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  • रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, पहली चार्जशीट दाखिल; दो कंपनियों समेत सात आरोपी नामजद

    रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, पहली चार्जशीट दाखिल; दो कंपनियों समेत सात आरोपी नामजद

    नई दिल्ली । रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने जांच को आगे बढ़ाते हुए पहली चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल कर दी है। इस आरोपपत्र में दो रिलायंस समूह की कंपनियों सहित कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ, जबकि संबंधित कंपनियों और कुछ अधिकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले की जांच अभी भी जारी है और आगे पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाने की संभावना जताई गई है।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपपत्र में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड तथा रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के पांच पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें तत्कालीन निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निदेशक तथा जोखिम प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ पदों पर कार्यरत अधिकारी शामिल हैं। सीबीआई ने सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वित्तीय नुकसान पहुंचाने से संबंधित आरोप लगाए हैं।

    जांच में यह आरोप सामने आया है कि बैंकों से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं किया गया। एजेंसी का दावा है कि ऋण की राशि को विभिन्न मध्यस्थ और शेल कंपनियों के माध्यम से समूह की अन्य कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। जांच के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया के कारण ऋण देने वाले सरकारी बैंकों को भारी वित्तीय क्षति हुई और संबंधित पक्षों को अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।

    यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार बैंकिंग कंसोर्टियम से जुड़े 13 सरकारी बैंकों को कुल 4,097 करोड़ रुपये का कथित नुकसान हुआ है। इसी आधार पर विस्तृत जांच शुरू की गई, जिसके बाद पहली चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की गई है।

    सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल वर्तमान आरोपियों तक सीमित नहीं है। एजेंसी अन्य निदेशकों, कंपनियों तथा संभावित रूप से जुड़े सार्वजनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। एजेंसी का कहना है कि पूरे मामले की हर कड़ी की गहन जांच की जा रही है।

    इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांग मोदी तथा रिलायंस कैपिटल के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी अमित बापना शामिल हैं। वर्तमान में दो आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी जांच एजेंसी की हिरासत में है।

    सीबीआई के अनुसार रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों से जुड़े मामलों में अब तक कई प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस टेलीकॉम से संबंधित मामले शामिल हैं। इन मामलों में विभिन्न सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि इससे पहले रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में भी आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। मौजूदा कार्रवाई उसी श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है। एजेंसी का कहना है कि सभी मामलों की निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच जारी है तथा आगे मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • बैंक घोटाले पर कसा शिकंजा सोनी इस्पात लिमिटेड डायरेक्टर गिरफ्तार दो आरोपी फरार

    बैंक घोटाले पर कसा शिकंजा सोनी इस्पात लिमिटेड डायरेक्टर गिरफ्तार दो आरोपी फरार

    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने करोड़ों रुपए के बैंक घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सोनी इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर राजीव लोचन सोनी को गिरफ्तार कर लिया है आरोपी को इंदौर से पकड़ा गया जहां वह जांच एजेंसी की नजर में था इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर बैंकिंग सिस्टम में फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

    जांच एजेंसियों के अनुसार राजीव लोचन सोनी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय स्टेट बैंक से करीब 13 करोड़ रुपए का लोन हासिल किया था यह लोन वर्ष 2006 से 2011 के बीच कंपनी के नाम पर लिया गया था आरोप है कि लोन लेने के दौरान दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई और नियमों का उल्लंघन किया गया बाद में यह लोन खाता एनपीए घोषित हो गया जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ

    मामले की शुरुआत तब हुई जब बैंक ने अपने स्तर पर खाते की समीक्षा की और अनियमितताएं सामने आईं इसके बाद वर्ष 2022 में एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि लोन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की गई थी

    सीबीआई ने इस मामले में राजीव लोचन सोनी के अलावा विजय सोनी और जगदीश चन्द्र सारंग को भी आरोपी बनाया है हालांकि फिलहाल राजीव लोचन की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि अन्य दोनों आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है जांच एजेंसी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा

    गिरफ्तारी के बाद राजीव लोचन सोनी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर मिलीभगत हुई थी ऐसे मामलों में अक्सर कई स्तरों पर साजिश और सहयोग की परतें सामने आती हैं इसलिए जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है

    यह मामला सिर्फ एक कंपनी या व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे वित्तीय तंत्र के लिए चेतावनी है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे बड़े लोन हासिल करना और फिर उसे चुकाए बिना छोड़ देना किस तरह बैंकिंग व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगा सकती है

    सीबीआई की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ एजेंसियां सक्रिय हैं और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं जो इस घोटाले की परतें और खोल सकते हैं