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  • भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी, निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूत बंद

    भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी, निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूत बंद

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी का सिलसिला जारी रहा। वैश्विक संकेतों में सुधार और घरेलू सेक्टरों में मजबूत खरीदारी के चलते बाजार हरे निशान में बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखाई दिया और प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख बनाए रखा।

    30 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स BSE Sensex 347.14 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,155.62 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, व्यापक बाजार की मजबूती के चलते Nifty 50 भी 96.55 अंक या 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,085.70 पर बंद हुआ।

    दिन की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने हल्की बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया था और धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ने से इंट्रा-डे में नए उच्च स्तर भी देखने को मिले। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,218.99 और निफ्टी 24,108.20 के स्तर तक पहुंचा, जिससे बाजार में तेजी का माहौल मजबूत हुआ।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.52 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.79 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक और मेटल सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन सेक्टरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई। वहीं आईटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी हल्की तेजी रही। इसके विपरीत ऑटो, रियल्टी और एफएमसीजी शेयरों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

    कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों ने बाजार की तेजी में योगदान दिया। Trent Limited, Bharat Electronics Limited और Hindalco Industries जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली। वहीं कुछ शेयरों जैसे टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, सिप्ला और ओएनजीसी में मुनाफावसूली देखी गई।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों में कमी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सुधार के संकेतों से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की संभावनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीदों ने भी बाजार को समर्थन दिया है।

    इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार को राहत दी है। तेल की कीमतें तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचने से भारत के आयात बिल में कमी की उम्मीद बढ़ी है, जिससे महंगाई पर नियंत्रण की संभावना मजबूत हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद है कि ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन भविष्य की दिशा को लेकर दिए जाने वाले संकेत बाजार की चाल तय करेंगे।

    तकनीकी विश्लेषण में निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,100 से 24,200 का दायरा तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर पार होता है तो बाजार में आगे और तेजी की संभावना बन सकती है।

  • बाजार में दमदार वापसी, सेंसेक्स 395 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद; मिडकैप-स्मॉलकैप में जोरदार खरीदारी

    बाजार में दमदार वापसी, सेंसेक्स 395 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद; मिडकैप-स्मॉलकैप में जोरदार खरीदारी


    नई दिल्ली ।
    घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बावजूद मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती तेजी के बाद बाजार में कुछ समय के लिए दबाव देखने को मिला, लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में खरीदारी लौटने से प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने सकारात्मक रुख दिखाया, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की रुचि अधिक मजबूत दिखाई दी।

    कारोबार की शुरुआत उत्साहजनक माहौल में हुई थी। शुरुआती घंटों में प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और चुनिंदा शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई। दोपहर तक बाजार पर दबाव इतना बढ़ गया कि प्रमुख सूचकांक लाल निशान तक पहुंच गए। हालांकि इसके बाद निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू की, जिससे बाजार में रिकवरी आई और दिन का समापन मजबूती के साथ हुआ।

    दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 395 अंकों की बढ़त के साथ 73,918 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 119 अंकों की मजबूती के साथ 23,242 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगभग आधा प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की, जो बाजार में सकारात्मक धारणा को दर्शाता है।

    इस कारोबारी सत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन रहा। बेंचमार्क सूचकांकों की तुलना में छोटे और मझोले शेयरों में कहीं अधिक तेजी देखने को मिली। इससे संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में बढ़ा है और वे बड़े शेयरों के साथ-साथ उभरती कंपनियों में भी निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।

    बाजार में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र ने सबसे अहम भूमिका निभाई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिसके कारण संबंधित सूचकांक में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज हुई। निजी बैंकिंग शेयरों में भी सकारात्मक रुझान बना रहा। वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की सक्रियता ने पूरे बाजार की दिशा को मजबूत बनाए रखने में योगदान दिया।

    पर्यटन, रक्षा, ऑटोमोबाइल और पूंजी बाजार से जुड़े क्षेत्रों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में आई तेजी ने बाजार के व्यापक दायरे को समर्थन दिया। उपभोक्ता उत्पाद, फार्मा, धातु और अवसंरचना क्षेत्र के शेयरों में भी सकारात्मक कारोबार दर्ज किया गया, जिससे बाजार की मजबूती को अतिरिक्त आधार मिला।

    हालांकि सभी सेक्टर एक जैसी गति से नहीं बढ़े। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कुछ कमजोरी देखने को मिली और चुनिंदा आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार की बढ़त कुछ हद तक सीमित रही। फिर भी अधिकांश क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल बने रहने से कुल मिलाकर बाजार सकारात्मक दिशा में बंद हुआ।

    व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो विमानन, वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों ने प्रमुख बढ़त हासिल की। दूसरी ओर ऊर्जा, आभूषण, बिजली और तकनीकी क्षेत्र की कुछ कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद व्यापक खरीदारी के चलते बाजार का समग्र रुख मजबूत बना रहा।

    विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में आई यह रिकवरी निवेशकों के बेहतर विश्वास और व्यापक हिस्सेदारी का संकेत है। यदि आने वाले सत्रों में यही रुझान जारी रहता है तो बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल मंगलवार का कारोबार इस बात का संकेत देता है कि निवेशकों की नजर अब केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में भी अवसर तलाशे जा रहे हैं।

  • भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन का दिया बड़ा संकेत, केंद्र सरकार को मिला 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड चेक

    भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन का दिया बड़ा संकेत, केंद्र सरकार को मिला 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड चेक

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड सौंपा है। यह भुगतान बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और देश की बैंकिंग प्रणाली में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

    एसबीआई के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने यह डिविडेंड चेक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा। इस संबंध में जानकारी वित्त मंत्री कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की गई, जिसमें बताया गया कि यह लाभांश केंद्र सरकार के लिए गैर-कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

    डिविडेंड का यह भुगतान ऐसे समय में हुआ है जब बैंकिंग क्षेत्र लगातार डिजिटल बदलाव, क्रेडिट ग्रोथ और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के चलते मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। एसबीआई की यह उपलब्धि न केवल बैंक की वित्तीय स्थिति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की आर्थिक मजबूती में अहम योगदान दे रहे हैं।

    एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक होने के साथ-साथ सरकार की वित्तीय नीतियों और आर्थिक विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी प्रमुख भूमिका निभाता है। बैंक की ओर से दिया गया यह डिविडेंड केंद्र सरकार के बजट प्रबंधन और राजस्व संतुलन में सहायक माना जाता है।

    बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी के नेतृत्व में एसबीआई ने हाल के वर्षों में कई क्षेत्रों में सुधार और विस्तार किया है। बैंकिंग सेवाओं का डिजिटलीकरण, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में कर्ज वितरण को मजबूत करना इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

    हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सी. एस. शेट्टी ने कहा था कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक नींव मजबूत बनी हुई है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को संतुलित बताते हुए कहा था कि ब्याज दरों में स्थिरता आर्थिक विकास को समर्थन देने में मदद करती है।

    उन्होंने यह भी कहा था कि निवेशकों को केवल अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि भारत की दीर्घकालिक विकास कहानी पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार, बैंकिंग सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत की आर्थिक प्रगति के मुख्य स्तंभ हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि एसबीआई का यह डिविडेंड भुगतान बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और लाभप्रदता का संकेत है। यह भी दर्शाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकारी खजाने को मजबूत करने में लगातार योगदान दे रहे हैं।

    वित्तीय वर्ष के इस प्रदर्शन को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भी बैंक अपनी वृद्धि की गति बनाए रखेगा और देश की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देता रहेगा।