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  • बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, हर शनिवार छुट्टी की पोस्ट फर्जी, दूसरे-चौथे शनिवार ही अवकाश

    बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, हर शनिवार छुट्टी की पोस्ट फर्जी, दूसरे-चौथे शनिवार ही अवकाश


    भोपाल । सोशल मीडिया पर इन दिनों बैंकों में हर शनिवार छुट्टी होने को लेकर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। वायरल पोस्ट में भारत सरकार के राजपत्र यानी Gazette of India का हवाला देते हुए दावा किया जा रहा है कि 30 सितंबर 2026 से भारतीय स्टेट बैंक समेत देश के सभी सरकारी बैंकों में हर शनिवार अवकाश रहेगा। इस खबर के सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई है। हालांकि सरकार की ओर से इस दावे को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया गया है।

    PIB Fact Check ने वायरल दावे की जांच करते हुए स्पष्ट किया है कि वित्त मंत्रालय की ओर से बैंकों में हर शनिवार छुट्टी घोषित करने के संबंध में ऐसा कोई गजट नोटिफिकेशन या आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा कथित भारत सरकार का राजपत्र वास्तविक सरकारी दस्तावेज नहीं है। ऐसे में बैंक ग्राहकों को इस तरह की पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचनी चाहिए।

    मौजूदा व्यवस्था की बात करें तो देश के बैंकों में फिलहाल हर शनिवार छुट्टी नहीं होती है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों में अवकाश रहता है। इसके अलावा पहले और तीसरे शनिवार को बैंक सामान्य रूप से काम करते हैं। यदि किसी महीने में पांचवां शनिवार आता है तो उस दिन भी बैंक खुले रहते हैं। इसलिए हर शनिवार बैंक बंद रहने की बात फिलहाल लागू नहीं हुई है।

    बैंकों में पांच दिन कामकाज यानी 5 Days Banking की मांग हालांकि काफी समय से चर्चा में है। बैंक कर्मचारी संगठनों और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े संगठनों की ओर से सभी शनिवार को अवकाश देने की मांग उठाई जाती रही है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन यानी IBA के बीच इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई है। इसी मांग को लेकर एक उच्चस्तरीय समिति बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन समिति के गठन या मांग पर चर्चा होने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार ने पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था को मंजूरी दे दी है।

    फिलहाल इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। ऐसे में 30 सितंबर 2026 से सभी शनिवार को बैंकों में छुट्टी होने का दावा सही नहीं है। ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी छुट्टियों और कामकाज के समय की जानकारी के लिए आधिकारिक बैंक वेबसाइट या संबंधित बैंक की सूचना को ही आधार बनाना चाहिए।

    सोशल मीडिया पर सरकारी दस्तावेज जैसी दिखने वाली तस्वीरें और नोटिफिकेशन अक्सर लोगों के बीच तेजी से फैल जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी जानकारी को आगे साझा करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की जांच करना जरूरी है। खासकर बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी सूचना का असर सीधे ग्राहकों के लेनदेन और जरूरी कामों पर पड़ सकता है। इसलिए वायरल पोस्ट के आधार पर बैंक जाने या अपना जरूरी काम टालने के बजाय आधिकारिक सूचना की पुष्टि करना ज्यादा उचित है।

    फिलहाल देश के बैंकिंग नियमों में हर शनिवार छुट्टी की व्यवस्था लागू नहीं हुई है। दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक अवकाश की मौजूदा व्यवस्था ही प्रभावी है। यदि भविष्य में पांच दिन बैंकिंग को लेकर सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला लिया जाता है तो उसकी जानकारी आधिकारिक अधिसूचना के जरिए ही सामने आएगी।

  • MP में आज से बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर 3 दिन तक परेशान होंगे ग्राहक 40 हजार बैंककर्मियों की हड़ताल ने बढ़ाई चिंता

    MP में आज से बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर 3 दिन तक परेशान होंगे ग्राहक 40 हजार बैंककर्मियों की हड़ताल ने बढ़ाई चिंता

    भोपाल।  मध्य प्रदेश में आज शुक्रवार को बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है। पांच दिवसीय बैंकिंग वीक की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंककर्मी एक दिन की हड़ताल पर रहेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले होने वाली इस हड़ताल के कारण प्रदेश की करीब 7 हजार बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। भोपाल में बैंक कर्मचारी एकजुट होकर प्रदर्शन भी करेंगे। हड़ताल भले ही केवल शुक्रवार को है लेकिन आम लोगों पर इसका असर लगातार तीन दिनों तक दिखाई दे सकता है क्योंकि इसके बाद शनिवार और रविवार को बैंकिंग अवकाश रहेगा।

    बैंक यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग सरकार के सामने रखी जा रही है लेकिन इस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वर्तमान व्यवस्था में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं जबकि बाकी शनिवार को कामकाज होता है। कर्मचारियों की मांग है कि हर शनिवार को अवकाश घोषित कर सोमवार से शुक्रवार तक पांच दिन बैंकिंग सेवाएं संचालित की जाएं। इसके बदले सप्ताह के पांच कार्यदिवसों में रोजाना करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

    हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में नकद निकासी जमा चेक क्लीयरेंस और अन्य काउंटर आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। खासकर बड़ी रकम निकालने या जमा करने वाले ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग यूपीआई एटीएम और मोबाइल बैंकिंग जैसी कई सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रह सकती हैं लेकिन नकद और शाखा से जुड़े जरूरी कामों के लिए ग्राहकों को इंतजार करना पड़ सकता है।

    यूनियनों की मांग केवल पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह तक सीमित नहीं है। संगठन स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई पीएलआई योजना का भी विरोध कर रहे हैं। यूनियन नेताओं का आरोप है कि यह योजना बैंक अधिकारियों के एक छोटे वर्ग को अधिक लाभ देने वाली है और इससे कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ सकती है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित प्रोत्साहन की नीति के बजाय कर्मचारियों के व्यापक हितों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    बैंक यूनियनों के मुताबिक पेंशन अपडेशन एक्स ग्रेशिया की समीक्षा एनपीएस को ओपीएस में बदलने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान डीए व्यवस्था जैसी मांगें भी अभी लंबित हैं। इसके साथ ही बैंकों में पर्याप्त संख्या में क्लर्क सब स्टाफ और आर्म्ड गार्ड की भर्ती की मांग भी उठाई जा रही है। यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों की कमी का सीधा असर बैंकिंग सेवाओं और मौजूदा कर्मचारियों के काम के दबाव पर पड़ रहा है।

    सबसे बड़ी चिंता यह है कि सितंबर में बैंकिंग सेवाओं पर दूसरी बड़ी बाधा भी आ सकती है। यूनियनों के कार्यक्रम के अनुसार 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद 28 से 30 सितंबर तक फिर हड़ताल प्रस्तावित है। ऐसे में लगातार पांच दिनों तक बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। फिलहाल शुक्रवार की हड़ताल को लेकर बैंक यूनियन और सरकार के बीच बातचीत जारी है लेकिन सकारात्मक समाधान नहीं निकलने के कारण आंदोलन का कार्यक्रम बरकरार रखा गया है। ऐसे में बैंक ग्राहकों के लिए सलाह है कि जरूरी नकद लेनदेन चेक जमा करने और शाखा से जुड़े दूसरे काम पहले से निपटा लें ताकि छुट्टियों और हड़ताल के कारण उन्हें अतिरिक्त इंतजार न करना पड़े।

  • 5-डे बैंकिंग वीक की मांग पर बैंककर्मियों का बड़ा आंदोलन: सितंबर में दो बार काम बंद, 26 से 30 सितंबर तक लगातार 5 दिन असर

    5-डे बैंकिंग वीक की मांग पर बैंककर्मियों का बड़ा आंदोलन: सितंबर में दो बार काम बंद, 26 से 30 सितंबर तक लगातार 5 दिन असर


    भोपाल । मध्य प्रदेश में सितंबर का महीना बैंक ग्राहकों के लिए परेशानी भरा हो सकता है। प्रदेश की करीब 7 हजार बैंक शाखाओं में इस महीने दो अलग-अलग मौकों पर बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है। करीब 40 हजार बैंककर्मी 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने समेत कई लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। पहली हड़ताल 11 सितंबर को प्रस्तावित है। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के कारण लगातार तीन दिन बैंकिंग कामकाज प्रभावित हो सकता है। महीने के आखिरी सप्ताह में भी बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद 28 29 और 30 सितंबर को बैंककर्मियों की हड़ताल प्रस्तावित है। इस तरह लगातार पांच दिन बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    हड़ताल के दौरान बैंक की रोजमर्रा की कई सेवाओं पर असर पड़ सकता है। नकद जमा और निकासी से लेकर चेक क्लियरेंस KYC अपडेट लॉकर से जुड़े काम और अन्य शाखा आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं होंगी लेकिन जिन कामों के लिए ग्राहकों को शाखा जाना जरूरी होता है उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटा लें ताकि हड़ताल के दौरान उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

    बैंक यूनियनों का सबसे प्रमुख मुद्दा 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना है। फिलहाल बैंक कर्मचारियों को महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है। यूनियनों की मांग है कि महीने के सभी शनिवार को अवकाश घोषित किया जाए। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना बैंकिंग समय में करीब 40 मिनट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। यूनियनों का तर्क है कि इससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य संतुलन मिलेगा और बैंकिंग व्यवस्था को भी पांच कार्य दिवसों के आधार पर व्यवस्थित किया जा सकेगा।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU ने 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह के साथ स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई PLI योजना को वापस लेने की मांग भी उठाई है। यूनियनों का आरोप है कि नई PLI व्यवस्था से कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ सकती है। उनका कहना है कि अधिकारियों के सीमित वर्ग को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन देने की व्यवस्था बैंक कर्मचारियों के बीच विभाजन पैदा कर सकती है।

    बैंक यूनियनों के मुताबिक पेंशन अपडेशन और पेंशनभोगियों के एक्स ग्रेशिया की समीक्षा जैसे कई मुद्दे भी लंबे समय से लंबित हैं। NPS को OPS में बदलने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान DA व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई जा रही है। इसके अलावा बैंकों में पर्याप्त संख्या में क्लर्क सब स्टाफ और आर्म्ड गार्ड्स की भर्ती करने की मांग है। ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने का मुद्दा भी यूनियनों के एजेंडे में शामिल है।

    यूनियनों का कहना है कि इन मांगों का समाधान किए बिना सरकार अगले वेतन संशोधन समझौते को जल्द पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बैंक कर्मचारियों ने 27 अगस्त को देशभर में प्रदर्शन भी किए थे। अब सितंबर में प्रस्तावित हड़ताल को आंदोलन को आगे बढ़ाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि हड़ताल से पहले सरकार और बैंक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में बैठक प्रस्तावित है। यदि बातचीत के दौरान 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह और अन्य मांगों पर सहमति बनती है तो हड़ताल के फैसले में बदलाव की संभावना हो सकती है। वहीं यदि बातचीत बेनतीजा रहती है तो 11 सितंबर और 28 से 30 सितंबर की हड़ताल का असर देशभर की बैंकिंग व्यवस्था पर पड़ सकता है।

    UFBU ने इसके बाद 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का भी ऐलान किया है। ऐसे में सितंबर की प्रस्तावित हड़तालों के साथ बैंक कर्मचारियों और सरकार के बीच बातचीत का परिणाम आगे की बैंकिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • ATM कैश की कमी पर शिकायत, बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल

    ATM कैश की कमी पर शिकायत, बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम नेटवर्क को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। देशभर में लगभग 65,000 एटीएम वाले इस नेटवर्क में कैश की कमी को लेकर ATM इंडस्ट्री बॉडी CATMi ने भारतीय रिजर्व बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक को शिकायत भेजी है। संगठन का आरोप है कि कैश सप्लाई में प्राथमिकता बड़े शहरों को दी जा रही है, जिससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में एटीएम खाली पड़े हैं।

    ₹100 करोड़ मुआवजे की मांग
    ATM ऑपरेटरों के संगठन CATMi का कहना है कि कैश की अनुपलब्धता के कारण हजारों एटीएम बंद हो गए हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। संगठन ने बैंकिंग सिस्टम से करीब ₹100 करोड़ मुआवजे की मांग भी की है। उनका कहना है कि हर खाली एटीएम का मतलब एक खोया हुआ ट्रांजैक्शन है, जिससे इंटरचेंज और ऑपरेशन फीस का सीधा नुकसान होता है।

    छोटे शहरों में सबसे ज्यादा असर
    रिपोर्ट के अनुसार समस्या मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में देखने को मिल रही है। कई जगहों पर एटीएम में कैश रिफिल समय पर नहीं हो रहा, जिससे लोग घंटों तक परेशान हो रहे हैं। उद्योग के अनुसार, दिसंबर 2025 के बाद से कई राज्यों में बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट से कैश उपलब्धता में भी दिक्कत बढ़ी है।

    बढ़ती लागत और घटता ट्रांजैक्शन बना संकट की वजह
    ATM ऑपरेटरों के सामने एक और बड़ी चुनौती ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी है। मजदूरी और ईंधन की कीमतें बढ़ने से खर्च 60% तक बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर कैश निकासी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 में जहां मासिक ट्रांजैक्शन 57 करोड़ थे, वहीं सितंबर 2025 तक यह घटकर 43.95 करोड़ रह गए।

    ग्रामीण क्षेत्रों में घटते ATM
    देश में ATM की संख्या भी धीरे-धीरे कम हो रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल ATM संख्या घटकर लगभग 2.51 लाख रह गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 2.53 लाख से अधिक था। सबसे ज्यादा गिरावट ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दर्ज की गई है।

    आम लोगों पर क्या असर होगा?
    अगर कैश सप्लाई की समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो छोटे शहरों और गांवों में लोगों को नकदी निकालने में और दिक्कत हो सकती है। हालांकि डिजिटल पेमेंट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत में अब भी बड़ी आबादी रोजमर्रा के लेनदेन के लिए कैश पर निर्भर है। ऐसे में ATM संकट सीधे आम जनता की जेब और सुविधा दोनों को प्रभावित कर सकता है।

  • सरकार की रणनीति में बदलाव के संकेत, IDBI Bank बिक्री प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की संभावना से बाजार में जोश

    सरकार की रणनीति में बदलाव के संकेत, IDBI Bank बिक्री प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की संभावना से बाजार में जोश

    नई दिल्ली । भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जहां सरकार के स्वामित्व वाले IDBI Bank के निजीकरण को लेकर रुकी हुई प्रक्रिया फिर से गति पकड़ सकती है। इस संभावना की खबर सामने आने के बाद बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी अचानक बढ़ गई और बैंक के शेयर में करीब 7 प्रतिशत तक की तेज़ी दर्ज की गई, जिससे स्टॉक ने इंट्राडे में नया उच्च स्तर छू लिया।

    सूत्रों के अनुसार सरकार IDBI Bank में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे पहले इस डील को रोक दिया गया था क्योंकि शुरुआती दौर में मिली बोलियां अपेक्षित मूल्य से कम थीं, जिससे सरकार संतुष्ट नहीं थी। अब अधिकारियों द्वारा यह आकलन किया जा रहा है कि प्रक्रिया को अधिक आकर्षक और व्यवहारिक बनाने के लिए इसमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि नए और मजबूत निवेशक इसमें रुचि दिखाएं।

    बताया जा रहा है कि सरकार इस बार बिक्री प्रक्रिया को सरल और निवेशकों के लिए अधिक लाभकारी बनाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें बैंक के मूल्यांकन ढांचे में बदलाव और रिजर्व प्राइस को समायोजित करने जैसी संभावनाएं शामिल हैं, ताकि बोली लगाने वाले अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में भाग ले सकें। पहले चरण में मिली कमजोर प्रतिक्रिया के बाद यह माना जा रहा है कि नए सिरे से रणनीति बनाकर प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जा सकता है।

    इस डील में IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री लंबे समय से सरकार की बड़ी आर्थिक योजनाओं का हिस्सा रही है। सरकार लगातार अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस बैंक की बिक्री अब तक कई कारणों से पूरी नहीं हो पाई है। यदि यह सौदा सफल होता है तो यह हाल के वर्षों में बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी बिक्री में से एक माना जाएगा।

    पहले इस प्रक्रिया में कई बड़े निवेशकों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समूह भी शामिल थे, लेकिन कीमत और शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। अब संभावना जताई जा रही है कि यदि प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है तो इसमें नए निवेशकों को भी शामिल किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी, जिससे समय और बढ़ सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खबरों का सीधा असर बैंकिंग शेयरों पर पड़ता है और निवेशकों की उम्मीदें तुरंत बदल जाती हैं। IDBI Bank के शेयर में आई तेजी भी इसी सकारात्मक धारणा का परिणाम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला प्रक्रिया की औपचारिक घोषणा और निवेश शर्तों पर निर्भर करेगा।