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  • शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

    शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

    नई दिल्ली । लगातार दो सत्रों तक दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को शानदार वापसी की। कारोबार के अंत में BSE Sensex 394.50 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,918.76 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 119.10 अंक यानी 0.52 प्रतिशत मजबूत होकर 23,424.10 के स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में तेजी की अगुवाई बैंकिंग सेक्टर ने की। Nifty Bank 2.09 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। इसके अलावा डिफेंस, रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, मैन्युफैक्चरिंग, एफएमसीजी और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं आईटी और मीडिया इंडेक्स दबाव में रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60,715.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.69 प्रतिशत उछलकर 18,063.60 के स्तर पर पहुंच गया।

    सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में State Bank of India, ICICI Bank, Axis Bank, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, Asian Paints और Adani Ports and Special Economic Zone शामिल रहे।

    दूसरी ओर Infosys, Tech Mahindra, HCL Technologies, NTPC और Power Grid Corporation of India के शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी की। साथ ही ईरान-इजरायल तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और ऊंची बॉन्ड यील्ड अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, Federal Reserve System की मौद्रिक नीति और वैश्विक लिक्विडिटी संकेतों पर रहेगी।

    मंगलवार को बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही थी और शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स तथा निफ्टी में करीब आधा प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, जो पूरे सत्र के दौरान कायम रही।

  • SBI स्टॉक में लगातार दबाव, Q4 नतीजों के बाद 10% की गिरावट, ब्रोकरेज ने घटाए अनुमान और बढ़ाए रिस्क संकेत

    SBI स्टॉक में लगातार दबाव, Q4 नतीजों के बाद 10% की गिरावट, ब्रोकरेज ने घटाए अनुमान और बढ़ाए रिस्क संकेत

    नई दिल्ली ।
    देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक के शेयरों में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है। यह दबाव खास तौर पर कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद बढ़ा है, जहां प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं माना गया। नतीजों के बाद निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और इसका सीधा असर शेयर की कीमत पर दिखाई दिया। लगातार दो कारोबारी सत्रों में स्टॉक करीब दस प्रतिशत तक गिर चुका है, जिससे बाजार में इस बैंकिंग दिग्गज को लेकर चिंता का माहौल बन गया है।

    शेयर में आई इस गिरावट के बीच कई प्रमुख संस्थागत विश्लेषकों ने अपने अनुमान में बदलाव किया है। कुछ ने स्टॉक की रेटिंग को घटाते हुए इसे लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाया है। उनका मानना है कि आने वाले समय में बैंक के रिटर्न प्रोफाइल पर दबाव देखा जा सकता है, खासकर तब जब क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा, नए अकाउंटिंग नियमों के प्रभाव से भी बैंक के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    एक प्रमुख वैश्विक विश्लेषण संस्था ने अपने पहले के सकारात्मक रुख को बदलते हुए अब इसे स्थिर दृष्टिकोण में रखा है। साथ ही शेयर के लिए तय किए गए मूल्य लक्ष्य को भी घटा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्तरों पर वैल्यूएशन में बड़े सुधार की गुंजाइश सीमित दिख रही है। अनुमान यह भी लगाया गया है कि बैंक की संपत्ति पर रिटर्न भविष्य में कुछ दबाव में रह सकता है, जिससे निवेशकों की उम्मीदें थोड़ी कम हो सकती हैं।

    वहीं दूसरी ओर, कुछ अन्य विश्लेषक अभी भी इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि बैंक की मजबूत लोन ग्रोथ आगे चलकर स्थिति को संतुलित कर सकती है। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि निकट भविष्य में मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट जैसे कारक चुनौती पेश कर सकते हैं। उनके अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो ताजा नतीजों के बाद इस बैंकिंग शेयर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां कुछ विशेषज्ञ आगे दबाव की आशंका जता रहे हैं, वहीं कुछ इसे लंबी अवधि के नजरिए से स्थिर निवेश मान रहे हैं। फिलहाल बाजार की नजर आने वाले तिमाही प्रदर्शन और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है, जो इस स्टॉक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तूफानी तेजी सेंसेक्स 800 अंक उछला निफ्टी 24550 के पार

    तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तूफानी तेजी सेंसेक्स 800 अंक उछला निफ्टी 24550 के पार


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए मजबूत तेजी लेकर आया, जहां निवेशकों के बीच उत्साह और भरोसा दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली। पूरे दिन के कारोबार में बाजार ने सकारात्मक रुख बनाए रखा और प्रमुख सूचकांक लगातार ऊंचाई की ओर बढ़ते नजर आए। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने इस तेजी को और मजबूती दी।

    कारोबार के दौरान सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेज बढ़त दर्ज की गई और यह 79 हजार 296 के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 24 हजार 550 के पार कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार की इस तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया और खरीदारी का रुझान बढ़ा।

    इस उछाल का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड के दाम 94 से 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुईं। तेल की कीमतों में नरमी से कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ी, जिसका असर सीधे तौर पर शेयर बाजार पर देखने को मिला।

    इसके साथ ही एशियाई बाजारों में आई मजबूती ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। एशिया के प्रमुख बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी और घरेलू बाजार में भी खरीदारी तेज हो गई। वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेतों ने भारतीय निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

    सेक्टोरल स्तर पर देखें तो बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी में सबसे अहम भूमिका निभाई। बड़े निजी बैंकों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी बैंक इंडेक्स में करीब डेढ़ प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। वित्तीय शेयरों में आई इस तेजी ने पूरे बाजार को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    रियल्टी सेक्टर ने आज सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें करीब तीन प्रतिशत के आसपास की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल, ऑटो, इंफ्रास्ट्रक्चर और पीएसयू बैंक सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इससे यह साफ संकेत मिला कि बाजार में व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है और तेजी केवल कुछ ही सेक्टरों तक सीमित नहीं है।

    आईटी सेक्टर ने भी आज मजबूती दिखाई और शुरुआती कमजोरी से उबरकर इसमें सुधार देखने को मिला। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि कुछ इंश्योरेंस शेयरों में हल्की कमजोरी देखने को मिली, लेकिन इसका असर पूरे बाजार पर सीमित रहा।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार अधिकतर शेयरों में तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच सकारात्मक भावना और मजबूत हुई। वोलैटिलिटी इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में घबराहट कम हुई है और निवेशक अधिक आत्मविश्वास के साथ ट्रेडिंग कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी का 24 हजार 300 के ऊपर बने रहना बाजार के लिए मजबूत संकेत है। आने वाले समय में 24 हजार 450 से 24 हजार 500 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि नीचे की ओर 24 हजार 150 से 24 हजार 200 का स्तर सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। हालांकि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा पर असर डाल सकते हैं।

  • बैंकिंग शेयरों में दबाव और कमजोर वैश्विक संकेतों से बाजार पर बना रहा नकारात्मक असर

    बैंकिंग शेयरों में दबाव और कमजोर वैश्विक संकेतों से बाजार पर बना रहा नकारात्मक असर

    नई दिल्ली: वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। निवेशकों की सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के इंतजार का असर बाजार पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक दबाव में नजर आए।

    शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हल्की गिरावट के साथ 77,976 के स्तर के आसपास खुला, जबकि निफ्टी भी कमजोरी के साथ 24,166 के करीब पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे निवेशकों का रुख पहले से ही सतर्क बना हुआ था और बाजार में भरोसे की कमी दिखाई दी।

    बाजार की इस कमजोरी का असर बैंकिंग सेक्टर पर भी पड़ा, जहां प्रमुख बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश रणनीति अपना रहे हैं। वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने बाजार की चाल को और कमजोर किया।

    वैश्विक स्तर पर भी मिश्रित संकेत देखने को मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है, जहां कई प्रमुख सूचकांक कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र में हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर दिखाई नहीं दिया।

    कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कुछ राहत का संकेत है। इसके बावजूद निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और बाजार में सतर्कता बनी हुई है।

    डॉलर की मजबूती भी बाजार पर दबाव बना रही है। मजबूत डॉलर के कारण विदेशी निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे उभरते बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना रहती है। यही कारण है कि घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है।

    पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन निवेशक अभी भी किसी ठोस परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। प्रमुख देशों के बीच चल रही बातचीत का सीधा असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है, इसलिए बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और सोच-समझकर निवेश निर्णय लें।

  • जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के

    जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के


    नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के बड़े जज ने भारतीय फाइनेंसियल सेक्टर में हलचल मचा दी है। कंपनी ने देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक को अपना मुख्य पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है, जिसके बाद शुक्रवार के कारोबार में बैंक के स्टॉक पर दबाव साफ नजर आया। सूची पर बैंक का शेयर करीब 3 प्रतिशत तक जनसंख्या 758 रुपये के आसपास पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पहले से ही बैंक का स्टॉक पिछले एक महीने में 14.3 प्रतिशत और छह महीने में करीब 20 प्रतिशत तक टूट गया है, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

    ‘ग्रिड एंड फियर’ की रिपोर्ट में बड़ा बदलाव, एचएसबीसी को मिली जगह

    जेफरीज़ के रणनीतिकार क्रिस वुड ने अपनी नामांकन रिपोर्ट “ग्रिड एंड फियर” में इस बदलाव का ज़िक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया (जापान को खत्म), ग्लोबल और इंटरनेशनल लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो को हटा दिया गया है। हालाँकि, इस निर्णय के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन बाजार में इसे शामिल करने की घटना देखी जा रही है। खास बात यह है कि बैंक की जगह एचएसबीसी को 4 प्रतिशत वेटेज के साथ पोर्टफोलियो में शामिल किया गया है। इस बदलाव के चलते भारत का कुल वेटेज भी थोड़ा कम हो गया है, जो विदेशी निवेशकों के नजरिए में बदलाव का संकेत देता है।

    एशिया-पैसिफिक पोर्टफोलियो में भी स्टॉक, भारत का वेटेज कम हो गया

    जेफरीज ने सिर्फ ग्लोबल पोर्टफोलियो में ही नहीं, बल्कि एशिया-पैसिफिक (जापान को छोड़कर) पोर्टफोलियो में भी बदलाव किए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया का वेस्टेज़ 2-2 प्रतिशत नीचे आया है, जबकि ताइवान का वेस्टेज़ 4 प्रतिशत नीचे आया है। इस पोर्टफोलियो में भारत की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो अभी भी MSCI से थोड़ी अधिक बनी हुई है। इसके बावजूद वेस्टेज में यह टिप्पणी की गई है कि विदेशी ब्रोकरेज हाउस को भारत ले जाने से रोका गया है।

    शव के अवशेषों से लेकर गहनता तक की जांच, जांच की भी चर्चा

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में डिजिटल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरधारक अतनु चक्रवर्ती ने ‘मूल्यों और संपत्तियों’ से जुड़े शेयरों की शपथ ली थी। इसके बाद बैंक ने केकी मिस्त्री को पोर्टफोलियो में नियुक्त कर दिया। बताया जा रहा है कि बैंक ने इस मामले की जांच के लिए लॉ फर्मों को भी नियुक्त किया है। वहीं, अन्यत्र में यह भी संकेत मिले हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस मामले की समीक्षा कर सकता है। इन घटनाओं में बैंक की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे गए हैं, जिससे किसी भी व्यक्ति का भरोसेमंद प्रभाव हो सकता है।

    युवाओं की धारणा पर असर, आगे भी रह सकता है दबाव

    विशेषज्ञ विशेषज्ञ का मानना ​​है कि भले ही अभी तक किसी भी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाओं की धारणा प्रभावित होती है। इससे शेयर पर शॉर्ट टर्म में प्रेशर बनाया जा सकता है। स्थिर स्थिति में बैंक का 52 ग्रेड का निचला स्तर 741.05 रुपये और उच्च स्तर 1,020.50 रुपये है, जबकि बैंक की बाजार पूंजी करीब 5.82 करोड़ लाख रुपये है। ऐसे में किसी भी निवेश के लिए यह समय अत्यावश्यक रहना होगा और किसी भी निवेश निर्णय से पहले स्थिति को भरना जरूरी होगा।

  • शेयर बाजार में मजबूती, IPO बाजार में हलचल, विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का सहारा

    शेयर बाजार में मजबूती, IPO बाजार में हलचल, विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का सहारा


    नई दिल्ली।/मुंबई से शेयर बाजार के लिए आज का दिन उत्साह भरा रहा। Bombay Stock Exchange का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 500 अंकों की मजबूती के साथ 83300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि National Stock Exchange of India का निफ्टी 150 अंक की बढ़त लेकर 25700 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में मजबूत खरीदारी के कारण देखने को मिली।

    कारोबार की शुरुआत से ही सरकारी बैंकों और प्रमुख ऑटो कंपनियों के शेयरों में सकारात्मक रुख दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों की आक्रामक खरीद और वैश्विक बाजारों से मिले स्थिर संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया। घरेलू निवेशकों का लगातार समर्थन इस समय बाजार के लिए संबल बना हुआ है।

    हालांकि बाजार की इस तेजी के बीच एक बड़ा झटका भी देखने को मिला। IDFC First Bank के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। चंडीगढ़ स्थित एक शाखा में करीब 590 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद बैंक का शेयर लगभग 20 प्रतिशत टूटकर 67 रुपये तक पहुंच गया। सरकारी विभाग की ओर से संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट मिलने के बाद मामला उजागर हुआ। बैंक प्रबंधन ने चार कर्मचारियों को निलंबित कर आंतरिक जांच शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम ने निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेत मिश्रित रहे। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में तेजी दर्ज की गई, जबकि जापान का बाजार अवकाश के कारण बंद रहा। अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक बंदी ने एशियाई बाजारों को सीमित समर्थन दिया।

    निवेश प्रवाह के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीद जारी रखी है। फरवरी माह में विदेशी निवेशकों की शुद्ध बिकवाली और घरेलू निवेशकों की मजबूती बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है।

    प्राथमिक बाजार में भी हलचल तेज रही। Clean Max Enviro Energy Solutions का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम निवेश के लिए खुल गया है। कंपनी इस आईपीओ के माध्यम से पूंजी जुटाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की योजना बना रही है। इससे निवेशकों को नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अवसर मिल सकते हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि अल्पकाल में बाजार की चाल बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन, वैश्विक संकेतों और निवेश प्रवाह पर निर्भर रहेगी। यदि घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल निवेशक सतर्क आशावाद के साथ बाजार की अगली दिशा पर नजर बनाए हुए हैं।