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  • नशे के खिलाफ शिवपंथ के अभियान की CM ने की सराहना, बोले- सरकार और समाज मिलकर बदल सकते हैं तस्वीर

    नशे के खिलाफ शिवपंथ के अभियान की CM ने की सराहना, बोले- सरकार और समाज मिलकर बदल सकते हैं तस्वीर


    बड़वानी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के ग्राम अजगरिया में आयोजित शिवपंथी नशामुक्ति कार्यक्रम में नशे के खिलाफ जनजागरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा नाश की जड़ है और अपने साथ कई तरह की बुराइयां तथा सामाजिक विकृतियां लेकर आता है। हर व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिए कि वह स्वयं नशे से दूर रहेगा और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने के लिए प्रयास करेगा। मुख्यमंत्री ने शिवपंथ समुदाय की ओर से नशामुक्ति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक भागीदारी से इस अभियान को जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिवपंथ के संस्थापक परम पूज्य गुरुवर्य श्री वनसिंह महाराज को नमन किया। उन्होंने श्री कालूसिंह महाराज और सुमली माताजी के प्रयासों की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है और इसे नशे की प्रवृत्ति में बर्बाद करने के बजाय ऐसे कार्यों में लगाना चाहिए जिनसे जीवन सार्थक बने। आध्यात्मिकता और सत्संग के माध्यम से लोगों को सकारात्मक दिशा देने का शिवपंथ का प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नशामुक्त समाज बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें परिवारों सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2029 तक नशे की बुराई को दूर करने के लक्ष्य की दिशा में सभी को मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था और जनजागरण को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष किसान कल्याण वर्ष मना रही है। किसान और ग्रामीण परिवार गौपालन तथा दुग्ध उत्पादन के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। सरकार गौशालाओं के संचालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता देगी। दूध समितियों के माध्यम से दूध बेचने पर ग्रामीणों को आमदनी का अवसर मिलेगा। उन्होंने लोगों से दूध और पौष्टिक आहार अपनाने तथा नशे से दूर रहने की अपील की।

    बड़वानी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं भी कीं। इनमें ग्राम में खुपजदेव धाम का निर्माण और वहां तक सड़क बनाने की घोषणा शामिल है। ग्राम अजगरिया में बालक और बालिकाओं के लिए 100-100 सीटर छात्रावास बनाए जाने की बात कही गई। ग्राम पांजरिया ध में 50 लाख रुपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त शेड बनाने तथा ग्राम धवली में पुलिस चौकी स्थापित करने की घोषणा भी की गई।

    मुख्यमंत्री ने स्थानीय भाषा और जनजातीय समुदाय से जुड़े विषयों पर भी ध्यान देने की बात कही। बारेली भाषा के संरक्षण और विकास के लिए दस्तावेजों के संरक्षण तथा शोध पर काम किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्र में सिकल सेल बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं जांच परामर्श और उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही वन औषधियों के संरक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए बड़वानी में वन औषधि शोध संस्थान स्थापित करने की बात कही गई।

    वन अधिकार के तहत जिन जनजातीय परिवारों को अभी पट्टे नहीं मिले हैं उन्हें पट्टे देने और जिन परिवारों को पट्टे मिल चुके हैं उनकी रजिस्ट्री कराने की घोषणा भी की गई। इन घोषणाओं का उद्देश्य क्षेत्र में शिक्षा स्वास्थ्य आजीविका और आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रयासों को गति देना है।

    शिवपंथी सत्संग संगठन लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में नशामुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। संगठन की मान्यता है कि आध्यात्मिकता सत्संग और अनुशासित जीवनशैली के माध्यम से व्यक्ति को नशे से दूर रहने की प्रेरणा मिल सकती है। शरद पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। धार्मिक भजनों के साथ दूध प्रसादी और चावल की खिचड़ी का वितरण किया गया। कार्यक्रम में नशामुक्त समाज बनाने और क्षेत्र के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश दिया गया।

  • आदिवासी अंचल में शिवपंथ के प्रयासों की CM ने की सराहना, सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कारों पर दिया जोर

    आदिवासी अंचल में शिवपंथ के प्रयासों की CM ने की सराहना, सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कारों पर दिया जोर


    बड़वानी । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी के आदिवासी अंचल में शिवपंथ समुदाय और गायत्री परिवार की ओर से किए जा रहे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार सनातन संस्कृति के मूल्य और अनुशासन सिखाना बेहद जरूरी है। इससे आने वाली पीढ़ी संस्कारवान चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिक बन सकेगी। उन्होंने शिवपंथ समुदाय की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को भी समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 26 अक्टूबर को अपने बड़वानी प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा में कहा कि शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आदिवासी अंचल में रात्रि विश्राम करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्हें क्षेत्र में समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले कई प्रयासों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि शिवपंथ समुदाय के महाराज बंशी और उनके अनुयायी भगवान की भक्ति तथा महादेव की आराधना के साथ नशे के विरुद्ध जनजागरण अभियान चला रहे हैं। आदिवासी समाज में नशे की समस्या को दूर करने के लिए इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में स्थायी बदलाव लाने के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए। जब लोगों की भागीदारी से नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे अभियान चलाए जाते हैं तो उनका प्रभाव व्यापक हो सकता है। उन्होंने कहा कि शिवपंथ समुदाय की ओर से धार्मिक आस्था को सामाजिक सुधार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे अभियान लोगों को बेहतर जीवनशैली अपनाने और परिवार तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    डॉ. मोहन यादव ने गायत्री परिवार की गतिविधियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि बीती रात गायत्री परिवार के आश्रम में रुकने का अवसर मिला। यहां बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए संस्कार आधारित कार्यक्रमों और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। आश्रम में सुबह योगाभ्यास सहित विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर उन्हें सुखद अनुभूति हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास में शिक्षा के साथ अनुशासन और नैतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को अपने परिवार समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराना भी जरूरी है। सनातन संस्कृति की परंपराओं और जीवन मूल्यों से परिचित कराकर उनमें अच्छे व्यवहार सेवा भावना और चरित्र निर्माण की नींव मजबूत की जा सकती है। मुख्यमंत्री के अनुसार इस तरह के प्रयास युवाओं को सही दिशा देने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होते हैं।

    मुख्यमंत्री ने बड़वानी को निमाड़ का पेरिस बताते हुए कहा कि इस प्रवास के दौरान समाज निर्माण और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े कई प्रेरणादायी कार्य देखने को मिले। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा से दीपावली तक का समय सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। ऐसे पर्व समाज में सद्भाव सेवा और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश देते हैं।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार जनकल्याण सामाजिक उत्थान और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और समाज के साझा प्रयासों से संस्कारवान पीढ़ी तैयार करने नशे से दूर रहने और सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने जैसे उद्देश्यों को मजबूती मिलेगी।

  • राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर

    राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों कई ऐसे मामले चर्चा में हैं जिनमें नेताओं के बयान कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं और प्रशासनिक घटनाक्रम सुर्खियां बटोर रहे हैं। इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखी चिट्ठी से लेकर जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा की दिशा को लेकर सामने आए अलग अलग बयानों और बड़वानी में दिव्यांगों के उपकरण वितरण कार्यक्रम के टलने तक तीन मामले चर्चा में हैं।

    इंदौर में 19 सितंबर को हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा उठा था। इसके बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की। राहुल गांधी ने 22 सितंबर को पत्र लिखा था और 23 सितंबर को इसे सार्वजनिक किया। उन्होंने पत्र में छात्रों की ओर से उठाए गए शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    हालांकि पत्र सार्वजनिक होने के बाद इसका एक संशोधित संस्करण सामने आया। शुरुआती पोस्ट में पत्र के अंतिम हिस्से के दो पैराग्राफ दोहराए गए थे। इसके बाद पुरानी पोस्ट हटाकर संशोधित पत्र साझा किया गया। इस वजह से पत्र में हुई टाइपिंग या संपादन संबंधी गलती भी चर्चा में आ गई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि 13 प्रतिशत पदों का मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं।

    दूसरा मामला जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा के स्वागत से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत यात्राएं निकाली जा रही हैं। जबलपुर में यात्रा के स्वागत के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों और यात्रा के साथ चल रहे कलश पर लिखी जानकारी में अंतर की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री राकेश सिंह और भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने यात्रा के वडनगर से वाराणसी जाने की जानकारी दी जबकि यात्रा के साथ मौजूद कलश पर वाराणसी से वडनगर की दिशा लिखी होने का उल्लेख किया गया। इसी वजह से स्वागत कार्यक्रम के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर चर्चा शुरू हुई।

    तीसरा मामला बड़वानी के पानसेमल का है जहां करीब 200 दिव्यांग और उनके परिजन सहायक उपकरण लेने पहुंचे थे। 21 सितंबर को आयोजित सामाजिक सशक्तीकरण शिविर में व्हीलचेयर ट्राइसाइकिल और दूसरे उपकरण वितरित किए जाने थे। शिविर की तैयारियां पूरी थीं और लाभार्थी भी पहुंच चुके थे लेकिन कार्यक्रम अचानक स्थगित हो गया। रिपोर्टों के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम में विधायक की मौजूदगी नहीं हो पाने के कारण वितरण टल गया और लाभार्थियों को बिना उपकरण लिए लौटना पड़ा।

    बाद में दोबारा कार्यक्रम आयोजित कर उपकरण वितरित किए गए। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रमों की तैयारी और लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठे। रिपोर्ट में विधायक की ओर से कार्यक्रम की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है जबकि कार्यक्रम के बैनर पर उनका नाम मुख्य अतिथि के रूप में दर्ज था।

    इन तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े अलग अलग पहलुओं को सामने रखा है। एक तरफ ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। दूसरी तरफ सेवा संकल्प यात्रा के दौरान सामने आया दिशा संबंधी अंतर चर्चा में रहा। वहीं पानसेमल में दिव्यांग लाभार्थियों को कार्यक्रम टलने के कारण दोबारा इंतजार करना पड़ा। इन घटनाओं के जरिए प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों के साथ साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन भी चर्चा में आ गया है।

  • इंदौर में राहुल गांधी से मिली प्रियंका अब दिल्ली में होगा इलाज 3 साल की उम्र से एक आंख की रोशनी का इंतजार

    इंदौर में राहुल गांधी से मिली प्रियंका अब दिल्ली में होगा इलाज 3 साल की उम्र से एक आंख की रोशनी का इंतजार


    इंदौर। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के पाडछा गांव की रहने वाली प्रियंका सेंगर के लिए 19 सितंबर का दिन अब उनकी जिंदगी में एक नई उम्मीद लेकर आया है। इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रियंका से मंच पर बातचीत की थी। बातचीत के दौरान उनकी नजर प्रियंका की आंख पर गई। प्रियंका ने बताया कि बचपन में आंख में चूना चले जाने के बाद उसकी एक आंख की रोशनी चली गई थी। इसके बाद इलाज की कोशिश तो हुई लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण आगे का उपचार नहीं हो सका।

    अब राहुल गांधी की टीम ने प्रियंका के परिवार से संपर्क किया है और उसे इलाज के लिए दिल्ली बुलाने की बात कही है। प्रियंका के मुताबिक कार्यक्रम के बाद दिल्ली से राहुल गांधी की टीम की एक महिला का फोन आया था। फोन पर उन्हें जल्द इलाज के लिए दिल्ली आने की जानकारी दी गई। इस खबर के बाद प्रियंका और उसके परिवार में उम्मीद जगी है कि वर्षों से अधूरा पड़ा इलाज अब आगे बढ़ सकेगा।

    प्रियंका ने बताया कि जब वह करीब तीन साल की थी तब उसकी आंख में चूना चला गया था। इस हादसे के बाद उसकी एक आंख से दिखाई देना बंद हो गया। 12वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान बड़ौदा में उसका एक ऑपरेशन भी कराया गया था। डॉक्टरों ने आगे एक और ऑपरेशन की जरूरत बताई थी लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह लगातार इलाज का खर्च उठा सके। इसके बाद उपचार रुक गया।

    प्रियंका के पिता उदय सिंह सेंगर किसान हैं। परिवार के पास करीब तीन एकड़ जमीन है लेकिन सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण खेती से नियमित आमदनी नहीं हो पाती। ऐसे में बेटी के इलाज का खर्च परिवार के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। एक ऑपरेशन के बाद आगे इलाज न करा पाना भी इसी आर्थिक स्थिति से जुड़ा रहा।

    इंदौर के कार्यक्रम के बाद प्रियंका के परिवार से अन्य लोगों ने भी संपर्क किया। जिले के समाजसेवी सरदार नरगावे और विधायक विक्रांत भूरिया की ओर से भी फोन आया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रियंका को मिलने के लिए बुलाया और उसके पिता से फोन पर बातचीत कर आंखों के इलाज तथा परिवार की परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली।

    प्रियंका फिलहाल इंदौर में रहकर यूजीसी नेट की तैयारी कर रही है। आंखों की परेशानी के बावजूद उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी है और आगे शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ने का सपना देख रही है। अब दिल्ली में प्रस्तावित इलाज को लेकर परिवार को उम्मीद है कि उसकी आंख की समस्या का आगे उपचार संभव हो सकेगा। प्रियंका का कहना है कि वह वर्षों से सामान्य लोगों की तरह देखने का सपना देखती रही है और अब उसे लगता है कि यह सपना पूरा होने की उम्मीद बनी है।

    इंदौर में राहुल गांधी से बातचीत के दौरान प्रियंका ने सिर्फ अपनी आंख की समस्या ही नहीं बताई थी बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों से जुड़े कई मुद्दे भी सामने रखे थे। उसने सरकारी हॉस्टलों में सीटों की कमी और भोजन तथा दूसरी सुविधाओं की समस्याओं का जिक्र किया था। प्रियंका ने बताया था कि उसने कक्षा एक से 12वीं तक सरकारी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की है।

    उसने हॉस्टल में भोजन से जुड़ी परेशानियों का भी उल्लेख किया था। उसके मुताबिक कई बार घर से लाई लाल मिर्च की चटनी के साथ रोटी खाकर गुजारा करना पड़ता था। उसने छात्राओं से वार्डन द्वारा काम करवाए जाने का आरोप भी लगाया था। प्रियंका ने यह भी बताया था कि 12वीं के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए पर्याप्त सरकारी हॉस्टल नहीं मिलने पर छात्राओं को किराए के कमरों में रहना पड़ता है और किराए तथा आवास भत्ते के बीच भी अंतर रहता है।

    अब प्रियंका के लिए दिल्ली से आया इलाज का बुलावा सिर्फ चिकित्सा से जुड़ी खबर नहीं बल्कि लंबे समय से देखे जा रहे एक सपने के आगे बढ़ने की उम्मीद है। पढ़ाई जारी रखते हुए वह अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है और परिवार को भरोसा है कि आगे होने वाला उपचार उसकी जिंदगी में नई संभावनाएं खोल सकता है।

  • बड़वानी से भोपाल तक IAS काजल जावला का सफर, 29 महीने के कार्यकाल में छोड़ी खास छाप; अब नई जिम्मेदारी के साथ नई पारी

    बड़वानी से भोपाल तक IAS काजल जावला का सफर, 29 महीने के कार्यकाल में छोड़ी खास छाप; अब नई जिम्मेदारी के साथ नई पारी


    बड़वानी। मध्यप्रदेश में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बीच जिला पंचायत बड़वानी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी IAS काजल जावला का तबादला कर दिया गया है। करीब 29 महीने तक बड़वानी में जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें अपर मिशन संचालक राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। बड़वानी में उनका कार्यकाल योजनाओं के क्रियान्वयन से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर बदलाव और कई उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए जाना जाएगा। जल संरक्षण पंचायत विकास शिक्षा महिला आजीविका और ग्रामीण योजनाओं की लगातार निगरानी ने उनके कार्यकाल को अलग पहचान दी।
    काजल जावला की कार्यशैली में मैदानी स्तर पर योजनाओं की स्थिति की समीक्षा और अधिकारियों कर्मचारियों के साथ लगातार समन्वय प्रमुख रहा। उन्होंने सरकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर जोर दिया। इसी का असर कई योजनाओं के प्रदर्शन में दिखाई दिया। जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़वानी ने उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की। जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 में जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में 5666 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इनमें खेत तालाब कंटूर ट्रेंच डगवेल रिचार्ज और सामुदायिक तालाब जैसे काम शामिल रहे।

    जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 में भी जिले ने उल्लेखनीय काम किया। जनसहयोग से 30155 कंटूर गड्ढे बनाए गए जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 41957 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इस अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं को मजबूत करने के साथ जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को भी बढ़ावा दिया।

    महिलाओं की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने वाले एक बगिया मां के नाम अभियान में भी बड़वानी प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। जिले में 732 बगिया स्वीकृत हुईं। कानपुरी बोरलाय और मतराला ग्राम पंचायतों को बेहतर प्रदर्शन के कारण प्रदेश की टॉप 10 पंचायतों में स्थान मिला। पंचायत स्तर की उपलब्धियों में भी जिले का प्रदर्शन मजबूत रहा। पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स में मलफा और मोरतलाई ग्राम पंचायतों ने प्रदेश में क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया।

    आदि कर्मयोगी अभियान के तहत जिले के 529 गांव चयनित हुए और सभी गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बड़वानी प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धि पर जिले को राष्ट्रपति स्तर पर सम्मान भी मिला। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन में भी बड़वानी लगातार दूसरे स्थान पर रहा।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी काजल जावला के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण काम हुए। कायाकल्प अभियान के तहत करीब 600 सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया गया। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली। प्रधानमंत्री पोषण अभियान और मध्यान्ह भोजन योजना की निगरानी से खाद्यान्न उठाव और एसएमएस मॉनिटरिंग का प्रदर्शन 44 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंचा और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही। जनसहयोग से पांच स्कूलों में सरस्वती प्रसादम अभियान भी संचालित हुआ जिसमें बच्चों को भोजन के अलावा फल दही मिठाई और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई।

    किसानों और महिलाओं की आय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड कार्यक्रम के तहत चार सब्जी क्लस्टर विकसित किए गए जिससे करीब 450 किसान सब्जी उत्पादन से जुड़े। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 10 तालाबों का निर्माण कराया गया। पाटी विकासखंड में स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराने और आजीविका कैफे तथा कियोस्क के जरिए महिला समूहों की आय बढ़ाने के प्रयास भी किए गए।

    जनता की शिकायतों के निराकरण में भी बड़वानी का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए लगातार मॉनिटरिंग की गई और जिला टॉप तीन में बना रहा। अब करीब 29 महीने बाद काजल जावला बड़वानी से विदा हो रही हैं। उनके तबादले के साथ जिम्मेदारी जरूर बदली है लेकिन जल संरक्षण पंचायत विकास शिक्षा और महिला आजीविका के क्षेत्र में किए गए काम उनके कार्यकाल की पहचान बने रहेंगे। अब भोपाल में नई जिम्मेदारी के साथ उनके प्रशासनिक अनुभव का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

  • मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद

    मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी अब किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। प्रदेश के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है, जबकि कहीं मौसम की मार किसानों की तैयार फसलों को तबाह कर रही है। शुक्रवार को खरगोन और बड़वानी से सामने आई तस्वीरों ने किसानों की परेशानी को और उजागर कर दिया।

    खरगोन जिले में जल संकट से परेशान किसानों ने नहर का पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडवा-बड़ौदा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। सुबह करीब 11:30 बजे 200 से अधिक किसान बैलगाड़ियां लेकर सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की वेदा, कुंदा और खारक नदियां लगभग सूख चुकी हैं, जिससे खेतों में सिंचाई का संकट गहरा गया है।

    प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि मृग नक्षत्र शुरू हुए करीब दो सप्ताह होने को हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। अधिकांश किसानों ने खेतों की जुताई और अन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण बुवाई शुरू नहीं हो पा रही है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

    दूसरी ओर बड़वानी जिले के खड़की क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने दो किसान भाइयों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज आंधी और बारिश के कारण अंबाराम और गंगाराम की करीब 9 एकड़ में लगी केले की तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। बाजार में बिक्री के लिए तैयार लगभग 1500 केले के पौधे जमीन पर गिर गए।

    किसानों के अनुसार इस फसल पर करीब 14 लाख रुपए की लागत आई थी, जबकि कुल नुकसान 36 लाख रुपए तक पहुंच गया है। अचानक हुए इस भारी नुकसान का सदमा किसान अंबाराम सहन नहीं कर पाए और उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल राजपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से फसल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

    प्रदेश में कम बारिश के कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सफल बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी जरूरी है। इसके लिए कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को जल्दबाजी में बोवनी करने से बचना चाहिए, क्योंकि पर्याप्त नमी नहीं होने पर बीज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

    मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ सीजन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

  • कचरा निपटान यूनिट के विरोध में ग्रामीणों का हंगामा: डेढ़ घंटे तक रुका प्रशासनिक अमला

    कचरा निपटान यूनिट के विरोध में ग्रामीणों का हंगामा: डेढ़ घंटे तक रुका प्रशासनिक अमला


    बड़वानी । बड़वानी जिले में प्रस्तावित ट्रेंचिंग ग्राउंड को लेकर शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब नगर पालिका की टीम जमीन सीमांकन और कब्जा प्रक्रिया के लिए मौके पर पहुंची। बंधान ग्राम के समीप आमलिया पानी क्षेत्र में कचरा निपटान यूनिट स्थापित किए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।

    जानकारी के अनुसार नगर पालिका का अमला सीएमओ, इंजीनियरिंग टीम और अन्य अधिकारियों के साथ जेसीबी मशीन लेकर निर्धारित स्थल पर पहुंचा था। कार्रवाई की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध इतना बढ़ गया कि प्रशासनिक टीम को बड़वानी-सेंधवा मार्ग किनारे करीब डेढ़ घंटे तक रुकना पड़ा।

    ग्रामीणों ने ट्रेंचिंग ग्राउंड तक जाने वाले मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। सड़क पर पाइप और मोटरसाइकिलें खड़ी कर रास्ता बंद कर दिया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने परियोजना के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासन से कार्रवाई रोकने की मांग की। स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।

    ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित स्थल के आसपास पहले से ही आवासीय क्षेत्र विकसित हो रहा है। यहां पंचायत भवन, सामुदायिक भवन और पानी की टंकी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण भी किया जा चुका है या निर्माणाधीन है। ऐसे में कचरा निपटान यूनिट बनने से पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा होने की आशंका है।

    ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों और शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने उनकी बातों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। कई बार जनसुनवाई और अन्य प्रशासनिक मंचों पर मामला उठाने के बाद भी समाधान नहीं निकला। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि परियोजना के लिए आवश्यक स्थानीय सहमति भी नहीं ली गई है।

    स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनने पर पुलिस ने मार्ग खाली कराया और निर्माण कार्य शुरू करवाया। इसके बाद क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई।

    तहसीलदार हितेंद्र भावसार ने बताया कि यहां कचरा निपटान यूनिट विकसित की जा रही है और इससे आसपास के ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। प्रशासन का कहना है कि परियोजना सार्वजनिक हित में है तथा सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।

    फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का विरोध जारी है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर आगे भी चर्चा और समाधान की संभावनाएं बनी हुई हैं।

  • भोजशाला निर्णय के बाद बड़वानी में आतिशबाजी, माहौल हुआ उत्साहपूर्ण

    भोजशाला निर्णय के बाद बड़वानी में आतिशबाजी, माहौल हुआ उत्साहपूर्ण


    बड़वानी।
    धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में हाईकोर्ट द्वारा आए फैसले के बाद बड़वानी शहर सहित पूरे जिले में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। फैसले में भोजशाला को मंदिर के रूप में मान्यता मिलने के बाद सकल हिंदू समाज के लोगों ने शुक्रवार देर रात बड़े पैमाने पर जश्न मनाया।

    शहर के पाटी नाका, मोटी माता चौक, रणजीत चौक सहित कई प्रमुख स्थानों पर लोग एकत्रित हुए और आतिशबाजी की गई। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा वातावरण जगमगा उठा। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया।

    जय श्रीराम के नारों से गूंजा शहर
    जश्न के दौरान पूरे शहर में “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के जोरदार नारे लगाए गए। युवाओं की बड़ी संख्या चौराहों पर मौजूद रही, जहां उन्होंने उत्साहपूर्वक आतिशबाजी की और खुशी साझा की। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा बन गया। स्थानीय लोगों ने मां वाग्देवी और भारत माता की पूजा-अर्चना करते हुए महाआरती भी की। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर धार्मिक आस्था व्यक्त की और फैसले को ऐतिहासिक बताया।

    वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया फैसला
    समाज के लोगों ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चल रहे संघर्ष और जनजागरण का परिणाम है। उनका कहना था कि वर्षों से विभिन्न स्तरों पर आंदोलन और प्रयास किए जा रहे थे, जिनका परिणाम अब सामने आया है। स्थानीय नागरिकों ने इस फैसले को केवल एक कानूनी निर्णय नहीं बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ा ऐतिहासिक क्षण बताया। लोगों के अनुसार यह निर्णय समाज की एकजुटता और संघर्ष की जीत का प्रतीक है।

    देर रात तक बना रहा जश्न का माहौल
    शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे से शुरू हुआ जश्न देर रात तक जारी रहा। शहर के कई हिस्सों में लोग समूहों में एकत्रित होकर खुशी मनाते रहे। पूरे बड़वानी में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और चौराहों पर युवाओं की भारी भीड़ रही। प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति सामान्य रही और कहीं से किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

  • शनि अमावस्या का विशेष आयोजन, नर्मदा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने की पूजा

    शनि अमावस्या का विशेष आयोजन, नर्मदा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने की पूजा


    नई दिल्ली। बड़वानी जिले में शनिवार को शनि अमावस्या और शनि जयंती के दुर्लभ संयोग पर धार्मिक आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्थित शनि मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। साईं शनेश्वर शनि मंदिर, सेंगाव बाईपास स्थित शनि मंदिर और अंजड़ के श्री नवग्रह शनि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।

    पूरे दिन मंदिर परिसर “जय शनिदेव” के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजते रहे। भक्तों ने तेल, फूल, काली उड़द और प्रसाद अर्पित कर शनिदेव की विशेष पूजा की।

    51 किलो तेल से शनिदेव का अभिषेक, नवग्रह पूजन भी सम्पन्न
    साईं शनेश्वर शनि मंदिर समिति के अनुसार, सुबह से ही वैदिक विधि-विधान के साथ शनिदेव का 51 किलो तेल से अभिषेक किया गया। इसके बाद नवग्रह पूजन, हवन और विशेष आरती संपन्न हुई। अंजड़ स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर, जिसे जिले का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है, वहां भी सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। यहां नवग्रह देवताओं का विशेष पूजन कर हवन किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।

    भंडारे और प्रसादी से भक्तों का स्वागत
    श्रद्धालुओं के लिए कई स्थानों पर भंडारे और प्रसादी का आयोजन किया गया। अंजड़ मंदिर में लगभग एक क्विंटल पूरी-चना प्रसाद वितरित किया गया, जबकि सेंगाव बाईपास मंदिर में छप्पन भोग के साथ प्रसादी बांटी गई। कुछ स्थानों पर साबूदाने की खिचड़ी भी श्रद्धालुओं को दी गई। मंदिरों में दिनभर भक्तों का आना-जाना जारी रहा और शाम तक माहौल पूरी तरह भक्ति में डूबा रहा।

    नर्मदा घाटों पर आस्था की डुबकी, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
    शनि अमावस्या के अवसर पर नर्मदा नदी के घाटों, विशेषकर राजघाट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने पवित्र स्नान कर दान-पुण्य और पितरों के तर्पण की विधि पूरी की। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। प्रशासन द्वारा घाटों पर पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती की गई ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

    शाम को होगी महाआरती, दिनभर जारी रहा उत्सव
    शाम 7 बजे सभी प्रमुख शनि मंदिरों में संगीतमय महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। पूरे जिले में यह दिन पूरी तरह धार्मिक उल्लास और आस्था के रंग में रंगा रहा।