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  • बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को मिला नया नेतृत्व, उज्जैन के प्रोफेसर दीन दयाल बेड़िया बने कुलगुरु, नियुक्ति आदेश जारी

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को मिला नया नेतृत्व, उज्जैन के प्रोफेसर दीन दयाल बेड़िया बने कुलगुरु, नियुक्ति आदेश जारी


    भोपाल । भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय यानी बीयू को नया कुलगुरु मिल गया है। मध्य प्रदेश के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने प्रोफेसर दीन दयाल बेड़िया को विश्वविद्यालय का नया कुलगुरु नियुक्त किया है। इस संबंध में 14 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक आदेश जारी किया गया। नियुक्ति के साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व की जिम्मेदारी अब प्रोफेसर बेड़िया के पास होगी। उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से चार वर्ष या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगा। इन दोनों में से जो भी अवधि पहले पूरी होगी उसी के आधार पर उनका कार्यकाल समाप्त होगा। इस नियुक्ति को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रोफेसर दीन दयाल बेड़िया वर्तमान में उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंधन संस्थान में व्यवसाय प्रबंधन के प्रोफेसर हैं। अब उन्हें प्रदेश की राजधानी भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुलगुरु का पद किसी भी विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस पद पर नियुक्त व्यक्ति संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था का नेतृत्व करता है। पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर बनाने से लेकर विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन और प्रशासनिक फैसलों तक कुलगुरु की भूमिका अहम रहती है। ऐसे में प्रोफेसर बेड़िया के सामने विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    राज्यपाल की ओर से जारी आदेश के मुताबिक प्रोफेसर बेड़िया का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से चार साल के लिए निर्धारित किया गया है। हालांकि यदि इस अवधि के दौरान उनकी उम्र 70 वर्ष पूरी हो जाती है तो उनका कार्यकाल उसी समय समाप्त हो जाएगा। इसका अर्थ है कि चार साल की अवधि और 70 वर्ष की आयु में से जो भी पहले पूरी होगी वही नियुक्ति की अंतिम समय सीमा होगी। उनकी नियुक्ति मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 13 की उपधारा एक के तहत की गई है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनकी सेवा शर्तें और अन्य नियम विश्वविद्यालय के परिनियम एक के अनुसार निर्धारित होंगे।

    नियुक्ति आदेश में पुलिस सत्यापन और शैक्षणिक सहित अन्य दस्तावेजों की जांच से जुड़ी शर्तें भी शामिल की गई हैं। प्रोफेसर बेड़िया को अपने मूल दस्तावेजों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार यदि सत्यापन के दौरान उन्हें सेवा के लिए अयोग्य पाया जाता है तो उनकी नियुक्ति समाप्त की जा सकती है। संबंधित अधिकारियों को इस प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। नियुक्ति आदेश की प्रतियां मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग और संबंधित विश्वविद्यालयों सहित अन्य अधिकारियों को भेजी गई हैं। आदेश को राजपत्र में प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में शामिल है। नए कुलगुरु की नियुक्ति के बाद विश्वविद्यालय की शैक्षणिक योजनाओं और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई और शोध गतिविधियों को आगे बढ़ाने के साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के कामकाज का समन्वय भी कुलगुरु की जिम्मेदारियों में शामिल होगा। प्रोफेसर दीन दयाल बेड़िया के पदभार ग्रहण करने के बाद विश्वविद्यालय के आगामी कार्यक्रमों और प्रशासनिक दिशा को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल राज्यपाल की ओर से उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया है और निर्धारित नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।


  • BU के नाम बदलने पर छात्रों की दो टूक: ‘नाम नहीं, सुविधाएं बदलें’; बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

    BU के नाम बदलने पर छात्रों की दो टूक: ‘नाम नहीं, सुविधाएं बदलें’; बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया


    मध्‍य प्रदेश । भोपाल स्थित Barkatullah University का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ किए जाने के प्रस्ताव ने छात्रों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। राज्य सरकार की ओर से सामने आए इस प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अधिकांश छात्रों का मानना है कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाली शिक्षा, शोध कार्य और सुविधाओं से बनती है।

    छात्रों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर हो, समय पर परीक्षाएं हों, परिणाम घोषित किए जाएं और शोध के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो इससे विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिलेगा। कई छात्रों ने यह भी कहा कि नाम परिवर्तन की बजाय प्रशासन को कैंपस की बुनियादी व्यवस्थाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और प्लेसमेंट सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

    हालांकि कुछ छात्रों ने प्रस्तावित नाम परिवर्तन का समर्थन भी किया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम स्थानीय इतिहास, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा होना चाहिए। ऐसे छात्रों का मानना है कि ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ नाम भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे सकता है।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय के नाम में बदलाव की चर्चा हो रही है। स्थापना के समय इसका नाम ‘भोपाल यूनिवर्सिटी’ था। बाद में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी Maulana Barkatullah के सम्मान में इसका नाम बदलकर बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी रखा गया था। अब एक बार फिर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव सामने आने से बहस तेज हो गई है।

    शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का भी मानना है कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा उसके अकादमिक प्रदर्शन, शोध उपलब्धियों और छात्रों की सफलता से तय होती है। ऐसे में नाम परिवर्तन के साथ-साथ संस्थान की गुणवत्ता और संसाधनों को बेहतर बनाने पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।

    फिलहाल प्रस्ताव को लेकर छात्रों और आम लोगों के बीच चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में सरकार इस विषय पर क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। लेकिन छात्रों का एक बड़ा वर्ग यही संदेश दे रहा है कि विश्वविद्यालय की असली पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि उसके काम और उपलब्धियों से बनती है।