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  • ईरान पर अमेरिका के हमले जारी…. बंदर अब्बास समेत कई शहरों में हुए धमाके

    ईरान पर अमेरिका के हमले जारी…. बंदर अब्बास समेत कई शहरों में हुए धमाके


    नई दिल्ली।
    अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) पर फिर एक बार हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पहले से ही तनावपूर्ण हालातों के बीच मिडिल ईस्ट (Middle East) में अस्थिरता और बढ़ गई है. सेंटकॉम (यू.एस. सेंट्रल कमांड) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह ऑपरेशन कमांडर-इन-चीफ (Operation Commander-in-Chief) के निर्देश पर किया गया।

    इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों को धमकाने और उन पर हमला करने के लिए किया जाता रहा है. बता दें, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

    वहीं, ऑपरेशन शुरू होने के कुछ ही समय बाद, ईरान के स्टेट टेलीविजन ने दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में धमाके की सूचना दी. इसके अलावा, ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि देश के दक्षिणी तट पर बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट कर दिए गए थे, जो हमलों के दौरान सेना के हाई अलर्ट पर होने का संकेत देते हैं.

    ईरानी मीडिया ने दक्षिण-पूर्वी शहरों चाबहार और कोनारक में भी कई धमाकों की खबर दी है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच यह तनाव बढ़ने की ताजा घटना बताई जा रही है।

    इस बीच, ईरान के स्टेट ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में हुई एक घटना के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया गया है. एक जलते हुए जहाज की तस्वीर शेयर करते हुए आईआरआईबी ने लिखा, ‘अमेरिका पर भरोसा करने का अंजाम, कुछ घंटे पहले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का नजारा.’

  • पानी के नीचे छिपी ईरान की ग़दीर मिनी सबमरीन: अमेरिका के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

    पानी के नीचे छिपी ईरान की ग़दीर मिनी सबमरीन: अमेरिका के लिए क्यों बढ़ी चिंता?


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी नौसेना ताकत को और मजबूत करते हुए दो नई मिनी पनडुब्बियां अपने बेड़े में शामिल की हैं। ये अत्याधुनिक ग़दीर क्लास पनडुब्बी डिवीजन की पनडुब्बियां हैं, जिन्हें विशेष रूप से समुद्री क्षेत्रों में गुप्त अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।

    इन पनडुब्बियों का उद्घाटन श्रीनगर रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास में किया गया, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लास से अहम जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर है।पर स्थित है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग एक तिहाई समुद्री तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में ईरान की सैन्य सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक इन मिनी पनडुब्बियों में अत्याधुनिक सोनार इवेडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इन्हें दुश्मन के सोनार और निगरानी उपकरणों से बचाने में सक्षम बनाती है। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पानी की सतह के नीचे से ही मिसाइल दाग सकती हैं। इसके अलावा ये टॉरपीडो लॉन्च करने और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता भी रखती हैं।

    इन मिजेट पनडुब्बियों का वजन करीब 150 मीट्रिक टन से कम होता है और इनमें लगभग नौ सदस्यों का चालक दल काम करता है। इन्हें विशेष रूप से अरब की खाड़ी जैसे उथले पानी वाले क्षेत्रों में संचालन के लिए तैयार किया गया है। छोटे आकार और गुप्त संचालन की क्षमता के कारण ये दुश्मन के लिए आसानी से पकड़ में नहीं आतीं और अचानक हमला करने में सक्षम मानी जाती हैं।

    ईरानी नौसेना के अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि देश के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम की सफलता को दर्शाती है। उनका दावा है कि ईरान 1990 के दशक से अपने रक्षा उपकरण जैसे टैंक, मिसाइल और लड़ाकू विमानों का निर्माण स्वयं कर रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्यके आसपास ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल आ सकता है।

    इस स्थिति का असर भारत समेत कई एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन, खाद्य आपूर्ति और उर्वरकों की लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। विश्लेषकों के मुताबिक ईरान की ये नई पनडुब्बियां क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं और आने वाले समय में मध्य पूर्व के सुरक्षा समीकरण को और जटिल बना सकती हैं।