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  • उर्स-ए-रजवी: बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, यात्रियों की सुविधा के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी

    उर्स-ए-रजवी: बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, यात्रियों की सुविधा के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी


    बरेली।
    आला हजरत के उर्स-ए-रजवी के मद्देनजर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। 6 से 8 अगस्त तक बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों को अतिरिक्त ठहराव दिया जाएगा। इनमें छह ऐसी सुपरफास्ट ट्रेनें भी शामिल हैं, जिनका नियमित रूप से यहां ठहराव नहीं होता। इसके अलावा आठ अगस्त को तीन जोड़ी विशेष अनारक्षित ट्रेनों का संचालन भी किया जाएगा।

    सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया कि उर्स के दौरान 20 ट्रेनों के ठहराव की अवधि बढ़ाई गई है, ताकि यात्रियों को चढ़ने और उतरने में सुविधा मिल सके। वहीं, बरेली-सहारनपुर, इज्जतनगर-लालकुआं और बरेली सिटी-पीलीभीत रूट पर तीन जोड़ी विशेष अनारक्षित ट्रेनें चलाई जाएंगी।

    इन ट्रेनों को मिलेगा अतिरिक्त ठहराव
    अस्थायी रूप से जिन प्रमुख ट्रेनों का बरेली जंक्शन पर ठहराव रहेगा, उनमें गंगा-सतलुज एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस, जम्मूतवी-कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट, जननायक एक्सप्रेस, चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस, जनसेवा एक्सप्रेस, योग नगरी ऋषिकेश-प्रयागराज संगम एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, सरयू-यमुना एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस, कोलकाता-नांगल डैम एक्सप्रेस और जलियांवाला बाग एक्सप्रेस शामिल हैं।

    इसके अलावा जनसाधारण एक्सप्रेस, बेगमपुरा एक्सप्रेस और सप्तक्रांति एक्सप्रेस की दोनों दिशाओं की सेवाओं को भी बरेली जंक्शन पर अतिरिक्त अस्थायी ठहराव दिया गया है। रेलवे ने बताया कि 8 अगस्त को बरेली-मुरादाबाद पैसेंजर (64177) अपने निर्धारित समय दोपहर 2:40 बजे के बजाय 3:45 बजे रवाना होगी।

    दिल्ली कैंट पर चार ट्रेनों का ठहराव रहेगा निरस्त
    उधर, दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 के उन्नयन कार्य के चलते 13 अक्तूबर तक चार ट्रेनों का वहां ठहराव अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है। इनमें जैसलमेर-काठगोदाम एक्सप्रेस, साबरमती-वाराणसी सुपरफास्ट, उदयपुर सिटी-नई दिल्ली एक्सप्रेस और बीकानेर-हावड़ा साप्ताहिक एक्सप्रेस शामिल हैं। यात्रियों से यात्रा से पहले ट्रेन की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेने की अपील की गई है।

  • आला हजरत दरगाह की ईद-उल-अजहा पर अपील: प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें, कानून और स्वच्छता का पालन करें

    आला हजरत दरगाह की ईद-उल-अजहा पर अपील: प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें, कानून और स्वच्छता का पालन करें



    बरेली । बरेली की प्रसिद्ध आला हजरत दरगाह ने ईद-उल-अजहा के मौके पर मुस्लिम समुदाय से महत्वपूर्ण अपील की है। दरगाह से जुड़े संगठन जमात रजा-ए-मुस्तफा ने कहा है कि त्योहार के दौरान किसी भी तरह के प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न दी जाए और सभी लोग कानून का पालन करते हुए ही धार्मिक परंपराओं को निभाएं। साथ ही खुले स्थानों पर कुर्बानी न करने और स्वच्छता बनाए रखने की भी अपील की गई है।

    धार्मिक और सामाजिक संतुलन पर जोर
    दरगाह की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि ईद-उल-अजहा एक पवित्र त्योहार है, जिसे शांतिपूर्ण और नियमों के अनुसार मनाना सभी की जिम्मेदारी है। संगठन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे जानवरों की कुर्बानी न करें, जो कानूनन प्रतिबंधित हैं, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या विवाद की स्थिति न बने।

    इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि त्योहार के दौरान सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।

    इमामों से संपर्क कर दिया गया संदेश
    जमात रजा-ए-मुस्तफा ने एक विशेष जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। इसके तहत संगठन के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार की नमाज के दौरान विभिन्न जिलों की मस्जिदों के इमामों से संपर्क किया और उनसे अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करें।

    इमामों से कहा गया है कि वे नमाज के दौरान और धार्मिक प्रवचनों में लोगों को यह संदेश दें कि कुर्बानी केवल निर्धारित नियमों और स्थानों पर ही की जाए। साथ ही किसी भी प्रकार के नियम उल्लंघन की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और दरगाह प्रबंधन को सूचना दी जाए।

    मोहल्लों में निगरानी टीम तैनात
    संगठन के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान ने बताया कि इस बार नियमों के पालन पर विशेष नजर रखने के लिए मोहल्लों में निगरानी टीमों की तैनाती की गई है। ये टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि कहीं भी सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या खुले इलाकों में कुर्बानी न की जाए।

    उन्होंने कहा कि स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए और पशुओं के अवशेषों का सही तरीके से निपटान किया जाए, ताकि पर्यावरण और समाज दोनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

    गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग
    इस मौके पर जमात रजा-ए-मुस्तफा की ओर से एक और महत्वपूर्ण मांग भी सामने आई है। महासचिव फरमान हसन खान ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए।उनका कहना है कि ऐसा करने से अवैध वध पर रोक लगेगी और इससे जुड़े अपराधों में कमी आएगी। साथ ही यह कदम सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगा।

    आला हजरत दरगाह की यह अपील न केवल धार्मिक भावना से जुड़ी है, बल्कि इसमें कानून, स्वच्छता और सामाजिक एकता का संदेश भी शामिल है। ईद-उल-अजहा जैसे पवित्र पर्व को शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी के साथ मनाने पर जोर देकर संगठन ने समाज में सद्भाव और अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की है।