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  • हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय न करें ये गलतियां, जानें क्या चढ़ाएं और किन बातों का रखें खास ध्यान

    हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय न करें ये गलतियां, जानें क्या चढ़ाएं और किन बातों का रखें खास ध्यान


    नई दिल्ली । हनुमान जी को चोला चढ़ाने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। भक्तों की मान्यता है कि श्रद्धा और विधि विधान के साथ बजरंगबली को चोला अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने का आत्मबल मिलता है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हीं दिनों भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान हनुमान को सिंदूर का चोला चढ़ाते हैं।
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर हनुमान मंदिर जाना शुभ माना जाता है। पूजा से पहले भगवान का ध्यान करते हुए अपनी श्रद्धा के अनुसार संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा की पूजा की जाती है और चोला अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू होती है। कई मंदिरों में चोला चढ़ाने की अलग परंपरा और व्यवस्था होती है इसलिए वहां के पुजारी के निर्देश के अनुसार ही चोला चढ़ाना उचित माना जाता है।

    हनुमान जी को चोला चढ़ाने में सिंदूर और चमेली के तेल का विशेष महत्व बताया जाता है। मान्यता है कि सिंदूर को चमेली के तेल में मिलाकर भगवान को अर्पित करने से भक्त की श्रद्धा पूर्ण होती है। इसके साथ लाल फूल अर्पित किए जा सकते हैं और भगवान को गुड़ तथा चने का भोग लगाने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ और राम नाम का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।

    चोला चढ़ाने से पहले प्रतिमा की साफ सफाई और पूजा की तैयारी श्रद्धा के साथ की जाती है। चोला अर्पित करते समय मन में सकारात्मक विचार रखने और भगवान का ध्यान करने की परंपरा है। भक्त अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखते हैं और उनसे परिवार की सुख शांति तथा जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

    शनिवार को भी हनुमान जी को चोला चढ़ाने की विशेष मान्यता है। शनि संबंधी परेशानियों से राहत पाने के लिए कई भक्त शनिवार को हनुमान जी की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान हनुमान अपने भक्तों को भय और संकट से बचाने वाले माने जाते हैं। हालांकि चोला चढ़ाने की मान्यताएं अलग अलग क्षेत्रों और मंदिरों में अलग हो सकती हैं इसलिए स्थानीय परंपरा का सम्मान करना जरूरी है।

    हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा सामग्री साफ और शुद्ध होनी चाहिए। चोला चढ़ाने से पहले प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी पदार्थ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मंदिर में यदि चोला चढ़ाने के लिए विशेष नियम निर्धारित हैं तो उनका पालन करना चाहिए। कई मंदिरों में भक्त स्वयं प्रतिमा पर चोला नहीं चढ़ाते बल्कि पुजारी के माध्यम से यह सेवा कराई जाती है।

    धार्मिक दृष्टि से हनुमान जी की पूजा केवल बाहरी श्रृंगार तक सीमित नहीं मानी जाती। भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा के साथ सेवा दया संयम और अच्छे आचरण को भी महत्वपूर्ण माना गया है। मंगलवार या शनिवार को चोला चढ़ाने के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना और सकारात्मक व्यवहार बनाए रखना भी पुण्यदायी माना जाता है।

    कुल मिलाकर मंगलवार और शनिवार दोनों ही दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाने के लिए विशेष माने जाते हैं। श्रद्धा और स्वच्छता के साथ पूजा करना तथा मंदिर की परंपराओं का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है। ये धार्मिक मान्यताएं आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं इसलिए इन्हें उसी रूप में समझना चाहिए।

  • हनुमान जन्मोत्सव: आज की पूजा में इन गलतियों से रहें दूर, जीवन में बढ़ेगी सकारात्मकता

    हनुमान जन्मोत्सव: आज की पूजा में इन गलतियों से रहें दूर, जीवन में बढ़ेगी सकारात्मकता


    नई दिल्ली । आज 2 अप्रैल 2026 को पूरे भारत में हनुमान जयंती का भव्य पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन हर साल चैत्र महीने की पूर्णिमा के दिन आता है और इसे भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान राम के अनन्य भक्त, संकटमोचन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस पावन अवसर पर भक्तजन बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मंदिरों में हनुमान जी की पूजा करते हैं और प्रसाद चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

    हनुमान जयंती का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत बड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में डर, बाधाएं और परेशानियां कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। लेकिन ज्योतिषियों और धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन कुछ सामान्य गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। इन गलतियों से बजरंगबली रुष्ट हो सकते हैं और पूजा का फल प्रभावित हो सकता है।

     तामसिक चीजों का सेवन न करें

    हनुमान जयंती के दिन खान-पान में शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन जैसी तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें। केवल सात्विक भोजन ही पूजा और व्रत के लिए उचित माना जाता है।

     काले कपड़े न पहनें

    हिन्दू लोक मान्यता और शास्त्रों के अनुसार पूजा के दौरान काले कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। खासकर हनुमान जयंती के दिन भूलकर भी काले कपड़े पहनने से बचें। सफेद रंग के कपड़े भी कुछ ग्रंथों में अनुकूल नहीं बताए गए हैं। हमेशा लाल, पीला या नारंगी जैसे शुभ रंगों का चयन करें।

    महिलाओं को हनुमान जी की प्रतिमा नहीं छूनी चाहिए

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं। इसलिए महिलाओं को इस दिन हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर को छूने से परहेज करना चाहिए। केवल श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा में भाग लें।

    अगर आप हनुमान जयंती के दिन व्रत रख रहे हैं तो भूलकर भी नमक का सेवन न करें। इस दिन व्रत तोड़ने के लिए मीठे व्यंजन का सेवन करना शुभ माना गया है।

    किसी को परेशान न करें
    हनुमान जयंती के दिन किसी भी जानवर या वानर को परेशान करना वर्जित है। ऐसा करने से हनुमान जी की नाराजगी होती है और घर में अशांति आ सकती है।
     
    भगवान राम का अपमान न करें
    हनुमान जी के अनन्य भक्त होने के कारण, हनुमान जयंती पर भगवान राम का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। अगर इस दिन श्रीराम का अपमान या अनदेखी की जाती है, तो माना जाता है कि हनुमान जी रुष्ट हो सकते हैं।

    इस हनुमान जयंती पर श्रद्धा, भक्ति और सावधानी के साथ पूजा-अर्चना करने से न केवल हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है बल्कि जीवन में सकारात्मकता, भय और संकटों से मुक्ति भी मिलती है। इसलिए आज के दिन उपरोक्त गलतियों से बचें और सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करें।

  • हनुमान अष्टमी 12 दिसंबर: बजरंगबली की पूजा से मिलता है ग्रहदोष और संकटों से छुटकारा

    हनुमान अष्टमी 12 दिसंबर: बजरंगबली की पूजा से मिलता है ग्रहदोष और संकटों से छुटकारा

    पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली हनुमान अष्टमी इस वर्ष 12 दिसंबर को देशभर में धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन हनुमान भक्त विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, आरती और भंडारे का आयोजन करते हैं। कई मंदिरों से चल समारोह भी निकाले जाते हैं।

    हनुमान अष्टमी से जुड़ी प्राचीन मान्यताएँ

    ज्योतिषाचार्य पं. हरिहर पंड्या बताते हैं कि हनुमान अष्टमी से अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं।
    सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, त्रेतायुग में हनुमानजी ने पाताल लोक में अहिरावण का वध किया था और भगवान श्रीराम व लक्ष्मण को बंदीगृह से मुक्त कराया था। इस विजयोत्सव के कारण ही इस दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है।

    एक अन्य मान्यता के अनुसार, अहिरावण का वध करने के बाद हनुमानजी पृथ्वी के नाभि केंद्र उज्जैन लौटे और यहीं विश्राम किया। संयोग से वह दिन पौष कृष्ण अष्टमी का था। तभी से उज्जैन में हनुमान अष्टमी उत्साहपूर्वक मनाई जाती है।

    उज्जैन में विशेष उत्सव और दर्शन का महत्व

    उज्जैन के नानाखेड़ा स्थित चाणक्यपुरी के श्री परशुराम मंदिर में विराजित भजनानंद हनुमानजी के दर्शन का इस दिन विशेष महत्व माना गया है। हर वर्ष बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन, पूजा और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी मंदिर प्रांगण में विशेष अनुष्ठान, आरती और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

    हनुमान पूजा से मिलता है ग्रहों के विपरीत प्रभाव से समाधान

    ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की जन्मपत्री में शनि, मंगल, राहु या अन्य ग्रह प्रतिकूल प्रभाव में हों, उनके लिए हनुमानजी की उपासना अत्यंत फलदायी मानी गई है।

    विशेष रूप से-

    शनि की साढ़ेसाती

    शनि की ढैय्या

    मंगल या राहु के दोष

    से प्रभावित जातकों को हनुमान अष्टमी पर हनुमानजी को तेल और सिंदूर चढ़ाना चाहिए। साथ ही हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक का पाठ करने से संकटों से मुक्ति मिलती है।

    इसके अतिरिक्त, प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को हनुमान मंदिर में दीपक लगाने, प्रसाद चढ़ाने और दर्शन करने से भी जीवन के कष्ट दूर होने की मान्यता है।