Tag: Bandhavgarh Tiger Reserve

  • बांधवगढ़ में बाघ शावक की दर्दनाक मौत जंगल के भीतर संघर्ष की आशंका ने बढ़ाई चिंता

    बांधवगढ़ में बाघ शावक की दर्दनाक मौत जंगल के भीतर संघर्ष की आशंका ने बढ़ाई चिंता


    उमरिया । मध्य प्रदेश के उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है जहां पनपथा कोर क्षेत्र की बीट बघडो में एक बाघ शावक का शव मिलने से वन महकमे में हलचल मच गई है। यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करती है बल्कि बाघों के बीच बढ़ते संघर्ष की ओर भी संकेत करती है।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मृत शावक का शव अत्यंत क्षतविक्षत अवस्था में पाया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि शावक की मौत किसी अन्य बाघ के साथ हुए आपसी संघर्ष के कारण हुई है जिसे वैज्ञानिक भाषा में इंट्रास्पेसिफिक फाइट कहा जाता है। जंगल के भीतर क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच इस प्रकार के संघर्ष असामान्य नहीं माने जाते लेकिन हाल के समय में ऐसी घटनाओं की बढ़ती संख्या ने चिंता जरूर बढ़ा दी है।

    घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेरकर गहन जांच शुरू की गई। डाग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर की मदद से हर संभावित पहलू की बारीकी से जांच की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस घटना में किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या शिकार शामिल नहीं है। जांच के दौरान ऐसे कोई संकेत नहीं मिले जिससे यह प्रतीत हो कि शावक की मौत के पीछे अवैध शिकार या बाहरी गतिविधि जिम्मेदार है।

    नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए शावक के शव का मौके पर ही दाह संस्कार कर दिया गया ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अन्य खतरे से बचा जा सके। वन विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत अंजाम दिया और सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण भी किया गया है।

    घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया है। विभागीय हाथियों की मदद से आसपास के घने जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि अन्य बाघों और शावकों की स्थिति का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि वे हर संभावित खतरे पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी असामान्य गतिविधि को गंभीरता से लिया जा रहा है।

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है जहां बाघों की अच्छी खासी आबादी पाई जाती है। हालांकि हाल के वर्षों में शावकों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं जो वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी के कारण क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं जिससे कमजोर शावक अधिक प्रभावित होते हैं।

    वन विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और इसकी रिपोर्ट जल्द ही नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भेजी जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर जंगल के भीतर की जटिल वास्तविकताओं को उजागर कर दिया है जहां जीवन और संघर्ष साथ साथ चलते हैं और संरक्षण के प्रयासों के बीच कई अनदेखी चुनौतियां सामने आती रहती हैं।

  • बांधवगढ़ और शहडोल में वन्यजीव संघर्ष दो अलग घटनाओं से मचा हड़कंप

    बांधवगढ़ और शहडोल में वन्यजीव संघर्ष दो अलग घटनाओं से मचा हड़कंप


    उमरिया /मध्यप्रदेश के उमरिया जिले स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों से जुड़ी दो अलग अलग घटनाओं ने वन विभाग और प्रशासन को सतर्क कर दिया है। एक ओर मानपुर बफर क्षेत्र में दो भालुओं की मौत से हड़कंप मचा हुआ है वहीं दूसरी ओर शहडोल जिले में दो बाघों के बीच संघर्ष के बाद एक घायल बाघ को रेस्क्यू कर उपचार में रखा गया है।

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर अंतर्गत खम्हा बीट क्षेत्र में एक अवयस्क नर भालू का शव मिलने की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की गई। डॉग स्क्वाड की मदद से आसपास के क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया गया जिसके दौरान कुछ ही दूरी पर एक मादा भालू का शव भी बरामद किया गया। एक ही क्षेत्र में दो भालुओं की मौत से पूरे रिजर्व क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बन गई।

    वन अमले ने दोनों शवों का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि दोनों भालुओं के सभी अवयव सुरक्षित हैं और कहीं भी शिकार या अवैध गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। घटनास्थल का संरक्षण कर पंचनामा तैयार किया गया। मेटल डिटेक्टर की सहायता से शवों की जांच की गई ताकि किसी प्रकार की धातु या गोली के निशान की पुष्टि हो सके। वाइल्डलाइफ हेल्थ ऑफिसर की मौजूदगी में दोनों भालुओं का पोस्टमॉर्टम किया गया और आवश्यक नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

    प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों भालुओं की मौत किसी अन्य वन्यप्राणी से हुए संघर्ष के कारण हुई हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और लैब जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन के दौरान भालू अक्सर दिखाई देते हैं और उनका मूवमेंट बफर क्षेत्रों में अधिक रहता है।

    इधर शहडोल जिले की जयसिंहनगर रेंज के वनचाचर बीट क्षेत्र में भी वन्यजीव संघर्ष की एक बड़ी घटना सामने आई है। यहां दो बाघों के बीच हुए संघर्ष के बाद एक नर बाघ गंभीर रूप से घायल हो गया था। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने लगातार तीन दिनों तक सर्च और ट्रैकिंग अभियान चलाया। हाथियों की मदद से घायल बाघ को ट्रेस किया गया जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

    रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक डार्ट गन की मदद से बाघ को बेहोश किया और मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद घायल बाघ को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मगधी परिक्षेत्र स्थित बहेरहा बाड़े में सुरक्षित रखा गया है। वन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा बाघ का इलाज किया जा रहा है और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।वन विभाग का कहना है कि दोनों घटनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।