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  • आरबीआई ने बंद नोटों को बदलने के लिए नहीं जारी किया कोई नया नियम..

    आरबीआई ने बंद नोटों को बदलने के लिए नहीं जारी किया कोई नया नियम..

    नई दिल्ली। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाओं का प्रवाह जितनी तेजी से होता है उतनी ही तेजी से भ्रामक और गलत जानकारियां भी समाज में फैलती हैं। हाल ही में विभिन्न संदेशों और चर्चाओं के माध्यम से यह दावा किया जा रहा था कि केंद्रीय बैंक ने काफी समय पहले चलन से बाहर हो चुके पुराने नोटों को बदलने के लिए एक और अवसर प्रदान किया है और इसके लिए नए नियम भी जारी किए गए हैं। आधिकारिक जांच और तथ्यों के गहन विश्लेषण के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि इस प्रकार का कोई भी दावा सत्य नहीं है। प्रशासन ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि पुरानी मुद्रा को बदलने के संबंध में किसी भी प्रकार का कोई नया बदलाव या घोषणा नहीं की गई है।

    भ्रामक खबरों का उद्देश्य अक्सर नागरिकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा करना होता है। विशेषकर वित्तीय मामलों में इस तरह की अफवाहें लोगों को गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यह देखा गया है कि साल 2016 में बंद किए गए उच्च मूल्य के नोटों को लेकर समय-समय पर इस तरह की मनगढ़ंत कहानियां साझा की जाती हैं। जिम्मेदार अधिकारियों ने एक बार फिर यह दोहराया है कि इन नोटों को बदलने की समय सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है और वर्तमान में ऐसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। जनता को यह समझना होगा कि किसी भी महत्वपूर्ण वित्तीय नीति में बदलाव की जानकारी हमेशा आधिकारिक और औपचारिक माध्यमों से ही सार्वजनिक की जाती है और व्यक्तिगत स्तर पर प्रसारित होने वाले संदेशों की कोई कानूनी वैधता नहीं होती है।

    आर्थिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह अनिवार्य है कि लोग किसी भी संदिग्ध जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करें। केवल मुद्रा ही नहीं बल्कि बैंकिंग सेवाओं और निवेश की योजनाओं को लेकर भी अक्सर फर्जी दावे किए जाते हैं ताकि भोले-भाले लोगों को वित्तीय जाल में फंसाया जा सके। कभी खातों को बंद करने का डर दिखाया जाता है तो कभी कम समय में धन दोगुना करने का प्रलोभन दिया जाता है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत जानकारी साझा करना या किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना खतरनाक साबित हो सकता है। समाज के हर वर्ग को इस बात के लिए जागरूक होना चाहिए कि वे किसी भी अपुष्ट संदेश को बिना सोचे-समझे दूसरों के साथ साझा न करें।

    सरकार और संबंधित विभाग लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं कि आम जनता तक केवल सही और प्रमाणित जानकारी ही पहुंचे। फर्जी खबरों के इस तंत्र को तोड़ने के लिए नागरिकों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत की सत्यता परखना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वित्तीय नियमों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन होने पर उसकी सूचना व्यापक रूप से सार्वजनिक की जाएगी। तब तक किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और अपनी व्यक्तिगत व वित्तीय सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सजग रहें। सतर्कता और सही जानकारी ही इस प्रकार के डिजिटल भ्रम से बचने का एकमात्र प्रभावी उपाय है।

  • बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम

    बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम


    नई दिल्ली । में बैंकिंग क्षेत्र को स्पष्ट संदेश देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा सहित अन्य वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री मिस-सेलिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भ्रामक तरीके से बीमा बेचने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल को संबोधित करने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकों को अपने मूल कार्य जमा जुटाने और ऋण देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न कि ग्राहकों पर अनावश्यक बीमा उत्पाद थोपने पर।

    मिस-सेलिंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं
    वित्त मंत्री ने कहा कि कई मामलों में ग्राहकों को ऐसे बीमा उत्पाद बेचे जा रहे हैं जिनकी उन्हें जरूरत ही नहीं होती। खासकर गृह ऋण के मामलों में संपत्ति पहले से गिरवी होने के बावजूद अतिरिक्त बीमा लेने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि अब स्पष्ट संदेश जाना चाहिए गलत बिक्री कानूनन अपराध है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

    1 जुलाई से लागू होंगे कड़े प्रावधान

    आरबीआई ने 11 फरवरी को मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया था। प्रस्तावित नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद बेचा जाता है तो संबंधित बैंक को पूरी राशि लौटानी होगी और नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इन नियमों पर 4 मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई थीं और अब 1 जुलाई से कड़े प्रावधान लागू किए जाएंगे। इससे ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    नियामकीय खामियों पर भी उठे सवाल

    सीतारमण ने माना कि अब तक आरबीआई और बीमा नियामक के बीच समन्वय की कमी के कारण कुछ मामलों में ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि नियामकीय अंतर रेगुलेटरी गैप का फायदा उठाकर गलत बिक्री की घटनाएं हुईं जिसे अब सख्ती से रोका जाएगा।

    जमा और कासा मजबूत करें बैंक

    वित्त मंत्री ने बैंकों को सलाह दी कि वे गैर-बैंकिंग उत्पादों की आक्रामक बिक्री से बचें और कम लागत वाली जमा व कासा चालू खाता-बचत खाता आधार को मजबूत करें। ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उनकी वित्तीय क्षमता को समझना प्राथमिकता होनी चाहिए।

    इस बीच आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि दर लगभग 12.5% है जबकि ऋण वृद्धि करीब 14.5% बनी हुई है। फरवरी 2025 से अब तक रेपो दर में 1.25% की कटौती कर इसे 5.25% किया जा चुका है। हालांकि हालिया समीक्षा में वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

    आरबीआई ने भरोसा दिलाया है कि बाजार में पर्याप्त नकदी बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे। स्पष्ट है कि 1 जुलाई के बाद बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परीक्षा शुरू होने जा रही है।