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  • पेपर लीक के बाद नेपाल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार ने जांच तेज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    पेपर लीक के बाद नेपाल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार ने जांच तेज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    नई दिल्ली । नेपाल के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल त्रिभुवन विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ बिजनेस स्टडीज (एमबीएस) प्रथम सेमेस्टर का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना सामने आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेपाल पुलिस ने एक शिक्षक को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

    जानकारी के अनुसार, 24 जुलाई को आयोजित एमबीएस प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद एक व्हाट्सएप समूह में साझा किया गया। अगले दिन इस घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और गोपनीयता व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। छात्रों ने आरोप लगाया कि यदि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र ऑनलाइन उपलब्ध था तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

    पुलिस जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र प्रसारित करने के आरोप में संदीप सिंह नामक शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह काठमांडू के दो शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं और विद्यार्थियों के बीच एक लोकप्रिय नाम से जाने जाते हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ परीक्षा गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने केवल किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त प्रश्नपत्र को संबंधित व्हाट्सएप समूह में आगे भेजा था। उसने यह भी कहा कि उसे इस घटना से कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ और वह केवल पहले से प्रसारित सामग्री को साझा कर रहा था। हालांकि जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब एक छात्र ने संबंधित व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक कर दिए। जांच के दौरान सामने आए डिजिटल रिकॉर्ड में परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद प्रश्नपत्र की पीडीएफ साझा किए जाने के साथ-साथ उसके विस्तृत उत्तर भी उपलब्ध कराए जाने के संकेत मिले। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर कुछ लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी गई।

    नेपाल के शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीर मानते हुए गृह मंत्रालय और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया। मंत्रालय का कहना है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि प्रश्नपत्र लीक की घटना किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी के बजाय एक शिक्षक से जुड़ी हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    इस घटना ने नेपाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है। हाल के वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, परीक्षा सुरक्षा और युवाओं के विश्वास जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। अब छात्र संगठनों का कहना है कि केवल दोषियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार भी आवश्यक हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सरकार के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

  • नेपाल के पीएम बालेन शाह ने बदला रुख, भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात कर कूटनीतिक संतुलन का दिया संकेत

    नेपाल के पीएम बालेन शाह ने बदला रुख, भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात कर कूटनीतिक संतुलन का दिया संकेत

    नई दिल्ली । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से जाना जाता है, अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में अपनाई गई एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक नीति में बदलाव करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं करेंगे और सभी आधिकारिक संपर्क विदेश मंत्रालय की निर्धारित प्रक्रिया या समूह बैठकों के माध्यम से ही होंगे। अब पहली बार वह इस नीति से हटते हुए भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने की तैयारी में हैं। इसे नेपाल की संतुलित विदेश नीति और बदलती कूटनीतिक आवश्यकताओं का संकेत माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से प्रधानमंत्री की अलग-अलग बैठकें एक ही दिन आयोजित की जाएंगी। दोनों बैठकों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि नेपाल अपने दोनों प्रमुख पड़ोसी देशों के साथ समान महत्व और संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है। सरकार की ओर से इन बैठकों की पुष्टि की गई है, हालांकि उनकी अंतिम तिथि सार्वजनिक नहीं की गई है। विदेश मंत्रालय इन मुलाकातों की तैयारियों में जुटा हुआ है।

    प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने पारंपरिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक नया कूटनीतिक प्रोटोकॉल लागू किया था। इसके तहत उन्होंने तय किया कि वह केवल किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के प्रतिनिधियों से ही व्यक्तिगत बैठक करेंगे। राजदूतों, उप-मंत्रियों या अन्य अधिकारियों से मुलाकात विदेश मंत्रालय की मौजूदगी में या समूह स्तर पर ही होगी। उनका मानना था कि विदेश नीति व्यक्तिगत संपर्कों के बजाय संस्थागत व्यवस्था के तहत संचालित होनी चाहिए और इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

    नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही थी कि प्रभावशाली देशों के राजदूत सीधे प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात करते थे। कई बार इन बैठकों का कोई औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था। विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसी व्यवस्था से विदेश नीति पर अनौपचारिक प्रभाव बढ़ सकता है और राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते हैं। इसी सोच के आधार पर बालेन शाह ने नई व्यवस्था लागू की थी, जिसके चलते कई विदेशी प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित व्यक्तिगत मुलाकातें नहीं हो सकीं।

    बताया जाता है कि उन्होंने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री, अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों तथा चीन के कुछ उच्च प्रतिनिधियों से भी व्यक्तिगत मुलाकात नहीं की थी। हालांकि एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष मसातो कांडा के साथ उनकी एकल बैठक को विशेष परिस्थिति में अपवाद माना गया था। इन घटनाओं ने उनकी नई कार्यशैली को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा पैदा की थी।

    अब प्रधानमंत्री के रूप में कुछ महीनों के अनुभव के बाद बालेन शाह का रुख अधिक व्यावहारिक दिखाई दे रहा है। नेपाल की भौगोलिक, आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत और चीन दोनों के साथ नियमित एवं प्रत्यक्ष संवाद बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बन गया है। ऐसे में व्यक्तिगत स्तर पर संवाद को पूरी तरह सीमित रखने की नीति व्यवहारिक चुनौतियां पैदा कर रही थी। यही कारण माना जा रहा है कि उन्होंने पहली बार अपने पुराने निर्णय में बदलाव करने का फैसला लिया है।

    नेपाल की विदेश नीति लंबे समय से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच खुली सीमा, सांस्कृतिक संबंध तथा लोगों के बीच गहरे सामाजिक जुड़ाव हैं। दूसरी ओर चीन ने हाल के वर्षों में नेपाल के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और परिवहन परियोजनाओं में बड़े निवेश किए हैं। ऐसे में दोनों देशों के साथ समान दूरी और समान निकटता बनाए रखना काठमांडू की कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बालेन शाह का यह नया कदम भी इसी संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

    भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

    नई दिल्ली । भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब पड़ोसी देश नेपाल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित मानकों का विस्तृत मसौदा जारी किया गया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, परिवहन, लेबलिंग और मूल्य निर्धारण तक के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

    प्रस्तावित मानकों के अनुसार नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को पेट्रोल में अधिकतम 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुसार कैबिनेट के निर्णय से इथेनॉल मिश्रण का अनुपात बदला जा सकेगा। इससे ऊर्जा नीति को समय-समय पर बदलती जरूरतों के अनुरूप लचीला बनाए रखने की कोशिश की गई है।

    मसौदे में इथेनॉल उत्पादन के स्रोतों और तकनीकों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। साथ ही इसके सुरक्षित भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया है। चूंकि इथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए इसे केवल सुरक्षित, सूखे और पूरी तरह लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखने का प्रावधान किया गया है। परिवहन और भंडारण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना या पर्यावरणीय जोखिम से बचा जा सके।

    सरकार ने उत्पाद की पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कंटेनर पर विस्तृत जानकारी देना भी अनिवार्य किया है। इसमें निर्माता का नाम, बैच नंबर, उत्पादन की मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना होगा। इसके अलावा इथेनॉल पूरी तरह स्वच्छ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें किसी प्रकार के ठोस कण नहीं होने चाहिए। मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी आवश्यक होगी।

    प्रस्तावित नियमों में वाहन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे ऐसे पदार्थों के उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो इंजन, रबर पाइप और ईंधन प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सरकार का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले इथेनॉल के उपयोग से वाहनों की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहेगी और ईंधन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा।

    नेपाल सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना, नए रोजगार के अवसर सृजित करना और पेट्रोल आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। साथ ही सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित न हो। इसी वजह से खाद्य उपयोग वाले अनाज को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया गया है।

    इसके स्थान पर चीनी उद्योग से निकलने वाले शीरे, नेपियर घास, कृषि एवं वन अपशिष्ट, धान के पुआल, मक्के के डंठल, गेहूं की भूसी, खराब एवं अनुपयोगी अनाज, कसावा तथा अन्य जैविक स्रोतों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया अपनाने की भी शर्त रखी है। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को बेचा जा सकेगा, जबकि इसकी कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा, जैव ईंधन उत्पादन और हरित अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।