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  • बेटी के लिए पिता ने लिया कर्ज, विदेश में मिली मौत, स्वीटी अख्तर की फांसी से सदमे में परिवार

    बेटी के लिए पिता ने लिया कर्ज, विदेश में मिली मौत, स्वीटी अख्तर की फांसी से सदमे में परिवार


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की रहने वाली स्वीटी अख्तर की कहानी संघर्ष और दर्द से भरी है। अपनी नौ साल की बेटी का भविष्य बेहतर बनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वह सऊदी अरब गई थी। उसे उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी करके वह अपनी बेटी को अच्छी जिंदगी दे सकेगी और परिवार को गरीबी से बाहर निकाल पाएगी। लेकिन जिस सपने को पूरा करने के लिए उसने अपना घर छोड़ा था वही सपना उसकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक अध्याय बन गया। सऊदी अरब में काम करने वाली स्वीटी को व्यभिचार के आरोपों में मौत की सजा दे दी गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि फांसी से ठीक एक दिन पहले उसकी अपने पिता से बातचीत हुई थी लेकिन उस दौरान उसने परिवार को अपनी सजा के बारे में कुछ नहीं बताया था।

    स्वीटी अख्तर मध्य बांग्लादेश के तंगाइल जिले के मिर्जापुर उपजिला के नगर छावली गांव की रहने वाली थी। उसके पिता फजल मिया दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और मां का नाम जोहोरा बेगम है। पांच बहनों में सबसे छोटी स्वीटी की जिंदगी बचपन से ही मुश्किलों से घिरी रही। जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ रही थी तभी उसकी शादी कर दी गई थी। पहली शादी टूटने के बाद वह अपनी बेटी को लेकर मायके लौट आई। परिवार के दबाव में उसने दूसरी शादी की लेकिन दूसरा पति भी उसे छोड़कर चला गया। लगातार टूटते रिश्तों और आर्थिक परेशानियों ने उसे विदेश में नौकरी तलाशने के लिए मजबूर कर दिया।

    परिवार ने स्वीटी को सऊदी अरब भेजने के लिए करीब डेढ़ लाख टका का कर्ज लिया था। मार्च 2023 में वह एक पंजीकृत भर्ती एजेंसी के माध्यम से सऊदी अरब पहुंची और मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सफाईकर्मी के तौर पर काम करने लगी। शुरुआती पांच से छह महीनों तक वह घर पैसे भेजती रही। इससे परिवार को उम्मीद जगी कि अब उनकी परेशानियां कम होंगी और बेटी का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। लेकिन कुछ समय बाद पैसे आने बंद हो गए। परिवार को बाद में पता चला कि स्वीटी को जेल में बंद कर दिया गया है।

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्वीटी को 2 अगस्त 2023 को व्यभिचार के आरोपों में हिरासत में लिया गया था। उसके साथ काम करने वाले बांग्लादेशी नागरिक नाजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर को भी गिरफ्तार किया गया था। स्वीटी को जेद्दा की महिला जेल में रखा गया। हालांकि उसने अपने पिता को गिरफ्तारी की अलग वजह बताई थी। उसके परिवार को आशंका थी कि उसे गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है। इन आरोपों और मामले की परिस्थितियों को लेकर परिवार के पास पूरी जानकारी नहीं थी।

    जेल में रहने के दौरान स्वीटी कभी हर सप्ताह तो कभी एक महीने के अंतराल पर अपने घर फोन करती थी। परिवार को मालूम था कि वह जेल में है लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर हो चुका है। उसके पिता के मुताबिक 13 अक्टूबर को मगरिब की नमाज के बाद उनकी बेटी से आखिरी बार बात हुई थी। बातचीत के दौरान स्वीटी ने न तो मुकदमे का जिक्र किया और न ही मौत की सजा की आशंका जताई। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द जेल से बाहर आ जाएगी।

    14 अक्टूबर को सऊदी अरब में स्वीटी अख्तर और नाजरुल इस्लाम को फांसी दिए जाने की घोषणा हुई। परिवार को इसकी जानकारी सीधे अधिकारियों से नहीं मिली बल्कि एक फेसबुक वीडियो के जरिए मौत की खबर सामने आई। बांग्लादेश के राजनयिक मिशन ने भी कहा था कि उसे फांसी से पहले इसकी सूचना नहीं दी गई। बाद में बांग्लादेश ने न्यायिक फैसलों की प्रतियां और मामले से जुड़ी जानकारी मांगी।

    स्वीटी की मां अपनी बेटी का शव बांग्लादेश वापस लाने की गुहार लगा रही हैं ताकि वह आखिरी बार उसका चेहरा देख सकें। जिस परिवार ने कर्ज लेकर उसे बेहतर जिंदगी की उम्मीद में विदेश भेजा था वह अब गहरे सदमे में है। पीछे छूट गई उसकी छोटी बेटी और परिवार के लिए यह घटना ऐसा दर्द बन गई है जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

  • ढाका में पाकिस्तान की बड़ी एंट्री! बांग्लादेशी सुरक्षाबलों को देगा ट्रेनिंग, CCTV ‘तीसरी आंख’ लगाने की तैयारी

    ढाका में पाकिस्तान की बड़ी एंट्री! बांग्लादेशी सुरक्षाबलों को देगा ट्रेनिंग, CCTV ‘तीसरी आंख’ लगाने की तैयारी


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच तेजी से बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के ढाका दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, साइबर निगरानी और सुरक्षाबलों की ट्रेनिंग को लेकर अहम समझौते हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम को क्षेत्रीय रणनीति और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    शुक्रवार को ढाका पहुंचे मोहसिन नकवी ने बांग्लादेश के गृह मामलों के सलाहकार सलाहुद्दीन अहमद समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बातचीत के बाद दोनों देशों ने ड्रग तस्करी, साइबर अपराध और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

    समझौते के तहत पाकिस्तान और बांग्लादेश की एजेंसियां नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई करने और खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान में मिलकर काम करेंगी। इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी है।

    इस दौरे का सबसे चर्चित हिस्सा ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ रहा। पाकिस्तान ने ढाका में बड़े पैमाने पर CCTV कैमरे लगाने और निगरानी सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसे शहर की सुरक्षा बढ़ाने और अपराध पर नजर रखने के लिए अहम कदम बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह मॉडल उसी तरह का होगा, जैसा चीन ने पाकिस्तान के कई शहरों में तैयार किया है।

    पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच पुलिस अकादमियों में ट्रेनिंग सहयोग, साइबर फ्रॉड की जांच और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए संयुक्त कार्यक्रम चलाने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए सचिव स्तर का एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर भी सहमति बनी है, जो दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और शेख हसीना सरकार के कमजोर पड़ने के बाद पाकिस्तान लगातार अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक और रणनीतिक संपर्क तेजी से बढ़े हैं।

    इससे पहले फरवरी में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर्रहमान के बीच भी संबंध मजबूत करने को लेकर अहम बातचीत हुई थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह सक्रियता केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दक्षिण एशिया में अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में भी जुटा है। वहीं, क्षेत्रीय राजनीति पर नजर रखने वाले देशों के लिए पाकिस्तान-बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकियां आने वाले समय में अहम रणनीतिक संकेत मानी जा रही हैं।