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  • सुप्रीम कोर्ट ने TMC के चार फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से किया इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने TMC के चार फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से किया इनकार

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट को चार डेबिट-फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इन चार खातों में करीब 804 करोड़ रुपये की राशि मौजूद है। TMC गुट ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत से इन खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से भी मना कर दिया, जिसमें खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार किया गया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष में नहीं जा रहा है, क्योंकि मुख्य मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित है। पीठ ने हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव चिह्न पर रोक लगाए जाने के बाद इन बैंक खातों में मौजूद राशि पर अधिकार किसका है, यह महत्वपूर्ण सवाल अभी न्यायिक निर्णय के लिए लंबित है। ऐसे में शीर्ष अदालत ने इस स्तर पर खातों को संचालित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।

    यह मामला पहले फ्रीज किए गए तीन HDFC बैंक खातों से अलग है। TMC गुट ने जिन चार बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी, उन्हें डेबिट लेनदेन के लिए फ्रीज किया गया था। पार्टी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए इन खातों के संचालन की अनुमति मांगी थी। TMC गुट की ओर से कहा गया था कि खातों पर रोक के कारण पार्टी के कामकाज पर असर पड़ रहा है और इसलिए इन्हें संचालित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, इस मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया है।

    इससे पहले 27 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट को करीब 804 करोड़ रुपये वाले इन चार बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। शीर्ष अदालत ने अब हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। साथ ही लंबित मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है। इस दौरान अदालत ने खातों में मौजूद राशि पर अधिकार को लेकर उठे सवाल को भी महत्वपूर्ण माना है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद चारों फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की मांग पर फिलहाल राहत नहीं मिली है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले के मूल विवाद पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। अदालत के अनुसार, खातों में मौजूद धन पर अधिकार किसका है, यह सवाल अभी लंबित है और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए तय किया जाना बाकी है। 1 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केवल हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया और मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया।

  • जनगणना 2027: आधार से लेकर बैंक खातों तक….. लोगों से पूछी जाएंगी ये जानकारियां

    जनगणना 2027: आधार से लेकर बैंक खातों तक….. लोगों से पूछी जाएंगी ये जानकारियां


    नई दिल्ली।
    जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर आधार (Aadhaar), मतदाता पहचान पत्र (Voter ID), ड्राइविंग लाइसेंस (Driving license), पासपोर्ट, मोबाइल नंबर (Mobile number) और बैंक खातों (Bank accounts) से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर लोगों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान नागरिकों से कोई निजी या गोपनीय बैंकिंग जानकारी नहीं मांगी जाएगी। नागरिकों से बैंक खातों की सिर्फ संख्या पूछी जाएगी।

    इसका मतलब है कि बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड, एटीएम या डेबिट कार्ड नंबर, पासवर्ड, पिन, ओटीपी, खाते में जमा राशि या लेन-देन का विवरण नहीं देना है। सिर्फ यह बताना है कि आपके नाम पर कितने बैंक खाते हैं। इसी तरह आधार, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जैसे सरकार द्वारा जारी पहचान दस्तावेजों से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। यह जानकारी उपलब्ध होने की स्थिति में ही दी जानी है।

    कर्मियों को क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र: जनगणना का कार्य करने वाले कर्मचारियों की पहचान के लिए क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र की व्यवस्था की गई है। किसी भी तरह का संदेह होने की स्थिति में इस कोड की मदद से कर्मचारी की पहचान सत्यापित की जा सकती है।


    पहले से तैयारी पूरी रखें

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना में करीब 40 प्रश्न पूछे जाने हैं। इसलिए घर पर पहले से आवश्यक जानकारी कागज पर लिखकर तैयार रखना उपयोगी होगा। इससे प्रक्रिया में आसानी और गलत जानकारी देने की संभावना भी कम होगी।


    वित्तीय जानकारी नहीं लेंगे

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना का उद्देश्य लोगों की निजी बैंकिंग या वित्तीय जानकारी हासिल करना नहीं है। इसका उद्देश्य देश की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, आवास, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और जनसांख्यिकीय पहलुओं से जुड़ा विश्वसनीय आंकड़ा तैयार करना है।


    आपकी जानकारी सुरक्षित

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना की जानकारी ‘जनगणना अधिनियम, 1948’ के तहत एकत्र की जाती है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत जानकारी गोपनीयता धारा 15 के तहत सुरक्षित है। इसलिए नागरिकों को अनावश्यक भय या भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है।


    साइबर ठगी से सावधान, आपको क्या नहीं बताना है

    1. बैंक अकाउंट नंबर
    2. एटीएम/डेबिट कार्ड नंबर
    3. इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड
    4. यूपीआई पिन
    5. ओटीपी
    6. खाते में उपलब्ध राशि
    7. बैंक लेन-देन का विवरण

  • TMC को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, ईडी द्वारा फ्रीज किए गए तीन बैंक खाते फिलहाल रहेंगे बंद

    TMC को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, ईडी द्वारा फ्रीज किए गए तीन बैंक खाते फिलहाल रहेंगे बंद


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए पार्टी के तीन बैंक खातों के संचालन की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया। इन खातों में कुल 440.42 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं।

    ईडी ने यह कार्रवाई राज्य पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की है। जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं, अवैध धन जुटाने और पार्टी के कुछ बैंक खातों के माध्यम से हुए संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

    हाईकोर्ट ने खारिज की अंतरिम राहत की मांग
    मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 13 जुलाई को अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए टीएमसी की अंतरिम राहत की मांग खारिज कर दी। इसके साथ ही पार्टी के तीनों बैंक खाते फिलहाल फ्रीज ही रहेंगे।

    जांच में क्या सामने आया?
    रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी एक अन्य इकाई को ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि संबंधित कंपनी ने 2023 से 2026 के बीच 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नई कंपनी को भेजे। अधिकारियों के अनुसार, इस धनराशि का आगे भी लेनदेन किया गया।

    जेट और हेलीकॉप्टर खरीद की जांच
    ईडी के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कथित लेनदेन में से 112 करोड़ रुपये का उपयोग एम्ब्रेयर लेगेसी 600 बिजनेस जेट और अगस्तावेस्टलैंड 109SP हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया। एजेंसी इस पूरे वित्तीय लेनदेन और धन के स्रोत की जांच कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में इस संबंध में आगे की सुनवाई होना बाकी है।