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  • बकरीद का अवकाश 27 या 28 मई को…. जानिए किस दिन रहेगी बैंक की छुट्टी?

    बकरीद का अवकाश 27 या 28 मई को…. जानिए किस दिन रहेगी बैंक की छुट्टी?


    नई दिल्ली।
    बकरीद (Bakrid) यानी ईद-उल-अजहा 2026 (Eid al-Adha 2026) के मौके पर बैंकों की छुट्टी को लेकर लोगों में काफी कन्फ्यूजन है। क्या 27 मई बुधवार यानी आज बैंक बंद रहेंगे या 28 मई गुरुवार को? दरअसल, इस बार चांद दिखने और राज्य सरकारों के अलग-अलग नोटिफिकेशन के चलते तारीखों में फर्क देखने को मिल रहा है। आइए, समझते हैं कि आपके शहर में कब रहेगी बैंकों की छुट्टी (Bank Holiday) और कौन सी सेवाएं जारी रहेंगी।


    केंद्र सरकार ने 28 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया

    केंद्र सरकार (Central Government) ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर अवकाश की तारीख में बदलाव किया है। कार्मिक मंत्रालय ने 22 मई को एक बयान जारी कर कहा कि दिल्ली स्थित सभी केंद्रीय प्रशासनिक कार्यालय 27 मई 2026 के बजाय 28 मई 2026 (गुरुवार) को बंद रहेंगे। यानी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ईद की छुट्टी 28 मई को ही मान्य होगी।


    क्या बैंक 27 मई को बंद रहेंगे या 28 मई को?

    बकरीद पर बैंकों की छुट्टी पूरे देश में एक समान नहीं है। यह मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करती है पहला चांद दिखना, दूसरा स्थानीय सरकार की अधिसूचना और तीसरा क्षेत्रीय परंपराएं। इसीलिए कुछ राज्यों में 27 मई को बैंक बंद रहेंगे, तो कुछ जगहों पर 28 मई को छुट्टी रहेगी।


    जम्मू-कश्मीर में बैंकों की छुट्टी आज

    रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलीडे कैलेंडर के अनुसार, जम्मू और श्रीनगर में 27 मई 2026 (बुधवार) को बकरीद (ईद-उल-अजहा) के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि कामर्शियल बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) और स्थानीय क्षेत्रीय बैंक (LAB) सभी इस दिन बंद रहेंगे।


    केरल में बकरीद पर दो दिन की छुट्टी

    केरल सरकार ने बकरीद के लिए लगातार दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 24 मई को जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य में बकरीद 28 मई को मनाई जा रही है, इसलिए 27 मई और 28 मई दोनों दिन सभी सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक उपक्रम बंद रहेंगे। यह आदेश निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत आने वाली संस्थाओं पर भी लागू होगा।


    मई 2026 में अब तक कब-कब बंद हुए बैंक

    · 1 मई (शुक्रवार): मजदूर दिवस/बुद्ध पूर्णिमा
    · 9 मई (दूसरा शनिवार)
    · 23 मई (चौथा शनिवार)
    · हर रविवार (4, 11, 18, 25 और 31 मई)
    अब 27 या 28 मई को बकरीद का अवकाश इसमें जुड़ जाएगा।


    आरटीजीएस और एनईएफटी पर कोई असर नहीं

    अगर आपको जरूरी पैसे भेजने हैं तो चिंता न करें। आरटीजीएस और एनईएफटी सेवाएं 24×7 चालू रहती हैं। 14 दिसंबर 2020 से ये सुविधा हर दिन, हर समय उपलब्ध है, फिर चाहे बैंक की छुट्टी ही क्यों न हो।


    क्या ऑनलाइन बैंकिंग छुट्टी वाले दिन काम करेगी?

    हां, ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं बैंक अवकाश के दिन भी बिना रुकावट चलती हैं। आप यूपीआई से पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग/नेट बैंकिंग, पैसे का लेन-देन, ऑनलाइन लोन अप्लाई करना और चेकबुक के लिए रिक्वेस्ट आसानी से और घर बैठे अपने मोबाइल से ही कर सकते हैं।


    एटीएम से कैश निकालने में दिक्कत नहीं

    अगर बैंक की शाखाएं बंद हैं, तब भी एटीएम चालू रहते हैं। आप जरूरत के अनुसार कैश निकाल और जमा कर सकते हैं। बस यह जरूर ध्यान रखें कि एटीएम में समय पर कैश भरा हो। बता दें अलग-अलग राज्यों में स्थानीय अवकाश भी लागू रहते हैं। इसलिए बैंक की छुट्टी की सही जानकारी के लिए अपने राज्य का आरबीआई कैलेंडर या संबंधित बैंक की वेबसाइट जरूर चेक कर लें।

  • लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद

    लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद



    नई दिल्ली। एक बार फिर तनाव का कारण बन गया है। स्थानीय स्तर पर इस स्थल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिनकी वजह से इलाके में सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन सख्त कदम उठाते हुए किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन पर रोक लगा दी है और पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कुछ संगठनों ने इस विवादित स्थल पर सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा के आयोजन का ऐलान किया था। वहीं दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में बकरीद की नमाज को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बन गई थी। दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई और तत्काल प्रभाव से दोनों धार्मिक कार्यक्रमों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    स्थानीय स्तर पर यह विवाद काफी पुराना बताया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से एक प्राचीन किले का हिस्सा रहा है, जिसे बाद में धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग किया गया। वहीं दूसरी ओर कुछ समुदायों का दावा है कि यह स्थल लंबे समय से धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इन्हीं विरोधाभासी दावों के कारण यहां समय-समय पर तनाव की स्थिति उत्पन्न होती रही है।

    पिछले दिनों इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पासी समुदाय से जुड़े कुछ लोगों ने इसे महाराजा कंस पासी का प्राचीन किला बताते हुए ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने की बात कही। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में पुराने गजेटियर और स्थानीय परंपराओं का भी हवाला दिया। इसके बाद क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों और प्रतीकात्मक आयोजनों को लेकर माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया।

    इसी विवाद के चलते पुलिस ने ‘लाखन आर्मी’ नामक संगठन के कुछ सदस्यों पर मामला दर्ज किया था, जिसके बाद संगठन ने विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी दी थी। संगठन के प्रमुख ने आरोप लगाया है कि उनके समुदाय की ऐतिहासिक पहचान को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे हैं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और खुफिया इकाइयों को सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की भीड़ जुटने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखना है और किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि को रोकना है। साथ ही दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश भी की जा रही है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

    कसमंडी कला का यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद न रहकर संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर प्रशासन की नजर लगातार बनी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह तनाव और बढ़ सकता है, इसलिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी था।

  • असम में बकरीद पर बड़ा सामाजिक संदेश: गो-कुर्बानी से परहेज की स्वैच्छिक पहल, भाईचारे की नई मिसाल

    असम में बकरीद पर बड़ा सामाजिक संदेश: गो-कुर्बानी से परहेज की स्वैच्छिक पहल, भाईचारे की नई मिसाल

    नई दिल्ली। बकरीद के अवसर पर असम से सामने आई एक सामाजिक और प्रशासनिक रूप से संवेदनशील पहल ने देशभर में आपसी सौहार्द, कानून के पालन और धार्मिक समन्वय को लेकर नई चर्चा को जन्म दिया है। राज्य के धुबरी, होजाई, बोंगाईगांव और उधारबंद सहित कई क्षेत्रों की ईदगाह और कब्रिस्तान कमेटियों ने इस वर्ष बकरीद के दौरान गो-वध से स्वैच्छिक रूप से दूरी बनाए रखने का निर्णय लेते हुए समुदाय से औपचारिक अपील जारी की है। इस निर्णय को केवल धार्मिक परंपरा के बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सामाजिक शांति, कानूनी अनुपालन और सामुदायिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयास माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह कदम विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और भरोसे को बढ़ाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    असम में लागू मवेशी संरक्षण कानून के तहत गाय के वध पर सख्त प्रतिबंध है और इसके उल्लंघन पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इस कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर कारावास और आर्थिक दंड जैसी सजा दी जा सकती है। इसी कानूनी ढांचे को ध्यान में रखते हुए ईदगाह कमेटियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि से बचना आवश्यक है जो कानून का उल्लंघन बने या जिससे अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न हो। कमेटियों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं को निभाते हुए भी कानून का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है, और इसी संतुलन के साथ समाज में शांति बनाए रखी जा सकती है।

    धार्मिक दृष्टिकोण से जारी संदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस्लाम में कुर्बानी का मूल उद्देश्य आस्था, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है, न कि किसी विशेष पशु तक सीमित परंपरा। इसी कारण समुदाय से आग्रह किया गया है कि वे वैध विकल्पों के माध्यम से धार्मिक कर्तव्यों का पालन करें, जिससे किसी भी प्रकार की धार्मिक या सामाजिक भावना प्रभावित न हो। यह पहल इस विचार को भी सामने लाती है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक संवेदनशीलता एक साथ आगे बढ़ सकती हैं, बशर्ते संवाद और समझ का मार्ग अपनाया जाए।

    कमेटियों ने अपने अपील पत्र में यह भी कहा है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच आपसी भाईचारा, शांति और सद्भाव बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी संदर्भ में यह भी अनुरोध किया गया है कि कोई भी ऐसा कार्य न किया जाए जिससे किसी अन्य समुदाय की भावनाएं आहत हों या सामाजिक वातावरण में तनाव पैदा हो। पिछले वर्ष कुछ क्षेत्रों में उत्पन्न हुई अप्रिय घटनाओं का उल्लेख करते हुए इस बार विशेष सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने की अपील की गई है ताकि ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति न हो।

    डिजिटल युग में सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्देश दिया गया है कि कुर्बानी से संबंधित किसी भी प्रकार की तस्वीर या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न की जाए। इस अपील का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनावश्यक विवाद या गलतफहमी की स्थिति न बने और समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण बना रहे। यह कदम आधुनिक संचार माध्यमों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एक सावधानीपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    इस पूरे मामले पर राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। मुख्यमंत्री ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक एकता और आपसी सम्मान को मजबूत करने वाला कदम बताया है। प्रशासन की ओर से भी बकरीद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और केवल निर्धारित स्थानों पर ही धार्मिक गतिविधियों को अनुमति देने पर जोर दिया गया है।

    कुल मिलाकर असम की यह पहल इस बात का संकेत देती है कि यदि समाज स्वेच्छा से संवाद, समझ और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़े, तो धार्मिक परंपराएं और सामाजिक व्यवस्था एक-दूसरे के पूरक बन सकती हैं। यह उदाहरण यह भी दर्शाता है कि विविधता भरे समाज में संतुलन और शांति बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

  • इकबाल अंसारी की मांग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, कुर्बानी को बताया अनुचित

    इकबाल अंसारी की मांग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, कुर्बानी को बताया अनुचित

    नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और उसकी कुर्बानी पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और गाय का आदर करना सामाजिक एकता के लिए जरूरी है।

    उत्तर प्रदेश में बकरीद के मौके पर गाय की कुर्बानी और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस के बीच बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस के पूर्व वादी इकबाल अंसारी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि गाय को “गौमाता” माना जाता है और इसका सम्मान हर नागरिक की जिम्मेदारी है, चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो।

    इकबाल अंसारी ने मांग की है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे, ताकि इसके संरक्षण और सम्मान को और मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में उसकी कुर्बानी किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती।

    उन्होंने यह भी कहा कि हम भारतीय मुसलमान हैं और देश की साझा परंपराओं का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। उनके अनुसार समाज में शांति और भाईचारे को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी धर्म एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और उसका सम्मान करें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पड़ोसी धर्म की आस्था का ध्यान रखना भी सामाजिक सद्भाव का हिस्सा है।

    इकबाल अंसारी ने कहा कि गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है और इसे प्रकृति का एक उपयोगी उपहार माना जाता है। इसलिए गाय का संरक्षण और सम्मान और भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्लाम भी निर्दोष और उपयोगी जीवों के प्रति क्रूरता को बढ़ावा नहीं देता, और समाज के कुछ लोग गलत कार्यों से पूरे समुदाय को बदनाम करते हैं।

    उन्होंने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि गायों के साथ किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार नहीं होना चाहिए और जो भी ऐसा करता है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखना चाहिए और केवल सामाजिक सौहार्द के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

    पूर्व वादी ने यह भी कहा कि यदि समाज में भाईचारा बनाए रखना है तो सभी धर्मों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना होगा। उन्होंने अयोध्या के संतों की राय का भी समर्थन करते हुए कहा कि धर्मों के बीच संवाद और सम्मान ही देश को मजबूत बनाता है।

    इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक और राजनीतिक बहस से जोड़कर देख रहे हैं।