाद ने बताया कि वे बाबा बागेश्वर की तस्वीर लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ मौजूद किसी व्यक्ति ने तस्वीर नहीं जलाई। उनके अनुसार तस्वीर जलाने वाले लोग अलग थे।

    प्रदीप प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि बंगालियों की छवि खराब करने के लिए बाहर से लोगों को बुलाया जाता है। दूसरी ओर आसनसोल के कांग्रेस नेता प्रसेनजित ने कहा कि उन्होंने बुधवार को बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाकर विरोध किया था। इसके बाद आसनसोल साउथ पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई।

    इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी धार्मिक परंपराओं के साथ देशभक्ति, राष्ट्रवाद और अखंड भारत के विचार पर भी बात की थी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी परंपरा और संस्कृति की बात की है और जिसे इसे स्वीकार करना है, वह करे, जबकि जिसे स्वीकार नहीं करना है, वह न करे। उनके मुताबिक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने किसी पर अपनी बात नहीं थोपी। इसके बावजूद भवानीपुर थाने के सामने उनकी तस्वीर जलाए जाने पर मुख्यमंत्री ने पुलिस आयुक्त को मामले में शामिल लोगों को तुरंत गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।

    बाबा बागेश्वर के बयान के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब तस्वीर जलाने और उसके बाद दर्ज हुई FIR तक पहुंच गया है। एक तरफ उनके बयान को लेकर राजनीतिक विरोध सामने आया है, वहीं दूसरी ओर तस्वीर जलाने की घटना पर मुख्यमंत्री ने पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर दिया गया बयान अब राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बन गया है।