Tag: Balochistan

  • भारत विरोधी दुष्प्रचार की फिर नाकाम कोशिश: रक्षा मंत्री के नाम पर फैलाए गए झूठे दावे की खुली पोल, फर्जी नैरेटिव पर बड़ा खुलासा

    भारत विरोधी दुष्प्रचार की फिर नाकाम कोशिश: रक्षा मंत्री के नाम पर फैलाए गए झूठे दावे की खुली पोल, फर्जी नैरेटिव पर बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली।भारत के खिलाफ भ्रामक सूचनाओं और झूठे प्रचार के जरिए माहौल प्रभावित करने की कोशिशें लगातार सामने आती रही हैं। एक बार फिर ऐसा मामला चर्चा में आया, जब सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के नाम से एक कथित बयान को वायरल कर भारत की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की गई। दावा किया गया कि रक्षा मंत्री ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को लेकर भारत के समर्थन से जुड़ा बयान दिया है। यह खबर तेजी से प्रसारित होने लगी और इसे कई लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। हालांकि जांच पड़ताल के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह दावा पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे था। इसके बाद पूरे मामले ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के गंभीर खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

    जांच के दौरान यह सामने आया कि रक्षा मंत्री द्वारा ऐसा कोई बयान कभी दिया ही नहीं गया था। वायरल सामग्री को तथ्यों से जोड़कर देखने पर उसमें कई विसंगतियां दिखाई दीं, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि इसके पीछे भ्रम पैदा करने और लोगों को गुमराह करने की मंशा थी। अधिकारियों ने भी साफ कर दिया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही जानकारी का वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। इस तरह की गतिविधियां केवल अफवाह फैलाने और लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने का काम करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों पर गलत सूचनाओं का प्रसार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हो गया है।

    हाल के वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े विषयों को लेकर कई बार इस तरह की फर्जी जानकारियां सामने आई हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब तस्वीरों, वीडियो और ऑडियो में बदलाव कर उन्हें वास्तविक जैसा दिखाना पहले से अधिक आसान हो गया है। यही कारण है कि कई बार सामान्य लोग ऐसी सामग्री को सच मान लेते हैं और बिना जांच किए आगे साझा कर देते हैं। ऐसे मामलों में झूठी सूचनाएं कुछ ही समय में लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा कर देती हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर जानकारी पर आंख बंद करके विश्वास करना सही नहीं है। किसी भी संवेदनशील विषय, विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी मामलों से जुड़ी खबरों की पुष्टि करना बेहद आवश्यक हो गया है। गलत सूचना केवल समाज में भ्रम नहीं फैलाती बल्कि कई बार राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर प्रभाव छोड़ सकती है। इसलिए लोगों को जागरूक रहने और किसी भी संदिग्ध जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करने की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दौर में सूचना जितनी तेजी से लोगों तक पहुंच रही है, उतनी ही तेजी से झूठ और भ्रम भी फैल रहे हैं। ऐसे में जिम्मेदार नागरिक होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सतर्कता, जागरूकता और तथ्यों की जांच ही फर्जी खबरों के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार साबित हो सकती है।

  • बलूचिस्तान में बड़ा हमला: सेना के जवानों और नागरिकों को ले जा रही ट्रेन बनी निशाना

    बलूचिस्तान में बड़ा हमला: सेना के जवानों और नागरिकों को ले जा रही ट्रेन बनी निशाना



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में रविवार को एक भीषण बम धमाके से हड़कंप मच गया। यह धमाका उस समय हुआ जब सेना के जवानों और उनके परिवारों को लेकर जा रही एक ट्रेन चमन फाटक के पास से गुजर रही थी। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    पाकिस्तानी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में सेना के जवान और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। धमाका इतना शक्तिशाली था कि ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतरकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और उनमें आग लग गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में घटनास्थल से घना काला धुआं उठता देखा गया, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे रहे। कई घायल यात्रियों को स्ट्रेचर के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार यह ट्रेन क्वेटा से पेशावर की ओर जा रही थी और उसमें जवान अपने परिवारों के साथ ईद की छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा कर रहे थे। धमाके के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया और जांच शुरू कर दी गई है।

    फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन बलूचिस्तान में लंबे समय से सक्रिय अलगाववादी और उग्रवादी गुटों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सभी संभावनाओं की जांच कर रही हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे पिछड़ा प्रांत माना जाता है, जहां लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • बलूचिस्तान के 1 ट्रिलियन डॉलर खनिज खजाने पर पाकिस्तान की सख्ती, सैन्य तैनाती से बढ़ा तनाव

    बलूचिस्तान के 1 ट्रिलियन डॉलर खनिज खजाने पर पाकिस्तान की सख्ती, सैन्य तैनाती से बढ़ा तनाव

    नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में खनिज संपदा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद गहराता जा रहा है। इस क्षेत्र में मौजूद अरबों-खरबों डॉलर के सोना, तांबा और रेयर अर्थ खनिजों को लेकर पाकिस्तानी सरकार और सेना की गतिविधियों का विरोध लगातार तेज हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बलूचिस्तान में सैन्य और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम खनिज संसाधनों और खनन परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इसके तहत फ्रंटियर कोर की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात करने और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा चौकियां स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूचिस्तान का रखशान डिवीजन, सैंदक और रेको डिक जैसे क्षेत्र बड़े खनिज भंडारों के लिए जाने जाते हैं। यहां तांबा और सोने की विशाल खदानें मौजूद हैं, जिनमें अरबों टन अयस्क होने का अनुमान लगाया जाता है। इन खनिज संसाधनों का अनुमानित मूल्य 1 से 6 ट्रिलियन डॉलर तक बताया जाता है।

    पाकिस्तान लंबे समय से इन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को खनन परियोजनाओं के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि आर्थिक संकट से राहत मिल सके। इनमें कुछ बड़ी अंतरराष्ट्रीय खनन कंपनियों की भागीदारी भी बताई जाती है, जो विभिन्न परियोजनाओं में हिस्सेदारी रखती हैं।

    हालांकि, बलूचिस्तान में इस खनन गतिविधि का लगातार विरोध हो रहा है। स्थानीय बलूच अलगाववादी समूहों और विद्रोही संगठनों का आरोप है कि उनकी जमीन के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है और इसका लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। इसी कारण यहां कई बार सुरक्षा बलों और विद्रोही गुटों के बीच हिंसक झड़पें भी हो चुकी हैं।

    पिछले समय में खनन स्थलों और सुरक्षा बलों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र की स्थिति और अधिक तनावपूर्ण बनी हुई है। विद्रोही गुटों का कहना है कि संसाधनों पर उनका पहला अधिकार है, लेकिन सरकार और सेना इन खजानों का उपयोग बाहरी कंपनियों के साथ मिलकर कर रही है।

    बलूचिस्तान की खनिज संपदा को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र दुनिया के सबसे समृद्ध प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में से एक है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों के कारण इसका पूरा लाभ अभी तक नहीं उठाया जा सका है।

    फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से सुरक्षा बढ़ाने के फैसले के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं

    असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने बलूचिस्तान की धरती से एक बार फिर भारत का नाम लिए बिना कड़ा बयान दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने बाहरी ताकतों पर पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने और दुष्प्रचार चलाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी कोशिशें देश की तरक्की और स्थिरता को रोक नहीं सकतीं।

    मुनीर ने कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, क्वेटा में अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान का “निश्चित उदय” किसी भी प्रकार के प्रॉक्सी वॉर, गलत सूचना अभियान या आतंकवाद से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना और जनता मिलकर देश से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    अपने भाषण में उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात सैन्य अधिकारियों की ट्रेनिंग और पेशेवर क्षमता की भी सराहना की। मुनीर ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और ऐसे में सेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, नई तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार काम करना होगा।

    उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा हालात में निरंतर प्रशिक्षण और उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    मुनीर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ “शत्रु ताकतें” पाकिस्तान के खिलाफ फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सेना और जनता की एकता के आगे ये प्रयास सफल नहीं होंगे।

    बलूचिस्तान में स्थायी शांति और विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्रगति सुरक्षा, समावेशी विकास और बेहतर शासन पर निर्भर करती है।

  • बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

    बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

    इस्लामाबाद। बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में पांच और नागरिकों का अपहरण कर लिया है। इन घटनाओं ने प्रांत में पहले से जारी अस्थिरता और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।

    मानवाधिकार संगठन ‘पांक’, जो बलूच नेशनल मूवमेंट ह्यूमन राइट्स डिपार्टमेंट (PANK) से जुड़ा है, ने बताया कि दो शिक्षकों 45 वर्षीय अब्दुल हमीद और 36 वर्षीय नासिर अली को 5 मई को पंजगुर जिले के पारूम क्षेत्र से फ्रंटियर कोर के कर्मियों द्वारा उठाया गया। संगठन ने कहा कि शिक्षकों को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र में मनमानी हिरासत और मानवाधिकार उल्लंघनों के बढ़ते पैटर्न को दर्शाता है।

    इसके अलावा 27 वर्षीय अल्ताफ हुसैन बलूच को 2 मई को हब चौकी से आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) के कर्मियों द्वारा कथित रूप से उठाया गया। उसी दिन एक और घटना में 40 वर्षीय जान खान और उनके 20 वर्षीय बेटे अब्दुल सत्तार को क्वेटा में उनके घर से कथित रूप से अगवा किया गया।

    मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।
    मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।

    क्वेटा में विरोध प्रदर्शन जारी
    इधर, प्रांतीय राजधानी क्वेटा में बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेतृत्व में प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्र बोलन मेडिकल कॉलेज के बाहर धरना दे रहे हैं, जो अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी खदीजा बलूच की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिन्हें 21 अप्रैल को बीएमसी महिला छात्रावास से सुरक्षा बलों द्वारा उठाए जाने का आरोप है।

    बीवाईसी के अनुसार, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों और परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बलूचिस्तान में लंबे समय से जबरन गायब किए जाने और कथित गैर-न्यायिक हत्याओं के मामलों को लेकर तनाव बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्र में सामाजिक ताने-बाने को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

  • Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल

    Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल


    इस्लामाबाद ।
    पाकिस्तान (Pakistan) के बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) में सेना व बलोच विद्रोहियों (Army and Baloch rebels) में भीषण गोलीबारी चल रही है। स्थिति यह है कि सैन्य अभियानों के बीच खारान, खुजदार और मस्तुंग सहित कई जिलों में हिंसा से विद्रोह और व्यापक हो गया है। सेना-विद्रोहियों में सशस्त्र झड़पों के बीच बड़ी संख्या में सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं। हालांकि, सीमित पहुंच के कारण इन खबरों पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल खामोशी बनाए हैं। जबकि खारान में नया सैन्य अभियान शुरू होने का दावा निवासियों ने किया। सेना ने अलमार्क और किसान जैसे इलाकों में तड़के एक अभियान शुरू कर दिया।

    इस अभियान के दौरान, कुछ अज्ञात हथियारबंद लोगों ने सेना के दस वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया और दोनों पक्षों में गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने अपने ऊपर ड्रोन उड़ने की भी जानकारी दी, लेकिन हताहतों या अभियान के नतीजों के बारे में कोई भी पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारी इन घटनाक्रमों पर चुप्पी साधे हैं। इसके बाद सोहिंदा में काफी देर तक गोलीबारी होती रही। यह झड़प कई घंटों तक चली। इस दौरान क्षेत्र में ड्रोन उड़ते भी देखे गए।

    बलूचिस्तान के बरखान जिल में अंधाधुंध सैन्य गोलीबारी में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। यहां बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने हाल ही में हुई बमबारी और गोलाबारी की निंदा कर इसे सामूहिक सजा का कृत्य बताया है। इस अभियान में कई गैर-लड़ाकों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल हैं। बीवाईसी ने घटना को बेहद दुखद और निंदनीय त्रासदी बताया।

  • पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में बंधक सैनिकों को पहचानने से किया इनकार… अपनाया कागरिल फॉर्मूला

    पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में बंधक सैनिकों को पहचानने से किया इनकार… अपनाया कागरिल फॉर्मूला


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान की सेना (Pakistan Army) ने कारगिल युद्ध (Kargil War) में मारे गए अपने सैनिकों को पहचानने से इनकार कर दिया था। अब यही फॉर्मूला उसने बलूचिस्तान (Balochistan) में भी इस्तेमाल किया है। पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) के सात जवान बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) (Balochistan Liberation Army (BLA) के कब्जे में हैं, जिनके बदले वह अपने लड़ाकों की रिहाई की मांग कर रही है, लेकिन पाकस्तानी सेना ने साफ कह दिया है कि ये जवान उनके हैं ही नहीं।

    सूत्रों के अनुसार 14 फरवरी को बीएलए ने इन सैनिकों का अपहरण किया था इनकी तस्वीरें और वीडियो क्लिप जारी कर अपने लड़ाकों को छोड़ने को कहा था। इसके लिए 21 फरवरी तक की मियाद रखी गई है, जो शनिवार को खत्म हो जाएगी। बीएलए ने कहा कि यदि पाक सेना ने उसकी बात नहीं मानी तो इन जवानों को फांसी दे दी जाएगी।

    फुटेज सामने आने के तुरंत बाद पाकिस्तान सेना के एक्स कोर और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल ने झूठ फैलाना शुरू कर दिया। कहा गया कि दिखाए गए लोग पाकिस्तानी सैनिक नहीं हैं। वीडियो को डिजिटल रूप से हेरफेर किया गया था। इसके बाद बीएलए ने एक नया वीडियो जारी किया, जिसमें सातों बंधक दिखाई दे रहे हैं तथा वे सेना का अपना आधिकारिक कार्ड भी दिखाते हैं। उन्हें पूरी पहचान बताते हुए दिखाया गया है।

    कारगिल में भी यही फॉर्मूला
    दरअसल, यह पाकिस्तानी सेना का पुराना फॉर्मूला है। इस घटनाक्रम ने 1999 के कारगिल संघर्ष की याद दिला दी है, जब जनरल परवेज मुशर्रफ के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना ने शुरू में इस बात से इनकार किया था कि नियमित सैनिक नियंत्रण रेखा के पार कार्रवाई कर रहे थे। उस समय युद्धक्षेत्र से मिले साक्ष्यों और बरामद शवों ने पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों को झुठला दिया था। अब फील्ड मार्शल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली सेना भी यही कर रही है।

  • 36 घंटे में बलूचिस्तान में 4 युवाओं की हत्या, 3 साल में 1700 से अधिक बलूच युवा जबरन गायब

    36 घंटे में बलूचिस्तान में 4 युवाओं की हत्या, 3 साल में 1700 से अधिक बलूच युवा जबरन गायब


    नई दिल्ली । बलूचिस्तान में पिछले 36 घंटों में चार बलूच छात्रों की हत्या ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवारों का आरोप है कि ये सभी छात्र पहले जबरन गायब किए गए और फिर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसी ISI के सशस्त्र गिरोहों ने उन्हें मार डाला।

    ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ़ बलूचिस्तान के डेटा के अनुसार, पिछले 3 सालों में बलूचिस्तान से 1713 युवा जबरन गायब हुए हैं। इसी अवधि में 390 से अधिक युवाओं के गायब होने और 80 से ज्यादा शव मिलने के मामले सामने आए। स्थानीय मानवाधिकार संगठन Baloch Yakjehti Committee का कहना है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं बल्कि व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा हैं।

    जुनैद अहमद, 22 वर्षीय ग्रेजुएशन छात्र, सुराब का निवासी, 23 जनवरी 2026 को जबरन उठाया गया। क्वेटा के एक अस्पताल से ईगल फोर्स और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने उसे बिना वारंट हिरासत में लिया। 15 फरवरी को उसका शव मिला, जिस पर गोली के निशान थे।

    पंजगुर के मैट्रिक छात्र जंगीयान बलोच को 26 मई 2025 को फ्रंटियर कॉर्प्स और ISI के डेथ स्क्वाड ने उठाया था। 15 फरवरी को उसका शव शापतान इलाके में मिला।

    17 वर्षीय मुहनास बलोच को 14 फरवरी को स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसके घर से उठाकर गोली मार दी। वहीं नवाब अब्दुल्ला, जिसे मई 2025 में उठाया गया था, का शव 14 फरवरी को घर के बाहर फेंक दिया गया।

    बलूचिस्तान में युवाओं को जबरन गायब करने की घटनाएं साल 2000 से लगातार हो रही हैं, जब से क्षेत्र में सशस्त्र विद्रोह शुरू हुआ। पाकिस्तानी सेना और ISI आज़ादी आंदोलन में शामिल युवाओं को अवैध हिरासत में लेने के बाद मार देती है या उनके गुटों में शामिल करवा देती है।

    बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इलाका है सोना, चांदी, यूरेनियम, रेयर अर्थ मिनरल्स और क़ीमती रत्नों से संपन्न। बावजूद इसके, गृह युद्ध और हिंसा की वजह से स्थानीय आबादी इन संसाधनों के लाभ से वंचित है। पाकिस्तान की सत्ता में बैठे नेता और विदेशी साझेदार इन संसाधनों का फायदा उठा रहे हैं, जबकि आम बलूच युवा हिंसा और जबरन गायब होने की त्रासदी का शिकार हो रहे हैं।

  • बलूचिस्तान में सेना तैनात करने जा रहा चीन, भारत को बलोच नेता किया आगाह?

    बलूचिस्तान में सेना तैनात करने जा रहा चीन, भारत को बलोच नेता किया आगाह?


    इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चीन जल्द ही अपनी सेना तैनात कर सकता है। बलूचिस्तान के बड़े नेता ने इस मामले पर चिंता जताते हुए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खत लिखा है। इस चिट्ठी में बलोच नेता मीर यार बलूच ने चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया है कि चीन अगले कुछ महीनों में ही बलूचिस्तान इलाके में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है।
    मीर यार ने बीते गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में एस जयशंकर के नाम एक लिखे एक खुला खत साझा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बरसों से बलूचिस्तान का शोषण कर रहा है। मीर यार ने लिखा, “बलूचिस्तान के लोग पिछले 79 सालों से पाकिस्तान के सरकारी कब्जे, प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को झेल रहे हैं।
    अब समय आ गया है कि इस बढ़ती हुई बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि हमारे देश में शांति आए और संप्रभुता पक्की हो।”
    पाक-चीन को लेकर जताई चिंता

    खत में मीर यार बलूच ने कहा कि चीन और पाकिस्तान तेजी से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के आखिरी स्टेज की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते गठबंधन को बहुत खतरनाक मानता है।

    चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को उसके आखिरी स्टेज तक पहुंचा दिया है।”
    बड़े खतरे की आशंका

    उन्होंने आगे कहा कि इस इलाके में जल्द ही चीन की सीधी मिलिट्री मौजूदगी देखी जा सकती है। मीर यार ने कहा, “अगर बलूचिस्तान की डिफेंस और फ्रीडम फोर्स की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और अगर ऐसे ही नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन कुछ महीनों के अंदर बलूचिस्तान में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है।” उन्होंने आगे लिखा, “60 मिलियन बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा और चुनौती होगी।”