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  • MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….

    MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बालाघाट (Balaghat) के बैगा अंचल में 19 बच्चों की मौत ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है. शुरुआत में इन बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण (Malnutrition) को वजह माना गया था, लेकिन ICMR और दूसरे प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों की जांच रिपोर्ट में मौतों की मुख्य वजह मलेरिया और मीजल्स (Malaria and Measles) यानी खसरा संक्रमण (Measles infection) सामने आया है. जांच में खसरा और मलेरिया संक्रमण को बच्चों की मौत की प्रमुख वजह बताया गया है. लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामला खत्म नहीं हुआ है. इसके बजाय बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

    जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे सभी नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. यानी संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी टीकाकरण इन बच्चों तक नहीं पहुंच पाया था. बालाघाट में हुई 19 बच्चों की मौतें संक्रमण से जुड़ी बताई गई हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों में बच्चों के सामने सिर्फ संक्रमण का खतरा नहीं है. इन इलाकों में कुपोषण भी बच्चों के स्वास्थ्य को लगातार कमजोर कर रहा है. एक तरफ मलेरिया और खसरे जैसे संक्रमण हैं और दूसरी तरफ कुपोषण की समस्या. इन दोनों के बीच आदिवासी बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    एक तरफ बीमारी, दूसरी तरफ कुपोषण

    ग्रामीण मध्य प्रदेश में बच्चों की पोषण स्थिति को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा 33 फीसदी से बढ़कर 42 फीसदी से ज्यादा हो गया है. इस स्थिति में सवाल यह है कि बच्चों को बीमारी से बचाने वाली वैक्सीन और कुपोषण से बचाने वाला पोषण दोनों की व्यवस्था में कमी कहां रह गई. बालाघाट में सामने आई 19 बच्चों की मौतों ने इन दोनों व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एक ओर अगर बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें पर्याप्त पोषण भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में संक्रमण और कुपोषण दोनों बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रहे हैं. केंद्र के मिशन पोषण 2.0 के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के साथ 6 साल तक के बच्चों को साल में कम से कम 300 दिन पोषण आहार दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन मध्य प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनबाड़ियों में एक साल में जुलाई तक करीब 260 दिन ही नियमित पोषण आहार मिलने के आरोप लगाए गए हैं. यानी जिस व्यवस्था के तहत बच्चों और महिलाओं तक पूरे साल पोषण पहुंचाने की बात है, वहां नियमित सप्लाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इसी बीच प्रदेश में पोषण आहार बनाने वाले रीवा, सागर, देवास, शिवपुरी और होशंगाबाद सहित जिलों के सभी 7 प्लांट बंद किए जा चुके हैं. पोषण आहार की व्यवस्था में हुए बदलाव ने भी सवाल खड़े किए हैं. जिस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों तक लगातार पोषण पहुंचाना था, वही व्यवस्था बदलाव के दौरान प्रभावित हुई. ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की नियमितता को लेकर चिंता सामने आई है।


    सरकार ने माना, व्यवस्था बदलने के दौरान सप्लाई प्रभावित हुई

    महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री निर्मला भूरिया के मुताबिक पुरानी व्यवस्था में ग्रामीण एवं पंचायत विकास विभाग की ओर से पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा था. मंत्री के अनुसार यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके बाद इसमें बदलाव किया गया. नए टेंडर जारी होने तक स्थानीय स्तर पर विभाग स्वसहायता समूहों के जरिए बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध करा रहा है. हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि व्यवस्था बदलने के दौरान कुछ दिनों तक पोषण आहार की सप्लाई प्रभावित हुई थी. इससे यह सवाल और अहम हो जाता है कि व्यवस्था बदलने के बीच बच्चों तक पोषण आहार की नियमित पहुंच कैसे सुनिश्चित की गई. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति चुनौतीपूर्ण है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विभाग की सचिव को बालाघाट जाने के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य वहां के हालात पर नजर रखना और स्थिति की जानकारी लेना है. बालाघाट के बैगा अंचल में हुई 19 बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने रख दिए हैं. जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण मौतों की मुख्य वजह सामने आने के बाद अब नियमित टीकाकरण भी चर्चा के केंद्र में है. क्योंकि जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों की संख्या बढ़ने का आंकड़ा भी सामने है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    मध्य प्रदेश की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि देश की कमजोर जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा इसी राज्य में रहता है. देश में 75 जनजातीय समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह घोषित किया गया है. मध्य प्रदेश में डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया, श्योपुर और छिंदवाड़ा के जनजातीय समुदाय इस श्रेणी में शामिल हैं. ऐसे में बालाघाट की 19 बच्चों की मौत केवल एक इलाके की घटना नहीं रह जाती, बल्कि यह सवाल उठाती है कि कमजोर जनजातीय इलाकों में बच्चों तक स्वास्थ्य और पोषण की सुविधाएं कितनी नियमित और प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं।

    बालाघाट में बच्चों की मौत की जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण सामने आया है. खसरे से संक्रमित बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हुआ था. दूसरी ओर ग्रामीण मध्य प्रदेश में कुपोषण के आंकड़े बढ़े हैं और पोषण आहार की सप्लाई में भी व्यवधान की बात सरकार ने स्वीकार की है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आदिवासी बच्चों को एक साथ बीमारी और कुपोषण से कैसे बचाया जाए. टीकाकरण और पोषण दोनों की नियमित व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. बालाघाट की घटना ने इस पूरी व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • रेत माफिया का कहर: चेकिंग के दौरान आरक्षक पर चढ़ाया ट्रैक्टर, हालत गंभीर

    रेत माफिया का कहर: चेकिंग के दौरान आरक्षक पर चढ़ाया ट्रैक्टर, हालत गंभीर


    भोपाल । बालाघाट जिले के लालबर्रा थाना क्षेत्र में अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान रेत माफिया की दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। कामथी क्षेत्र में मंगलवार देर शाम चेकिंग के दौरान एक ट्रैक्टर चालक ने पुलिस आरक्षक पर वाहन चढ़ा दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    जानकारी के अनुसार, लालबर्रा थाने में पदस्थ आरक्षक सुनील और राजेश्वर रहांगडाले को मुखबिर से सूचना मिली थी कि क्षेत्र में अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है। सूचना पर दोनों आरक्षक मौके पर पहुंचे और कार्रवाई शुरू की। इसी दौरान जब पुलिस टीम घटनास्थल का वीडियो बनाने लगी, तभी ट्रैक्टर चालक ने अचानक वाहन आरक्षक राजेश्वर रहांगडाले पर चढ़ा दिया।

    घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल आरक्षक को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत नाजुक देखते हुए उन्हें गोंदिया रेफर कर दिया गया। फिलहाल उनका इलाज जारी है और स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। देर रात आईजी ललित शाक्यवार और एसपी आदित्य मिश्रा जिला अस्पताल पहुंचे और घायल आरक्षक का हाल जाना। अधिकारियों ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    आईजी ललित शाक्यवार ने बताया कि घटना के तुरंत बाद आरोपी ट्रैक्टर चालक को पुलिस अभिरक्षा में ले लिया गया है और वाहन को जब्त कर लिया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर अवैध रेत खनन और माफिया के बढ़ते हौसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।

  • बालाघाट में बड़ा खुलासा: सूदखोरी और जमीन घोटाले में वारासिवनी का आरोपी गिरफ्तार, संपत्तियों की जांच शुरू

    बालाघाट में बड़ा खुलासा: सूदखोरी और जमीन घोटाले में वारासिवनी का आरोपी गिरफ्तार, संपत्तियों की जांच शुरू


    नई दिल्ली । बालाघाट के वारासिवनी में सूदखोरी और आदिवासियों की जमीन हड़पने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार अनिल अरोरा को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। पुलिस अब उसके बैंक खातों और संपत्ति दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है, जिसमें बड़े वित्तीय और जमीन घोटाले के संकेत मिले हैं।

    सूदखोरी के जाल में फंसते रहे लो
    वारासिवनी क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे कथित सूदखोरी के नेटवर्क का अब बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी अनिल अरोरा पर आरोप है कि वह आम लोगों के साथ-साथ नौकरीपेशा वर्ग को भी ऊंचे ब्याज दरों पर कर्ज देकर शोषण करता था। बताया जा रहा है कि वह 10 से 15 प्रतिशत तक ब्याज वसूलता था, जिससे कई लोग कर्ज के जाल में फंसते चले गए।

    छापेमारी में मिले चौंकाने वाले दस्तावे
    पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपी के ठिकानों से बड़ी संख्या में खाली चेक, जमीन की रजिस्ट्री और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। ये दस्तावेज कथित तौर पर उसके संगठित अवैध कारोबार की ओर इशारा करते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था।

    आदिवासियों की जमीन पर कब्जे का आरो
    मामले में सबसे गंभीर आरोप आदिवासी समुदाय की जमीनों को हड़पने का है। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी ने कुछ लोगों के नाम का उपयोग कर आदिवासियों से सस्ते दामों पर जमीन खरीदी। इसके बाद उन्हीं जमीनों को बड़े कॉलोनाइजरों और गैर-आदिवासियों को ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया। अब तक इस तरह की करीब 6 रजिस्ट्रियां पुलिस के हाथ लगी हैं।

    कोर्ट ने भेजा जेल, जांच में बढ़ी सख्त
    शनिवार को कोर्ट ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजते हुए जेल भेज दिया। पुलिस अब उसके बैंक खातों और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है ताकि अवैध कमाई का पूरा नेटवर्क सामने आ सके। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

    यह मामला न केवल सूदखोरी की गंभीर समस्या को उजागर करता है, बल्कि आदिवासी भूमि के अवैध लेन-देन और संगठित आर्थिक अपराध की ओर भी इशारा करता है। पुलिस की जांच से आने वाले समय में पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है।

  • कल का मौसम 13 मार्च 2026: दिल्ली में चुभती गर्मी, उत्तर भारत में बारिश की संभावना

    कल का मौसम 13 मार्च 2026: दिल्ली में चुभती गर्मी, उत्तर भारत में बारिश की संभावना

     
    नई दिल्ली । नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में मार्च की शुरुआत से ही मौसम तेजी से बदल रहा है। 13 मार्च को दिल्ली-एनसीआर में तेज धूप और बढ़ती गर्मी का असर रहेगा, वहीं उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना है।

    दिल्ली-एनसीआर में गर्मी का असर

    दिल्ली-एनसीआर में मार्च की शुरुआत से ही जून-जुलाई जैसी गर्मी महसूस हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार 13 मार्च को राजधानी में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। दिनभर तेज धूप और बढ़ती गर्मी के साथ बीच-बीच में बादलों की हल्की आवाजाही भी देखने को मिल सकती है।

    अगले दिनों दिल्ली का मौसम

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 14 मार्च से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर में बदलाव देखने को मिलेगा। बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है और 15 मार्च को छिटपुट बारिश की संभावना है। तेज हवाओं के साथ दिनभर बादल छाए रहने से तापमान में कमी आ सकती है, जिससे गर्मी से राहत मिल सकती है।

    शहरवार 13 मार्च का तापमान

    शहर अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान
    दिल्ली 34°C 18°C
    मुंबई 38°C 23°C
    चेन्नई 34°C 22°C
    कोलकाता 32°C 24°C
    लखनऊ 36°C 19°C
    पटना 34°C 21°C
    रांची 33°C 19°C
    भोपाल 35°C 21°C
    जयपुर 34°C 21°C
    शिमला 22°C 10°C
    नैनीताल 27°C 15°C

    उत्तर भारत में मौसम का मिजाज

    उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कुछ जगहों पर बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश या गरज-चमक की संभावना है। तेज हवाएं 40-55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। बारिश और हवाओं के कारण तापमान में थोड़ी कमी आ सकती है।

    अन्य राज्यों में मौसम

    गुजरात, राजस्थान पश्चिमी हिस्से मध्य प्रदेश: गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण दिन का तापमान 40 डिग्री के आसपास रह सकता है।

    बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर: मौसम अपेक्षाकृत बदलता रहेगा। कुछ इलाकों में हल्की बारिश या गरज-चमक की संभावना है।

    दक्षिण भारत कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सामान्यतः गर्म और शुष्क मौसम रहेगा। समुद्री तटीय इलाकों में हल्की हवाएं चल सकती हैं।

    कश्मीर में लगातार हिमपात और बारिश

    कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार दूसरे दिन हिमपात जारी रहा। घाटी के मैदानी हिस्सों में मध्यम बारिश हुई। केरन, माछिल कुपवाड़ा बांदीपोरा का गुरेज और गांदरबल जिले में सोनमर्गजोजिला क्षेत्र सहित कई ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात हुआ। श्रीनगर सहित घाटी में भी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में ऊंचाई वाले इलाकों में छिटपुट हिमपात और घाटी में बादलों और हल्की बारिश की चेतावनी जारी की है।
  • आजीविका मिशन से बदली महिलाओं की तकदीर, कृष्णा आजीविका समूह बना आत्मनिर्भरता की मिसाल

    आजीविका मिशन से बदली महिलाओं की तकदीर, कृष्णा आजीविका समूह बना आत्मनिर्भरता की मिसाल


    भोपाल । मजबूत संकल्प और सामूहिक प्रयास से सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। इसका जीवंत उदाहरण बालाघाट जिले के लांजी विकासखंड के ग्राम कुल्पा की 13 महिलाओं ने पेश किया है। इन महिलाओं ने कृष्णा आजीविका स्व सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने जीवन में आर्थिक बदलाव लाया है बल्कि पूरे गांव में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम की है।

    कुछ वर्ष पहले जब इन महिलाओं ने समूह की शुरुआत की थी तब उनके पास सीमित संसाधन थे लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत की कमी नहीं थी। उन्होंने नियमित बैठकों मासिक बचत समय पर ऋण वापसी और सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा को अपनाकर समूह को मजबूत बनाया। इसी अनुशासन और एकजुटता ने धीरे धीरे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने का रास्ता दिखाया।

    शुरुआती छह महीनों में ब्लॉक कार्यालय के मार्गदर्शन से समूह को 13 हजार रुपये की चक्रीय निधि प्राप्त हुई। इसी छोटी राशि से उन्होंने अपनी आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की। बाद में बैंक सखी के सहयोग से समूह को प्रथम सीसीएल के रूप में एक लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि को महिलाओं ने कृषि कार्य में निवेश किया और 12 महीनों के भीतर ब्याज सहित पूरा ऋण वापस कर दिया।

    समूह की सक्रियता और भरोसेमंद कार्यप्रणाली को देखते हुए उन्हें द्वितीय सीसीएल के रूप में 2 लाख रुपये और तृतीय सीसीएल में 3 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि से महिलाओं ने बकरी पालन जनरल स्टोर पान दुकान सब्जी उत्पादन ऑनलाइन सेवा केंद्र और ट्रैक्टर खरीद जैसे छोटे छोटे व्यवसाय शुरू किए। इन गतिविधियों से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई बल्कि गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए।

    इसके बाद चतुर्थ सीसीएल के रूप में फिर 3 लाख रुपये की सहायता मिली जिससे महिलाओं ने अपने व्यवसायों का विस्तार किया। साथ ही ग्राम संगठन से 1 लाख 10 हजार रुपये की सीआईएफ राशि भी प्राप्त हुई जिसका उपयोग कृषि और बच्चों की शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया गया।

    आज इस समूह की कई महिलाएं अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वछला दशहरे की मासिक आय करीब 20 हजार रुपये पुस्तकला वर्मा की लगभग 25 हजार रुपये रामबती दमाहे और इमला शेंडे की करीब 15 हजार रुपये तथा विमला नागपुरे की लगभग 8 हजार रुपये हो गई है। अन्य सदस्य भी बकरी पालन और कृषि कार्य से हर महीने 4 से 5 हजार रुपये की आय कमा रही हैं।

    इस समूह की सबसे प्रेरणादायक कहानी नीरा दशहरे की है। उन्होंने समूह से मिले सहयोग और ऋण का उपयोग अपनी तीनों बेटियों की शिक्षा के लिए किया। आज उनकी तीनों बेटियां अच्छी नौकरी कर रही हैं और लगभग एक लाख रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं।

    ग्राम कुल्पा की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि जब महिलाएं संगठित होकर आगे बढ़ती हैं तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं बल्कि पूरे समाज में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई रोशनी भी फैला सकती हैं।

  • मध्य प्रदेश में चौथी बार बारिश का दौर, बालाघाट, डिंडौरी समेत 5 जिलों में आज अलर्ट

    मध्य प्रदेश में चौथी बार बारिश का दौर, बालाघाट, डिंडौरी समेत 5 जिलों में आज अलर्ट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में लो प्रेशर एरिया और दो ट्रफ के असर से एक बार फिर मौसम बदला है। प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार को धूप खिली, लेकिन इसके बाद आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया। मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला और सिवनी जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    लो प्रेशर और ट्रफ का असर

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में लो प्रेशर एरिया सक्रिय है। इसके साथ ही दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से में दो ट्रफ सक्रिय हैं। इन प्राकृतिक सिस्टम के प्रभाव से फरवरी में चौथी बार प्रदेश में बारिश का सिलसिला शुरू हुआ है, जो मंगलवार को भी जारी रहेगा।

    दिन में धूप, शाम को बदला मौसम

    सोमवार को कई जिलों में दोपहर तक धूप खिली रही, लेकिन शाम होते-होते मौसम बदल गया। जबलपुर, रीवा और सीधी में बारिश हुई। रात में मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, ग्वालियर, मुरैना, रीवा, बड़वानी, धार, दतिया, खरगोन, सागर और दमोह में गरज-चमक के साथ बारिश दर्ज की गई।

    फरवरी में बार-बार बारिश का असर
    फरवरी की शुरुआत से ही प्रदेश में दो बार बारिश और ओले गिरे हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा। प्रभावित क्षेत्रों में सरकार ने सर्वे भी कराया। तीसरी बार 18 फरवरी को प्रदेश भीगा, और 19-21 फरवरी को भी मौसम का असर रहा। अब चौथी बार 23 फरवरी से बारिश का दौर शुरू हुआ है।

    तापमान में उतार-चढ़ाव

    बारिश के कारण दिन का तापमान गिरा है, लेकिन रात में हल्की गर्मी बनी रही। रविवार-सोमवार की रात में पचमढ़ी में न्यूनतम 11.2 डिग्री, मंदसौर में 11.7 डिग्री और राजगढ़ में 12.4 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के बड़े शहरों में भी तापमान 12 डिग्री से ऊपर रहा।

  • MP: बालाघाट के जंगल से नक्सली डंप से लाखों रुपये बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले

    MP: बालाघाट के जंगल से नक्सली डंप से लाखों रुपये बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले


    बालाघाट।
    मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) को हाल ही में उस वक्त एक बड़ी सफलता मिली, जब उसने बालाघाट (Balaghat) में नक्सलियों (Naxalites) से अबतक की सबसे बड़ी रिकवरी की। इस दौरान पुलिस ने जंगलों में छुपाकर रखी गई माओवादियों की करीब साढ़े ग्यारह लाख रुपए की नगद राशि बरामद (Cash Amount Recovered) की। पुलिस ने इस कार्रवाई को आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली गोपनीय जानकारी के आधार पर अंजाम दिया।

    इस बारे में एक प्रेस नोट जारी करते हुए बालाघाट पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से उनके सहयोगियों एवं जंगल मे छिपाए गए डंप के संबध मे लगातार पूछताछ की जा रही है। इसी दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों से पूछताछ के आधार पर बालाघाट के विभिन्न जंगलों में डम्प करके छिपाए गए 11 लाख 57 हजार 385 रुपए नगद की रिकवरी की गई, जो बालाघाट में नक्सलियों से की गई अब तक की सबसे बडी कैश रिकवरी है।

    पुलिस ने बताया कि इसके अलावा आत्मसमर्पण किए हुए नक्सलियों की निशादेही से बालाघाट के विभिन्न जंगल से भारी मात्रा मे डम्प किए गए रायफल, पिस्टल, एम्युनेशन, ग्रेनेड लॉन्चर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, IED निर्माण सामग्री एवं विस्फोटक सहित अन्य सामग्रियां जब्त की गई हैं।


    इन हथियारों व विस्फोटक सामग्री की हुई बरामदगी

    4 सेमीऑटोमैटिक राइफल, 1 ग्रेनेड लॉन्चर, 1 बोल्ट एक्शन राइफल, 8 पम्प एक्शन सिंगल शॉट राइफल, 1 हैंड मेड देशी कट्टा, 5 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 1 वोल्ट मीटर, 4 बैटरीसेल, 451 राउंड कारतूस, 26 मैगजीन, 1 क्लेमोर माइन्स पाइप, 500 ग्राम बारूद, 16 किलो विस्फोटक सामग्री, 22 नग मेटल स्पाइक्स, 2 किलो बोल्ट व छर्रे, 4 मोटोरोला मैन पैक सेट, 1 कैमरा व बड़ी संख्या में अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस।

    इसके अलावा दैनिक उपयोग कि सामग्री टेंट बनाने का सामान, नक्सल वर्दी, पिड्डु बैग, नक्सल साहित्य, राशन सामग्री, खाना पकाने का सामान, हथियार मेंटेनेंस सामग्री, ड्रिल मशीन, अन्य सामग्री भी बरामद हुई है।


    आखिरी दो नक्सलियों ने किया था आत्मसमर्पण

    बता दें कि मध्यप्रदेश में नक्सल विरोधी सर्चिग अभियान के दौरान मुठभेड़ में मारे जाने के डर से 11 दिसंबर को मध्यप्रदेश में बचे हुए अंतिम 2 नक्सलियों DVCM दीपक उर्फ सुधाकर एवं ACM रोहित उर्फ मंगलू ने भी आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने यह कदम शासन की नीतियों पर विश्वास जताते हुए किया था। पुलिस के अनुसार मध्यप्रदेश में इस साल अब तक सबसे ज्यादा 13 हार्डकोर सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों ने भारत के संविधान पर अपनी निष्ठा जताते हुए हथियार त्याग कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 10 हार्डकोर नक्सलियों को सुरक्षाबलों द्वारा धराशायी कर दिया गया है।

    भारत सरकार द्वारा नक्सलवाद के उन्मूलन हेतु मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पुलिस द्वारा लगातार चलाए जा रहे सर्चिंग अभियानों के परिणाम स्वरूप मध्य प्रदेश से सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त किया जा चुका है।

  • सागर जिले में सड़क हादसे में मुरैना के 4 बीडीएस जवानों की मौतएक घायल

    सागर जिले में सड़क हादसे में मुरैना के 4 बीडीएस जवानों की मौतएक घायल


    सागर । मध्य प्रदेश के सागर जिले के बांदरी मालथौन क्षेत्र में 5 दिसंबर2023 की सुबह करीब 4 बजे एक गंभीर सड़क दुर्घटना ने चार बीडीएस जवानों की जान ले ली। यह हादसा नेशनल हाईवे 44 पर हुआजब मुरैना जिले के बम एंड डॉग स्क्वॉड BDS के जवान बालाघाट से ड्यूटी करके लौट रहे थे। दुर्घटना में मुरैना बीडीएस के चार जवानों की मौत हो गई और एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया।

    जानकारी के अनुसारयह घटना एक ट्रक और बम एंड डॉग स्क्वॉड वाहन के बीच आमने-सामने की टक्कर से हुई। घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। इस हादसे में चार जवानों की मौत हो गईजबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल है। घायल जवान को पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गयाऔर बाद में उनकी स्थिति को देखते हुए दिल्ली के गंगा राम अस्पताल के लिए एयर एंबुलेंस से रेफर किया गया।

    हादसे में मारे गए जवानों के नाम

    प्रधुमन दीक्षित मुरैना अमन कौरव मुरैना परमलाल तोमर मुरैनाड्राइवर विनोद शर्मा भिंडडॉग मास्टर दुर्घटना के बाद एक और जवान राजीव चौहान मुरैनाघायल हुआजिनका इलाज सागर के बंसल अस्पताल में चल रहा है। राहत की बात यह है कि हादसे में वाहन में सवार डॉग पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई चोट नहीं आई।

    हादसे की जानकारी

    मिली जानकारी के अनुसारये सभी जवान बम एंड डॉग स्क्वॉड BDSके सदस्य थे और बालाघाट में अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद मुरैना लौट रहे थे। यह वाहन सड़क पर तेज गति से चल रहा थातभी सामने से आ रहे ट्रक के साथ यह टक्कर हो गई। दुर्घटना के कारण वाहन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार जवानों को गंभीर चोटें आईं। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है और स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    प्रशासन की प्रतिक्रिया

    घटना के बाद सागर पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। साथ हीपुलिस अधिकारियों ने अस्पताल में घायल जवान का इलाज सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक इंतजाम किए। सागर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी बंसल अस्पताल में इलाज की निगरानी कर रहे हैंताकि घायल जवान को सर्वोत्तम इलाज मिल सके।

    सड़क सुरक्षा की आवश्यकता

    यह हादसा इस बात की ओर इशारा करता है कि मध्य प्रदेश के कई प्रमुख राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा की स्थिति अभी भी गंभीर है। यहां नियमित दुर्घटनाएं होती रहती हैंऔर यह घटना उसी का एक और उदाहरण है। प्रशासन और संबंधित विभागों को सड़क सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता हैताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    समाज और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी क्षति

    मुरैना के इन चार जवानों की मौत ने न केवल उनके परिवारों को बल्कि पूरे प्रदेश को शोक में डुबो दिया है। बीडीएस टीम के ये जवान अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए हमेशा तत्पर रहते थेऔर उनकी शहादत इस बात का प्रमाण है कि वे अपने काम के प्रति कितने समर्पित थे। इन जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर सुरक्षा का काम किया थाऔर आज उनके बलिदान को याद किया जाएगा। यह घटना एक दुखद है कि हमें सड़क सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क रहने की जरूरत हैऔर साथ ही सुरक्षा बलों की जिंदगियों की अहमियत को समझना चाहिए।