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  • 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड निययों में होगा बदलाव, हाई ट्रांजैक्शन पर रहेगी नजर, जानें 5 बड़े बदलाव

    1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड निययों में होगा बदलाव, हाई ट्रांजैक्शन पर रहेगी नजर, जानें 5 बड़े बदलाव


    नई दिल्ली । अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो आने वाली 1 अप्रैल 2026 की तारीख आपके लिए अहम हो सकती है। इस दिन से क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। ये बदलाव इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत प्रस्तावित हैं। नए नियमों के लागू होने के बाद क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर निगरानी और सख्त हो जाएगी। खासतौर पर पैन कार्ड लिंकिंग और हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर नजर बढ़ेगी।

    हालांकि आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के खर्च पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ज्यादा खर्च करने वाले या विदेश यात्रा करने वालों के लिए ये बदलाव महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

    हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर कड़ी निगरानी
    1 अप्रैल 2026 से सबसे बड़ा बदलाव ज्यादा खर्च करने वाले यूजर्स के लिए होगा। नए नियमों के अनुसार, यदि किसी वित्त वर्ष में आपके क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये या उससे अधिक का भुगतान होता है, तो बैंक इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को दे सकता है। इसके अलावा, एक तय सीमा से अधिक विदेशी खर्चों पर भी नजर रखी जाएगी। यदि आपका खर्च आपकी घोषित आय से ज्यादा पाया जाता है, तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस मिल सकता है।

    PAN कार्ड लिंकिंग होगी जरूरी
    अगले महीने से क्रेडिट कार्ड के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया जाएगा। 1 अप्रैल 2026 के बाद बिना पैन नंबर के नया क्रेडिट कार्ड जारी नहीं होगा। साथ ही मौजूदा कार्डधारकों को भी अपना कार्ड पैन से लिंक कराना होगा। इससे क्रेडिट कार्ड आपकी टैक्स पहचान का अहम हिस्सा बन जाएगा।

    कंपनी के कार्ड के इस्तेमाल पर टैक्स
    यदि आपको आपकी कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड मिला है, तो यह बदलाव आपके लिए महत्वपूर्ण है। नए नियमों के तहत कंपनी के कार्ड से किए गए व्यक्तिगत खर्च को टैक्स योग्य लाभ माना जा सकता है। यानी यदि आप निजी खर्च, यात्रा या मनोरंजन के लिए इस कार्ड का उपयोग करते हैं, तो वह राशि आपकी आय में जोड़ी जा सकती है और उस पर टैक्स देना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में खर्च से जुड़े बिल या प्रमाण रखना जरूरी होगा।

    क्रेडिट कार्ड से टैक्स पेमेंट का विकल्प
    नए नियमों के तहत क्रेडिट कार्ड से इनकम टैक्स भुगतान करने का विकल्प भी मिल सकता है। यानी अब आप नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड के अलावा क्रेडिट कार्ड से भी टैक्स जमा कर सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए मददगार हो सकती है, जिनके पास भुगतान के समय पर्याप्त नकदी नहीं होती। हालांकि, इस पर बैंक प्रोसेसिंग फीस ले सकता है और समय पर भुगतान न करने पर ब्याज भी देना पड़ सकता है।

    क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट बनेगा एड्रेस प्रूफ
    एक और अहम बदलाव के तहत क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को पते के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यदि स्टेटमेंट हाल का है और उसमें सही पता दर्ज है, तो इसे वैध दस्तावेज माना जाएगा। इससे पैन कार्ड बनवाने या उसमें बदलाव करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। साथ ही, क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते समय पैन कार्ड देना भी अनिवार्य होगा।

  • जुलाई से नया नियम लागू: मिस-सेलिंग पर RBI का शिकंजा, ग्राहकों को मिलेगा फायदा

    जुलाई से नया नियम लागू: मिस-सेलिंग पर RBI का शिकंजा, ग्राहकों को मिलेगा फायदा


    नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी हल्दी कंपनियों के बीच ‘मिस-सेलिंग’ पर सहमति की तैयारी की है। प्रस्तावित नए नियम जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं, जैसे मुख्य उद्देश्य निवेशकों को गलत या बुनियादी जानकारी हासिल करने वाले वित्तीय योजनाओं पर रोक लगाना है। इन प्रावधानों के लागू होने के बाद यदि किसी ग्राहक को पता चलता है कि उसके साथ धोखे से कोई उत्पाद निकाला गया है, तो वह शिकायत करेगा और जांच के मामले में सही पाए जाने पर बैंक को पूरा पैसा लौटाना होगा।

    मिस-सेलिंग क्या है? आसान भाषा में

    ‘मिस-सेलिंग’ का मतलब ग्राहक की ज़रूरत, प्रोफ़ाइल या समझ के आधार पर वित्तीय उत्पाद युवाओं के लिए गलत जानकारी है। ऐसा अक्सर होता है जब बैंक कर्मचारी अपने निवेशकों या इंसेंटिव के दबाव में निवेशकों को बीमा, फंड फंड या अन्य थर्ड पार्टी उत्पाद बेचते हैं। कई बार रिस्क, लॉक-इन होम या रिटर्न से जुड़ी अहम जानकारी छिपा ली जाती है।

    उदाहरण के तौर पर पर-

    एफडी ने ग्राहकों को यूलिप से “सेफ इन्वेस्टमेंट” में शामिल किया
    लोन के साथ इंश्योरेंश जॉइंट देना
    बुजुर्ग व्यक्ति को लंबी अवधि की स्थायित्व थमा देना

    ये सभी मिस-सेलिंग के क्लासिक केस माने जाते हैं।

    जुलाई 2026 से क्या बदला जाएगा?

    भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रस्तावित पदासीन पदों के लिए आवेदकों के लिए स्पष्ट और बंधनकारी प्रणाली बनाई जाएगी। यदि ग्राहक को समय सीमा निर्धारित नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर सकता है।

    अगर जांच में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो-

    उत्पादों को रद्द करना होगा
    ग्राहक को पूरी रकम लौटानी होगी
    हुए नुकसान की खोज भी करनी होगी
    इसके अलावा, बैंकों को अपने कर्मचारियों को ऐसे उत्पाद बेचने के लिए गलत प्रोत्साहन देने से भी रोकना होगा।

    सिस्टम से सुपरमार्केट प्लांट

    नए स्नातक के अधीन संस्थानों को हर स्टायर्ड पार्टी उत्पाद की बिक्री के लिए 30 दिन के अंदर ग्राहक से अंतिम संस्कार लेना अनिवार्य होगा। इस डेटा के आधार पर हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सिस्टम में टुकड़े और टुकड़े होंगे।

    बदनसीब की वजह

    पिछले कुछ वर्षों में बैंकों की ऑर्थोडॉक्स पार्टी के उत्पादों की कमाई तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 2024-25 में इस माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का कमीशन कमाया। इसी प्रवृत्ति को देखते हुए सरकार और जनरल जनरल को अब सबसे ज्यादा छूट दी गई है। हाल ही में निर्मला सीतारमण ने भी बैंकों को अपने मूल कार्य-जमा और कर्ज-पर ध्यान देने की सलाह दी थी।

    वेबसाइट के लिए क्या जरूरी है?

    ऐसे विंटेज को भी रहने की ज़रूरत है। किसी भी वित्तीय उत्पाद के रिकॉर्ड्स से पहले—

    सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें
    जोखिम और ऑटोमोबाइल को मंजूरी
    केवल मूल्यवान वादों पर भरोसा न करें
    आवश्यकता है लिखित जानकारी लेने की

    यदि आपको लगता है कि आपके साथ कुछ गलत हुआ है, तो आप अपने बैंक की वेबसाइट या संबंधित लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

    वाद-विवाद के हित में बड़ा कदम

    भारतीय रिज़र्व बैंक का यह कदम नेटवर्क सिस्टम में निवेशकों की रक्षा करने की दिशा को बढ़ाना और महत्व देना माना जा रहा है। इससे मिस-सेलिंग जैसी समस्याओं पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।