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  • एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा

    एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा


    पेरिस।
    एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाने से जुड़े विवाद में हिंदू संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) को जांच में क्लीन चिट मिल गई है। जांच में सामने आया है कि संगठन ने एफिल टावर प्रशासन से महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई मांग नहीं की थी। पिछले महीने करीब 100 संतों के एफिल टावर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वहां से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इसके विरोध में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था और एफिल टावर एक दिन के लिए बंद रहा था।

    जांच रिपोर्ट के मुताबिक BAPS प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले ही महिला कर्मचारियों को कुछ देर के लिए अपने स्थान से हटने को कहा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपसी सूचना के आदान-प्रदान के दौरान मूल संदेश का अर्थ बदल गया। कर्मचारियों को स्थायी रूप से स्थान छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था, बल्कि कुछ मिनटों के लिए एक-दूसरे से अलग रहने को कहा गया था।

    संचालन कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो छोड़ेंगे पद

    एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो इस साल के अंत में अपने पद से इस्तीफा देंगे। वह 2018 से एफिल टावर के महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    रुइवो के कार्यकाल में हुई आंतरिक जांच में इस दौरे के आयोजन में ‘परिचालन संबंधी खामियों और कमियों’ की बात सामने आई। कंपनी के बोर्ड ने कहा कि इन खामियों के कारण महिला कर्मचारियों को हटाया जाना ‘अस्वीकार्य’ था।

    क्या था पूरा विवाद?

    5 सितंबर को BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टावर का निजी दौरा किया था। आरोप था कि संगठन की ओर से दौरे के दौरान महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने की बात सामने आई थी।

    घटना के बाद यूनियन प्रतिनिधि डायने दावोइन ने महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटना दोबारा न होने की मांग की थी। कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद पेरिस शहर के अधिकारियों ने भी मामले की जांच शुरू की।

    एफिल टावर की संचालन कंपनी के बोर्ड अध्यक्ष एरियल वेइल ने कहा कि यहां एक विशेष प्रोटोकॉल विभाग बनाया जाएगा। इसके अलावा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए नए उपाय और प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।

    एफिल टावर का स्वामित्व पेरिस नगर प्रशासन के पास है। यहां हर साल करीब 70 लाख पर्यटक पहुंचते हैं।

    100 साल से अधिक पुरानी है BAPS

    BAPS की स्थापना गुजरात में 100 से अधिक वर्ष पहले हुई थी। यह एक सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू संस्था है। संगठन के साधु ब्रह्मचर्य के कड़े नियमों का पालन करते हैं और अनुयायियों से भी निर्धारित नैतिक नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

  • हिंदू समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने पर भड़के एफिल टावर कर्मचारी, एक दिन बंद रहा टावर

    हिंदू समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने पर भड़के एफिल टावर कर्मचारी, एक दिन बंद रहा टावर

    नई दिल्ली ।पेरिस के प्रसिद्ध एफिल टावर को सोमवार को कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एक दिन के लिए बंद करना पड़ा। हड़ताल की वजह एक हिंदू धार्मिक समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने का मामला बताया जा रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर लिंग के आधार पर भेदभाव किया गया और महिलाओं को हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगाया गया।

    घटना का संबंध बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी BAPS के एक प्रतिनिधिमंडल की एफिल टावर यात्रा से बताया गया है। समूह में 100 से अधिक संत और अन्य सदस्य शामिल थे। यात्रा से पहले महिला कर्मचारियों को उनके निर्धारित कार्यस्थलों से हटाने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले से कर्मचारियों में नाराजगी पैदा हुई और बाद में उन्होंने विरोध स्वरूप हड़ताल कर दी।

    एफिल टावर की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी एसईटीई के अनुसार, धार्मिक समूह की ओर से अनुरोध किया गया था कि उनके दौरे के दौरान महिलाओं से बातचीत कम से कम हो। कंपनी ने कहा कि उसने इस तरह की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, घटनाक्रम के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया।

    कर्मचारियों की ओर से इस मामले को कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव से जोड़कर देखा गया। उनका कहना था कि किसी धार्मिक या सांस्कृतिक समूह की पसंद के आधार पर महिला कर्मचारियों को उनके काम से हटाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों ने सोमवार को काम रोक दिया, जिसके चलते एफिल टावर आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    इस विवाद के बाद BAPS से जुड़े पेरिस स्थित हिंदू मंदिर की ओर से भी खेद जताया गया। संस्था ने कहा कि यदि उनके प्रतिनिधिमंडल की वजह से किसी व्यक्ति को ठेस पहुंची है या किसी तरह की परेशानी हुई है तो उन्हें इसका अफसोस है। संस्था ने यह भी बताया कि प्रतिनिधिमंडल में 100 से अधिक लोग शामिल थे और बड़ी संख्या को देखते हुए यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए व्यवस्थाएं पहले से तय की गई थीं।

    पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि कंपनी को इस तरह की शर्तें स्वीकार नहीं करनी चाहिए थीं। विवाद ने धार्मिक स्वतंत्रता, कार्यस्थल पर समानता और महिला कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।

    एफिल टावर पेरिस की पहचान से जुड़ी दुनिया की सबसे प्रसिद्ध संरचनाओं में से एक है। सीन नदी के किनारे स्थित यह टावर करीब 330 मीटर ऊंचा है। इसका निर्माण 1887 से 1889 के बीच कराया गया था। इसे 1889 में आयोजित विश्व मेले के लिए तैयार किया गया था। यह आयोजन फ्रांसीसी क्रांति की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया था।

    इस विशाल टावर का डिजाइन गुस्ताव एफिल से जुड़ा है और उन्हीं के नाम पर इसे एफिल टावर कहा गया। शुरुआत में इसे प्रदर्शनी के लिए तैयार किया गया था, लेकिन समय के साथ यह पेरिस और फ्रांस की सबसे बड़ी पहचान बन गया। आज दुनियाभर से लाखों पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण इसका एक दिन बंद रहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया।

  • भूपेंद्र पटेल ने न्यू जर्सी अक्षरधाम को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सेवा का वैश्विक प्रकाशस्तंभ बताया, स्वयंसेवकों की सराहना की

    भूपेंद्र पटेल ने न्यू जर्सी अक्षरधाम को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सेवा का वैश्विक प्रकाशस्तंभ बताया, स्वयंसेवकों की सराहना की

    नई दिल्ली । गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान न्यू जर्सी के रॉबिन्सविल स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम का दौरा किया। उन्होंने अक्षरधाम को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत, सामुदायिक सेवा तथा स्वयंसेवकों के समर्पण का प्रभावशाली वैश्विक प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री के साथ गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा।

    अक्षरधाम पहुंचने पर बीएपीएस के संतों ने भूपेंद्र पटेल का स्वागत किया। इस दौरान वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. संजीव कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव विक्रांत पांडे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने परिसर की वास्तुकला और वहां संचालित गतिविधियों के बारे में जानकारी ली।

    भूपेंद्र पटेल ने निर्माणाधीन अक्षरधाम संग्रहालय का विशेष भ्रमण भी किया। उन्हें बताया गया कि भारतीय विरासत को समर्पित यह संग्रहालय अमेरिका में अपनी तरह के शुरुआती हिंदू सांस्कृतिक संग्रहालयों में शामिल होगा। संग्रहालय में भारत की गौरवशाली विरासत को आधुनिक और दृश्य माध्यमों के जरिए प्रस्तुत करने की योजना है।

    संग्रहालय में 12 वास्तुशिल्प प्रतिकृतियां, 40 मल्टीमीडिया प्रस्तुतियां, 85 डायोरामा और 200 सजीव प्रतिमाओं के माध्यम से भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी प्रस्तुति विभिन्न आयु और पृष्ठभूमि के लोगों को भारतीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    उन्होंने आस्था, सद्भाव, करुणा, पारिवारिक मूल्यों और निःस्वार्थ सेवा जैसे विषयों को सार्वभौमिक महत्व वाला बताया। अक्षरधाम मंदिर की सूक्ष्म नक्काशी, विशाल स्वरूप और शांत वातावरण से भी मुख्यमंत्री प्रभावित हुए। संग्रहालय के भ्रमण के दौरान उन्होंने कहा कि यहां भारत की प्राचीन संस्कृति को प्रभावशाली तरीके से पुनर्जीवित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने अक्षरधाम में सेवा कर रहे स्वयंसेवकों से भी मुलाकात की। उन्होंने स्वयंसेवकों के अनुशासन, विनम्रता, आतिथ्य और सेवा भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि अक्षरधाम के निर्माण में योगदान देने वाले बीएपीएस स्वयंसेवकों की मेहनत और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दे सकता है।

    भूपेंद्र पटेल ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से से यहां आने वाला व्यक्ति शांति का अनुभव कर सकता है। उनके अनुसार अक्षरधाम केवल एक धार्मिक परिसर नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति, अध्यात्म और मानवीय मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण केंद्र है।

    मुख्यमंत्री की अमेरिका यात्रा वाइब्रेंट गुजरात पहल से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा है। करीब तीन दशकों में गुजरात के किसी मुख्यमंत्री की यह पहली अमेरिका यात्रा बताई गई है। अक्षरधाम के अनुभव का उल्लेख करते हुए पटेल ने कहा कि उनकी यात्रा का केंद्र वाइब्रेंट गुजरात है, लेकिन अक्षरधाम में भारत की संस्कृति स्वयं जीवंत रूप में दिखाई देती है।

    इस अवसर पर अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों और सामुदायिक नेताओं ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया। यात्रा के दौरान बीएपीएस के सांस्कृतिक संरक्षण के साथ शिक्षा, मानवीय राहत, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण जागरूकता, युवा विकास और सामाजिक सेवा से जुड़े वैश्विक योगदान को भी रेखांकित किया गया।

    भूपेंद्र पटेल ने अपने अनुभव को प्रेरणादायक और आध्यात्मिक रूप से सुखद बताया। उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आध्यात्मिक परंपराओं को जीवित रखने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सभी की शांति, भलाई और प्रगति की कामना की।