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  • रग्बी मैच में कर्टिस ग्रेगरी ने विरोधी खिलाड़ी की टांग पर मारी लात, रेड कार्ड मिलने के बाद आजीवन बैन की मांग

    रग्बी मैच में कर्टिस ग्रेगरी ने विरोधी खिलाड़ी की टांग पर मारी लात, रेड कार्ड मिलने के बाद आजीवन बैन की मांग

    नई दिल्ली । वेल्स में खेले गए सुपर रग्बी सिमरू मुकाबले के दौरान एब्बू वेले के खिलाड़ी कर्टिस ग्रेगरी की एक हरकत विवाद का कारण बन गई। लैंडोवरी के खिलाफ मैच में उन्होंने रक के दौरान विरोधी टीम के खिलाड़ी की टांग पर पैर से हमला कर दिया। घटना के बाद रेफरी ने उन्हें सीधे रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद रग्बी प्रशंसकों ने ग्रेगरी के व्यवहार की आलोचना की और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। कुछ प्रशंसकों ने तो उन्हें खेल से आजीवन प्रतिबंधित करने की मांग भी की है।

    यह घटना शुक्रवार को लैंडोवरी और एब्बू वेले के बीच खेले गए मुकाबले के 36वें मिनट में हुई। उस समय दोनों टीमों के खिलाड़ी गेंद पर कब्जा हासिल करने के लिए रक की स्थिति में थे। रग्बी में रक तब बनता है, जब गेंद जमीन पर होती है और दोनों टीमों के खिलाड़ी उस पर नियंत्रण पाने के लिए एक-दूसरे के सामने जोर लगाते हैं। इसी दौरान लैंडोवरी के एक खिलाड़ी की टांग बाहर की ओर थी। ग्रेगरी ने उसकी टांग पर पैर से हमला कर दिया। मैदान पर मौजूद लोगों के लिए यह घटना चौंकाने वाली थी।

    36वें मिनट में दिखाया गया रेड कार्ड

    रेफरी ने घटना को गंभीर मानते हुए कर्टिस ग्रेगरी को सीधे रेड कार्ड दिखाया। रेड कार्ड मिलने का अर्थ है कि खिलाड़ी को मैच से बाहर जाना पड़ता है। इस कार्रवाई के बाद मुकाबले में उनकी भागीदारी समाप्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिस खिलाड़ी की टांग को निशाना बनाया गया था, उसे इस घटना में चोट नहीं आई। हालांकि, इस तरह के व्यवहार को लेकर खेल प्रशंसकों के बीच नाराजगी देखने को मिली।

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई प्रशंसकों ने इस हरकत को खतरनाक बताते हुए कहा कि इससे विरोधी खिलाड़ी को गंभीर चोट लग सकती थी। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि यदि पैर गलत तरीके से लगता, तो खिलाड़ी के घुटने या टांग को बड़ा नुकसान पहुंच सकता था।

    प्रशंसकों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

    इस घटना को लेकर कई प्रशंसकों ने ग्रेगरी पर लंबे समय तक प्रतिबंध लगाने की मांग की। कुछ प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि ऐसी हरकत करने वाले खिलाड़ी को दोबारा मैदान पर उतरने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। अन्य लोगों ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताते हुए नाराजगी जताई। प्रशंसकों की मांगों में आजीवन प्रतिबंध की बात भी शामिल रही।

    हालांकि, किसी खिलाड़ी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला संबंधित खेल अधिकारियों और अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। उपलब्ध जानकारी में ग्रेगरी के खिलाफ आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रशंसकों की मांग को आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता।

    खेल भावना और अनुशासन पर फिर चर्चा

    रग्बी जैसे शारीरिक संपर्क वाले खेल में खिलाड़ियों के बीच गेंद हासिल करने के दौरान जोरदार टक्कर और संघर्ष देखने को मिलता है। इसके बावजूद मैदान पर खिलाड़ियों से नियमों का पालन करने और विरोधियों की सुरक्षा का ध्यान रखने की अपेक्षा की जाती है। कर्टिस ग्रेगरी की इस घटना ने खेल में अनुशासन और अनुचित शारीरिक व्यवहार को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

    फिलहाल इस मामले में सामने आई प्रमुख कार्रवाई रेड कार्ड के रूप में है। प्रशंसकों की ओर से अतिरिक्त सजा की मांग जरूर उठी है, लेकिन आगे किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई या प्रतिबंध के बारे में पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

  • शिवपुरी में कार्बाइड गन पर पूरी तरह प्रतिबंध, बेचने और चलाने वालों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

    शिवपुरी में कार्बाइड गन पर पूरी तरह प्रतिबंध, बेचने और चलाने वालों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

    शिवपुरी जिले: में दीपावली से पहले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्बाइड गन के निर्माण, बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लोहे, स्टील और पीवीसी पाइप में कैल्शियम कार्बाइड भरकर तेज धमाका करने वाली इन देसी गनों को बच्चों के लिए खतरनाक माना गया है। प्रशासन ने इनके इस्तेमाल से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    जिले में कार्बाइड गन की कीमत लगभग 150 से 300 रुपये बताई जा रही है। कम कीमत के कारण बच्चे इन्हें खिलौना समझकर खरीद सकते हैं और इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, इन उपकरणों से होने वाला तेज धमाका गंभीर चोटों का कारण बन सकता है। इनमें कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पाइप के भीतर गैस बनती है और उसे प्रज्वलित करने पर जोरदार आवाज के साथ विस्फोट जैसा प्रभाव पैदा होता है।

    ऐसी गनों से निकलने वाली चिंगारी, पाइप के टुकड़े और तेज धमाके के कारण आंखों, चेहरे और कानों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। अन्य जिलों में इनके इस्तेमाल के दौरान आंखों में गंभीर चोट लगने, चेहरा झुलसने और कान के पर्दे प्रभावित होने जैसी घटनाएं सामने आने की जानकारी दी गई है। इसी तरह की दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए शिवपुरी प्रशासन ने त्योहार से पहले इनकी बिक्री और उपयोग रोकने का निर्णय लिया है।

    कलेक्टर अर्पित वर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इसके अनुसार शिवपुरी जिले की सीमा में कोई भी व्यक्ति, दुकानदार या संस्था प्रतिबंधित कार्बाइड गन और तेज आवाज वाले अवैध पटाखों का निर्माण, भंडारण, खरीद-बिक्री या प्रदर्शन नहीं कर सकेगा। यह आदेश त्योहारों तक प्रभावी रहेगा।

    प्रशासन ने आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिले के सभी अनुविभागीय दंडाधिकारियों, तहसीलदारों और थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार जांच करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को विशेष रूप से पटाखा बाजारों और हार्डवेयर की दुकानों पर निगरानी रखने को कहा गया है। इन दुकानों से पाइप और कार्बाइड जैसी सामग्री उपलब्ध होने की आशंका के कारण जांच को महत्वपूर्ण माना गया है।

    आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या दुकानदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित गन बनाने, बेचने, रखने या चलाने के मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करना होगा।

    प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सहयोग करने की अपील की है। यदि किसी बाजार, दुकान या अन्य स्थान पर कार्बाइड गन की बिक्री होती दिखाई दे अथवा कोई व्यक्ति इसका इस्तेमाल करता मिले, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या कंट्रोल रूम को देने को कहा गया है। समय पर सूचना मिलने से खतरनाक गतिविधियों को रोकने और संभावित दुर्घटनाओं से बचने में मदद मिल सकती है।

    दीपावली के दौरान पटाखों और अन्य विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल के बीच यह प्रतिबंध बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रशासन का उद्देश्य जिले में कार्बाइड गन के इस्तेमाल पर रोक लगाकर आंखों, चेहरे और कानों को होने वाली संभावित चोटों का जोखिम कम करना तथा त्योहार के दौरान किसी बड़ी दुर्घटना को रोकना है।

  • J&K: HC का बड़ा फैसला… श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील में पेट्रोल-डीजल मोटरबोट और जेट स्की पर लगाया बैन

    J&K: HC का बड़ा फैसला… श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील में पेट्रोल-डीजल मोटरबोट और जेट स्की पर लगाया बैन


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट (Jammu & Kashmir and Ladakh High Court) ने श्रीनगर (Srinagar) की प्रसिद्ध डल झील (Famous Dal Lake) में पेट्रोल और डीजल से संचालित सभी प्रकार की मोटरबोट्स और जेट स्की के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश झील के लगातार घटते जलस्तर और बढ़ते जल प्रदूषण को रोकने के मद्देनजर दिया गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेश का उल्लंघन किए जाने पर अवमानना की सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने झील में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में सोलर और ई-बोट्स के उपयोग की संभावनाएं तलाशने को कहा है।

    मुख्य न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति राजेश सेखरी की खंडपीठ ने मोहम्मद रफीक मीर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिबंध का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि अगले आदेश तक डल झील में ईंधन से चलने वाली कोई भी मोटरबोट, चाहे वह शिकारा मोटरबोट हो या जेट स्की… न चलाई जाए।

    इसके साथ ही लेक कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एलसीएमए), पर्यटन विभाग और जम्मू-कश्मीर पुलिस को निर्देश दिया है कि वे झील में किसी भी तरह की ईंधन आधारित मोटरबोट या जेट स्की का चलना पूरी तरह बंद कराएं। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं, कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में तैनात नावों को इस पाबंदी से छूट दी गई है। इसके अलावा, राज्य प्रशासन को विशेषज्ञों की सलाह से एक व्यापक नीति तैयार करने को कहा गया है, ताकि पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन साधा जा सके।


    पारिस्थितिकी व पर्यटन में संतुलन जरूरी

    पीठ ने टिप्पणी की कि जलस्रोतों और झीलों का संरक्षण मौजूदा सभ्यता के लिए सबसे अहम चुनौती है। ऐसे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को रोकना अनिवार्य है। अदालत ने सुझाव दिया कि पर्यावरण व पर्यटन दोनों को सुरक्षित रखने के लिए सोलर और इलेक्ट्रिक बोट्स एक प्रभावी समाधान साबित हो सकती हैं। खंडपीठ ने वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता मोहसिन कादरी को निर्देश दिया कि वे 30 अक्तूबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह रिपोर्ट दाखिल करें कि क्या सभी मशीनीकृत इंजनों को पूरी तरह से सौर ऊर्जा संचालित ई-इंजनों में तब्दील किया जा सकता है।

  • US में सरकारी खजाने से ट्रंप का प्रचार…. जनता के पैसों से चल रहे थे विज्ञापन…कोर्ट ने लगाई रोक

    US में सरकारी खजाने से ट्रंप का प्रचार…. जनता के पैसों से चल रहे थे विज्ञापन…कोर्ट ने लगाई रोक


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अपने राजनीतिक संदेश के प्रचार के लिए सरकारी खजाने से चलाए जा रहे टीवी विज्ञापनों पर रोक लगानी होगी। न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत (Federal Court) ने रविवार रात प्रशासन को आदेश दिया कि ऐसे सभी विज्ञापन तुरंत बंद किए जाएं, जो अब भी प्रसारित होने बाकी हैं। खास बात यह है कि प्रशासन पहले ही कह चुका था कि विज्ञापन अभियान (Advertising campaign) जल्द खत्म होने वाला है। इसके बावजूद अदालत ने साफ कर दिया कि रविवार रात प्रसारित होने वाले विज्ञापनों समेत बाकी सभी विज्ञापनों को भी रद्द करना होगा।


    जनता के पैसे से राजनीतिक प्रचार पर उठे सवाल

    यह पूरा मामला उन टीवी विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर करदाताओं के लाखों डॉलर खर्च किए गए। इन विज्ञापनों के जरिए ट्रंप के राजनीतिक संदेश को लोगों तक पहुंचाया जा रहा था। इस खर्च पर सवाल उठाते हुए एक गठबंधन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस गठबंधन में गैर-दलीय निगरानी संगठन कॉमन कॉज (Common Cause) भी शामिल था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकारी धन का इस तरह इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है और इसे सार्वजनिक धन का अनुचित इस्तेमाल माना जाना चाहिए।


    प्रशासन को विज्ञापन रोकने के लिए मिला साफ आदेश

    न्यूयॉर्क की अमेरिकी जिला अदालत की जज जेनिफर एल. रोचोन ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाया। उन्होंने अस्थायी रोक लगाने का आदेश जारी किया, जिसके तहत प्रशासन को बचे हुए सभी टीवी विज्ञापन रद्द करने होंगे। इस आदेश में उन विज्ञापनों को भी शामिल किया गया, जिनका प्रसारण रविवार रात होना था। यानी प्रशासन की ओर से विज्ञापन अभियान खत्म करने की घोषणा के बावजूद अदालत ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया कि कोई भी बाकी विज्ञापन प्रसारित न हो।


    अब सरकारी खर्च और राजनीतिक संदेश के इस्तेमाल पर नजर

    इस मामले ने सरकारी धन के इस्तेमाल और राजनीतिक प्रचार के बीच की सीमा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत करने वाले संगठनों का कहना है कि जनता के पैसे का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता, जिसे वे किसी राजनीतिक संदेश को बढ़ावा देने का अनुचित तरीका मानते हैं। अदालत के आदेश का तत्काल असर यह है कि प्रशासन को बचे हुए विज्ञापनों को रोकना होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह आदेश अस्थायी रोक के तौर पर जारी किया गया है। मामले में आगे क्या होता है, यह न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरणों पर निर्भर करेगा।

  • मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    नई दिल्ली ।अमेरिका में व्हाइट हाउस और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच बढ़े विवाद के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 घंटे चलने वाली अपनी टीवी सेवा शुरू कर दी है। इस सेवा का नाम ‘ट्रंप टीवी’ रखा गया है। इसके जरिए राष्ट्रपति के भाषण, प्रशासन की घोषणाएं और सरकार से जुड़े प्रमुख फैसलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।

    यह कदम उस समय सामने आया है, जब कई प्रमुख टीवी चैनलों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस में प्रवेश संबंधी अनुमति को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच गया। संबंधित मीडिया संस्थानों ने संयुक्त रूप से प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि केवल खबरों की सामग्री पसंद नहीं आने के आधार पर पत्रकारों की पहुंच रोकना संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल है।

    विवाद की शुरुआत पत्रकारों के प्रवेश बैज निष्क्रिय किए जाने के बाद हुई। इसके बाद संबंधित संस्थानों के संवाददाताओं को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया। मीडिया संस्थानों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित सूचना और प्रक्रिया के उनके पत्रकारों की पहुंच सीमित की।

    मीडिया संस्थानों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति या किसी सरकारी अधिकारी को केवल खबरों की सामग्री से असहमति के कारण प्रेस के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े हितों को खत्म करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती दी है।

    इसी बीच प्रमुख टीवी नेटवर्कों के बीच राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा कवरेज को लेकर भी बदलाव देखने को मिला। सोमवार को सीएनएन को उस प्रेस पूल व्यवस्था से हटा दिया गया, जिसके तहत प्रमुख समाचार नेटवर्क व्हाइट हाउस की महत्वपूर्ण गतिविधियों की कवरेज आपस में साझा करते हैं।

    विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने अपना 24 घंटे चलने वाला टीवी प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका उद्देश्य प्रशासन की महत्वपूर्ण सूचनाओं, घोषणाओं और फैसलों को सीधे दर्शकों तक पहुंचाना बताया गया है। इस सेवा पर राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण और प्रशासन से संबंधित वीडियो सामग्री दिखाई जाएगी।

    व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि इस माध्यम से ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां और घोषणाएं लोगों तक पहुंचेंगी, जो पहले उनकी नजर से छूट जाती थीं। सेवा को प्रशासन की गतिविधियों और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की जानकारी सीधे उपलब्ध कराने वाले मंच के रूप में पेश किया गया है।

    दूसरी ओर, प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों का कहना है कि सरकारी परिसर में पत्रकारों की पहुंच को केवल खबरों की सामग्री के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है और किसी भी प्रतिबंध के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि व्हाइट हाउस स्वतंत्र प्रेस को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि उनके अनुसार गलत खबरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने ऐसी खबरों को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और कहा कि इसे रोका जाना चाहिए।

    व्हाइट हाउस का तर्क है कि संविधान में मीडिया के अधिकारों का सम्मान किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस, ब्रीफिंग रूम या राष्ट्रपति के प्रेस पूल तक स्वतः पहुंच का अधिकार मिल जाता है।

    अब इस पूरे विवाद में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ मीडिया संस्थान पत्रकारों की पहुंच और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन अपने फैसले को उचित बता रहा है। इसी बीच ‘ट्रंप टीवी’ की शुरुआत ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच चल रहे विवाद को एक नया रूप दे दिया है।

  • MP: नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर बैन… 8 मौतों के बाद बड़ा फैसला

    MP: नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर बैन… 8 मौतों के बाद बड़ा फैसला


    आगर मालवा।
    आगर-मालवा जिले (Agar-Malwa district) के नलखेड़ा (Nalkheda) स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर (Siddha Peeth Maa Baglamukhi Temple) के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद मंदिर में रात 8 बजे बाद हवन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. शासन की ओर से जारी पत्र के अनुसार, अब मंदिर में हवन रात 8 बजे से पहले ही किए जा सकेंगे।

    शनिवार को तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया था. इसी दौरान श्रद्धालुओं से भरी एक कार तेज बहाव में बह गई. हादसे में कार सवार 8 लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों में 7 लोग ओडिशा के रहने वाले थे, जबकि कार चालक आगर-मालवा जिले के बड़ोद का निवासी था. मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल थे।

    हादसे के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे. इसी के बाद अब रात 8 बजे के बाद हवन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है।

    जानकारी के मुताबिक, ओडिशा के सात श्रद्धालु उज्जैन दर्शन के लिए आए थे. इसके बाद उन्होंने कार किराए पर ली और मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए नलखेड़ा पहुंचे थे. शुक्रवार रात तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास स्थित बरसाती नाले में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया।

    बताया गया कि कार पुलिया के पास तेज बहाव की चपेट में आ गई और करीब 100 मीटर दूर तक बह गई. नलखेड़ा में उस दौरान पिछले 24 घंटे में करीब 3.7 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    हादसे का पता शनिवार सुबह चला, जब स्थानीय लोगों ने नाले में पलटी हुई कार देखी. सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. SDRF की मदद से कार को नाले से बाहर निकाला गया और उसमें सवार सभी 8 लोगों के शव बरामद किए गए. शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया. बाद में प्रशासन ने शवों को एंबुलेंस के जरिए उनके गृह क्षेत्र ओडिशा भिजवाया।


    मृतकों के गले में लिपटी थी लाल चुनरी

    पुलिस के मुताबिक, जब शवों को कार से बाहर निकाला गया तो सभी के गले में माता के आशीर्वाद वाली लाल चुनरी लिपटी हुई थी. बताया गया कि श्रद्धालु रात में हवन-पूजन करने के बाद लौट रहे थे।

    मृतकों की पहचान चालक अरुण पिता ब्रदीलाल गोयल निवासी सुदवास, बड़ोद, राधारानी बेहरा (33), ज्ञानेंद्र कुमार बेहरा (41), रितारानी पत्नी ज्ञानेंद्र बेहरा (38), कृष्णा राजवीर पिता शिवप्रसाद (13), शिवप्रसाद बेहरा, वी साई स्वस्तिक पिता ज्ञानेंद्र (10) और शाहीरा स्वयं प्रभा पिता शिवप्रसाद (6) के रूप में हुई है. सभी सात श्रद्धालु ओडिशा के भुवनेश्वर के रहने वाले थे।


    CCTV में एक और व्यक्ति भी बहता दिखा

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज बारिश और नाले में अचानक बढ़ा पानी सामने आया है. मंदिर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

    CCTV फुटेज में हादसे से पहले करीब 11 बजे एक व्यक्ति पैदल तेज बहाव वाले रास्ते को पार करता दिखाई दिया. बताया गया कि वह भी नाले के बहाव में बह गया. फिलहाल उसका कोई पता नहीं चल पाया है।


    हादसे के बाद उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

    हादसे के बाद नलखेड़ा में लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला. बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचे और अंबेडकर चौराहे पर चक्काजाम किया. दुकानों को भी बंद कराया गया।

    स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे से 12 बजे तक तेज बारिश के दौरान जब मंदिर मार्ग का नाला उफान पर था, तब वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए. आरोप है कि नाले के दोनों ओर बेरिकेडिंग नहीं थी और सुरक्षा जवान भी मौजूद नहीं थे।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तेज बहाव के दौरान रास्ते को बेरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया जाता या सुरक्षा जवान तैनात रहते तो हादसे को रोका जा सकता था. हालांकि, हादसे की जिम्मेदारी और कारणों को लेकर पुलिस-प्रशासन की जांच जारी है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की. ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी घटना पर शोक जताया।

  • 15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर प्रतिबंध

    15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर प्रतिबंध


    नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस 2026 के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने 2 अगस्त से 16 अगस्त तक राजधानी में ड्रोन सहित सभी छोटे हवाई प्लेटफॉर्म के उड़ान संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।

    पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। इसके अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान ड्रोन (UAV/UAS), क्वाडकॉप्टर, पैराग्लाइडर, पैरामोटर, हैंग ग्लाइडर, माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA), हॉट एयर बैलून, छोटे पावर्ड एयरक्राफ्ट तथा विमान से पैरा जंपिंग जैसी सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी में आशंका जताई गई है कि असामाजिक या आतंकवादी तत्व इन हवाई माध्यमों का इस्तेमाल कर आम नागरिकों, वीआईपी और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए एहतियातन यह फैसला लिया गया है।


    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह प्रतिबंध 2 अगस्त से लागू होकर 16 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा, ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराया जा सके।

  • MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित

    MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए सरकारी खर्चों में बड़ी कटौती का फैसला किया है. वित्त विभाग ने सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थाओं के लिए मितव्ययिता संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों के तहत अगले दो वर्षों तक गैर-जरूरी सरकारी खर्चों (Non-Essential Government Expenditures) पर रोक रहेगी और संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाएगा.

    नए आदेश के मुताबिक, अधिकारियों की विदेश यात्राएं केवल अत्यावश्यक सरकारी कार्यों तक सीमित रहेंगी. देश के भीतर हवाई यात्रा भी आवश्यकता के आधार पर ही की जाएगी और सभी अधिकारी सरकारी खर्च पर केवल इकोनॉमी क्लास में ही सफर कर सकेंगे.


    होटल में बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं

    वित्त विभाग ने होटलों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में कार्यशालाएं, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगा दी है. ऐसे कार्यक्रम अब सरकारी भवनों में आयोजित किए जाएंगे. जहां संभव होगा, वहां प्रशिक्षण और बैठकों को वर्चुअल माध्यम या वेबिनार के जरिए आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अनावश्यक खर्च से बचा जा सके.


    किराए के वाहनों की संख्या घटेगी

    सरकार ने सभी विभागों को किराए के वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए व्हीकल पूलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा. दो या अधिक अधिकारियों के लिए अलग-अलग वाहन उपलब्ध कराने के बजाय साझा वाहन व्यवस्था अपनाई जाएगी. यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त विभाग का प्रभार दिया जाता है तो उसे दूसरे विभाग का अलग वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा.


    दफ्तरों की साज-सज्जा पर भी रोक

    आदेश में अधिकारियों के कार्यालयों और केबिन की सजावट तथा इंटीरियर पर होने वाले अनावश्यक खर्च पर भी रोक लगा दी गई है. विभागाध्यक्षों को इन खर्चों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं.


    नई कंसल्टेंसी सेवाओं पर रोक

    राज्य सरकार ने फिलहाल नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंध करने पर भी रोक लगा दी है. साथ ही सभी निगम-मंडलों और सरकारी उपक्रमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने लाभांश की अधिकतम संभव राशि राज्य शासन के खाते में जमा कराएं, ताकि सरकारी वित्तीय संसाधनों को मजबूत किया जा सके.

  • काहिरा हवाई अड्डे पर जब उमड़ा था 'महानायक' के प्रशंसकों का जनसैलाब: खुद अमिताभ बच्चन ने 1991 के उस दौर को बताया था 'राष्ट्रीय संकट'

    काहिरा हवाई अड्डे पर जब उमड़ा था 'महानायक' के प्रशंसकों का जनसैलाब: खुद अमिताभ बच्चन ने 1991 के उस दौर को बताया था 'राष्ट्रीय संकट'

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता केवल भारत की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनके प्रशंसकों की संख्या करोड़ों में है। अस्सी के दशक में जब इंटरनेट और सोशल मीडिया का नामोनिशान नहीं था, तब भी सात समंदर पार मिडिल ईस्ट के देशों में उनकी दीवानगी चरम पर थी। विशेष रूप से मिस्र यानी इजिप्ट में अमिताभ बच्चन को लेकर ऐसा असाधारण क्रेज देखा गया कि वहां की तात्कालिक सरकार के लिए यह चिंता का विषय बन गया था और अंततः उन्हें एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाना पड़ा था।

    साल 1980 के दौर में मिस्र के सिनेमाघरों में जब भी अमिताभ बच्चन की कोई फिल्म लगती थी, तो टिकट खिड़कियों पर मील लंबी लाइनें लग जाती थीं। इस अभूतपूर्व दीवानगी का सीधा नुकसान मिस्र के स्थानीय फिल्म उद्योग को उठाना पड़ रहा था क्योंकि वहां के क्षेत्रीय सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी कमी हो गई थी और सन्नाटा पसरने लगा था। अपनी घरेलू फिल्म इंडस्ट्री को मंदी से उबारने और उसे संरक्षण देने के उद्देश्य से मिस्र की सरकार ने एक कड़ा आर्थिक और सांस्कृतिक फैसला लेते हुए अमिताभ बच्चन की फिल्मों के प्रदर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।

    इस सरकारी प्रतिबंध के बावजूद वहां के आम नागरिकों के दिलों से अमिताभ बच्चन का जादू कम नहीं किया जा सका। मिस्र के लोग उनकी फिल्में देखने के लिए नए-नए रास्ते निकालने लगे और वहां के छोटे-छोटे निजी थिएटरों व बंद कमरों में चोरी-छिपे इन फिल्मों का प्रदर्शन किया जाने लगा। उस दौर में जिन लोगों के पास फिल्में देखने के साधन या टेप रिकॉर्डर उपलब्ध नहीं थे, वे हर गुरुवार को स्थानीय कैफे में बड़ी संख्या में एकत्र होते थे और केवल अमिताभ बच्चन की फिल्मों के ऑडियो गाने सुनकर ही अपनी दीवानगी पूरी किया करते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि मिस्र की एक स्थानीय फिल्म में अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म ‘गिरफ्तार’ के एक मुख्य दृश्य को हूबहू कॉपी किया गया था।

    मिस्र में अमिताभ बच्चन के इस दबदबे का सबसे बड़ा नजारा साल 1991 में देखने को मिला जब वे काहिरा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए अफ्रीकी महाद्वीप पहुंचे थे। काहिरा हवाई अड्डे पर उनके स्वागत और एक झलक पाने के लिए इतनी विशाल और बेकाबू भीड़ उमड़ पड़ी कि वहां की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। हवाई अड्डे से लेकर शहर की सड़कों तक हालात इस कदर बेकाबू हो गए थे कि खुद अमिताभ बच्चन ने बाद में अपने एक साक्षात्कार में उस माहौल को एक ‘राष्ट्रीय संकट’ जैसी स्थिति के रूप में याद किया था।

    जिस देश की सरकार ने कभी अपनी स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री के अस्तित्व को बचाने के लिए अमिताभ बच्चन की फिल्मों को प्रतिबंधित कर दिया था, उसी देश को आखिरकार वैश्विक कला और उनके अभिनय के सामने नतमस्तक होना पड़ा। इस ऐतिहासिक दीवानगी और सांस्कृतिक प्रभाव को स्वीकार करते हुए मिस्र सरकार ने साल 2001 में अमिताभ बच्चन को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया। वहां उन्हें सिनेमा जगत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक ‘एक्टर ऑफ द सेंचुरी’ के खिताब से नवाजा गया, जो यह साबित करता है कि कला को किसी भी देश की भौगोलिक और प्रशासनिक सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता।

  • झारखंड सरकार का बड़ा फैसला…. तंबाकू युक्त गुटखा-पान मसाला पर लगाया एक साल का प्रतिबंध

    झारखंड सरकार का बड़ा फैसला…. तंबाकू युक्त गुटखा-पान मसाला पर लगाया एक साल का प्रतिबंध


    रांची।
    झारखंड (Jharkhand) में जन-स्वास्थ्य (Public Health) की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार (State Government) ने तंबाकू और निकोटीन (Tobacco and Nicotine) युक्त गुटखा और पान मसाला (Gutkha and pan masala) के निर्माण, भंडारण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से एक आदेश जारी किया गया है।

    अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह प्रतिबंध उन सभी उत्पादों पर लागू होगा, जो किसी भी नाम से बाजार में बेचे जा रहे हों, यदि उनमें तंबाकू या निकोटीन की मात्रा पाई जाती है। आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार ने यह फैसला खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम-2006 की धारा 30(2)(ए) और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियमन 2011 के नियम के तहत लिया है। इसमें कहा गया है कि प्रतिबंध का यह आदेश जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान प्रतिबंधित तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पकड़ा जाता है, तो कानून सम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।