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  • रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस केस में सीबीआई का बड़ा एक्शन पहली चार्जशीट में दो कंपनियां और पांच पूर्व अधिकारी नामजद

    रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस केस में सीबीआई का बड़ा एक्शन पहली चार्जशीट में दो कंपनियां और पांच पूर्व अधिकारी नामजद

    नई दिल्ली । देश के चर्चित बैंक धोखाधड़ी मामलों में शामिल रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े 4097 करोड़ रुपए के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए गए आरोप पत्र में रिलायंस समूह की दो कंपनियों सहित कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सुनियोजित साजिश के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को हजारों करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया जबकि संबंधित कंपनियों और आरोपियों को अनुचित लाभ मिला।

    सीबीआई की चार्जशीट में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के अलावा रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के पांच पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें तत्कालीन निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांग प्रवीण मोदी निदेशक रविंद्र सोमयाजुला राव धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी एग्जीक्यूटिव रिस्क ऑफिसर राजेश कृष्णमूर्ति और चीफ रिस्क ऑफिसर लव चतुर्वेदी शामिल हैं। सभी पर आपराधिक साजिश रचने धोखाधड़ी करने और सरकारी बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।

    जांच एजेंसी के अनुसार रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड ने बैंकों से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं किया। आरोप है कि यह धनराशि विभिन्न मध्यस्थ और शेल कंपनियों के माध्यम से रिलायंस एडीए समूह की अन्य कंपनियों में स्थानांतरित कर दी गई। इस पूरी प्रक्रिया से बैंकिंग नियमों का उल्लंघन हुआ और सरकारी बैंकों को 4097 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।

    सीबीआई ने बताया कि यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि कुल 13 सरकारी बैंकों के बैंकिंग कंसोर्टियम को इस कथित वित्तीय अनियमितता के कारण भारी नुकसान हुआ। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित साजिश में और कौन कौन शामिल था।

    मामले की जांच के दौरान सीबीआई अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी कर चुकी है। इनमें रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांग मोदी तथा रिलायंस कैपिटल के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी अमित बापना शामिल हैं। वर्तमान में अमिताभ झुनझुनवाला और देवांग मोदी न्यायिक हिरासत में हैं जबकि अमित बापना सीबीआई की हिरासत में हैं।

    जांच एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह केवल पहली चार्जशीट है और जांच अभी जारी है। आने वाले समय में अन्य निदेशकों कंपनियों और संभावित सार्वजनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी।

    सीबीआई के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशंस रिलायंस होम फाइनेंस रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड से जुड़े मामलों में विभिन्न सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों पर कुल सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। इससे पहले मई महीने में रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में भी पहली चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। एजेंसी का कहना है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष व्यापक और त्वरित जांच की जा रही है तथा पूरी प्रक्रिया पर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी बनी हुई है।

  • नकली सोने पर 43 लाख का गोल्ड लोन! PNB में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा, 15 लोगों पर FIR दर्ज

    नकली सोने पर 43 लाख का गोल्ड लोन! PNB में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा, 15 लोगों पर FIR दर्ज


    मध्यप्रदेश। जबलपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सदर शाखा से जुड़ा एक बड़ा बैंकिंग फर्जीवाड़ा सामने आया है। बैंक प्रबंधन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर्स सहित 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर उसे असली बताने की रिपोर्ट तैयार की गई और उसके आधार पर करीब 43 लाख रुपए का गोल्ड लोन स्वीकृत करा लिया गया। मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और गोल्ड लोन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस के अनुसार यह कथित फर्जीवाड़ा दिसंबर 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच किया गया। शिकायत में कहा गया है कि बैंक द्वारा अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर ने कुछ ग्राहकों के साथ मिलकर नकली आभूषणों को असली सोना प्रमाणित किया। बैंक ने वैल्यूअर की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए गोल्ड लोन स्वीकृत कर दिया और संबंधित आभूषण बैंक के लॉकर में सुरक्षित रख दिए गए।

    जानकारी के मुताबिक बैंक ने न्यू रामनगर स्थित एक ज्वेलरी कारोबारी को गोल्ड वैल्यूअर के रूप में अधिकृत किया था। आरोप है कि उन्होंने बैंक में आए कई ग्राहकों के नकली सोने को अपनी जांच रिपोर्ट में असली बताया, जिसके आधार पर लोन स्वीकृत हुए। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक अन्य अधिकृत वैल्यूअर ने भी एक मामले में कथित रूप से नकली आभूषणों को असली प्रमाणित किया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब गोल्ड लोन लेने वाले कई खाताधारकों ने निर्धारित अवधि के बाद भी अपनी किस्तें जमा नहीं कीं। बैंक की ओर से नोटिस जारी किए गए, लेकिन अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद लॉकर में रखे गए गिरवी आभूषणों की दोबारा जांच कराई गई। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि जिन आभूषणों के आधार पर लोन स्वीकृत किए गए थे, उनमें से कई नकली थे।

    इसके बाद बैंक प्रबंधन ने पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू की और फरवरी 2026 में पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।

    कैंट थाना पुलिस के मुताबिक शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा बैंक को हुए नुकसान की वास्तविक राशि कितनी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस तरह के अन्य मामले भी सामने आए हैं।

    बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन प्रक्रिया में वैल्यूअर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला माना जाएगा। हालांकि मामले में दर्ज आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

    फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश जारी है। बैंक प्रबंधन भी मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रहा है। पूरे घटनाक्रम पर अब जांच एजेंसियों और बैंक अधिकारियों की नजर बनी हुई है।

  • जबलपुर में साइबर ठगी: बुजुर्ग के खाते से एक लाख रुपये उड़ा लिए, योनो लिंक पर क्लिक कर हुआ हैक

    जबलपुर में साइबर ठगी: बुजुर्ग के खाते से एक लाख रुपये उड़ा लिए, योनो लिंक पर क्लिक कर हुआ हैक


    जबलपुर । जबलपुर में साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग नागरिक को अपना शिकार बना लिया। गोराबाजार थाना क्षेत्र के निवासी प्रभाकर मोहिते ने पुलिस को शिकायत दी कि उनके खाते से करीब एक लाख रुपये ठगी के जरिए गायब हो गए।

    शिकायत में बताया गया कि ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर बताया कि उनके एसबीआई योनो ऐप का एक्सपायर हो गया है। इसके बाद उन्होंने प्रभाकर मोहिते को एक लिंक भेजा और उस पर क्लिक करने को कहा। लिंक पर क्लिक करते ही बुजुर्ग का मोबाइल हैक हो गया। इसके तुरंत बाद उनके खाते से कई ट्रांजेक्शन के जरिए कुल एक लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए गए।

    गोराबाजार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात साइबर अपराधियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों को चेताया है कि कभी भी मोबाइल लिंक या कॉल पर बैंक की जानकारी साझा न करें और ऐसे संदिग्ध संदेश आने पर सीधे अपने बैंक या पुलिस से संपर्क करें।

    इस घटना ने एक बार फिर साइबर ठगी के नए तरीकों की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल या इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल करते समय हमेशा सुरक्षित ऐप और आधिकारिक वेबसाइटों का ही प्रयोग करें।

  • बैंगलुरु बैंक मैनेजर ने ग्राहकों का 3 किलो सोना हड़पकर जुए में उड़ाया, पुलिस ने गिरफ्तार किया

    बैंगलुरु बैंक मैनेजर ने ग्राहकों का 3 किलो सोना हड़पकर जुए में उड़ाया, पुलिस ने गिरफ्तार किया


    बैंगलुरु । बैंगलुरु में एक चौकाने वाला बैंक फ्रॉड सामने आया है जिसमें इंडियन बैंक के 34 वर्षीय असिस्टेंट मैनेजर किरन कुमार ने ग्राहकों के करीब 3 किलो सोना हड़प लिया। यह सोना ग्राहकों के लॉकर में सुरक्षित रखा गया था और इसकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये बताई जा रही है। आरोपी ने इस सोने को बेचकर प्राप्त राशि से ऑनलाइन जुआ खेला।

    पुलिस और बैंक सूत्रों के मुताबिक जब शाखा के ब्रांच मैनेजर अनुपस्थित थे तब किरन कुमार के पास लॉकर का एक्सेस था। उन्होंने लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में सोना चुराना शुरू किया और धीरे-धीरे ग्राहकों के करीब 2.70 किलो सोने पर कब्जा कर लिया।

    यह मामला 2 जनवरी को तब उजागर हुआ जब एक ग्राहक अपने गहने निकालने बैंक गया और लॉकर में छेड़छाड़ पाई। जांच में पता चला कि बैंक के 21 लॉकरों से गहने गायब हैं जबकि तीन लॉकर पूरी तरह खाली कर दिए गए थे। इसके बाद बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बैंगलुरु पुलिस ने किरन कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह फ्रॉड पिछले साल तेलंगाना में एसबीआई बैंक के कैशियर द्वारा किए गए बड़े घोटाले की याद दिलाता है। उस मामले में कैशियर ने 10 महीने की योजना के तहत ग्राहकों के 14 करोड़ रुपये और 20 किलो सोना हड़प लिया था।

    अब बैंगलुरु में हुए इस फ्रॉड की जांच जारी है। पुलिस ने कहा है कि ग्राहक अपने लॉकर की सामग्री की सुरक्षा और ट्रैकिंग के लिए सावधान रहें। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में आरोपी से पूछताछ के बाद चोरी किए गए सोने की वापसी और अन्य संभावित अपराधियों की पहचान की जाएगी। यह घटना एक बार फिर बैंकिंग सुरक्षा और कर्मचारियों पर भरोसे के बीच खतरनाक अंतर दिखाती है और ग्राहकों के लिए चेतावनी है कि उन्हें अपनी संपत्ति की निगरानी व्यक्तिगत रूप से भी करनी चाहिए।