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  • फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से कथित फर्जी पहचान के जरिए शादी करने का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने स्वयं को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बताकर युवक से विवाह किया। बाद में जब उसके दावों की सत्यता पर सवाल उठे तो पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, युवक और महिला की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। बातचीत के दौरान महिला ने स्वयं को IAS अधिकारी बताया और दावा किया कि एक न्यायिक मामले के कारण उसकी नियुक्ति लंबित है। युवक का आरोप है कि महिला और उसके परिजनों ने भी इसी बात की पुष्टि करते हुए भरोसा दिलाया कि मामला समाप्त होते ही वह प्रशासनिक सेवा में कार्यभार संभाल लेगी। इन दावों पर विश्वास करने के बाद दोनों ने विवाह कर लिया।

    शिकायत में कहा गया है कि विवाह के शुरुआती दिनों के बाद महिला का व्यवहार बदलने लगा। पति का आरोप है कि उसने परिवार के बहुमूल्य आभूषण और अन्य कीमती सामान अपने कब्जे में ले लिया। आरोप यह भी है कि बाद में परिवार पर बड़ी धनराशि की मांग का दबाव बनाया गया और आर्थिक लाभ के लिए जमीन बेचने का सुझाव दिया गया। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

    पति ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि एक रात महिला ने कथित रूप से उसका गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। उसने तत्काल पुलिस सहायता ली, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने का प्रयास भी किया गया। हालांकि विवाद समाप्त नहीं हुआ और बाद में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

    मामले में दर्ज प्राथमिकी में महिला के साथ उसके पिता, भाई और एक अन्य रिश्तेदार को भी नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी ने मिलकर महिला की पहचान और नौकरी को लेकर गलत जानकारी देकर विवाह कराया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं और क्या अन्य लोगों के साथ भी इसी प्रकार की घटनाएं हुई हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच और दर्ज मुकदमे के आधार पर महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। साथ ही नामजद अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन पहचान और वैवाहिक संबंधों में तथ्यों के सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से बनने वाले संबंधों में व्यक्तिगत और पेशेवर दावों की पुष्टि करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम किया जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

  • 'वक्फ बोर्ड की जांच हो तो सामने आएगा बड़ा घोटाला', मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र

    'वक्फ बोर्ड की जांच हो तो सामने आएगा बड़ा घोटाला', मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र


    बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि वक्फ बोर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अरबों-खरबों रुपये की कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना रिजवी ने कहा कि केवल बरेली जिले में ही वक्फ की जमीनों से जुड़े करोड़ों और अरबों रुपये के कथित घोटाले हुए हैं। उनका आरोप है कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग जनकल्याण के बजाय निजी हितों के लिए किया गया और सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

    गरीबों के लिए बनी थी वक्फ संपत्ति
    मौलाना ने कहा कि वक्फ की जमीनें गरीब मुसलमानों, महिलाओं, बच्चों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की मदद के उद्देश्य से दान की गई थीं। इन संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग इन्हीं वर्गों के कल्याण पर होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उनका दावा है कि आज भी बड़ी संख्या में गरीब मुसलमान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जबकि वक्फ की जमीनों से कुछ लोग करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे हैं।

    समाजवादी पार्टी के कार्यकाल पर लगाए आरोप
    मौलाना रिजवी ने आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों की कथित खरीद-फरोख्त समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान सबसे अधिक हुई। उनके अनुसार, जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में रही, तब सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार लोगों ने सरकारी संरक्षण में वक्फ संपत्तियों के सौदे किए।

    उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव 1989-91, 1993-95 और 2003-07 तक मुख्यमंत्री रहे, जबकि अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। मौलाना का दावा है कि इन चारों कार्यकालों में अधिकांश समय आजम खान के पास अल्पसंख्यक, वक्फ और हज मंत्रालय की जिम्मेदारी रही।

    चेयरमैनों की नियुक्ति और कार्यशैली पर भी सवाल
    मौलाना ने आरोप लगाया कि आजम खान की पसंद के लोगों को वक्फ बोर्ड में चेयरमैन और सदस्य बनाया गया। उन्होंने बताया कि जुफर अहमद फारूकी वर्ष 2000-01 तक, अमीर आलम 2001-03 तक, हाफिज उस्मान 2004-09 तक और इसके बाद जुफर अहमद फारूकी 2010 से 2026 तक सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे। उनके अनुसार, इन कार्यकालों में बोर्ड के भीतर मनमाने ढंग से काम हुआ और कई कथित अनियमितताएं हुईं।

    ‘वक्फ की जमीनों का हुआ बंटवारा’
    मौलाना ने दावा किया कि सुन्नी और शिया दोनों वक्फ बोर्डों के कई जिम्मेदार पदाधिकारियों ने वक्फ की जमीनों का दुरुपयोग किया। उनका आरोप है कि जो भी व्यक्ति बोर्ड में सदस्य या पदाधिकारी बना, उसने अपने क्षेत्र में वक्फ की जमीनों का बंटवारा कराया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने वक्फ संपत्तियां इसलिए दान की थीं ताकि उनकी आय से गरीबों, यतीमों और जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा सके, लेकिन इस उद्देश्य को पूरा नहीं किया गया।

    स्कूल, अस्पताल और मदरसे बनाने का उद्देश्य अधूरा
    मौलाना ने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मदरसे विकसित किए जाने थे, लेकिन कथित वक्फ माफिया के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। उनका आरोप है कि इन संपत्तियों का लाभ आम लोगों के बजाय सीमित लोगों तक ही पहुंचा।

    मुख्यमंत्री से की कार्रवाई की मांग
    मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि वक्फ बोर्ड द्वारा बेची गई सभी जमीनों की जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने दावा किया कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले से भी बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। उनका यह भी कहना है कि यदि वक्फ की आय का सही उपयोग गरीब मुसलमानों के कल्याण पर किया जाए तो उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव है।

  • बरेली में बकरीद पर कड़ी ट्रैफिक व्यवस्था: रूट डायवर्जन लागू, भारी वाहनों पर रोक, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

    बरेली में बकरीद पर कड़ी ट्रैफिक व्यवस्था: रूट डायवर्जन लागू, भारी वाहनों पर रोक, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम



    बरेली। ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर बरेली में यातायात पुलिस ने विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। शहर में 28 मई को सुबह 5 बजे से लेकर कार्यक्रम समाप्ति तक भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। त्योहार के दौरान भीड़ और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए कई मार्गों पर रूट डायवर्जन भी लागू किया जाएगा।

    भारी वाहनों के लिए रूट डायवर्जन
    एडवाइजरी के अनुसार दिल्ली, रामपुर और नैनीताल की ओर से आने वाले भारी वाहनों को झुमका तिराहा बाईपास, बिल्वाधाम, नवदिया झादा और इन्वर्टिस तिराहा के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा।

    वहीं बदायूं की ओर से आने वाले वाहनों को सुबह 7 बजे से पहले मंशाराम, बुखारा और कैंट मार्ग से शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।इसके अलावा दिल्ली और रामपुर की तरफ से आने वाली रोडवेज बसों को झुमका तिराहा से मिनी बाईपास, इन्वर्टिस तिराहा, डेलापीर और 100 फुटा रोड होते हुए सेटेलाइट बस स्टेशन तक भेजा जाएगा।

    चौकी चौराहा से मिनी बाईपास होकर डेलापीर मजार की ओर जाने वाले सभी भारी वाहन और बसें पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी।

    प्रशासन की अपील
    यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि त्योहार को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाएं। साथ ही वाहन चालकों को नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है, जिसमें दोपहिया पर तीन सवारी न बैठाना, स्टंटबाजी से बचना, तेज गति से वाहन न चलाना और प्रेशर हॉर्न का उपयोग न करना शामिल है।

    सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
    बकरीद को लेकर प्रशासन ने शहर में 41 कुर्बानी स्थलों को चिन्हित किया है और वहां कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने मिलकर साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। जिले में कुल 2423 मस्जिदों और 179 ईदगाहों में नमाज अदा की जाएगी। शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिसमें कोतवाली, कैंट, किला, प्रेमनगर, सुभाषनगर, बारादरी और इज्जतनगर क्षेत्र प्रमुख हैं।

  • श्रद्धा और आस्था के साथ बरेली में मनाया गया वट सावित्री पर्व, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

    श्रद्धा और आस्था के साथ बरेली में मनाया गया वट सावित्री पर्व, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना




    बरेली । बरेली में शनिवार को वट सावित्री व्रत पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखा और पारंपरिक विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा की। सुबह से ही शहर के मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास महिलाओं की भीड़ देखने को मिली।

    शहर के अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर और तपेश्वरनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा की। इसके अलावा बन्नूवाल नगर, मॉडल टाउन और अन्य कॉलोनियों में भी सामूहिक रूप से वट सावित्री पूजन किया गया। 16 श्रृंगार में सजी महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर परंपराओं का पालन किया और अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना की।

  • महिला सिपाही के ब्लैकमेल नेटवर्क का खुलासा, कई दारोगा और सिपाही बने शिकार

    महिला सिपाही के ब्लैकमेल नेटवर्क का खुलासा, कई दारोगा और सिपाही बने शिकार



    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश पुलिस की एक महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा का ब्लैकमेलिंग नेटवर्क इन दिनों सुर्खियों में है जिसके कारण पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मीनाक्षी की गतिविधियों का खुलासा कुठौंद थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की गोली लगने से हुई मौत के बाद हुआ जिसके बाद से उसकी काली करतूतों की परत दर परत खुल रही है। जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2022 में मीनाक्षी ने पीलीभीत जिले के पूरनपुर थाने में तैनाती के दौरान एक सिपाही को प्रेमजाल में फंसाकर उससे मोटी रकम की मांग की थी। इसके बाद यह सिलसिला बरेली और जालौन जिलों तक फैल गयाजहां उसने कई दारोगा और सिपाहियों को अपने जाल में फंसाया और उनसे पैसे की मांग की।

    प्रेमजाल और पैसों का दबाव

    मीनाक्षी की कार्यशैली बहुत ही चालाकी से भरी हुई थी। वह पहले जान-पहचान बनाने के लिए पुलिसकर्मियों से संपर्क करती फिर धीरे-धीरे निजी बातचीत और करीबी का हवाला देती थी। इसके बाद वह उन पर पैसों का दबाव बनाती थी। यह दबाव इस तरह से बनता था कि वह खुद को पीड़िता के रूप में प्रस्तुत करती थी जिसके बाद पुलिसकर्मी न चाहते हुए भी पैसों का भुगतान करने के लिए मजबूर हो जाते थे।

    चौंकाने वाली बात यह है कि मीनाक्षी ने इस पूरी प्रक्रिया में अपने परिवार के सदस्यों खासकर अपने पिता और भाई को भी शामिल किया था। मीनाक्षी के पिता और भाई उसे इस खेल में सहयोग करते थे और उसे हिम्मत भी देते थे। जेल जाने के दौरान भी मीनाक्षी के पिता ने उसे जल्द से जल्द बाहर निकालने का वादा किया था जिससे यह संकेत मिलता है कि यह पूरे परिवार का संगठित प्रयास था।

    मीनाक्षी का नेटवर्क और अन्य शिकार

    मीनाक्षी शर्मा के इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा था। जांच में यह सामने आया कि वह अकेली नहीं थी बल्कि उसके परिवार के लोग भी इसमें शामिल थे। उसकी सक्रियता पीलीभीत के पूरनपुर थाने तक सीमित नहीं रही बल्कि बरेली और जालौन जिलों में भी उसने कई पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। मीनाक्षी का यह नेटवर्क न सिर्फ पुलिस महकमे के लिए शर्मिंदगी का कारण बना बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक सिपाही ने अपनी शक्ति का गलत उपयोग किया। उसके खिलाफ पुलिस ने जांच तेज कर दी है और अब तक कई अन्य पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है जो मीनाक्षी के शिकार बने थे। वहीं अधिकारियों का कहना है कि मीनाक्षी के इस पूरे गिरोह को जल्द ही पकड़ा जाएगा और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    जांच और गिरफ्तारी

    महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। मीनाक्षी के पिता और भाई का भी पुलिस ने पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया है। अब जांच के दौरान यह जानने की कोशिश की जा रही है कि मीनाक्षी ने किन-किन अन्य पुलिसकर्मियों को अपने जाल में फंसाया और वह किस तरह से इन रकमों को इकट्ठा करती थी।इस मामले ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है

    और अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या पुलिस महकमें में अन्य किसी महिला या पुरुष कर्मी की तरफ से भी ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं जिसे उजागर नहीं किया गया हो।उत्तर प्रदेश पुलिस के एक महिला सिपाही द्वारा किए गए इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क ने न केवल पुलिस महकमे को शर्मिंदा किया है बल्कि यह भी दिखाया है कि एक सिपाही अपने कद और शक्ति का गलत उपयोग कैसे कर सकता है। इस मामले की गहन जांच जारी है और पुलिस विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। मीनाक्षी और उसके परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न घटित हों।