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  • ATM कैश की कमी पर शिकायत, बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल

    ATM कैश की कमी पर शिकायत, बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम नेटवर्क को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। देशभर में लगभग 65,000 एटीएम वाले इस नेटवर्क में कैश की कमी को लेकर ATM इंडस्ट्री बॉडी CATMi ने भारतीय रिजर्व बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक को शिकायत भेजी है। संगठन का आरोप है कि कैश सप्लाई में प्राथमिकता बड़े शहरों को दी जा रही है, जिससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में एटीएम खाली पड़े हैं।

    ₹100 करोड़ मुआवजे की मांग
    ATM ऑपरेटरों के संगठन CATMi का कहना है कि कैश की अनुपलब्धता के कारण हजारों एटीएम बंद हो गए हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। संगठन ने बैंकिंग सिस्टम से करीब ₹100 करोड़ मुआवजे की मांग भी की है। उनका कहना है कि हर खाली एटीएम का मतलब एक खोया हुआ ट्रांजैक्शन है, जिससे इंटरचेंज और ऑपरेशन फीस का सीधा नुकसान होता है।

    छोटे शहरों में सबसे ज्यादा असर
    रिपोर्ट के अनुसार समस्या मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में देखने को मिल रही है। कई जगहों पर एटीएम में कैश रिफिल समय पर नहीं हो रहा, जिससे लोग घंटों तक परेशान हो रहे हैं। उद्योग के अनुसार, दिसंबर 2025 के बाद से कई राज्यों में बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट से कैश उपलब्धता में भी दिक्कत बढ़ी है।

    बढ़ती लागत और घटता ट्रांजैक्शन बना संकट की वजह
    ATM ऑपरेटरों के सामने एक और बड़ी चुनौती ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी है। मजदूरी और ईंधन की कीमतें बढ़ने से खर्च 60% तक बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर कैश निकासी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 में जहां मासिक ट्रांजैक्शन 57 करोड़ थे, वहीं सितंबर 2025 तक यह घटकर 43.95 करोड़ रह गए।

    ग्रामीण क्षेत्रों में घटते ATM
    देश में ATM की संख्या भी धीरे-धीरे कम हो रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल ATM संख्या घटकर लगभग 2.51 लाख रह गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 2.53 लाख से अधिक था। सबसे ज्यादा गिरावट ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दर्ज की गई है।

    आम लोगों पर क्या असर होगा?
    अगर कैश सप्लाई की समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो छोटे शहरों और गांवों में लोगों को नकदी निकालने में और दिक्कत हो सकती है। हालांकि डिजिटल पेमेंट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत में अब भी बड़ी आबादी रोजमर्रा के लेनदेन के लिए कैश पर निर्भर है। ऐसे में ATM संकट सीधे आम जनता की जेब और सुविधा दोनों को प्रभावित कर सकता है।

  • सरकार की रणनीति में बदलाव के संकेत, IDBI Bank बिक्री प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की संभावना से बाजार में जोश

    सरकार की रणनीति में बदलाव के संकेत, IDBI Bank बिक्री प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की संभावना से बाजार में जोश

    नई दिल्ली । भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जहां सरकार के स्वामित्व वाले IDBI Bank के निजीकरण को लेकर रुकी हुई प्रक्रिया फिर से गति पकड़ सकती है। इस संभावना की खबर सामने आने के बाद बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी अचानक बढ़ गई और बैंक के शेयर में करीब 7 प्रतिशत तक की तेज़ी दर्ज की गई, जिससे स्टॉक ने इंट्राडे में नया उच्च स्तर छू लिया।

    सूत्रों के अनुसार सरकार IDBI Bank में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे पहले इस डील को रोक दिया गया था क्योंकि शुरुआती दौर में मिली बोलियां अपेक्षित मूल्य से कम थीं, जिससे सरकार संतुष्ट नहीं थी। अब अधिकारियों द्वारा यह आकलन किया जा रहा है कि प्रक्रिया को अधिक आकर्षक और व्यवहारिक बनाने के लिए इसमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि नए और मजबूत निवेशक इसमें रुचि दिखाएं।

    बताया जा रहा है कि सरकार इस बार बिक्री प्रक्रिया को सरल और निवेशकों के लिए अधिक लाभकारी बनाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें बैंक के मूल्यांकन ढांचे में बदलाव और रिजर्व प्राइस को समायोजित करने जैसी संभावनाएं शामिल हैं, ताकि बोली लगाने वाले अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में भाग ले सकें। पहले चरण में मिली कमजोर प्रतिक्रिया के बाद यह माना जा रहा है कि नए सिरे से रणनीति बनाकर प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जा सकता है।

    इस डील में IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री लंबे समय से सरकार की बड़ी आर्थिक योजनाओं का हिस्सा रही है। सरकार लगातार अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस बैंक की बिक्री अब तक कई कारणों से पूरी नहीं हो पाई है। यदि यह सौदा सफल होता है तो यह हाल के वर्षों में बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी बिक्री में से एक माना जाएगा।

    पहले इस प्रक्रिया में कई बड़े निवेशकों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समूह भी शामिल थे, लेकिन कीमत और शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। अब संभावना जताई जा रही है कि यदि प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है तो इसमें नए निवेशकों को भी शामिल किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी, जिससे समय और बढ़ सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खबरों का सीधा असर बैंकिंग शेयरों पर पड़ता है और निवेशकों की उम्मीदें तुरंत बदल जाती हैं। IDBI Bank के शेयर में आई तेजी भी इसी सकारात्मक धारणा का परिणाम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला प्रक्रिया की औपचारिक घोषणा और निवेश शर्तों पर निर्भर करेगा।